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चम्पावत, 28 अगस्त*देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल, ऐतिहासिक पाषाण युद्ध के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु**दोपहर 1:48...
28/08/2026

चम्पावत, 28 अगस्त

*देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल, ऐतिहासिक पाषाण युद्ध के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु*

*दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर 1:55 बजे तक 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का किया गया प्रयोग*

*मा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ वाराही के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की*

*मा. मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही*

चम्पावत के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर आयोजित इस प्रसिद्ध मेले में आस्था, परंपरा, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। मेले में प्रतिभाग करने के लिए मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा हेलीपैड पहुंचे। हेलीपैड पर कैबिनेट मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक श्रीमती रेखा यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। हेलीपैड पर पारंपरिक लोकनृत्य छोलिया की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मा. मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया।

मा. मुख्यमंत्री ने शक्तिपीठ माँ वाराही देवी की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माँ वाराही मइया सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने देवीधुरा की पावन भूमि और विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बग्वाल मेले को उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विकास को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक धरोहरों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के अंतर्गत कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख पौराणिक एवं धार्मिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। देवीधुरा मंदिर परिसर में 4.27 करोड़ रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन तथा 4.57 करोड़ रुपये की लागत से रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य प्रगति पर हैं। इसके अतिरिक्त घटोत्कच मंदिर का सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर का निर्माण, सप्तेश्वर महादेव मंदिर में स्नानघाट तथा लधौनधुरा मेला स्थल का सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

मा. मुख्यमंत्री ने बताया कि घटोत्कच से झालिमाली मंदिर मार्ग के डामरीकरण पर 1.95 करोड़ रुपये, विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण के लिए 4.70 करोड़ रुपये तथा पूर्णागिरि मार्ग पर 5 करोड़ रुपये की स्ट्रीट लाइट परियोजना के कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पाताल रुद्रेश्वर, खेतीखान सूर्य मंदिर, भूमिया देव मंदिर, भिगराड़ा मंदिर एवं डुंगरी-फत्याल शिव मंदिर से संबंधित विकास कार्य भी गतिमान हैं। विगत पांच वर्षों में धार्मिक अवस्थापना एवं सौंदर्यीकरण के तहत 68.58 करोड़ रुपये की लागत से 397 कार्य किए गए हैं।

मा. मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण कार्य शीघ्र कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि बग्वाल मेले को ‘राजकीय मेला’ घोषित कर इसकी गरिमा बढ़ाने के साथ ही व्यवस्थाओं को भी और अधिक सुदृढ़ किया गया है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक पर्यटन का मूल उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करना तथा रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना है। उन्होंने प्रदेशवासियों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी से अपनी समृद्ध लोक परंपराओं एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान करते हुए ‘विकास भी और विरासत भी’ के संकल्प को दोहराया।

*चार खाम-सात थोक के बीच खेली गई ऐतिहासिक बग्वाल*

मा. मुख्यमंत्री ने चार खाम–सात थोक के बीच खेले जाने वाले इस अनोखे प्राचीन पाषाण युद्ध का भी अवलोकन किया। रक्षाबंधन के अवसर पर मेले में बच्चियों एवं महिलाओं ने मा. मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी को राखी बांधकर रक्षाबंधन पर्व मनाया।

पाटी विकासखंड में स्थित माँ वाराही धाम में प्रधान पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बग्वाल की शुरुआत हुई। इसके बाद चारों खाम—वालिक (सफेद), चम्याल (गुलाबी), गहड़वाल (भगवा) और लमगड़िया (पीला)—के बग्वालियों का प्रवेश हुआ। अलग-अलग रंगों के पारंपरिक वस्त्रों एवं पगड़ियों में सजे बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से निर्मित ढालें थीं। शंखनाद और माँ वाराही के जयकारों के बीच बग्वाल का शुभारंभ हुआ।

