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08/11/2025

राष्ट्र को लेकर एक विशाल पदयात्रा.... हजारों लोग पैदल चले बाबा बागेश्वर के साथ। HIGH LIGHT पानीपत की बात Pankaj Khursija Bjp Baba Shri Chitra Vichitra Ji Maharaj Binder Danoda Parmod Vij HINDUSTAN NEWS 24 #हिंदूसंस्कार

माता जी को शत् शत् नमन
08/11/2025

माता जी को शत् शत् नमन

08/11/2025

पुलिस अधीक्षक बोले... बदमाश बदमाशी छोड़ दो नहीं तो होगा यही हाल। City Aaina

08/11/2025

फ़िटनेस ही असली पावर है अपनी ऊर्जा सही दिशा में लगाओ और समाज के लिए मिसाल बनो।
O P Singh, DGP Haryana HIGH LIGHT

पानीपत की गलियां-15(पानीपत की गलियों में एक यादगार सैर: कचहरी बाजार से चोड़ा बाज़ार तक)आज सुबह की ताज़ा हवा में पानीपत क...
07/11/2025

पानीपत की गलियां-15
(पानीपत की गलियों में एक यादगार सैर: कचहरी बाजार से चोड़ा बाज़ार तक)

आज सुबह की ताज़ा हवा में पानीपत की पुरानी गलियों की सैर करने का मन हुआ। शहर की भीड़-भाड़ से दूर, इन संकरी गलियों में इतिहास, संस्कृति और लोगों की ज़िंदगानी की कहानियाँ छिपी हैं। मैं कचहरी बाज़ार से शुरूआत करता हूँ, जहाँ सुबह-सुबह दुकानों के शटर खुलने की आवाज़ें और चाय की भाप उड़ाती दुकानों का माहौल जीवंत हो जाता है। यहाँ से आगे बढ़ते हुए, हम दो भाइयों की मशहूर दुकान के पास से गुज़रते हैं – वो दुकान जहाँ बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं। ठीक इसी के बगल में डॉ. मनोहर लाल सुनेजा का क्लीनिक है, जो अब उनके सुपुत्र चला रहे हैं। क्लीनिक की दीवारें पुरानी हैं, लेकिन उनमें शहर की सेवा की गाथाएँ समाई हैं।

डॉ. मनोहर लाल सुनेजा – एक सज्जन, मिलनसार और समर्पित व्यक्तित्व। बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे। रघुवीर सैनी, सुल्तान सिंह और विजय कुमार सलूजा जैसे साथियों के साथ संगठन की नींव मजबूत की। एक बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से विधायक का चुनाव भी लड़े, लेकिन पार्टी की आंतरिक राजनीति का शिकार होकर हार गए। फिर भी, लोगों के दुख-सुख में शामिल होना कभी नहीं छोड़ा। पानीपत को जिला बनाने के संघर्ष में अग्रणी रहे। कई बार नगरपालिका के सदस्य बने, लेकिन पद-प्रतिष्ठा की लालच नहीं की। पार्टी अनुशासन उनके लिए सर्वोपरि था। आजकल अस्वस्थ हैं, लेकिन मानसिक रूप से पूर्णतः सजग। उनकी इज्ज़त दलगत राजनीति से कहीं ऊपर है – शहर उन्हें 'डॉ. साहब' कहकर पुकारता है, सम्मान की भाषा में। क्लीनिक के साथ पहले लकड़ी की टाल थी. और यहीं था उनका जनता क्लिनिक, जहाँ पुराने ज़माने की दवाइयाँ और मरीजों की लंबी कतारें याद आती हैं। अब उसकी जगह एक शानदार आर-पार मार्केट है, जो गली को और जीवंत बनाती है।

