Dance_shortz_universe

Dance_shortz_universe this page is provided digital knowledge.
(6)

"विहान सर, अगर यह खबर मीडिया में लीक हो गई, तो मेरा करियर, मेरी इज्जत, मेरा खानदान... सब कुछ एक पल में मिट्टी में मिल जा...
02/06/2026

"विहान सर, अगर यह खबर मीडिया में लीक हो गई, तो मेरा करियर, मेरी इज्जत, मेरा खानदान... सब कुछ एक पल में मिट्टी में मिल जाएगा! प्लीज मुझे बचा लीजिए। मैं आपके पैर पड़ने को तैयार हूँ।" शहर के सबसे बड़े रियल एस्टेट टाइकून, सूर्यप्रताप सिंघानिया इस वक्त विहान हेगड़े के आलीशान केबिन में सोफे पर बैठे कांप रहे थे। उनके माथे से पसीने की बूंदें टपक कर उनके महंगे सूट पर गिर रही थीं। उनके हाथ इस कदर कांप रहे थे कि पानी का गिलास भी नहीं पकड़ पा रहे थे।
विहान ने बेहद शांति से अपने हाथ में पकड़े ब्लैक कॉफी के मग को टेबल पर रखा। उसके चेहरे पर न तो कोई शिकन थी, न कोई घबराहट, और न ही सिंघानिया के लिए कोई सहानुभूति। उसकी गहरी, काली आँखों में एक अजीब सा बर्फीला ठहराव था—एक ऐसा ठहराव जो केवल उस इंसान में हो सकता है जिसने जिंदगी के सबसे भयानक तूफानों को बेहद करीब से देखा हो।
उसने अपनी कुर्सी को थोड़ा आगे खिसकाया, अपनी भारी और रोबीली आवाज़ में कहा, "सिंघानिया साहब, शांत हो जाइए। आपने विहान हेगड़े की फर्म को पाँच करोड़ रुपए की फीस दी है। यह फीस मैंने आपकी चीखें सुनने के लिए नहीं, बल्कि आपकी समस्या को दफनाने के लिए ली है। अगले दो घंटे में इस शहर का मीडिया इस घोटाले को भूलकर किसी दूसरी खबर के पीछे भाग रहा होगा। आप चुपचाप अपने घर जाइए, एक अच्छी सी नींद लीजिए और कल सुबह अखबार में अपना नाम साफ पाइए।"
सिंघानिया ने राहत की सांस ली। विहान के शब्दों में एक ऐसा जादू और भरोसा था जिसे कोई काट नहीं सकता था। वह विहान को धन्यवाद कहते हुए केबिन से बाहर निकल गए।
उनके जाने के तुरंत बाद, विहान की पर्सनल सेक्रेटरी, रिया केबिन के अंदर आई। उसने टेबल पर कुछ नई फाइलें रखीं और विहान को बड़ी अचरज भरी निगाहों से देखने लगी। वह खुद को रोक नहीं पाई और बोल पड़ी, "सर, मुझे कभी-कभी समझ नहीं आता कि आप इंसान हैं या रोबोट। इतना बड़ा केस, करोड़ों का दांव, पुलिस और मीडिया का इतना दबाव... और आप ऐसे बैठे हैं जैसे कुछ हुआ ही न हो। क्या आपको कभी डर नहीं लगता? क्या आपका कभी रोने का मन नहीं करता? लोग सच ही कहते हैं, विहान हेगड़े पत्थर का बना हुआ इंसान है।"
विहान के होठों पर एक बहुत ही हल्की और रहस्यमयी मुस्कान आई, जो तुरंत गायब भी हो गई। उसने अपनी फाइलों को समेटते हुए कहा, "रिया, इस समाज ने मर्दों के लिए एक नियम बनाया है। पुरुष का मतलब है—ताकत, साहस और अटूट भरोसा। जो पुरुष रोया, जो कमज़ोर पड़ा, यह दुनिया उसे कुचल कर आगे बढ़ जाती है। एक रक्षक कभी रो नहीं सकता। और विहान हेगड़े कभी कमज़ोर नहीं हो सकता। तुम अब घर जा सकती हो।"
रात के ठीक ११ बज रहे थे। विहान अपनी ब्लैक मर्सिडीज कार खुद ड्राइव करके शहर के आलीशान इलाके में बने अपने सुनसान बंगले पर पहुँचा। इस तीन मंजिला बंगले में वह बिल्कुल अकेला रहता था। न कोई नौकर-चाकर रात को रुकता था, न कोई परिवार का सदस्य।
गाड़ी पार्क करने के बाद वह सीधे तीसरी मंजिल की तरफ बढ़ा। तीसरी मंजिल का गलियारा हमेशा अंधेरे में डूबा रहता था। उस गलियारे के आखिरी कोने में एक भारी सागवान की लकड़ी का दरवाज़ा था। उस दरवाज़े पर बाहर कोई नेमप्लेट या नंबर नहीं लिखा था, लेकिन विहान के दिमाग में उस कमरे का एक ही नाम था—"कमरा नंबर ३०४"।
उसने गलियारे में चारों तरफ देखा, यह सुनिश्चित करने के लिए कि वहाँ कोई नहीं है। फिर उसने अपनी आस्तीनें ऊपर चढ़ाईं, अपनी शर्ट के ऊपर के दो बटन खोले और अपनी जेब से एक बहुत ही अनोखी और प्राचीन दिखने वाली चाबी निकाली। चाबी को ताले में घुमाते ही एक भारी आवाज़ के साथ दरवाज़ा खुल गया।
कमरे के अंदर घने, स्याह अंधेरे के अलावा कुछ नहीं था। विहान ने लाइट नहीं जलाई। वह उस अंधेरे से अच्छी तरह वाकिफ था। कमरे के बीचों-बीच एक बहुत बड़ा, आदमकद शीशा (Mirror) लगा हुआ था, जिस पर खिड़की से आ रही चांद की हल्की रोशनी पड़ रही थी।
विहान ने कमरे के अंदर कदम रखा और पीछे से दरवाज़े की भारी कुंडी चढ़ा दी। जैसे ही कुंडी के बंद होने की आवाज़ गूँजी, विहान की रोबीली रीढ़ की हड्डी अचानक झुक गई। उसका वह सख्त, मजबूत और पत्थर जैसा मुखौटा, जो उसने पूरी दुनिया के सामने पहन रखा था, ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
उसने शीशे के सामने जाकर खड़े होने की कोशिश की, लेकिन उसके पैर जवाब दे गए। वह घुटनों के बल ठंडे फर्श पर बैठ गया। अगले ही पल, विहान हेगड़े—जिसके एक इशारे पर शहर के मंत्री और बिजनेसमैन कांपते थे—उस अंधेरे कमरे में किसी लावारिस, डरे हुए बच्चे की तरह फूट-फूट कर रोने लगा।
उसकी हिचकियाँ बंद नहीं हो रही थीं। उसके सीने में बरसों से दबा हुआ दर्द, अकेलापन, और समाज का वह भारी बोझ आँसुओं के रूप में उसकी आँखों से बह रहा था। वह अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा छुपाकर रो रहा था ताकि उसकी खुद की आवाज़ भी इस कमरे से बाहर न जा सके। वह चिल्लाना चाहता था, वह कहना चाहता था कि 'मैं थक चुका हूँ इस मजबूत होने के नाटक से!'
वह लगभग आधे घंटे तक यूँ ही रोता रहा। लेकिन तभी, उस शांत और अंधेरे बंगले में एक अजीब सी आवाज़ हुई।
कमरा नंबर ३०४ के बंद दरवाज़े के बाहर, गलियारे के सन्नाटे में किसी के दबे पाँव चलने की आहट सुनाई दी। कोई बहुत धीरे-धीरे विहान के रोने की आवाज़ का पीछा करते हुए आ रहा था। वह परछाईं रेंगती हुई आई और ठीक 'कमरा नंबर ३०४' के दरवाज़े के पास आकर रुक गई।
विहान, जो अपने ही आंसुओं में डूबा हुआ था, अचानक चौंक गया। उसकी तेज सूंघने और सुनने की क्षमता ने भांप लिया कि कोई बाहर खड़ा है। उसने तुरंत अपने आँसू पोंछे, उसकी आँखें डर और गुस्से से लाल हो गईं। अगर आज किसी ने विहान हेगड़े का यह रूप देख लिया, तो उसका साम्राज्य एक पल में खत्म हो जाएगा।
उसने कांपते हाथों से अपनी जेब से पिस्तौल निकाली और दबे पाँव दरवाज़े की तरफ बढ़ा। जैसे ही उसने दरवाज़े के नीचे की झिरी से देखा, बाहर खड़े इंसान के जूतों की परछाईं साफ नजर आ रही थी। कोई बाहर खड़ा होकर विहान के इस सबसे बड़े राज को सुन चुका था!