फलों और फूलों की बरसात के बीच पूरा बग्वाल मैदान मां के जयकारों से गूंज उठा। इस वर्ष बग्वाल दोपहर 1:48 बजे शुरू होकर 1:55 बजे समाप्त हुई। 8 मिनट तक चले इस अनूठे ऐतिहासिक युद्ध में फल और फूलों का प्रयोग कर सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखा गया। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार, फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।खामों के आगमन एवं बग्वाल के संचालन की जिम्मेदारी पीठाचार्य श्री कीर्तिबल्लभ जोशी ने निभाई।

मा. मुख्यमंत्री ने कहा, “माँ वाराही मइया सबकी चिंता करती हैं। यह अनोखी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। यहां की परंपरा अनुशासन और भाईचारे की मिसाल है, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा गले मिलते हैं।”

इस अवसर पर मा. कैबिनेट मंत्री श्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद श्री अजय टम्टा, मा. अध्यक्ष जिला पंचायत श्री आनंद सिंह अधिकारी, माँ वाराही मंदिर समिति अध्यक्ष श्री हीराबल्लभ जोशी,भाजपा जिला अध्यक्ष श्री गोविन्द सामन्त, मुख्य विकास अधिकारी श्री जीएस खाती, परियोजना निदेशक श्री अजय सिंह, सीएमओ श्री देवेश चौहान, श्री महेन्द्र पाल, दर्जा राज्य मंत्री श्री मुकेश महराना, दर्जा राज्य मंत्री श्री हुकुम सिंह कुँवर, दर्जा राज्य मंत्री श्री श्याम नारायण पाण्डेय, दर्जा राज्य मंत्री श्री सुभाष बगौली, श्री लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता श्री सतीश पांडे, पूर्व विधायक लोहाघाट श्री पूरन सिंह फर्त्याल, श्री रवि नेगी, पूर्व अध्यक्ष मंदिर समिति श्री मोहन सिंह बिष्ट, श्री खीम सिंह लमगड़िया, श्री राजशेखर जोशी, श्री नरेन्द्र लडवाल, श्री खीमानन्द सनवाल, श्री देवेन्द्र पन्त, श्री त्रिलोक सिंह बिष्ट, श्री बिरेन्द्र सिंह लमगड़िया, श्री गंगा सिंह चम्याल, श्री बद्री सिंह बिष्ट, श्री चेतन, श्री राजेश बिष्ट, श्री जगदीश सिंह सिनग्वाल, मंच संचालक श्री कीर्तिबल्लभ जोशी, श्री हयात सिंह बिष्ट, श्री बिशन सिंह चम्याल, श्री राजेन्द्र बिष्ट, श्री लक्ष्मी दत्त जोशी, श्री दीवान सिंह बिष्ट, श्री मदन सिंह बोरा, श्री बहादुर सिंह नदगली, श्री ईश्वर सिंह बिष्ट, श्री विनोद चम्याल, श्री रमेश राना, श्री विनोद प्रकाश गड़कोटी, श्री गौरव सिनग्वाल, श्रीमती रश्मि लमगड़िया, श्री दीपक सिनग्वाल, श्री पवन लमगड़िया, श्री चन्दन बिष्ट, श्री दीपक चम्याल, श्री जितेन्द्र पाण्डेय, श्री दिनेश चम्याल, श्री विनोद जोशी एवं श्री सुदीप चम्याल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

*त्योहारों में स्थानीय उत्पादों की खरीद को दें प्राथमिकता : मुख्यमंत्री**मुख्यमंत्री ने सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वय...
25/08/2026

*त्योहारों में स्थानीय उत्पादों की खरीद को दें प्राथमिकता : मुख्यमंत्री*

*मुख्यमंत्री ने सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों के स्टालों से खरीदे स्थानीय उत्पाद*

