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राहुल गांधी का 12 सितंबर को होनेवाला छात्रों की गूंज कार्यक्रम टला कांग्रेस की आपसी गुटबाजी के चलते टला कार्यक्रम...!अब ...
02/09/2026

राहुल गांधी का 12 सितंबर को होनेवाला छात्रों की गूंज कार्यक्रम टला

कांग्रेस की आपसी गुटबाजी के चलते टला कार्यक्रम...!

अब 19 सितंबर को कार्यक्रम होने का किया जा रहा दावा।

इंदौर : कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 12 सितंबर को इंदौर में होनेवाला 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम टल गया है। अब यह 19 सितंबर को आयोजित करने की बात कही जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि जगह नहीं मिलने के कारण राहुल गांधी के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है। लेकिन कांग्रेस की गुटबाजी को इसके लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि नगर निगम से, कार्यक्रम हेतु नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराने की मांग की गई थी लेकिन नहीं दिया गया। कांग्रेस ने वैकल्पिक स्थान के बतौर रीजनल पार्क पार्क के सामने स्थित मैदान पर तैयारी शुरू कर दी है।

हालांकि राहुल गांधी का कार्यक्रम टलने को कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान से जोड़ा जा रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विवेक तनखा की X पर की गई पोस्ट ने भी इस बात को साबित किया है।तनखा ने अपनी पोस्ट में लिखा है, "मुझे खुशी है कि राहुल गांधी का 'छात्रों की गूंज ' कार्यक्रम इंदौर में होने जा रहा है। इस कार्यक्रम को लेकर कांग्रेसजन और युवा वर्ग उत्साहित है। कार्यक्रम का आइडिया पीएसी की बैठक में मैने अपने प्रिय शहर जबलपुर में करने के लिए दिया था, पर जीतू पटवारी का प्रेम इंदौर था।"

विवेक तनखा की पोस्ट से ये साफ झलकता है कि वे राहुल गांधी का कार्यक्रम जबलपुर में कराना चाहते थे लेकिन पीसीसी चीफ जीतू पटवारी इंदौर में कार्यक्रम कराकर राहुल गांधी के समक्ष अपने नंबर बढ़वाना चाहते थे, यही कारण है कि उन्होंने कार्यक्रम इंदौर में करवाने का निर्णय लिया। विवेक तनखा की पोस्ट में उनकी निराशा साफ नज़र आती है।

बता दें कि राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस और बीजेपी में लेटर वार का दौर चलने से सियासत भी गरमा रही थी। इस बीच तारीख आगे बढ़ने से कांग्रेस की आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने आ गई ।

अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में प्रभावी- लाभकारी सिद्ध होगा जन विश्वास पोर्टल: मुख्यमंत्री डॉ. यादवभोपाल : मुख्यमं...
02/09/2026

अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में प्रभावी- लाभकारी सिद्ध होगा जन विश्वास पोर्टल: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार, 2 सितंबर को जन विश्वास पोर्टल को मंत्रालय में लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि 7 अगस्त से प्रारंभ मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के अब तक चार सप्ताह सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुके हैं। कम समय में ही अभियान का अत्यधिक सकारात्मक प्रभाव रहा है। जनप्रतिनिधियों से लेकर अधिकारियों तक सभी सप्ताह में एक दिन फील्ड पर जाकर जनता की समस्याओं का तुरंत निराकरण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन विश्वास पोर्टल, अभियान के उद्देश्यों को पूरा करने में प्रभावी और लाभकारी सिद्ध होगा। प्रत्येक स्तर पर अधिकारी इस पोर्टल में यूजर मैनुअल के अनुसार नियमित रूप से जानकारियां अपलोड करना सुनिश्चित करें। इसके समेकित उपयोग से मैदानी स्तर पर जनसामान्य को बहुत लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जन विश्वास अभियान के तहत किए जा रहे कार्यो की संपूर्ण जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज करने के लिए मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान पोर्टल बनाया गया है।

उच्च स्तर पर होगी समीक्षा।

सीएम डॉ. यादव ने कहा कि पोर्टल पर अभियान के अंतर्गत किए गए भ्रमण, निरीक्षण, जन संवाद, उद्यम संवाद, जिला स्तरीय समीक्षा बैठक, नीतिगत विषय, अभियान के दौरान दिए गए महत्वपूर्ण निर्देशों, जिले के प्रमुख नवाचारों और जिले की ओर से भेजे जाने वाले सुझावों को दर्ज किया जाएगा। प्रति सप्ताह दर्ज की जाने वाली जानकारी की उच्च स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी और राज्य स्तरीय मामलों के निराकरण के लिए आवश्यक समन्वय भी होगा।

इंदौर विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में 177.33 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को दी गई प्रशासकीय स्वीकृतिरेडिसन और रोबोट च...
01/09/2026

इंदौर विकास प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में 177.33 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को दी गई प्रशासकीय स्वीकृति

रेडिसन और रोबोट चौराहे पर फ्लाय ओव्हर तथा एमआर-09 मार्ग निर्माण को मिली मंजूरी, यातायात होगा सुगम,

