20/09/2026
ज़िंदगी में सब कुछ हो — पैसा हो, नाम हो, शोहरत हो — लेकिन अगर सुकून नहीं तो सब बेकार है। सुकून वो एहसास है जो न खरीदा जा सकता है, न माँगा जा सकता है। ये बस मिलता है — किसी अपने की आवाज़ में, किसी शाम की ठंडी हवा में, या कभी अपने आप से बात करने में।
कई बार हम इतने थक जाते हैं कि बस चाहते हैं — कोई कहे, “सब ठीक हो जाएगा।”