*स्थानीय उत्पादों की खरीद से मातृशक्ति की आजीविका होगी सशक्त, स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा बढ़ावा*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में सशक्त बहना उत्सव के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टालों से विभिन्न स्थानीय उत्पादों की खरीदारी की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से आगामी त्योहारों में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के संकल्प को आगे बढ़ाने में सहभागी बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की मातृशक्ति द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किए जा रहे उत्पाद हमारी स्थानीय संस्कृति, परंपरा और हुनर की पहचान हैं। इन उत्पादों को खरीदकर हम न केवल स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि उनसे जुड़ी महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान देते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों का समय स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। प्रदेशवासी त्योहारों पर उपहार एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद में स्थानीय उत्पादों को अधिक से अधिक प्राथमिकता दें। हमारे द्वारा स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पाद की प्रत्येक खरीद किसी परिवार की आय बढ़ाने, किसी महिला के स्वरोजगार को मजबूती देने और राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक बनती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने देश में स्थानीय उत्पादों के प्रति एक नया विश्वास पैदा किया है। राज्य सरकार भी महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि इस त्योहारी सीजन में स्थानीय उत्पाद खरीदें, दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें और ‘वोकल फॉर लोकल’ को जन-अभियान बनाने में अपना योगदान दें। स्थानीय उत्पादों को अपनाने से ही आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को और अधिक मजबूती मिलेगी।

मानसून के बाद बनेगी प्रदेश भर की सड़कें *प्रदेशभर की सड़कों को दुरुस्त करने के संबंध में कैबिनेट बैठक में हुआ विस्तृत वि...
25/08/2026

मानसून के बाद बनेगी प्रदेश भर की सड़कें


*प्रदेशभर की सड़कों को दुरुस्त करने के संबंध में कैबिनेट बैठक में हुआ विस्तृत विचार-विमर्श*

* सड़क सुधार के कार्य युद्धस्तर पर शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण करने पर जोर*

*पीएमजीएसवाई की पुरानी सड़कों के सुधार एवं स्थानीय निकायों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने पर भी हुई चर्चा*

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेशभर की सड़कों की स्थिति और उनके सुधार के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत क्षेत्रों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को दुरुस्त करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य करने पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के अधीन आने वाली सड़कों को दुरुस्त करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। बैठक में पीएमजीएसवाई के अंतर्गत निर्मित ऐसी पुरानी सड़कों, जिनकी अनुरक्षण अवधि समाप्त हो चुकी है और जिनका नियमित रखरखाव नहीं हो पा रहा है, को दुरुस्त करने के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसून समाप्त होते ही प्रदेशभर में सड़क सुधार के कार्य एक साथ युद्धस्तर पर शुरू किए जाने चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग अभी से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करते हुए निविदा प्रक्रिया समय से पूर्ण कर लें, ताकि बारिश समाप्त होने के बाद निर्माण एवं मरम्मत कार्य शुरू करने में किसी प्रकार का विलंब न हो।

बैठक में शहरी क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति में सुधार के लिए स्थानीय निकायों को आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों एवं नगर पंचायतों को सड़क सुधार के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों की सड़कों को भी प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अक्टूबर माह से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का सड़क मार्ग से भ्रमण करेंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से सड़कों के सुधार के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर समयबद्ध रूप से कार्य करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को बेहतर और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वित प्रयास करने होंगे।

*आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव का होगा स्थायी समाधान, सितंबर में पूरा होगा विस्तृत सर्वेक्षण**देहरादून 22 अगस्त, 2026।सह...
22/08/2026

*आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव का होगा स्थायी समाधान, सितंबर में पूरा होगा विस्तृत सर्वेक्षण*

*देहरादून 22 अगस्त, 2026।
सहस्रधारा मोटर मार्ग स्थित आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने शनिवार को ऋषिपर्णा सभागार में उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को क्षेत्र का गहन सर्वेक्षण कर सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में सिडकुल, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग तथा अनुसंधान एवं नियोजन खंड के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से एनआईवीवी कंसल्टेंसी सर्विसेज के प्रतिनिधि शामिल हुए।

जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून के दौरान सड़कों पर जलभराव की समस्या देहरादून शहर के लिए लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही है। इसका स्थायी समाधान केवल तात्कालिक जल निकासी से नहीं, बल्कि शहर में वैज्ञानिक एवं सुव्यवस्थित ड्रेनेज व्यवस्था विकसित कर ही संभव है। उन्होंने सिंचाई विभाग के माध्यम से चिन्हित कंसल्टेंसी के विशेषज्ञों को आईटी पार्क क्षेत्र में जलभराव के कारणों का गहन तकनीकी सर्वेक्षण कराते हुए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जल निकासी के प्राकृतिक मार्ग, वर्षा जल के प्रवाह तथा वर्तमान ड्रेनेज व्यवस्था का समग्र अध्ययन किया जाए, ताकि भविष्य में भी जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो। जिलाधिकारी ने सितंबर माह में आईटी पार्क क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण पूरा कराने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने कहा कि कंसल्टेंसी द्वारा सर्वेक्षण के आधार पर दिए जाने वाले सुझावों और प्रस्तावित समाधानों का तकनीकी स्तर पर गहन परीक्षण किया जाए। इसके बाद प्रभावी ड्रेनेज प्लान तैयार कर शासन स्तर पर उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि आवश्यक स्वीकृति प्राप्त कर कार्य को आगे बढ़ाया जा सके।

उन्होंने कहा कि जलभराव का स्थायी समाधान होने से आईटी पार्क क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा तथा स्थानीय नागरिकों, कर्मचारियों और आमजन को बरसात के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि.रा.) केके मिश्रा, अधिशासी अभियंता भृगुनाथ द्विवेदी, एजीएम सिडकुल विनय शंकर, अधिशासी अभियंता सिंचाई ईआर पुरुषोत्तम, सहायक अभियंता पीएस रावत, नेहा सिंह सहित दिल्ली से एनआईवीवी कंसल्टेंसी सर्विसेज के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

चमोली 14 अगस्त 2026 *घायल श्रमिकों से मिले मुख्यमंत्री, जिला अस्पताल में जाना कुशलक्षेम**प्रत्येक श्रमिक की जान बेहद कीम...
14/08/2026

चमोली 14 अगस्त 2026

*घायल श्रमिकों से मिले मुख्यमंत्री, जिला अस्पताल में जाना कुशलक्षेम*

*प्रत्येक श्रमिक की जान बेहद कीमती, सुरक्षित रेस्क्यू सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- मुख्यमंत्री*

मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने घटनास्थल पर पहुंचकर रेस्क्यू अभियान की स्थिति का जायजा लेने के उपरांत जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचे। यहां उन्होंने रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और उनसे बातचीत की।

मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से उनके स्वास्थ्य एवं उपचार के बारे में जानकारी ली तथा अस्पताल में उपलब्ध कराई जा रही चिकित्सा व्यवस्थाओं के संबंध में चिकित्सकों से भी जानकारी प्राप्त की।

मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों को घायल श्रमिकों को बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा उनके उपचार में किसी भी प्रकार की कमी न रहने देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घायल श्रमिकों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि, प्रत्येक व्यक्ति की जान हमारे लिए बहुत कीमती है। इसके लिए हमारे पास जितने भी साधन उपलब्ध हैं, उन सभी का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और रेस्क्यू अभियान में किसी भी स्तर पर कमी नहीं रहने दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि घटना में प्रभावित श्रमिकों के परिजनों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने के लिए संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी उन्होंने स्वयं वार्ता की है। साथ ही टनल दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

इस दौरान बद्रीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, अपर जिलाधिकारी विवेक प्रकाश, मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. राजीव पाल सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