अहिल्योत्सव समिति को अहिल्योत्सव वर्ष 2026 के के लिए दिया जाएगा 8 लाख रुपये का अनुदान।

गणेश विसर्जन चल समारोह में निकलने वाली झांकियों के ‍निर्माण हेतु मिलों की गणेशोत्सव समितियों को दी जाएगी 03 लाख रुपए की सहयोग राशि।

संभागायुक्त एवं इंदौर विकास प्राधिकरण के सह-अध्यक्ष भास्कर लाक्षाकार की अध्यक्षता में इंदौर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न।

इंदौर : संभागायुक्त एवं इंदौर विकास प्राधिकरण के सह-अध्यक्ष भास्कर लाक्षाकार की अध्यक्षता में इंदौर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई तथा महत्वपूर्ण विकास कार्यों के संबंध में अनेक निर्णय लिए गए। बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग योगेन्द्र कुमार, मुख्य अभियंता विद्युत विभाग राजेशचन्द्र जैन, संयुक्त संचालक नगर तथा ग्राम निवेश शुभाशीष बेनर्जी, अधीक्षण यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सुनील कुमार उदिया, मुख्य कार्यपालिक अधिकारी इंदौर विकास प्राधिकरण डॉ. परीक्षित झाड़े सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

संचालक मंडल द्वारा पूर्वी रिंग रोड स्थित रेडिसन चौराहा पर प्रस्तावित फ्लाय ओव्हर निर्माण के लिए 76.59 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इसी प्रकार रोबोट चौराहे पर प्रस्तावित फ्लाय ओव्हर निर्माण के लिए 94.18 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। दोनों चौराहे पर फ्लायओव्हर के ‍निर्माण के बाद यातायात सुगम होगा। इसी तरह आगरा-मुंबई बायपास से प्राधिकरण की योजना क्रमांक 05 को जोड़ने वाले मास्टर प्लान एमआर-09 मार्ग के निर्माण के लिए 6.56 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इस प्रकार गैर योजनामद के अंतर्गत कुल 177.33 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।

एरोसिटी के विकास के लिए 52.61 करोड़ रुपये स्वीकृत।

संचालक मंडल द्वारा योजना क्रमांक 151-169-बी में आईटी कंपनियों टीसीएस/इन्फोसिस को दी गई भूमि के बदले शासन से प्राप्त भूमि, जो योजना क्रमांक 172 के समीप स्थित है, को एरोसिटी के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही इंदौर विकास योजना-2021 के अनुसार उक्त भूमि से एयरपोर्ट तक 75 मीटर चौड़े एवं लगभग 1.5 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण के लिए 52.61 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। एरोसिटी के विकास से एयरपोर्ट के समीप होटल सहित अन्य व्यावसायिक एवं सेवा गतिविधियों के विस्तार को गति मिलने की संभावना है।

योजना क्रमांक 172 के विकास के लिए 240.93 करोड़ रुपये स्वीकृत।

संचालक मंडल ने एयरपोर्ट रोड स्थित योजना क्रमांक 172 के विकास कार्यों के लिए 240.93 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। योजना के विकास से शहर के समीपस्थ क्षेत्रों में अधोसंरचना एवं अन्य विकास गतिविधियों के विस्तार को गति मिलेगी।

मेघदूत उपवन से लगी भूमि के समग्र विकास को मंजूरी।

योजना क्रमांक 54 के अंतर्गत मेघदूत उपवन से लगी प्राधिकरण स्वामित्व की लगभग 3.83 हेक्टेयर भूमि के समग्र विकास तथा कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए 15 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इससे इस क्षेत्र में उपलब्ध भूमि का सुनियोजित एवं बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा सकेगा। साथ ही मेघदूत उपवन में आने वाले दर्शकों की संख्या में वृद्धि होगी।

योजना क्रमांक 97 भाग-2 के विकास कार्य की निविदा स्वीकृत।

बैठक में योजना क्रमांक 97 भाग-2 के विकास कार्य के लिए न्यूनतम निविदादाता द्वारा प्रस्तुत 33 करोड़ 95 लाख 98 हजार 498 रुपये की निविदा को स्वीकृति प्रदान की गई। इससे योजना के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

विभिन्न योजनाओं में भूखण्ड एवं आवासीय प्रकोष्ठों के व्ययन के लिए दरें निर्धारित।

संचालक मंडल द्वारा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में संपत्तियों के व्ययन के लिए दर निर्धारण भी किया गया। योजना क्रमांक 103 के बहुमंजिला भवन "पलाश" में निर्मित 31 आवासीय प्रकोष्ठों, योजना क्रमांक 114-प्रथम (राजीव आवास विहार) में आवासीय उपयोग के 09 प्रकोष्ठों तथा योजना क्रमांक 135 में 106 आवासीय उपयोग के भूखण्डों के व्ययन के लिए दरें निर्धारित की गईं।

