15/12/2025
एक माली था जिसके पास पानी ले जाने के लिए दो मटके थे। एक मटका सही-सलामत था, जबकि दूसरा टूटा हुआ था, जिसमें हमेशा थोड़ा पानी रिसता रहता था।
टूटा हुआ मटका अपनी कमी पर बहुत दुखी रहता था। उसे लगता था कि वह अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा है और माली का नुकसान कर रहा है।
एक दिन, टूटे हुए मटके ने माली से माफ़ी मांगी और अपना दर्द बताया।
माली मुस्कुराया और बोला, "मेरे दोस्त, तुमने कभी ध्यान दिया? जिस रास्ते से हम रोज़ गुजरते हैं, उस रास्ते पर तुम्हारी तरफ़ हमेशा ख़ूबसूरत फूल खिले रहते हैं, और दूसरे मटके की तरफ़ कुछ नहीं है। मैंने जानबूझकर उस तरफ़ फूलों के बीज बोये थे, क्योंकि मुझे पता था कि तुम रोज़ उन्हें पानी देते रहोगे।"
"तुम्हारी कमज़ोरी ही मेरी बगिया की ख़ूबसूरती बन गई। हमें अपनी कमियों को कोसना नहीं चाहिए, बल्कि देखना चाहिए कि हम उनसे क्या ख़ास बना सकते हैं।"