1. **कमरा नंबर ३०४ के बाहर खड़ा वह रहस्यमयी इंसान कौन है? क्या वह विहान की सेक्रेटरी रिया है, या कोई पुराना दुश्मन जो उसका राज जानने आया है?**
2. **अगर विहान का यह 'कमज़ोर और रोता हुआ' रूप दुनिया के सामने आ गया, तो सिंघानिया जैसे बड़े लोग जो उस पर भरोसा करते हैं, उनका क्या होगा?**
3. **विहान के अतीत में ऐसा क्या भयानक हादसा हुआ था, जिसने उसे पूरी दुनिया के सामने 'पत्थर का इंसान' बनने पर मजबूर कर दिया?**

puri kahani ke liye niche di gayi link par jaye

""मुखौटा या कमरा नंबर ३०४" चैप्टर - १: पत्थर का इंसान", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :,

https://hindi.pratilipi.com/series/मुखौटा-या-कमरा-नंबर-३०४-चैप्टर-१-पत्थर-का-इंसान-kewmeqiaiwyj?language=HINDI&utm_source=android&utm_medium=content_series_share

भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!

"क़िस्मत की सबसे बड़ी ख़ामी यही है कि वह जब बदलती है, तो सँभलने का वक़्त नहीं देती। और जब दिमाग़ खेल खेलता है, तो गवाह भ...
02/06/2026