इसी प्रकार योजना क्रमांक 59 पार्ट-2 में व्यावसायिक उपयोग के 21 एवं आवासीय उपयोग के 01 भूखण्ड को भू-स्वामी अधिकार पर व्ययन करने, योजना क्रमांक 136 में आवासीय उपयोग के 151 भूखण्डों तथा योजना क्रमांक 71 सेक्टर-ए में व्यावसायिक उपयोग के 05, औद्योगिक उपयोग के 04 एवं शॉपिंग उपयोग के 03 भूखण्डों के व्ययन के लिए भी दरें निर्धारित की गईं। योजना क्रमांक 54 में चिकित्सालय उपयोग के भूखण्ड के व्ययन के लिए भी दर निर्धारण किया गया। इन निर्णयों के बाद संबंधित योजनाओं में संपत्तियों के व्ययन हेतु निविदाएं आमंत्रित की जा सकेंगी।

योजना क्रमांक 97 की भूमियों के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्णय।

संचालक मंडल द्वारा योजना क्रमांक 97 के दीर्घकालीन क्रियान्वयन के दौरान विभिन्न कारणों से योजना से पृथक हुई अथवा भूमि अर्जन की कार्यवाही से बाहर हुई भूमियों की वर्तमान स्थिति निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। कृषि उपयोग की भूमियों के संबंध में अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने तथा योजना के आवश्यक उपांतरण के लिए मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 52(1)(ख) के अंतर्गत राज्य शासन को प्रस्ताव प्रेषित किए जाने का निर्णय भी लिया गया।

अहिल्योत्सव एवं गणेशोत्सव समितियों को सहयोग।

बैठक में श्री अहिल्योत्सव समिति को अहिल्योत्सव वर्ष 2026 के आयोजन के लिए 8 लाख रुपये का अनुदान दिए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके साथ ही बंद कपड़ा मिलों की पांच गणेशोत्सव समितियों को गणेश विसर्जन चल समारोह में निकलने वाली झांकियों के निर्माण के लिए प्रत्येक समिति को 3 लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया।

नांदेड़ में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने सनातन धर्म के खिलाफ की नारेबाजी, मचा बवालनांदेड़ पुलिस ने हिंदू संगठनों की...
01/09/2026

नांदेड़ में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों ने सनातन धर्म के खिलाफ की नारेबाजी, मचा बवाल

नांदेड़ पुलिस ने हिंदू संगठनों की शिकायत पर कांग्रेसियों के खिलाफ दर्ज किया प्रकरण।

इंदौर : अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण और बहुसंख्यकों को जातियों में बांटने के रास्ते पर चल रही कांग्रेस लगता है अब सीधे हिंदू और सनातन धर्म के विरोध में उतर आई है। महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सनातन धर्म के खिलाफ नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल होने के बाद सियासी गलियारों में बवाल मच गया। बीजेपी और हिंदू संगठनों के कड़े ऐतराज के बाद नांदेड़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

दरअसल, समूचा घटनाक्रम बीती 14 अगस्त का है, उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे की सभा के बाद कतिपय हिंदूवादी कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से सभास्थल का गोमूत्र छिड़ककर शुद्धिकरण किया गया था। कांग्रेस का आरोप है कि खरगे के दलित होने के चलते ऐसा किया गया जबकि हिंदूवादी कार्यकर्ताओं का तर्क था खरगे की सभा में इस्लामिक और देश विरोधी नारे लगाए गए थे, इसलिए सभास्थल पर गोमूत्र छिड़का गया। कांग्रेस ने इस घटना को दलित विरोधी बताते हुए देशभर में प्रदर्शन किए। उसी कड़ी में बीती 14 अगस्त को नांदेड़ के आईटीआई चौक में जुटे स्थानीय कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बताया जाता है कि कांग्रेसियों ने इस दौरान सनातन धर्म के विरोध में भी नारे लगाए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नांदेड़ पुलिस ने विहिप और बीजेपी कार्यकर्ताओं की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सनातन धर्म के खिलाफ कांग्रेसियों द्वारा की जा रही नारेबाजी का वीडियो सही पाया गया। अब नांदेड़ पुलिस दोषी कांग्रेस कार्यकर्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस के नांदेड़ से सांसद रवींद्र चव्हाण ने सनातन के अपमान पर माफी मांगी है। हालांकि बीजेपी और विहिप ने सांसद चव्हाण सहित 50 से अधिक कांग्रेसियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कांग्रेस के इस कृत्य को समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने वाला बताया है।

(नोट : संलग्न फोटो गूगल से साभार)

01/09/2026

अच्छा इंसान अच्छे मन और संस्कारों से बनता है : मुख्यमंत्री यादव

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में "प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना" अंतर्गत कक्षा 12वीं में 75% से अधिक अंक प्राप्त करने वाले प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल एवं सफल भविष्य की कामना की और उनके साथ सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई।

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी सफलता को कभी सिर पर न चढ़ने दें और असफलता को दिल पर न लें। हर परिस्थिति में सामान्य रहकर निरंतर आगे बढ़ते रहें। अच्छा इंसान कागज पर मिले अंकों से नहीं, बल्कि अच्छे मन और अच्छे संस्कारों से बनता है। आपका ज्ञान और दक्षता जीवन में सफलता की राह पर सदैव आपके सहायक रहेंगे। यह गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश की बोर्ड परीक्षाओं की मैरिट सूची में 50% से अधिक विद्यार्थी शासकीय स्कूलों से आ रहे हैं।

