21/10/2026
मैं पति के लिए खाना लेकर उसके दफ्तर पहुँची, लेकिन उसे दूसरी औरत को चूमते पकड़ लिया। उसने सबके सामने मुझे मारा और बोला, “यहाँ से निकल जाओ, वरना सिक्योरिटी बुलाऊँगा।” मैंने सिर्फ अपनी शादी की अंगूठी उतारी, एक नंबर मिलाया और शांत स्वर में कहा, “आपातकालीन बैठक बुलाइए”—5 मिनट बाद उसका बैज बंद हुआ, लेकिन असली झटका अभी बाकी था...
PART 1
गुरुग्राम के साइबर सिटी स्थित वर्धन ग्लोबल के काँच के मुख्यालय में 300 से अधिक कर्मचारियों के सामने विक्रम सेठी का हाथ अनन्या मेहरा के चेहरे पर पड़ा, और अगले ही पल पूरा लॉबी ऐसा शांत हो गया जैसे किसी ने इमारत की साँस रोक दी हो।
अनन्या लड़खड़ाकर पीछे रखे सोफे से टकराई। उसके होंठ के किनारे से खून की पतली लकीर उतरने लगी। आसपास खड़े कर्मचारियों में से कई के हाथ मोबाइल की ओर बढ़े, लेकिन कोई उसके पास नहीं आया।
वह केवल 10 मिनट पहले बारिश से भीगा दुपट्टा संभालते हुए वहाँ पहुँची थी। उसके हाथ में स्टील का टिफिन था जिसमें उसने खुद विक्रम की पसंद की दाल मखनी और जीरा राइस बनाया था। विक्रम ने संदेश भेजा था कि वह देर रात तक मीटिंग में रहेगा। अनन्या ने सोचा था कि उसे खाना देकर चुपचाप लौट जाएगी।
लेकिन निजी लिफ्ट के पास उसने विक्रम को नैना कपूर को चूमते देख लिया।
नैना मानव संसाधन विभाग की उपनिदेशक थी। महंगे कपड़े, ऊँचे संपर्क और दूसरों की हैसियत को उनके कपड़ों से मापने की आदत उसके लिए किसी परिचय से कम नहीं थी।
— तुम मेरा पीछा कर रही हो? विक्रम चीखा। तुम्हें शर्म नहीं आती?
नैना ने फर्श पर गिरे टिफिन को अपनी एड़ी से किनारे कर दिया।
— विक्रम, मैंने कहा था न, यह समस्या बहुत पहले खत्म कर देनी चाहिए थी।
विक्रम ने अनन्या को ऐसे देखा जैसे वह उसकी पत्नी नहीं, कोई बोझ हो।
— 4 साल से मैं सब कुछ चला रहा हूँ। किराया, घर, गाड़ी, माँ की दवाइयाँ, तुम्हारे खर्च। और तुम अपने छोटे-मोटे फ्रीलांस काम को नौकरी समझती हो।
कुछ कर्मचारियों के बीच दबे हुए ठहाके सुनाई दिए।
— मेरी टीम के सामने तुम्हें देखकर मुझे शर्म आती है। देखो खुद को। तुम कॉर्पोरेट ऑफिस में आई हो या मोहल्ले के बाजार में?
अनन्या ने धीरे से चेहरा उठाया।
इस लॉबी में किसी को पता नहीं था कि शादी से पहले वह एशिया और यूरोप की अरबों रुपये की निवेश परियोजनाएँ संभाल चुकी थी।
किसी को यह भी नहीं पता था कि मेहरा होल्डिंग्स के जरिए वर्धन ग्लोबल के 61% मतदान अधिकार उसी परिवार के नियंत्रण में थे।
और सबसे बड़ी बात—विक्रम भी यह नहीं जानता था।
अनन्या चाहती थी कि कोई उससे उसके उपनाम, संपत्ति या पिता की विरासत के कारण प्रेम न करे। विक्रम जब वर्धन में नौकरी माँगने आया था, तब उसने केवल इतना कहा था कि उसकी योग्यता निष्पक्ष रूप से देखी जाए।
विक्रम अपनी क्षमता पर आगे बढ़ा था।
लेकिन हर पदोन्नति के साथ उसके भीतर कुछ और भी बढ़ता गया था—अहंकार।
विक्रम ने दोबारा हाथ उठाया।
— निकल जाओ यहाँ से। वरना सिक्योरिटी तुम्हें बाहर फेंक देगी।
इस बार अनन्या पीछे नहीं हटी।
उसने अपने कुर्ते के ऊपर पहने लंबे कोट की अंदरूनी जेब में हाथ डाला और एक छोटा काला फोन निकाला। वह फोन केवल वर्धन समूह के बोर्ड और मेहरा होल्डिंग्स की अध्यक्ष के लिए सुरक्षित था।
उसने एक संपर्क दबाया।
दूसरी ओर से तुरंत आवाज आई।
— मैडम चेयरपर्सन?
अनन्या की आँखें विक्रम पर टिकी रहीं।
— अरुण, आपातकालीन प्रोटोकॉल सक्रिय करो। और लाइन मत काटना।
विक्रम हँस पड़ा।
अनन्या ने खून पोंछते हुए कहा—
— क्योंकि अगले कुछ मिनटों में तुम्हें भी पता चल जाएगा कि तुमने किसे थप्पड़ मारा है।
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