"क़िस्मत की सबसे बड़ी ख़ामी यही है कि वह जब बदलती है, तो सँभलने का वक़्त नहीं देती। और जब दिमाग़ खेल खेलता है, तो गवाह भी सुराग़ बन जाते हैं।"**
**दृश्य 1:**
**स्थान:** मसूरी, उत्तराखंड। एक छोटा सा, पुराना लकड़ी का मकान। बाहर बर्फ़ीली हवा चल रही है और सुबह के ठीक 4:00 बजे हैं।
कमरे के अंदर का दृश्य बेहद साधारण है। दीवार पर उत्तराखंड के पहाड़ों की कुछ तस्वीरें टंगी हैं। कमरे के बीचों-बीच एक पुरानी लकड़ी की मेज़ है, जो पूरी तरह से मोटी-मोटी किताबों, हस्तलिखित नोट्स, और मानचित्रों से पटी पड़ी है। मेज़ पर रखे एक छोटे से टेबल लैंप की पीली रोशनी सीधे एक खुली हुई क़िताब पर पड़ रही है।
रुद्र अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़कर गरमाहट पैदा करने की कोशिश करता है। उसकी आँखें लाल हैं, जो हफ़्तों की अधूरी नींद बयां कर रही हैं, लेकिन उन आँखों में एक अजीब सी चमक और ज़िद है। वह एक पेन उठाता है और तेज़ी से अपने रजिस्टर में कुछ जटिल नोट्स लिखने लगता. है। उसका दिमाग़ इस वक़्त बिजली की रफ़्तार से काम कर रहा है।
तभी कमरे का दरवाज़ा हल्के से चरमराता है। रुद्र के पिता, हरीश जी, हाथ में चाय का एक गरम स्टील का गिलास लिए अंदर आते हैं। उनके चेहरे पर झुर्रियाँ हैं, लेकिन अपने बेटे को देखकर उनकी आँखों में गर्व साफ़ झलकता है।
**हरीश जी (धीमी आवाज़ में):** "रात भर से सोया नहीं है तू रुद्र? पूरे तीन बज रहे थे जब मैंने तेरी बत्ती जलती देखी थी। ले, थोड़ी चाय पी ले, बदन में कुछ गरमाहट आएगी।"
रुद्र पेन नीचे रखता है, चाय का गिलास thambta है, और अपने पिता की तरफ़ देखकर एक गहरी और आत्मविश्वासी मुस्कान देता है।
**रुद्र:** "बस कुछ ही दिनों की बात है बापू। इस बार की मेहनत सिर्फ़ एक परीक्षा के लिए नहीं है। यह हमारे पूरे परिवार के बदले हुए कल की शुरुआत है।"
**हरीश जी (मुस्कुराते हुए रुद्र के कंधे पर हाथ रखते हैं):** "मुझे पता है बेटा। तेरी माँ और मेरा बस यही एक सपना है कि इस बार जब परिणाम आए, तो पूरे उत्तराखंड को अपने इस बेटे पर नाज़ हो।"
**रुद्र (चाय की चुस्की लेते हुए, आँखों में एक अलग ही तेज़ी के साथ):** "बापू, आप सिर्फ़ उत्तराखंड की बात कर रहे हैं? आप लिख कर ले लीजिए... इस बार नाम पूरे देश के कोने-कोने में गूंजेगा।"
**दृश्य 2:**
**स्थान:** देहरादून का एक मशहूर कैफ़े। बाहर हल्की धूप खिली है और वादियों का नज़ारा बेहद ख़ूबसूरत है।
कैफ़े के कोने वाली मेज़ पर रुद्र बैठा है। वह अब अपनी पढ़ाई वाले गंभीर लुक में नहीं है; उसने एक साफ़-सुथरी शर्ट पहनी है और वह बार-बार कैफ़े के दरवाज़े की तरफ़ देख रहा है। वह अपनी घड़ी में वक़्त देखता है और थोड़ा बेचैन हो जाता है।
तभी कैफ़े का दरवाज़ा खुलता है और एक बेहद ख़ूबसूरत, चुलबुली लड़की अंदर आती है। यह सिमरन है। उसके चेहरे पर एक नटखट सी मुस्कान है। वह सीधे रुद्र की मेज़ की तरफ़ बढ़ती है और बिना कुछ बोले उसकी आँखों के सामने अपनी उँगलियाँ चटकाती है।
**सिमरन (हँसते हुए):** "ओहो! देश के होने वाले सबसे बड़े अफ़सर साहब इतनी गहरी सोच में डूबे हैं कि सामने खड़ी अपनी क़िस्मत भी दिखाई नहीं दे रही?"
रुद्र सिमरन को देखकर तुरंत खड़ा हो जाता है। उसकी सारी बेचैनी पल भर में ग़ायब हो जाती है।