14/08/2026

चमोली 14 अगस्त 2026

*टीएचडीसी टनल में फंसे 22 लोगों में से 19 को बाहर निकाला गया, 3 की तलाश जारी*

*घटना के बाद बचाव के लिए गए सभी 6 लोग भी सुरक्षित, अब तक 7 लोगों के दुःखद मृत्यु की सूचना*

मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा एवं पानी भरने की घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से रातभर राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी रहा। जिलाधिकारी गौरव कुमार स्वयं घटनास्थल पर मौजूद रहकर रेस्क्यू अभियान की निगरानी कर रहे हैं।

टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना के टीआरटी टनल की लंबाई लगभग 3 किलोमीटर है। टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव के कारण मलबा एवं पानी आने की स्थिति उत्पन्न हुई है। इसके चलते टनल में कार्यरत कुछ लोग अंदर फंस गए।

टनल में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी, जिनमें से रातभर चले राहत एवं बचाव अभियान में अब तक 19 लोगों को बाहर निकाल लिया गया है। वहीं शेष 3 लोगों की तलाश एवं रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। घटना के बाद राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग के लिए टनल के अंदर गए 6 बचावकर्मी भी सुरक्षित हैं। घटना में अभी तक 7 लोगों की मृत्यु की सूचना है।

रेस्क्यू किए गए घायलों को उपचार के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है। चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा घायलों के उपचार एवं स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।

राहत एवं बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस सहित अन्य तकनीकी एवं विशेषज्ञ टीमें मौके पर मौजूद हैं। टनल के भीतर मलबा एवं पानी की चुनौती के बीच बचाव दल अत्यंत सावधानी एवं समन्वय के साथ अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।

जिलाधिकारी गौरव कुमार ने मौके पर अधिकारियों एवं रेस्क्यू टीमों से लगातार जानकारी लेते हुए शेष लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी आवश्यक संसाधनों एवं तकनीकी सहायता का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन द्वारा घटनास्थल पर राहत एवं बचाव कार्यों के साथ ही घायलों के उपचार एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी लगातार जुटाई जा रही हैं।

जिला प्रशासन द्वारा पूरे घटनाक्रम पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा रेस्क्यू अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है।

*सांसद त्रिवेन्द्र ने संसद में उठाया हिंसक वन्यजीवों से मानव जीवन की सुरक्षा का मुद्दा*देहरादून/नई दिल्लीसांसद हरिद्वार ...
11/08/2026

*सांसद त्रिवेन्द्र ने संसद में उठाया हिंसक वन्यजीवों से मानव जीवन की सुरक्षा का मुद्दा*

देहरादून/नई दिल्ली

सांसद हरिद्वार एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संसद में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से मानव जीवन के लिए खतरा बने वन्यजीवों से मानव जीवन की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा संचालित विशेष योजनाओं एवं कार्ययोजनाओं के बारे में प्रश्न पूछा। उन्होंने इस दिशा में किए जा रहे उपायों, पिछले दो वर्षों में जारी धनराशि, वन्यजीवों के प्रबंधन तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के परिणामों का भी ब्यौरा मांगा।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की है। केंद्र सरकार केंद्र प्रायोजित समग्र योजना ‘वन्यजीव पर्यावासों का एकीकृत विकास’ के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। इसके तहत संकटग्रस्त वन्यजीवों को पकड़ने एवं पुनर्वास, निगरानी, वन्यजीवों को दूर भगाने के उपाय, मानव जीवन एवं फसल-संपत्ति के नुकसान का मुआवजा, बीमा, जन-जागरूकता तथा वन विभाग के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य किए जा रहे हैं।

राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि देशभर में ‘वन्यजीव पर्यावासों का विकास’ योजना के तहत वर्ष 2024-25 में ₹131.71 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹95.20 करोड़, कुल ₹226.90 करोड़ की धनराशि जारी की गई। वहीं, उत्तराखंड को इसी योजना के तहत दो वर्षों में ₹9.38 करोड़ की केंद्रीय सहायता मिली। इसमें वर्ष 2024-25 में ₹6.52 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹2.85 करोड़ शामिल हैं।