प्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 41 हजार करोड़ रूपये की दी गई स्वीकृतिवीबी जी राम ...
01/09/2026

प्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 41 हजार करोड़ रूपये की दी गई स्वीकृति

वीबी जी राम जी योजना के लिए 29 हजार 619 करोड़ रूपये का अनुसमर्थन,

दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के लिए 2 हजार 973 करोड़ रुपए स्वीकृत

भोपाल-जबलपुर और उज्जैन में प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित होंगे,

पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति,

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग निर्माण के लिए 3 हजार 272 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति,

स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण का अनुरक्षण के लिए 488 करोड़ रुपये की स्वीकृति,

चिकित्सा संस्थानों में विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 916 करोड़ रूपये की स्वीकृति,

मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए 21 पदों की स्वीकृति,

निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों का होगा सृजन,

कृषकों से मूँग की उपज का 60 प्रतिशत तक का उपार्जन किए जाने वाले निर्णय का अनुसमर्थन,

मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिये गए निर्णय।

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय भोपाल में संपन्न हुई। मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से लगभग 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति प्रदान की। राज्य में ग्रामीण विकास के ढांचे को गति देने के लिए 'विकसित भारत: वीबी जी राम जी योजना' के क्रियान्वयन के लिये 29 हजार 619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। इसके साथ ही प्रदेश की सड़क कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रुपये और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के लिए 3 हजार 272 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है, जिससे राज्य में औद्योगिक और सभी तरह के आवागमन को नई ऊर्जा मिलेगी।

तीन नए प्रौद्योगिकी विवि होंगे स्थापित।

उच्च एवं तकनीकि शिक्षा के क्षेत्र में क्षेत्रीय संतुलन और गुणवत्ता विस्तार की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) का पुनर्गठन कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके अतिरिक्त राज्य के दुग्ध उत्पादकों के आर्थिक सशक्तिकरण और 'सांची' ब्रांड के उन्नयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के सहयोग से 2 हजार 973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी गई।

प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से चिकित्सा उपकरणों और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। किसानों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए पंजीकृत कृषकों से ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज की उपार्जन सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुसमर्थन किया गया। साथ ही नवगठित जिलों मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा और निवाड़ी में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए सामाजिक न्याय और आयुष विभागों में नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

वीबी जी राम जी योजना के क्रियान्वयन के लिए 29 हजार 619 करोड़ रूपये का अनुसमर्थन।

मंत्रि-परिषद ने "विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण) : वीबी जी राम जी योजना मध्यप्रदेश" और इसके 1 जुलाई 2026 से प्रभावशील किए जाने का अनुसमर्थन किया। योजना के कार्यान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 में अनुमानित लागत रुपये 3,183 करोड़ रूपये तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना की निरंतरता के लिए कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रूपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। केंद्र और राज्य का अंश 60:40 के अनुपात में होगा, जिसमें राज्यांश 10 हजार 574 करोड़ रूपये होगा। इन पाँच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रूपये का व्यय होगा, जो राज्य शासन वहन करेगा।

निर्णय अनुसार नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी प्रदान की जाएगी। रोजगार के दिनों में की गई यह वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी।

नई योजना का मुख्य आधार 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण बुनियादी ढांचे को तैयार करना है। अब प्रत्येक ग्राम पंचायत जीआईएस आधारित तकनीक, 'पीएम गति शक्ति' लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी। इन योजनाओं को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' में समेकित किया जाएगा।

योजना अंतर्गत जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और अत्याधुनिक आजीविका मॉडल जैसे तकनीकि कार्यों के प्रभावी संपादन के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद में एक समर्पित राज्य-स्तरीय परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी।

भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में प्राप्त होने वाले वित्तीय आवंटन को पारदर्शी और आवश्यकता-आधारित बनाने के लिए ग्राम पंचायतों को विकास मानदंडों के आधार पर क, ख, ग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा।
योजना में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण को अनिवार्य किया गया है। साथ ही त्वरित शिकायत निवारण के लिए प्रत्येक जिले में एक 'लोकपाल' की नियुक्ति की जाएगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिकायतों का निराकरण करेंगे।

मंत्रि-परिषद ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नई परिषद के पूर्ण गठन/पंजीकरण तक वर्तमान 'मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद' को ही इस नई योजना के समस्त दायित्वों के निर्वहन के लिए अधिकृत किया है।

दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के लिए 2 हजार 973 करोड़ रूपये की स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली और सांची ब्राण्ड के उन्नयन के उद्देश्य से 2 हजार 973 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। डेयरी विकास योजना के माध्यम सेआगामी 05 वर्ष में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7331 ग्रामों से बढ़ाकर 26,000 ग्रामों तक किया जायेगा।दुग्ध संकलन को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन किया जाएगा।दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन किया जाएगा।दुग्ध पैकेट विक्रय 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन लीटर किया जाएगा।कृत्रिम गर्भाधान कवरेज 15% से बढाकर 50% किया जाएगा ।
एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड एवं संबद्ध दुग्ध संघों के संचालन और प्रबंधन के लिए मध्यप्रदेश शासन, एम.पी. स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन एवं संबद्ध दुग्ध संघों तथा राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के मध्य सहकार्यता अनुबंध (कोलेबोरेशन एग्रीमेंट) 13 अप्रैल 2025 को निष्पादित किया गया है। निष्पादित सहकार्यता अनुबंध के तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा 2 हजार 973 करोड़ की प्रस्तुत डेयरी विकास योजना पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। राज्य शासन द्वारा 500 करोड़ रूपये अधोसंरचना के लिए अनुदान एवं इसके अतिरिक्त भारत सरकार की योजनाओं पर स्वीकृति के अनुरूप अनुमानित 241 करोड़ रूपये का राज्यांश तथा योजना विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन की स्वीकृति दी गई है।

पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के निर्माण के लिए 3 हजार 774 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने पश्चिम भोपाल बायपास 4 लेन मय पेव्ड शोल्डर के लम्बाई 35.61 कि.मी., निर्माण कार्य के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) अंतर्गत कुल परियोजना वित्तीय लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप की राशि 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया। इस बायपास के निर्माण से जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इन्दौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल से नहीं गुजरना पड़ेगा और 21 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। पूर्व में पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर सहित हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) अंतर्गत लम्बाई-40.90 कि.मी. के लिए 2,981 करोड़ 65 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति 4 सितंबर 2023 को प्रदान की गई थी। पश्चिम भोपाल बायपास का एक रेखण भोपाल-जबलपुर मार्ग पर मण्डीदीप के समीप इटायाकलाँ से प्रारंभ होकर भोपाल-देवास मार्ग के ग्राम फंदा के समीप तक निर्मित किया जाना था, जिसकी लंबाई-40.90 कि.मी. थी। पश्चिम भोपाल बॉयपास क्षेत्र में रातापानी टाईगर रिजर्व घोषित हो जाने, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन के प्रभाव का समावेश करने, राज्य पुरातत्व विभाग की प्राचीन धरोहर शिव मंदिर (समसगढ़) एक रेखण पर आने तथा बायपास को पूर्वी बायपास से जोड़कर संपूर्ण रिंग रोड बनाने के कारण एक रेखण में परिवर्तन किया गया। एक रेखण में परिवर्तन से परियोजना की लागत में पूर्व स्वीकृति से 8.18 प्रतिशत वृद्धि होने से पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद से प्राप्त की गयी है।

मंत्रि-परिषद के निर्णय अनुसार परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत 599 करोड़ 44 लाख रुपये का भुगतान कंसेशन अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन प्राप्त करने पर 10 किश्तों में एवं नेट पॉजिटिव सीओएस की राशि का भुगतान निर्माण अवधि में अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार, राज्य राजमार्ग निधि के माध्यम से किया जायेगा। परियोजना निर्माण लागत की शेष 60% राशि रुपये 1,910 करोड़ 42 लाख रूपये का भुगतान एन्यूटी, ओएण्डएम एवं ब्याज सहित संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जायेगा।

आरजीपीवी का पुनर्गठन कर 3 नये प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में तकनीकि शिक्षा के संवर्धन, क्षेत्रीय संतुलन और अधोसंरचना की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी)भोपाल के स्थान पर अब राज्य में 3 पृथक प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाने की स्वीकृति दी है। ये विश्वविद्यालय भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में स्थापित होंगे। इस व्यवस्था अंतर्गत भोपाल स्थित वर्तमान विश्वविद्यालय को 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय', उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' तथा जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के रूप में स्थापित किया जाएगा।

वर्तमान में आरजीपीवी अंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाए और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन करते है। स्वीकृत व्यवस्था के अंतर्गत प्रदेश के सभी तकनीकि महाविद्यालयों को संभागवार विभाजित कर नवीन गठित तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में सौंपा गया है। भोपाल स्थित 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अधीन भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग आएंगे। उज्जैन स्थित 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के अंतर्गत उज्जैन और इंदौर संभाग रहेंगे। इसी प्रकार जबलपुर स्थित 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के क्षेत्राधिकार में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकि संस्थान शामिल किए जाएंगे। तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए पृथक अधिनियम लागू किए जाएंगे।

उज्जैन एवं जबलपुर में नवीन स्थापित होने वाले दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक संचालन के लिए प्रारंभिक स्तर पर कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव तथा वित्त अधिकारी के पदों को मंजूरी दी गई है। साथ ही अन्य सहायक व तकनीकि पदों को नियमानुसार आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाएगा। इन पदों का वेतन आहरण प्रारंभिक रूप से विश्वविद्यालय की उपलब्ध राशि से किया जाएगा और ये संस्थान स्व-वित्तीय आधार पर संचालित होंगे।

