10/09/2025
आज का युवा वर्ग आक्रोशित है। वह यह महसूस करता है कि देश जिस स्थिति में होना चाहिए, वहाँ नहीं है। उनकी पीड़ा और ग़ुस्सा जायज़ है, लेकिन इस ऊर्जा का रास्ता भटक जाना चिंता का विषय है। सरकार की नीतियों और नेताओं की जवाबदेही पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, किंतु राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुँचाना या संसद जैसी संस्थाओं पर हमला करना किसी भी आंदोलन की सही पहचान नहीं हो सकती।
विद्रोह ओर आंदोलन का अर्थ लूटपाट या विध्वंस नहीं है। आंदोलन का अर्थ है – विचार, सवाल और परिवर्तन की माँग। जब नई पीढ़ी सरकारी इमारतों को नुकसान पहुँचाती है, तो वह उसी घर को तोड़ती है जहाँ राष्ट्र के आज और कल की दिशा तय होती है।
फिर भी, युवाओं के आक्रोश को नकारा नहीं जा सकता। नेताओं की स्वार्थपूर्ण राजनीति, भ्रष्टाचार और दोहरे चरित्र ने ही यह स्थिति पैदा की है। देश के धन से अपने बच्चों को विदेश भेजना, उन्हें विलासिता का जीवन देना और जनता को खोखले वादों से बरसों तक छलना – यही आज की राजनीति का चेहरा बन चुका है। ऊपर से नीचे तक फैला भ्रष्टाचार हर स्तर पर जनता का विश्वास तोड़ता है।
हम अक्सर देशभक्ति का ढोंग करते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सत्ता और व्यवस्था से जुड़े अधिकांश लोग केवल निजी लाभ के लिए काम कर रहे हैं। पैसा कमाना, आलीशान मकान और बेशुमार ज़मीनें इकट्ठी करना ही उनका असली मकसद बन चुका है। यही कठोर हकीकत है, और यही कारण है कि युवाओं में निराशा और विद्रोह की भावना बढ़ रही है।
लेकिन सबसे बड़ी ग़लती सरकार की है, जो जनता की आवाज़ को सुनने और समाधान खोजने के बजाय उसे दबाने में लगी है। जब आंदोलनकारियों ने सड़कों पर उतरकर अपनी माँग रखी, तो सत्ता ने संवाद और समझौते के रास्ते को चुना ही नहीं, बल्कि गोली से जवाब दिया। यह किसी लोकतंत्र का नहीं, बल्कि दमनकारी शासन का संकेत है। जनता पर गोलियाँ चलाना, अपने ही देश के भविष्य को कुचलने जैसा है। मारे गए लोग आँकड़े नहीं, बल्कि इस देश के सपनों और संभावनाओं का हिस्सा थे।
अब ज़रूरत है कि युवा अपनी ऊर्जा को सही दिशा दें – तोड़फोड़ या हिंसा नहीं, बल्कि जागरूकता, संगठन और वैचारिक संघर्ष की ओर। क्योंकि बदलाव केवल गुस्से से नहीं, बल्कि विचार और प्रयास से आता है।
आख़िर में, नेपाल के परिवर्तन के आंदोलन/ विद्रोह में सरकार की गोलियों से मारे गए युवाओं को श्रद्धांजलि ओर हूल जोहार...
{ Nepal, Nepal Protest, Gen Z Protest, Kathmandu }