**रुद्र (दिखावटी ग़ुस्से के साथ):** "सिमरन, तुम पूरे बीस मिनट लेट हो। तुम्हें पता है कि यूपीएससी एस्पिरेंट के लिए समय की क्या क़ीमत होती है? एक-एक सेकंड का हिसाब रखना पड़ता है।"
**सिमरन (अपनी सीट पर बैठते हुए और पाउट बनाते हुए):** "अच्छा जी! अभी से अफ़सर वाली धौंस जमाना शुरू? जब ज़िले के कलेक्टर बन जाओगे, तब तो मुझसे मिलने के लिए भी अपॉइंटमेंट लेटर मंगवाओगे, क्यों?"
रुद्र की आँखों का ग़ुस्सा तुरंत पिघल जाता है। वह सिमरन की तरफ़ थोड़ा झुकता है और बेहद संजीदगी से बोलता है।
**रुद्र:** "मज़ाक से हटकर सिमरन... अगर आज मैं यहाँ तक पहुँचा हूँ, रोज़ सोला-सोला घंटे पढ़ पाता हूँ, तो सिर्फ़ इसलिए क्योंकि मुझे पता है कि मंज़िल पर तुम मेरा इंतज़ार कर रही हो। मेरी इस पूरी तैयारी की असली ताक़त तुम हो।"
सिमरन की आँखें रुद्र की बातें सुनकर भावुक हो जाती हैं। वह धीरे से अपना हाथ रुद्र के हाथ पर रखती है। उसकी आँखों में एक अजीब सा अहसास है, जिसे पढ़ पाना सामान्य इंसान के लिए नामुमकिन है।
**सिमरन (एक गहरी मुस्कान के साथ):** "मैं भी देखना चाहती हूँ रुद्र कि तुम अपनी मंज़िल को पाकर किस हद तक जा सकते हो। बस याद रखना, परीक्षा का परिणाम चाहे जो हो, तुम्हारी ज़िंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बहुत जल्द आने वाला है।"
रुद्र सिमरन की बात का मतलब नहीं समझ पाता, वह बस उसकी आँखों में खो जाता है। उसे अंदाज़ा भी नहीं है कि सिमरन के इन शब्दों के पीछे कितनी बड़ी तबाही का तूफ़ान छुपा हुआ है।
**दृश्य 3:**
**स्थान:** दिल्ली, यूपीएससी मुख्यालय का मुख्य सभागार।
माहौल में ज़बरदस्त सन्नाटा और तनाव है। कैमरे की फ़्लैश लाइट लगातार चमक रही है। देश के बड़े-बड़े पत्रकार और टेलीविज़न चैनल्स के कैमरे एक ही मंच की तरफ़ केंद्रित हैं।
मंच पर मुख्य अधिकारी माइक के सामने खड़े होते हैं और हाथ में मौजूद लिस्ट को खोलते हैं।
**मुख्य अधिकारी (गंभीर और बुलंद आवाज़ में):** "इस साल की सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित करते हुए हमें बेहद गर्व हो रहा है। इस वर्ष, देश की सबसे कठिन परीक्षा में जिस युवा ने पूरे भारत में पहला स्थान प्राप्त कर टॉप किया है... वह उत्तराखंड के पहाड़ों से आते हैं। ऑल इंडिया रैंक 1 — रुद्र देव!"
पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता है। फ़्लैश लाइट्स की चमक सीधे मंच पर आते हुए रुद्र के चेहरे पर पड़ती है। वह मुस्कुरा रहा है, उसकी आँखों में जीत का ऐसा सवेरा है जो सदियों का अंधेरा मिटा दे।
कैमरा ज़ूम इन करता है रुद्र के चेहरे पर, जहाँ उसकी यह मुस्कुराती हुई तस्वीर अचानक धुंधली होने लगती है। पृष्ठभूमि का संगीत अचानक एक गहरे, डरावने और सस्पेंस भरे टोन में तब्दील हो जाता है।
स्क्रीन पर अंधेरा छा जाता है और केवल एक भारी, रोंगटे खड़े कर देने वाली फुसफुसाहट सुनाई देती है:
**"बधाई हो रुद्र देव... तुम देश की नज़रों में क़िस्मत के सिकंदर तो बन गए, लेकिन तुम्हें यह नहीं मालूम कि तुम उस चक्रव्यूह के अंदर पैर रख चुके हो, जहाँ से ज़िंदा बाहर निकलने का रास्ता सिर्फ़ पागलपन की गलियों से होकर गुज़रता है।"**

"Khel dimaag ka tha... par dimaag hi chala gaya!" ​Yeh kahani hai Uttarakhand ki haseen aur shant vaadiyon mein rehne wale ek behad seedhe aur tezi se dimaag chalane wale pahadi ladke ki. Apni dhasu buddhi aur din-raat ki mehnat ke dum par woh poore desh mein UPSC Top karta hai. Uske is safar mein...