इसी प्रकार, ‘बाघ एवं हाथी परियोजना’ के तहत देशभर में वर्ष 2024-25 में ₹290 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹158.52 करोड़, कुल ₹448.52 करोड़ जारी किए गए। उत्तराखंड को इस योजना के तहत दो वर्षों में ₹25.04 करोड़ मिले, जिसमें वर्ष 2024-25 में ₹18.23 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹6.81 करोड़ शामिल हैं।

इस प्रकार, इन दोनों योजनाओं के तहत देशभर में दो वर्षों में लगभग ₹675.42 करोड़, जबकि उत्तराखंड को लगभग ₹34.42 करोड़ की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई गई है।

श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और वनबहुल राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन, आजीविका और सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में तेंदुए, बाघ एवं अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों के कारण ग्रामीणों को कई बार गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता वन्यजीवों की निगरानी एवं प्रबंधन, संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, वन विभाग की क्षमता बढ़ाने और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित उपायों को और मजबूत किया जाना आवश्यक है। वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाली आबादी की सुरक्षा, समय पर सूचना, प्रभावी निगरानी और संकटग्रस्त वन्यजीवों के उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और वन्यजीवों का संरक्षण दोनों हमारी जिम्मेदारी हैं। मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों को मिलकर निरंतर प्रभावी प्रयास करने होंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार से मिल रही सहायता उत्तराखंड में इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर रही है।

*ईसीएलजीएस 5.0 से विमानन क्षेत्र को मिला मजबूत वित्तीय सहारा : त्रिवेन्द्र*देहरादून / नई दिल्लीसांसद हरिद्वार एवं पूर्व ...
11/08/2026

*ईसीएलजीएस 5.0 से विमानन क्षेत्र को मिला मजबूत वित्तीय सहारा : त्रिवेन्द्र*

देहरादून / नई दिल्ली

सांसद हरिद्वार एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संसद में प्रश्न पूछते हुए वित्त मंत्रालय से जानना चाहा कि क्या सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण विमानन क्षेत्र के सामने उत्पन्न अल्पकालिक वित्तीय दबाव से निपटने के लिए आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) 5.0 के तहत कोई रूपरेखा तैयार की है? उन्होंने एयरलाइनों को ऋण सहायता देने के पात्रता मानदंड, प्राप्त एवं स्वीकृत आवेदनों तथा ऋण सहायता के उपयोग की निगरानी और विमानन सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के उपायों का भी ब्यौरा मांगा।

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण एमएसएमई एवं गैर-एमएसएमई क्षेत्रों के सामने उत्पन्न अल्पकालिक चलनिधि संबंधी जरूरतों से निपटने के लिए मई 2026 में ईसीएलजीएस 5.0 शुरू की है। अनुसूचित यात्री विमानन क्षेत्र के पात्र उद्यमों को उनकी उच्चतम बकाया ऋण सीमा के 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण की सुविधा दी जा रही है, जिस पर एनसीजीटीसी के माध्यम से 90 प्रतिशत गारंटी कवरेज उपलब्ध है।

राज्यमंत्री श्री चौधरी ने बताया कि 31 जुलाई 2026 तक अनुसूचित यात्री विमानन क्षेत्र के संबंध में ईसीएलजीएस 5.0 के तहत कुल 8 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें कुल ₹2,529.67 करोड़ की राशि शामिल है। इनमें से 4 आवेदन ₹920.22 करोड़ की राशि के स्वीकृत किए गए हैं, जबकि 3 मामलों में ₹912.40 करोड़ की गारंटी जारी की गई है।