मंत्रि-परिषद ने तीनों विश्वविद्यालयों की स्थापना एवं अनुवर्ती कार्यवाही को गति देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय 'मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति' के गठन की भी स्वीकृति प्रदान की है। इस समिति में तकनीकि शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार, वित्त, उच्च शिक्षा और सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवों एवं मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वद्यालय के कुलगुरु सहित आयुक्त तकनीकि शिक्षा को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग निर्माण के लिए 3 हजार 272 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने मेहलुआ- बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग लंबाई 67.116 कि.मी., 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल पर निर्माण के लिए कुल परियोजना वित्तीय लागत रूपये 2,776 करोड़ 83 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति दी है। अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) की राशि 428 करोड़ 94 लाख रूपये तथा सुपरविजन चार्जेस की राशि 65 करोड़ 77 लाख रूपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किये जाने का अनुमोदन किया गया।
मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन परियोजना निर्माण लागत रूपये 1,151 करोड़ है। कुल परियोजना निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि रूपये 543 करोड़ 27 लाख (जीएसटी सहित) निर्माण अवधि के दौरान भुगतान म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा लिये जा रहे ऋण के माध्यम से तथा कुल परियोजना निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि 1,738 करोड़ 85 लाख रूपये (जीएसटी सहित) का भुगतान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट से किया जाएगा। प्रस्तावित मार्ग एन.एच.-346 विदिशा-चंदेरी पर मेहलुआ चौराहा से प्रारंभ होता है एवं बीना में एन.एच-934 हीरापुर-बीना को क्रॉस करते हुये मालथौन में एन.एच-44 नार्थ साउथ कॉरिडोर को जोड़ता है। यह मार्ग क्षेत्रीय, अंतर-राज्यीय एवं औद्योगिक यातायात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बीना शहरी क्षेत्र में बीपीसीएल रिफाइनरी, थर्मल पॉवर प्लांट, रेलवे यार्ड एवं प्रमुख उद्योग स्थित होने के कारण भारी वाहनों की संख्या अधिक है। यह मार्ग भविष्य में एक सशक्त आर्थिक व लॉजिस्टिक कॉरिडोर के रूप में विकसित होने की उच्च क्षमता रखता है।

स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण का अनुरक्षण के लिए 488 करोड़ रुपये की स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन एवं उपकरण के अनुरक्षण से संबंधित योजना को एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में प्रदाय किये गये मशीन एवं उपकरणों के रख-रखाव, मरम्मत इत्यादि के कार्य किए जायेंगे।

चिकित्सा संस्थानों में विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 916 करोड़ रूपये की स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना को 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 915 करोड़ 77 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना अंतर्गत प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओ.टी. इत्यादि के मरम्मत कार्य किए जाते हैं।

मैहर, मऊगंज एंव पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए 21 पदों की स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने नवगठित मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा जिलों में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए प्रत्येक जिले में उप संचालक का एक पद, सहायक वर्ग-2 का एक पद एवं सहायक वर्ग-3 के तीन पद सहित कुल 15 नवीन नियमित पद सृजित किये जाने तथा प्रत्येक जिले के लिये चतुर्थ श्रेणी के दो-दो मानव संसाधन कुल 6 आउटसोर्सिंग से रखे जाने की स्वीकृति प्रदान की है।

निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन की स्वीकृति।

मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिला निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा एवं मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार चार जिला कार्यालयों में जिला आयुष अधिकारी के चार पद वेतन मान 15 हजार 600-39,100-6600 ग्रेड पे, सहायक ग्रेड-1 मुख्य लिपिक के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2800 ग्रेड पे, लेखापाल के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2,800 ग्रेड पे एवं सहायक ग्रेड-2 के चार पद वेतन मान 5,200-20हजार 200-2400 ग्रेड पे की स्वीकृति दी है।

पंजीकृत कृषकों से मूँग का 60 प्रतिशत उपार्जन किए जाने वाले निर्णय का अनुसमर्थन।

मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूँग एवं उडद का 1 जुलाई 2026 से उपार्जन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्णय का अनुसमर्थन किया है। रबी वर्ष 2025-26 (विपणन वर्ष 2026-27) में प्राइस सपोर्ट स्कीम अंतर्गत ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन के लिए मंत्रि-परिषद के 24 फरवरी 2026 के आदेश में पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत उत्पादन ही उर्पाजित करने के निर्णय को आंशिक रूप से संशोधन करते हुए मूंग का पंजीकृत कृषकों से उनकी उपज का 60 प्रतिशत तक का उपार्जन किया जाने का निर्णय लिया गया था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1.21 लाख से अधिक बच्चों के खातों में जारी की 304 करोड़ से ज्यादा की राशिस्कूली बच्चों के साथ रिम...
01/09/2026

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1.21 लाख से अधिक बच्चों के खातों में जारी की 304 करोड़ से ज्यादा की राशि

स्कूली बच्चों के साथ रिमोट का बटन दबाकर सीएम डॉ. मोहन ने ट्रांसफर किए रुपये,

लैपटॉप के लिए साढ़े 6 लाख विद्यार्थियों को 1620 करोड़ रुपए दे चुकी सरकार,

भोपाल में आयोजित हुआ 'प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना कार्यक्रम।

किसी ने 12वीं के साथ किया नीट, किसी ने नीट और जेईई मैन्स दोनों, विद्यार्थियों की प्रतिभा देख प्रभावित हुए सीएम डॉ. मोहन।