शहर के सबसे महंगे और आलीशान होटल 'द रॉयल एम्पायर' का ग्रैंड बॉलरूम आज रोशनी से नहाया हुआ था। चारों तरफ कांच के बड़े-बड़े...
02/06/2026

शहर के सबसे महंगे और आलीशान होटल 'द रॉयल एम्पायर' का ग्रैंड बॉलरूम आज रोशनी से नहाया हुआ था। चारों तरफ कांच के बड़े-बड़े झूमर चमक रहे थे। शहर के नामी बिजनेसमैन, नेता और मीडिया के लोग वहाँ मौजूद थे। आज रात की पार्टी बहुत खास थी। यह पार्टी 'आर-एन ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज' के मालिक राज और उसकी पत्नी निशा की शादी की तीसरी सालगिरह की थी। इसके साथ ही, वे अपनी नई मेगा-बिजनेस डील का जश्न भी मना रहे थे।
राज ने वाइन का ग्लास हाथ में पकड़ा हुआ था। वह ब्लैक टक्सीडो में काफी हैंडसम लग रहा था, लेकिन उसकी आँखों में एक अजीब सा घमंड था। उसके ठीक बगल में निशा खड़ी थी, जो लाल रंग की महंगी साड़ी और हीरों के हार में चमक रही थी।
निशा ने राज के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, "राज, देखो आज सब हमारे सामने झुक रहे हैं। कभी सोचा था कि हम इस शहर के सबसे अमीर कपल बन जाएंगे?"
राज ने मुस्कुराते हुए वाइन की चुस्की ली और धीरे से फुसफुसाया, "यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है निशा। अगर तीन साल पहले हमने उस बेवकूफ अवनी को रास्ते से न हटाया होता, तो आज भी हम उसके टुकड़ों पर पल रहे होते। वह मर गई और उसकी सारी जायदाद, यह बिज़नेस, सब हमारा हो गया।"
निशा धीरे से हंसी, "हाँ, बेचारी अवनी! कितनी मासूम थी वह। उसे तो मरते दम तक पता नहीं चला कि उसकी कार के ब्रेक किसने फेल किए थे। भगवान उसकी आत्मा को शांति दे... ताकि हम यहाँ ऐश कर सकें।"
दोनों जोर से हंस पड़े। उन्हें इस बात का जरा भी पछतावा नहीं था कि उन्होंने एक मासूम लड़की की जान ली थी। उनके लिए पैसा ही उनका भगवान था।
तभी अचानक, पूरे बॉलरूम की लाइटें कुछ सेकंड के लिए टिमटिमाईं। म्यूज़िक अचानक बंद हो गया। हॉल में फुसफुसाहट शुरू हो गई। लोग हैरान होकर इधर-उधर देखने लगे कि अचानक क्या हुआ।
तभी बॉलरूम के विशाल आलीशान दरवाजे धीरे-धीरे खुले।
दरवाजे के पीछे से एक साया अंदर की तरफ बढ़ा। हाई हील्स की 'टिक-टिक' आवाज़ पूरे शांत हॉल में गूंज उठी। जैसे ही वह रोशनी के नीचे आई, पूरे हॉल में सन्नाटा पसर गया।
वह एक बेहद खूबसूरत लड़की थी। उसने आधी रात की तरह गहरे काले रंग का एक सिल्क गाउन पहन रखा था, जो उसकी पतली कमर और खूबसूरत काया को पूरी तरह निखार रहा था। उसके खुले काले बाल उसकी पीठ पर लहरा रहे थे। उसकी आँखें... वे आँखें इतनी गहरी और ठंडी थीं कि जो भी उसे देखता, उसकी रीढ़ में एक सिहरन दौड़ जाती। उसके चेहरे पर एक रहस्यमयी और कातिलाना मुस्कान थी।
उसे देखते ही राज के हाथ से वाइन का ग्लास छूटकर संगमरमर के फर्श पर गिरा और चकनाचूर हो गया। लाल वाइन फर्श पर ऐसे फैल गई जैसे खून।
राज के चेहरे का खून सूख चुका था। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह हांफते हुए पीछे हटा, "अ... अवनी??"
निशा का चेहरा भी डर के मारे सफेद पड़ गया। उसका गला सूख गया, वह लड़खड़ाते हुए बोली, "नहीं... यह नहीं हो सकता! वह तो मर चुकी है! हमने खुद... मेरा मतलब है, वह एक्सीडेंट में मर गई थी! यह उसका भूत है!"
पार्टी में मौजूद लोग राज और निशा की यह हालत देखकर हैरान थे। वे नहीं जानते थे कि अवनी कौन थी, क्योंकि राज ने दुनिया को यही बताया था कि उसकी पहली पत्नी की मौत एक बीमारी से हुई थी।
वह लड़की (जो असल में अवनी ही थी, लेकिन अब उसका नाम माया था) राज और निशा की तरफ बढ़ने लगी। उसकी हर एक चाल में एक रानी जैसा रुतबा और ताकत थी। वह डरपोक अवनी नहीं थी जो राज की एक डांट से रोने लगती थी। वह अब 'माया' थी—जो तबाही बनकर लौटी थी।
निशा डर के मारे कांपते हुए चिल्लाई, "दूर रहो हमसे! तुम जो कोई भी हो, दूर रहो!"