श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि ईसीएलजीएस 5.0 के माध्यम से केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र को वित्तीय संकट के बीच आवश्यक तरलता उपलब्ध कराने के साथ-साथ हवाई सेवाओं की निरंतरता, रोजगार की सुरक्षा और यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल की है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने ऋण सहायता के उपयोग की निगरानी के लिए भी प्रभावी प्रावधान किए हैं। ₹100 करोड़ से अधिक की सहायता का उपयोग ईंधन, हवाई अड्डा शुल्क, विमान पट्टा भुगतान एवं अन्य आवश्यक परिचालन खर्चों में किया जाना है तथा इसके सत्यापन के लिए ऑडिटर प्रमाण-पत्र की व्यवस्था की गई है।

श्री रावत ने कहा कि मजबूत विमानन क्षेत्र विकसित भारत की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण आधार है और केंद्र सरकार का यह निर्णय संकट की परिस्थितियों में उद्योग, रोजगार और आम नागरिकों के हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

*चमोली जिला में तमकनाला आपदा ::*राहत-बचाव से लेकर कनेक्टिविटी बहाली तक हर मोर्चे पर त्वरित कार्रवाई**CM धामी लगातार कर र...
11/08/2026

*चमोली जिला में तमकनाला आपदा ::

*राहत-बचाव से लेकर कनेक्टिविटी बहाली तक हर मोर्चे पर त्वरित कार्रवाई*

*CM धामी लगातार कर रहे मॉनिटरिंग, अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर स्थिति का आकलन करने के निर्देश*

*प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध रखने और वैकल्पिक मार्ग तलाशने के निर्देश*

*निचले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता, लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता*

*SEOC से 24×7 निगरानी, राहत-बचाव तंत्र अलर्ट मोड पर*

देहरादून। चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में बेली ब्रिज बहने की घटना के बाद मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। मंगलवार को भी मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी चमोली एवं गढ़वाल मंडल आयुक्त से स्थिति की जानकारी लेते हुए राहत-बचाव, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और कनेक्टिविटी बहाली को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में राशन, खाद्य सामग्री, दवाइयों एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक मार्गों एवं अन्य उपलब्ध माध्यमों से ग्रामीणों तक जरूरी सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर आवाजाही को जल्द से जल्द बहाल करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर तत्काल कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति एवं नुकसान का स्वयं आकलन करने को कहा, ताकि राहत और पुनर्व्यवस्था से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो।

बदलते मौसम और बढ़ते जलप्रवाह को देखते हुए मुख्यमंत्री ने निचले क्षेत्रों तथा नदी-नालों के आसपास विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जाए और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की पूरी तैयारी रखी जाए।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से भी चमोली सहित प्रदेश के सभी संवेदनशील क्षेत्रों पर 24×7 नजर रखी जा रही है। जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों के साथ लगातार समन्वय किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव दलों को तत्काल सक्रिय किया जा सके।

सोमवार को चमोली जनपद के ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमकनाला में अचानक अत्यधिक जलप्रवाह बढ़ने के कारण 123 बीआरटीएफ, सुराईथोटा द्वारा निर्मित बेली ब्रिज बह गया था। तेज बहाव की चपेट में एक व्यक्ति और एक कैंपर वाहन के बहने की सूचना भी प्राप्त हुई थी।

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और राहत-बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ की टीमों को तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना किया गया। स्थानीय प्रशासन, पुलिस एवं संबंधित विभागों की टीमें भी मौके पर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं।

संकट के बीच सरकार का फोकस—सुरक्षा, राहत और कनेक्टिविटी

तमकनाला की घटना के बाद सरकार की प्राथमिकता केवल राहत एवं बचाव कार्यों तक सीमित नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति, वैकल्पिक कनेक्टिविटी और आवाजाही की शीघ्र बहाली पर भी समान रूप से काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री धामी की लगातार मॉनिटरिंग और अधिकारियों को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश राज्य सरकार की प्रो-एक्टिव आपदा प्रबंधन नीति को दर्शाते हैं। प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय पर सतर्कता, बेहतर समन्वय और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई से उनके प्रभाव को कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कठिन परिस्थितियों में प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