भोपाल : स्कूली छात्रों के लिए 01 सितंबर का दिन बेहद खास रहा। प्रतिभावान छात्रों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इतना प्रभावित किया कि वे विद्यार्थियों की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं सके।सीएम डॉ. यादव जिन छात्रों से मिले, उनमें से कुछ बच्चों ने तो 12वीं के साथ-साथ नीट और जेईई मैन्स भी क्लीयर कर लिया था। ये सुनकर प्रदेश के मुखिया ने खुद बच्चों के लिए तालियां बजवाईं। मौका था भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित 'प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना' कार्यक्रम का। कार्यक्रम के तहत सीएम डॉ. यादव ने 12वीं में 75% से ज्यादा नंबर लाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप दिया। उन्होंने 1 लाख 21 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 304 करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की। इस तरह हर विद्यार्थी के खाते में 25-25 हजार रुपये आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 10 विद्यार्थियों को मंच पर लैपटॉप प्रदान किए। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सीएम डॉ. यादव ने विद्यार्थियों के साथ रिमोट का बटन क्लिक करवाकर रुपये ट्रांसफर कराए।

बता दें कि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंच पर ही विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। छात्र वीरेंद्र सिंह बुंदेला ने कहा कि मैं राजनेता बनना चाहता हूं। इस पर सीएम डॉ. यादव ने कहा कि यह भी हमारे लिए जरूरी है। बच्चे राजनेता बनकर देश को दिशा देने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक सवाल के जवाब में बुंदेला ने कहा कि मैंने लोगों की परेशानी देखी है। एक राजनेता उन परेशानियों को दूर कर सकता है। उन्होंने कहा कि जब मैंने देखा कि कोई राजनीति नहीं करना चाहता, तो मैंने फैसला किया कि मैं वो करूंगा जो कोई नहीं करना चाहता। मैं देश का विकास करना चाहता हूं। उसके बाद सीएम डॉ. मोहन ने बच्चों से पूछा कि किस-किस के घर में खेती-किसानी होती है और कौन-कौन किसान बनना चाहता है। उन्होंने छात्रों की प्रतिक्रिया देखने के बाद कहा कि हमारी जड़ खेती-किसानी है। बच्चे कहते हैं डॉक्टर बनेंगे, वकील बनेंगे, इंजीनियर बनेंगे, लेकिन कोई नहीं कहता कि मैं किसान बनना चाहता हूं। आप बताइए खेती के बिना काम चलेगा क्या। उन्होंने कहा कि किसान अगर मेहनत करके अन्न नहीं उगाएगा, तो क्या होगा। इसी तरह अगर हम राजनीति करने के लिए खड़े नहीं होंगे, तो अच्छे राजनेता कहां से आएंगे। छात्रा हिमांशी पाठक ने कहा कि मैं शुरूआत एयर होस्टेस बनकर करना चाहती हूं, लेकिन मेरा अंतिम उद्देश्य एंटरप्रिन्योर बनना है। आज कॉम्पटीशन ज्यादा है। इसलिए अपना काम करना ही उचित होगा। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि इसे सरल भाषा में कहा जाता है कि हम नौकरी पाने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे। इस बीच पूरा हॉल हिमांशी की उस बात पर ठहाकों से गूंज उठा, जब उसने कहा कि मैंने इस दृश्य को सपने में देखा है। मैंने देखा था कि इसी तरह का हॉल है और मैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच पर हूं।

बच्चे छोटे, लेकिन सपने और प्रयास बड़े हैं।

छात्रा मान्यता साहू ने कहा कि मैं इस लैपटॉप से बहुत काम करूंगी। ये लैपटॉप मेरी बहुत मदद करेगा। अरिमा इमरान ने कहा कि मैं नीट का एग्जाम दूंगी और मेरा उद्देश्य डॉक्टर बनना है। मैं गरीबों की सेवा करना चाहती हूं। उसके बाद कीर्ति ने माइक हाथ में थामा। उसके हाथ में लगी मेहंदी देखकर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि मैं भी मेहंदी लगा लेता हूं। अपनी बहन को मैं ही मेहंदी लगाता था। कीर्ति ने कहा कि मैं कॉस्ट एंड मैनेजमेंट में करियर बनाना चाहती हूं। इसके बाद तन्वी ने माइक थामा। उसके माइक पकड़ते ही सीएम डॉ. मोहन ने सभी को बताया कि तन्वी 12वीं की पढ़ाई करते-करते मेडिकल कॉलेज भी पहुंच गई है। उसने नीट भी क्लीयर कर लिया। पहली बार में ही दोनों एग्जाम क्लीयर कर लिए। तन्वी ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। याशी ने 75 फीसदी नहीं लाने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया। उसने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती है। उसके बाद ओम चौकसे ने बताया कि मैंने 12वीं के साथ-साथ नीट-जेईई मैन्स-सीयूएलटी भी क्लीयर किया है। इस पर सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि आदमी छोटा लेकिन छलांग बड़ी है। ओम ने कहा कि मैं डॉक्टर बनना चाहता हूं। सीएम डॉ. मोहन ने बताया कि ओम के पिता जी बैग बनाकर दुनिया चलाते हैं। उनके पास दुकान भी नहीं है। अभिषेक ने बताया कि वह इसरो का साइंटिस्ट बनना चाहता है।