माया, राज और निशा के बिल्कुल करीब आकर रुक गई। उसने अपनी गहरी आँखें राज की आँखों में गड़ा दीं। राज को लगा जैसे वह किसी शेरनी के सामने खड़ा हो। डर के मारे उसके माथे से पसीना टपकने लगा।
राज ने अपनी कांपती हुई आवाज़ को संभालने की कोशिश की और कहा, "अवनी... तुम जिंदा हो? तुम तीन साल तक कहाँ थी? और तुम्हारा यह हुलिया..."
माया ने अपनी गर्दन को थोड़ा सा झुकाया और उसकी खूबसूरत सी हंसी पूरे हॉल में गूंज उठी। वह हंसी इतनी ठंडी थी कि राज का दिल दहल गया।
माया ने बहुत ही शांत और मखमली आवाज़ में कहा, "सॉरी मिस्टर राज... लेकिन आप किसी गलतफहमी का शिकार हो रहे हैं। मेरा नाम 'माया' है। माया सिंघल। मैं सिंगापुर से आई हूँ।"
राज ने चौंककर निशा की तरफ देखा। निशा ने फुसफुसाते हुए कहा, "नहीं राज, यह चाल चल रही है। यह वही है! इसका चेहरा, इसकी आवाज़..."
माया ने निशा की तरफ देखा और अपनी भौहें सिकाड़ते हुए कहा, "ओह! तो आप मिसेज निशा हैं? मैंने आपके बिज़नेस के बारे में बहुत सुना है। वैसे मिस्टर राज, आप अपनी जिस पहली पत्नी 'अवनी' की बात कर रहे हैं... क्या वह भी इतनी ही खूबसूरत थी? या फिर वह इतनी बदनसीब थी कि उसने आप जैसे कमज़ोर दिल इंसान पर भरोसा किया?"
माया के शब्दों में एक गहरा तंज था, जिसे राज और निशा अच्छी तरह समझ रहे थे, लेकिन वे चाहकर भी सबके सामने कुछ बोल नहीं पा रहे थे।
राज ने खुद को संभालते हुए कहा, "अगर तुम अवनी नहीं हो, तो तुम्हारा चेहरा उससे क्यों मिलता है? और तुम यहाँ हमारी प्राइवेट पार्टी में क्या कर रही हो?"
माया ने अपनी उंगली से अपने होंठों को छुआ और एक गहरी सांस लेते हुए कहा, "दुनिया में एक जैसे चेहरे के कई लोग होते हैं मिस्टर राज। और जहाँ तक यहाँ आने की बात है... मैं यहाँ पार्टी करने नहीं आई हूँ। मैं यहाँ आपकी बर्बादी का तमाशा देखने आई हूँ। आर-एन ग्रुप ने जो नया टेंडर पास कराया है, मैं उसे अपनी कंपनी के नाम करने आई हूँ। यानी... मैं आपका सब कुछ छीनने आई हूँ।"
पूरे हॉल में सनसनी फैल गई। मीडिया के कैमरों की फ्लैशलाइट्स माया पर चमकने लगीं। राज गुस्से से लाल हो गया, "तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई! तुम जानती भी हो मैं कौन हूँ? मैं तुम्हें इस शहर में बिज़नेस तो क्या, पैर भी रखने नहीं दूँगा!"
माया ने मुस्कुराते हुए राज के करीब आकर उसके कान में धीरे से कहा, "खेल तो अभी शुरू हुआ है राज बाबू। तीन साल पहले जो कहानी अधूरी रह गई थी, उसे पूरा करने का वक्त आ गया है। मरे हुए लोग वापस नहीं आते... लेकिन जो ज़िंदा दफन किए गए हों, वे तबाही बनकर लौटते हैं।"
यह कहकर माया पीछे हटी और मुड़कर जाने लगी। राज और निशा उसे जाते हुए देखते रहे। राज का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह अवनी है या कोई और, लेकिन एक बात साफ थी—उनकी जिंदगी का सुकून अब खत्म होने वाला था।
जैसे ही माया होटल के गेट से बाहर निकली, बाहर तेज बारिश शुरू हो चुकी थी। ठंडी हवाएं चल रही थीं। उसने आसमान की तरफ देखा और बुदबुदाई, "माँ... पापा... आपकी मासूम अवनी उस दिन कार के साथ खाई में गिरकर मर गई थी। आज जो वापस आई है, वह आप सबके कातिलों के लिए काल है। मैं राज और निशा को तड़पा-तड़पा कर मारूँगी।"
तभी, काले रंग की एक बेहद महंगी बुगाटी कार माया के ठीक सामने आकर रुकी। कार का शीशा धीरे से नीचे हुआ। अंदर अंधेरे में एक आदमी बैठा था, जिसके हाथ में सिगार था। उसकी आँखों में एक अजीब सा आकर्षण और खतरनाक साया था। वह कोई और नहीं, शहर का सबसे खूंखार और रईस बिज़नेसमैन **रेयांश सिंघानिया** था।
रेयांश ने माया की तरफ देखा और अपनी भारी, मर्दाना आवाज़ में कहा, "तो... पहली जंग जीतकर कैसा लग रहा है, मिस माया?"
माया ने मुस्कुराकर कार का दरवाजा खोला और अंदर बैठ गई। गाड़ी अंधेरी रात में गायब हो गई।
**[चैप्टर 1 समाप्त]**

