17/03/2026
एक आयु के बाद मेडिकल माफिया का विश्वास मत करें।नहीं तो जितने टेस्ट उपलब्ध हैं पैसे कमाने के लिए सभी टेस्ट करवा कर आधे तो वैसे ही मार दिए जाओगे।
नो स्मोकिंग दिवस पर विशेष।नो तंबाकू पर ज्ञान झाड़ने वाले सारे एनजीओ और बाकी लोग जेनेटिक्स पढ़ लें ढंग से। तंबाकू से कैंसर नहीं होता तंबाकू सिर्फ ओंकॉजेनिक cells को एक्टिवेट कर सकता है। Oncogenic cells heridity से किसी के शरीर में हो सकते हैं। अगर किसी के शरीर में ओंकॉजैनिक cells हों तो तंबाकू से ज्यादा एक्टिवेटर तो आपको टमाटो सॉस में मिला हुआ सोडियम बेंजोएट है जिसको प्रिजर्वेटिव की तरह इस्तेमाल किया जाता है।
इस प्रकार से तो तंबाकू से ज्यादा खतरनाक तो टमाटो सॉस और मैगी में और मोमो सूप में इस्तेमाल किए जाने वाला अजीनोमोटो है।
हां लंग्स में और छोटी मोटी समस्या तो तंबाकू पैदा कर सकता है। लेकिन oncogenic cells को एक्टिवेट करने में फूड प्रिजर्वेटिव और अजीनोमोटो तंबाकू से ज्यादा खतरनाक है।
ये एनजीओ और दूसरे संगठन अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए उल्टा सीधा प्रचार करने में माहिर है । जैसे आदिकाल से चले आ रहे प्राकृतिक मुफ्त में मिलने वाले नशे भांग के खिलाफ फर्जी एनजीओ और ड्रग माफिया पोषित एनजीओ नेताओं ने प्रचार करके इसे बैन करवा कर चिट्टे जैसे जानलेवा नशे के लिए स्पेस क्रिएट करवाया, जिससे रोज हिंदू सिर्फ हिन्दू युवा मर रहे हैं, जबकि भांग जैसे नशे से आज तक कोई नहीं मरा हमने नब्बे नब्बे साल के बजुर्गों को भांग पीते देखा है जिन्होंने पूरे परिवार की जिम्मेवारियों को निभाया। यह सब माफियाओं की धन कमाई का धंधा है। मैं नशे का समर्थक नहीं हूं लेकिन समाज का एक वर्ग हमेशा से नशे करता था और करेगा इस बात को नहीं झुठलाया जा सकता, आप यदि ब्रम्हचारी हो और यह सोचे कि सारा समाज आपकी तरह ब्रह्मचारी बन जाए तो इस्लामिक सोच और आपकी सोच में कोई अंतर नहीं है।मैगी तो बच्चे भी खाएं तो खाएं इनको तो बिजनेस करना है। अगर कोई डॉक्टर मेरी इस पोस्ट को पढ़ रहा है। तो मेरा चैलेंज है प्रूव करे कि तंबाकू क्या कैंसर पैदा करता है कि oncogenic cells को एक्टिवेट। तब तो ऐसी मुहिम फूड प्रिजर्वेटिव और अजीनोमोटो के खिलाफ भी चलनी चाहिए।
मुझे आईएमए और डॉक्टर्स से इस बात का जवाब चाहिए।
तंबाकू से ज्यादा कैंसर मरीज तो फ्लोराइड युक्त झाग वाला आईएमए द्वारा प्रमाणित कोलगेट पेस्ट कर चुका है।
coke pepsi में आईएमए द्वारा प्रमाणित brominated वेजिटेबल ऑयल की याद है या भूल गए।
मैंने पिछले काफी समय से 1999 से आजतक ऐसे किसी व्यक्ति की कुंडली नहीं देखी जो स्मोकर हो और उसकी मृत्यु कैंसर से हुई हो। या वर्तमान समय में उसे corona के कारण गंभीर समस्या हुई हो। अगर किसी के पास ऐसी कोई जानकारी हो तो बताए। कृप्या सुनी सुनाई बातों के आधार पर ना लिखें , अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं या थे तभी लिखें। इस विषय पर मुझे अपनी रिसर्च करने में मेरी मदद कीजिए। क्योंकि मैने देखा है कि अंतर राष्ट्रीय संगठन किसी ना किसी एजेंडा के तहत किसी चीज का प्रचार प्रसार अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रख कर करते आए हैं। हां इन बातों के कुछ नुकसान जरूर देखें हैं परन्तु उन नुकसानों को मत गिनाए। मैने अपने बचपन में ऐसे बहुत लोग देखे है जिनकी आयु 90-95 साल होती थी लेकिन बिल्कुल स्वस्थ और उनका हुक्का कभी बुझता नहीं था। और ऐसी बड़ी आयु 80-90 साल की औरतें देखी थी जो हर 5 मिनट बाद अपने नाक में नसवार सूंघती रहती थी बिल्कुल स्लिम ट्रिम और स्वस्थ। नस्वार भी तमाखु का पाउडर होता है। और मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूं जिन्होने किसी गुरु या पत्नी या डॉक्टर के कहने से बड़ी आयु 50 प्लस में तमाखू छोड़ा उनको सभी को स्टंट पड़ गए या उनकी हार्ट सर्जरी हुई।
यह सारा आधुनिक सिस्टम भय का व्यापार करता है और हमें दवाइयों पर निर्भर कर रहा है।
और जब से मोदी सरकार ने हार्ट स्टंट के रेट लाखों से 10-20 हजार के बीच कर दिए हमारे शहर में अब इक्कादुक्का केस में ही हार्ट स्टंट पड़ने के केस सुनाई देते है नहीं तो पहले हर दूसरे दिन सुनते थे कि उसको इसको हार्ट स्टंट पड़ गए। हमारा वैदिक ज्ञान भी यही कहता है कि अधिकतर बीमारियां हमारी सोच के कारण ज्यादा प्रभाव करती है। इसलिए जितना भय करोगे उतनी समस्या बढ़ेगी। एसपटीन फाइल्स वाले मनुष्यों की खेती करने वाले लोग ही इस मेडिकल माफिया के असली मालिक है आजकल।