30/05/2026
कलयुगी महाभारत: बेनीवाल बनाम भजनलाल
सत्ता का स्वभाव ही परम मूर्खता है,क्योंकि जहां अहंकार का साम्राज्य होता है, वहां होश और विवेक की कोई संभावना नहीं बचती। हनुमान बेनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनहीनता पर की गई टिप्पणी के प्रतिशोध में उनकी सुरक्षा से तीन पुलिस जवानों को हटा देना,राजनीति के इसी संकीर्ण और बचकानेपन का जीवंत प्रमाण है।यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं,बल्कि सत्ता के अहंकार का आत्मघाती नृत्य है।
जब किसी व्यक्ति के पास आंतरिक रूप से कुछ नहीं होता,तो वह बाहर की कुर्सी और सत्ता को अपनी अस्मिता बना लेता है।जैसे ही उस सत्ता पर कोई उंगली उठाता है,उसका पूरा अस्तित्व हिल जाता है।मुख्यमंत्री द्वारा एक आलोचना के बदले सुरक्षाकर्मी हटा लेना यह दिखाता है कि व्यवस्था भीतर से कितनी डरी हुई और कमजोर है।
अरे भाई भजनलाल जी!यह कुर्सी पांच साल के लिए जनता की दी हुई अमानत है,आपकी जागीर नहीं।चेले-चांटों की फौज आगे-पीछे घूमने से कोई अमर नहीं हो जाता।इतनी छोटी सी आलोचना से डोल गए,तो खाक मुख्यमंत्री बने!" आलोचना से घबराकर प्रतिशोध पर उतर आना यह सिद्ध करता है कि राज्य के मुखिया का मन कितना संकुचित है। तीन जवानों को हटाकर आपने बेनीवाल का कद छोटा नहीं किया,बल्कि खुद की मानसिक दरिद्रता को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है।
बदला हमेशा कमजोर और रीढ़विहीन मन की उपज होता है। हनुमान बेनीवाल ने यदि जनता की आवाज उठाकर सरकार को आईना दिखाया,तो एक आत्मविश्वासी और सजग मुख्यमंत्री को आत्ममंथन करना चाहिए था।लेकिन इसके विपरीत,सुरक्षा में कटौती करना यह दर्शाता है कि सत्ता में बैठे लोग खुद को भगवान समझने की भूल कर बैठे हैं।
आपको क्या लगता है,तीन पुलिसवाले हटा देने से बेनीवाल डर जाएगा?जो आदमी खेतों,खलिहानों और सड़कों पर धूल फांकते हुए जनक्रांति के दम पर नेता बना हो,वह तुम्हारी पुलिस की संगीनों और बंदूकों का मोहताज नहीं है।यह सरकार की वह मूर्खता है जो दूसरों को नीचा दिखाने के चक्कर में खुद को ही जनता के सामने नग्न कर देती है।
राजस्थान की यह मरुधरा हमेशा से स्वाभिमान,साहस और सत्य की पक्षधर रही है।यहां राजसी धौंस और तानाशाही को कभी स्वीकार नहीं किया गया।सत्य को तुम जितना दबाने की कोशिश करोगे,वह उतनी ही दुगुनी ताकत से प्रस्फुटित होगा। सुरक्षा हटा लेने से न तो विचार मरते हैं और न ही सच की आवाज को दबाया जा सकता है।
चेत सको तो चेत जाओ भजनलाल जी!यह जनता है,यह यदि गद्दी पर बैठाना जानती है,तो वक्त आने पर उसी गद्दी से नीचे खींचने का माद्दा भी रखती है।यह घटना इस बात का प्रमाण है कि जब-जब सत्ता अहंकार के मद में चूर होकर अपनी मर्यादा भूलेगी, तब-तब लोक-चेतना और दर्शन उसे इसी तरह आईना दिखाते रहेंगे।
पूरे दिन भर जो बात घरेलू थी उसको ट्रेंड में रखवाकर पूरे देश को अवगत करवा दिया।वाकई बिन मूर्खता यहां राजकाज नहीं चलता है।
HEERA LAL PRAJAPATI BAJWAS