शीर्षक: माफिया की मासूम मल्लिका: एक खामोश इंतकाम जिसे सबसे ज्यादा चाहा, उसी ने सबसे बड़ा धोखा दिया! अवनी की मासूमियत...

31/05/2026

Description: ​सूरत शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में, करण एक आम कंप्यूटर ऑपरेटर है जो अपनी बीमार मां के इलाज के लिए दिन-रात मेहन.....

31/05/2026

​"आरोही एक बिंदास, स्मार्ट और मार्शल आर्ट्स जानने वाली आधुनिक लड़की है। उसकी जिंदगी में तूफान तब आता है, जब उसे एक र.....

31/05/2026

"Khel dimaag ka tha... par dimaag hi chala gaya!" ​Yeh kahani hai Uttarakhand ki haseen aur shant vaadiyon mein rehne wale ek behad seedhe aur tezi se dimaag chalane wale pahadi ladke ki. Apni dhasu buddhi aur din-raat ki mehnat ke dum par woh poore desh mein UPSC Top karta hai. Uske is safar mein...

29/05/2026

एक रौबीली और कड़क आवाज़ फॉर्च्यूनर कार के अंदर गूंजी। ड्राइवर रमेश ने तुरंत ब्रेक मारा। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थ...

Pyar ka izeharएक रौबीली और कड़क आवाज़ फॉर्च्यूनर कार के अंदर गूंजी। ड्राइवर रमेश ने तुरंत ब्रेक मारा। बाहर मूसलाधार बारिश ...
29/05/2026