*मतदाता सुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, आयोग के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें रू गढ़वाल आयुक्त**बीएलओ अन...
07/08/2026

*मतदाता सुनवाई में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, आयोग के निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करें रू गढ़वाल आयुक्त*

*बीएलओ अनावश्यक दस्तावेज न मांगें, प्रत्येक सुनवाई का तत्काल बीएलओ एप और ईआरओ नेट पर करें अपडेट*

*देहरादून, 07 अगस्त।
भारत निर्वाचन आयोग एवं मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तराखण्ड के निर्देशों के अनुपालन में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत गढ़वाल आयुक्त एवं रोल ऑब्जर्वर आनंद स्वरूप ने शुक्रवार को विधानसभा क्षेत्र राजपुर रोड (अ.जा.) एवं मसूरी के विभिन्न मतदेय स्थलों एवं सुनवाई शिविरों का औचक निरीक्षण कर मतदाताओं को जारी नोटिसों के निस्तारण एवं सुनवाई प्रक्रिया का गहन परीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी पात्र मतदाता को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए तथा आयोग द्वारा निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप ही सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी एवं उप जिला निर्वाचन अधिकारी अभिनव शाह, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी एनपी देवली तथा संबंधित निर्वाचन कार्मिक उपस्थित रहे। आयुक्त ने विधानसभा क्षेत्र राजपुर रोड (अ.जा.) के मतदेय स्थल संख्या-84 डीएवी इंटर कॉलेज, करनपुर, मतदेय स्थल संख्या-109 सेंट थॉमस कॉलेज क्रॉस रोड तथा विधानसभा मसूरी के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज, डोभालवाला स्थित दो मतेय स्थलों पर आयोजित सुनवाई शिविरों का निरीक्षण किया।

गढ़वाल आयुक्त ने सुनवाई के लिए पहुंचे मतदाताओं से सीधे संवाद कर यह जानकारी प्राप्त की कि बीएलओ द्वारा उनसे किस प्रकार के अभिलेख मांगे जा रहे हैं। इस दौरान बीएलओ ने अवगत कराया कि अनमैप्ड वोटर्स श्रेणी के मतदाताओं से वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली से संबंधित विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया जा रहा है। यदि उक्त विवरण उपलब्ध नहीं है, तो आयोग द्वारा निर्धारित 11 मान्य दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत किया जा सकता है। वहीं एनोमली (विसंगति) श्रेणी के मतदाताओं से नाम अथवा संबंधी के नाम में सूक्ष्म त्रुटि होने की स्थिति में किसी एक मान्य दस्तावेज के आधार पर सुनवाई की जा रही है।

आयुक्त ने सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को निर्देश दिए कि सुनवाई कक्ष में आयोग द्वारा निर्धारित सभी मान्य दस्तावेजों की सूची अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए, ताकि मतदाताओं को आवश्यक जानकारी सहज रूप से उपलब्ध हो सके और उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

उन्होंने सभी सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों, बीएलओ सुपरवाइजरों एवं बीएलओ को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेजों के अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अनावश्यक मांग न की जाए तथा प्रत्येक प्रकरण की सुनवाई निर्धारित मानकों के अनुरूप समयबद्ध ढंग से पूरी की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मतदाता के साथ अनावश्यक असुविधा या विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।

गढ़वाल आयुक्त ने एईआरओ द्वारा की जा रही सुनवाई प्रक्रिया तथा ईआरओ नेट पर अपलोड की जा रही रिपोर्ट की भी विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जैसे-जैसे नोटिसों की सुनवाई पूर्ण होती जाए, उसकी प्रविष्टि तत्काल बीएलओ एप एवं ईआरओ नेट पर की जाए, ताकि प्रगति का वास्तविक एवं अद्यतन विवरण उपलब्ध रहे तथा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की पारदर्शिता एवं प्रभावशीलता बनी रहे।

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