यहाँ से हम चोड़ा बाज़ार में दाखिल होते हैं – इसे ओल्ड हॉस्पिटल रोड भी कहते हैं। संकरी गली, दोनों तरफ दुकानें सजी हुईं। यह गली प्रेम मंदिर के पीछे वाली है, जो शाह जी की कोठी के ठीक सामने से गुज़रती है। थोड़ा आगे चलें तो दाहिनी ओर पालिका बाज़ार आता है। यहाँ पहले पुराना सिविल हॉस्पिटल था – मेरे जन्म से पहले और काफी बाद तक। उस ज़माने में बच्चे घर पर दाईयों से पैदा होते थे, लेकिन इस हॉस्पिटल में डॉ. फ्रांसिस पहली कुशल गायनेकोलॉजिस्ट थीं। बाद में डॉ. कँवर हरि सिंह और डॉ. मसीह भी आए। यहीं सिविल हॉस्पिटल वेलफेयर सोसाइटी बनी, जिसमें मेरी माता सीता रानी कई वर्षों तक सोशल वर्कर और सेक्रेटरी रहीं। उनकी यादें आज भी यहाँ की दीवारों में बसी हैं – मरीजों की सेवा, गरीबों की मदद। अब यह मार्केट छोटे-बड़े शो-रूम से भरी है: गारमेंट्स, लेडीज़ साड़ियाँ, किड्स वेयर – हर तरफ रंग-बिरंगे कपड़े लहराते नज़र आते हैं। दुकानों में ग्राहकों की चहल-पहल, मोल-भाव की आवाज़ें – पानीपत की व्यापारिक आत्मा यहीं धड़कती है।

पालिका बाज़ार के ठीक सामने एक सीधी गली शाह जी की कोठी की ओर जाती है। यह गली रोज़मर्रा के कपड़ों की दुकानों से भरी है – सस्ते, टिकाऊ और स्थानीय पसन्द वाले। इससे आगे बढ़ें तो एक और गली प्रेम मंदिर की तरफ मुड़ती है, जो लैय्या प्राइमरी स्कूल के सामने से गुज़रकर दिगंबर जैन मंदिर वाली सड़क पर मिलती है। स्कूल की पुरानी इमारत देखकर बचपन की घंटियाँ बजती हैं – वो दिन जब किताबें कंधे पर टांगे स्कूल जाते थे।

बाज़ार की मुख्य सड़क पर आगे चलें तो दाहिनी ओर न्यू क्लॉथ मार्केट और उसके साथ ही कुछ आगे चलकर जवाहर मार्केट है . इसका एक दरवाज़ा इस बाज़ार की ओर खुलता है, दूसरा जी टी रोड पर। पानीपत में यह खुदरा कपड़ा मार्केट की रानी रही है – हर प्रकार का कपड़ा, अच्छा और सस्ता। साथ में टेलरिंग शॉप्स भी, जहाँ कपड़े सिलवाने का मज़ा अलग है। इसके सामने नगरपालिका का पुराना दफ्तर था, जो बाद में किला पर शिफ्ट हो गया। बाज़ार जैन हाई स्कूल की पुरानी बिल्डिंग के पिछवाड़े में पचरंगा बाज़ार की तरफ खत्म होता है। पूरी मार्केट की एसोसिएशन के प्रधान आजकल मेरा क्लास फेलो श्री दर्शन लाल वधवा हैं – पुराने दोस्त की सफलता देखकर अच्छा लगता है।

पूरे पानीपत में चोड़ा बाज़ार अद्भुत है – जहाँ कपड़े खरीदना सिर्फ शॉपिंग नहीं, एक अनुभव है। सस्ते दाम, गुणवत्ता और दुकानदारों की मुस्कान। सैर खत्म करते हुए मन भर आता है – इन गलियों में न केवल कपड़े बिकते हैं, बल्कि शहर की आत्मा जीवित रहती है। अगली बार फिर आऊँगा, शायद कोई पुरानी कहानी और सुनाने को मिले।
Ram Mohan Rai,
पानीपत की बात HIGH LIGHT Parmod Vij
( यात्रा वृतांत में यदि आप कोई त्रुटि हो तो आपकी सलाह पर सुधार किया जा सकता है. )

07/11/2025

सबसे सुंदर गीत वंदे मातरम् ...सभी को बहुत बहुत बधाई। HIGH LIGHT

पानीपत की गलियां-14पानीपत की गलियों का सफ़र: सलारजंग गेट से अंसार चौक तकआज हम पानीपत की उन संकरी, जीवंत गलियों में कदम र...
06/11/2025

पानीपत की गलियां-14
पानीपत की गलियों का सफ़र: सलारजंग गेट से अंसार चौक तक

आज हम पानीपत की उन संकरी, जीवंत गलियों में कदम रखते हैं, जो शहर की आत्मा को जीवंत बनाती हैं। हमारा सफ़र शुरू होता है ऐतिहासिक सलारजंग गेट से, जो कभी शहर की प्रवेश द्वार की तरह था। गेट के ठीक बाहर से ही बाज़ार की रौनक शुरू हो जाती है। जैसे ही हम अंदर कदम रखते हैं, बाईं ओर फलों की रेहड़ियाँ और छोटी-छोटी दुकानें नज़र आती हैं। ताज़े सेब, केले, अमरूद और मौसमी फलों की महक हवा में घुली रहती है। इन दुकानों के साथ ही एक सड़क बाईं ओर मुड़ती है, जो न्यू सुखदेव नगर की ओर जाती है। यह सड़क थोड़ी घुमावदार है और अंत में जी.टी. रोड पर स्थित पुराने बस स्टैंड के पास जाकर मिलती है।