Pyar ka izehar

एक रौबीली और कड़क आवाज़ फॉर्च्यूनर कार के अंदर गूंजी। ड्राइवर रमेश ने तुरंत ब्रेक मारा। बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी। कार का दरवाज़ा खुला और काले रंग के महंगे सूट में लिपटा एक लंबा, बेहद हैंडसम और शार्प नैन-नक्श वाला लड़का बाहर निकला। उसके चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता थी जो उसे भीड़ में सबसे अलग बनाती थी।
यह था **कबीर शर्मा**। शहर की सबसे बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी 'शर्मा एम्पायर' का इकलौता वारिस, बिजनेस माइंडेड, वक्त का पाबंद, और दिल से एकदम सख्त। लोग उसे 'द किंग ऑफ बिजनेस' भी कहते थे, लेकिन कबीर के लिए काम ही उसकी जिंदगी थी। प्यार, रोमांस और जज़्बात? इन चीज़ों के लिए उसकी लाइफ में कोई जगह नहीं थी।
कबीर ने बिना छाते के बारिश में खड़े होकर सामने बन रही गगनचुंबी इमारत को देखा, अपनी कलाई पर बंधी महंगी घड़ी पर वक्त नोट किया और वापस कार में बैठते हुए कहा, "स्पीड बढ़ाओ रमेश, डैड घर पर इंतज़ार कर रहे होंगे।"
शर्मा मेंशन के आलीशान ड्राइंग रूम में कदम रखते ही कबीर का स्वागत रोज की तरह होने वाले पारिवारिक ड्रामे से हुआ।
"अरे कबीर बेटा! आ गया मेरा बच्चा? देख जरा अपनी इस बहन को, कॉलेज कम जाती है और सोशल मीडिया पर रील ज्यादा बनाती है!" यह आवाज़ कबीर की मां, **गायत्री शर्मा** की थी। गायत्री जी एक संस्कारी, थोड़ी ड्रामेटिक और दिल की बेहद साफ महिला थीं, जिनकी पूरी दुनिया उनके परिवार के इर्द-गिर्द घूमती थी।
"अरे मॉम, आप भी ना! इसे रील्स नहीं, कंटेंट क्रिएशन कहते हैं," सोफे पर बैठी कबीर की छोटी और चुलबुली बहन **रिया** ने मुंह बनाते हुए कहा। रिया कबीर की लाडली थी, जो पूरे घर में सिर्फ कबीर से ही थोड़ा डरती थी।
तभी सीढ़ियों से उतरते हुए एक भारी और रौबीली आवाज़ आई, "गायत्री, शांत हो जाओ। मेरा शेर बेटा घर आ गया है, तो बिजनेस की बात होगी, इन फालतू रील्स की नहीं।"
यह थे कबीर के पिता, **बिहारी लाल शर्मा**। एक कड़क मिजाज और उसूलों के पक्के बिजनेसमैन, जिन्होंने शून्य से इस साम्राज्य को खड़ा किया था। वो कबीर को बहुत प्यार करते थे, लेकिन उनका तरीका हमेशा एक सख्त बॉस जैसा होता था।
डिनर टेबल पर पूरा परिवार साथ बैठा था। माहौल खुशनुमा था, लेकिन तभी बिहारी लाल जी ने चम्मच प्लेट पर रखी और कबीर की तरफ देखते हुए गंभीर आवाज़ में कहा, "कबीर, बिजनेस को तुम बहुत अच्छे से संभाल रहे हो। लेकिन अब वक्त आ गया है कि तुम अपनी जिंदगी का दूसरा फैसला भी ले लो।"
कबीर ने पानी का ग्लास नीचे रखा, "कैसा फैसला, डैड?"
"तुम्हारी शादी का फैसला। मैंने मिस्टर सिंघानिया से बात की है, उनकी बेटी अहाना अगले हफ्ते लंदन से लौट रही है। मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों मिलो और यह रिश्ता पक्का हो जाए। बिजनेस और लाइफ दोनों के लिए यह परफेक्ट होगा।" बिहारी लाल जी ने एक तरह से अपना आखिरी फैसला सुना दिया था।
पूरे कमरे में सन्नाटा छा गया। गायत्री जी मुस्कुराईं, रिया ने कबीर को चिढ़ाने वाले अंदाज में देखा। लेकिन कबीर का चेहरा एकदम सख्त हो गया। वह अपनी जगह से खड़ा हुआ और बिना कोई जज़्बात दिखाए बोला, "डैड, शादी एक डील नहीं है जो मैं आपके कहने पर साइन कर दूँ। मुझे इस बारे में कोई बात नहीं करनी।"
"कबीर! तुम मेरी बात को टाल रहे हो?" बिहारी लाल जी की आवाज़ में गुस्सा साफ था।
"मैं सिर्फ सच कह रहा हूँ डैड। गुड नाइट," कहकर कबीर अपने कमरे की तरफ बढ़ गया।
अपने अंधेरे और आलीशान कमरे की बालकनी में खड़ा होकर कबीर बाहर हो रही बारिश को देख रहा था। उसके दिमाग में डैड की बातें घूम रही थीं। कबीर ने हमेशा अपनी मर्जी की जिंदगी जी थी, लेकिन परिवार का यह दबाव उसे परेशान कर रहा था।
उसने गहरी सांस ली और मन ही मन सोचा, *'शादी? प्यार? जो चीज़ दुनिया में एक्सिस्ट ही नहीं करती, उसके लिए मैं अपनी आज़ादी नहीं खो सकता। कोई नहीं बदल सकता कबीर शर्मा को... कोई भी नहीं!'*
कबीर को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि किस्मत उसकी इस सोच को बहुत जल्द ही बदलने वाली थी। उसकी लाइफ में एक ऐसी लड़की की एंट्री होने वाली थी, जो कबीर शर्मा के सारे उसूलों को ताश के पत्तों की तरह बिखेरने वाली थी।
कौन थी वो लड़की? और कैसे होने वाला था कबीर की जिंदगी का पहला और सबसे खूबसूरत **'प्यार का इज़हार'**?
**[एपिसोड 1 समाप्त]**
**अगले एपिसोड में देखिए:** कबी
र के ऑफिस में एक नई इंटर्न की एंट्री, जो आते ही कबीर की गाड़ी से अपनी स्कूटी ठोक देती है! क्या होगा जब कबीर का सामना उस बेबाक लड़की से होगा? जानने के लिए पढ़ते रहिए!

if you like this blog kindly give your feedback.
02/12/2023

if you like this blog kindly give your feedback.

Digital marketing sikhne ke liye koi khaas qualification nahi chahiye, lekin kuch basic skills aur knowledge ki zarurat hoti hai. Yahaan kuch cheezein hain jo aapko digital marketing mein shuruwat …

18/11/2023

superb page, nice and unique content in this page so I highly recommend this page

Address

Surat
Surat
395010

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dance_shortz_universe posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Dance_shortz_universe:

Shortcuts

Share