असफलता को न लगाएं दिल से।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि विद्यार्थी अपनी मेहनत से सफलता प्राप्त कर परिवार और प्रदेश का मान बढ़ाते हैं। सफलता को कभी स्वयं पर हावी नहीं होने देना है। अगर जीवन में कभी असफलता मिले तो उसे कभी दिल पर नहीं लगाना। हम जहां हैं, वहीं सामान्य बने रहें और हमेशा मन में आगे बढ़ने का जज्बा कायम रखें। हमें अपनी पिछली गलतियों से सबक भी लेना चाहिए, क्योंकि एक अच्छा इंसान कागज पर मिले नंबरों से नहीं बनता, अच्छा इंसान मन के अंदर से बनता है। देश युवाओं को आगे बढ़ते हुए देखना चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश सरकार भी इस विकास यात्रा में कदम से कदम मिलाकर साथ चल रही है। आपकी नॉलेज (ज्ञान) और स्किल (कौशल) ही सफलता के दो मित्र हैं। नॉलेज जीवन का साथी है और स्किल जीवन में दक्षता लाती है। दोनों हमारे जीवन में सदैव मददगार सिद्ध होते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार सभी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के तहत पहले वर्ष 473 बच्चों को लैपटॉप दिए थे। पिछले साल लगभग 92 हजार और इस वर्ष स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के लगभग 1 लाख 22 हजार विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए हैं। मप्र बोर्ड की परीक्षाओं की मेरिट लिस्ट में 50 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से आते हैं। सीमित संसाधनों के बाद भी स्कूल शिक्षा विभाग ने उत्कृष्ट कार्य कर दिखाया है। इसके लिए सभी अधिकारी और शिक्षक बधाई के पात्र हैं।

बेहतर शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध सरकार।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में शत प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिलाने वाले शासकीय स्कूलों के प्राचार्य, शिक्षकों और विद्वानों को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सम्मानित किया है। इनके कार्यों से स्कूल शिक्षा विभाग और प्रदेश सरकार गौरवान्वित होती है। हम अपनी समृद्धि और अतीत का गौरवशाली पृष्ठ दोबारा खोलने जा रहे हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें अपने मन में संकल्प और दृढ़ निश्चय की आवश्यकता है। बड़े लक्ष्य तय करें और उन्हें हासिल करने के लिए परिश्रम करें। दुनिया में भारत का बढ़ता सम्मान हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरका स्कूल शिक्षा की बेहतरी के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें, ड्रेस, साइकिलें, लैपटॉप और स्कूटी भी प्रदान की जा रही हैं। लेकिन, प्रदेश के स्कूलों में कभी वह दौर भी था, जब बच्चों को स्कूलों में बैठने तक के इंतजाम नहीं हुआ करते थे। हमारी सरकार ने तेजी से नए मेडिकल कॉलेज खोलने प्रारंभ किए हैं। प्रदेश में आजादी के बाद 55 साल में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे। अब हमारी सरकार में निजी और शासकीय मिलाकर कुल 33 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। राज्य में अभी साढ़े 6 हजार से अधिक एमबीबीएस की सीटें हैं। दो साल में हमने 5 नए मेडिकल कॉलेज खोले। इनमें यूजी के लिए 2400 सीटें बढ़ गईं। राज्य सरकार ने वर्ष 2028 तक कुल 55 मेडिकल कॉलेज और 10 हजार यूजी सीटों का लक्ष्य तय किया है।

सरकारी में शून्य हुआ ड्रॉप आउट।

स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था बेहतर हो रही है। कक्षा 12वीं में प्रथम प्रयास में 75 प्रतिशत या अधिक अंक पाने वाले मेधावी विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लैपटॉप राशि दी जा रही है। पिछले साल भी लगभग 92 हजार विद्यार्थी लैपटॉप योजना से लाभान्वित हुए थे। माता-पिता और बच्चों का परिश्रम तथा शिक्षकों का बेहतर प्रबंधन के कारण ही इस वर्ष 1.21 लाख से अधिक विद्यार्थी लैपटॉप प्राप्त करने के लिए पात्र बने हैं। यह लैपटॉप विद्यार्थियों की कॉलेज की पढ़ाई को सरल और डिजिटल करेगा। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत डिजिटलीकरण को प्रोत्साहित किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले ढाई साल में लगभग पौने 3 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप क्रय करने के लिए राशि वितरित की है। लैपटॉप खरीदने के लिए प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अब तक कुल साढ़े 6 लाख विद्यार्थियों को 1620 करोड़ रुपए उनके खातों में भेजे गए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पिछले 3 साल में प्रवेश दर बढ़ती जा रही है। हमारी सरकार के प्रयासों से स्कूली बच्चों की ड्रॉप आउट दर शून्य हो गई है। स्कूलों में शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। हमारे स्कूलों में 70 से 72 हजार अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं। राज्य सरकार लगभग 18 हजार रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती के लिए प्रतिबद्ध है। बच्चे हमारे देश का भविष्य और प्रदेश की आशा हैं। हमारे बच्चे 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करेंगे।

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