इसी सड़क के रास्ते में दो महत्वपूर्ण गलियाँ निकलती हैं:
1. पहली गली – यह संकरी गली सीधे हकीम वालों की गली में पहुँचाती है, जिसे अब सेंट्रल बैंक वाली गली भी कहा जाता है। यह गली पुराने ज़माने की याद दिलाती है, जहाँ हकीम और वैद्य अपने इलाज के लिए मशहूर थे।
2. दूसरी गली – यह बिना किसी मोड़ के सीधे हकीम वालों के घरों (जो अब अधिकांशतः मौजूद नहीं हैं) के बीच से गुज़रकर कचहरी बाज़ार में मिल जाती है।

लेकिन हमारा मुख्य मार्ग तो सलारजंग गेट से सीधा अंसार चौक की ओर है। कुछ कदम आगे बढ़ते ही रास्ता दो हिस्सों में बँट जाता है:
- बाईं ओर – चकरी (ज्ञान हलवाई की मशहूर दुकान) की ओर, जहाँ गर्म-गर्म जलेबी और समोसे की खुशबू पूरे मोहल्ले में फैली रहती थी।
- दाईं ओर – सीधे अंसार चौक की ओर।

गलियाँ और उनके किस्से:
आगे चलते हुए एक गली बाईं ओर निकलती है, जो बाद में सेंट्रल बैंक वाली सड़क में मिल जाती है। इस गली के दोनों सिरों पर कभी लकड़ी के भारी-भरकम दरवाज़े लगे होते थे, जो रात को बंद कर दिए जाते थे। अब वे दरवाज़े गायब हैं, लेकिन उनकी यादें बाकी हैं।

इस गली के ठीक सामने खादी भंडार की दुकान है, जहाँ से दो और गलियाँ निकलती हैं:
- एक गली – शिंगला मार्केट की ओर।
- दूसरी गली – चढ़ाई चढ़कर अंसार बाज़ार में मिल जाती है।

इसी मुख्य सड़क पर आगे बढ़ते हुए हमें स्वतंत्रता सेनानी श्री चमन लाल आहूजा का मकान मिलता है। आहूजा जी को आज भी अपनी सादगी और गरिमा के लिए जाना जाता है। वे निहायत शरीफ, पूर्णतः गांधीवादी और पंडित माधो राम शर्मा (पूर्व सांसद) के विश्वसनीय सहयोगी थे।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता के प्रबल पक्षधर श्री चमन लाल आहूजा का योगदान:
- 1967: कांग्रेस टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा, थोड़े वोटों से असफल रहे।
- 1984: सिख विरोधी दंगों के समय श्रीमती सुभद्रा जोशी और पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारी लाल नंदा के साथ मिलकर साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए काम किया।

- पानीपत को जिला बनाने में अहम भूमिका: कॉमरेड रघुवीर सिंह, श्री फतेहचंद विज, श्री महेश दत्त शर्मा के साथ पानीपत जिला बचाओ संघर्ष समिति का नेतृत्व किया।
- मैंने बचपन में भारतीय बाल सभा की स्थापना उनसे और स्वामी आनंद रंक बंधु की प्रेरणा से की थी.

उनके मकान के साथ ही एक और गली निकलती है, जो फिर से हकीम वालों के घरों के पास से गुज़रती है।

बाज़ार की रौनक:
अब हम बाज़ार के उस हिस्से में हैं जहाँ हर तरफ दुकानें हैं:
- लेडीज सूट, साड़ी, दुपट्टे की चमकदार दुकानें।
- अचार-मुरब्बे की दुकानें, जहाँ नींबू का अचार, गाजर का मुरब्बा और आम का चटनी सूंघते ही मुँह में पानी आ जाता है।
- दाईं ओर एक बंद गली मुड़ती है। यहाँ पहले श्री मुकुंद लाल विज की आटे की चक्की थी। इस गली में मेरा खूब आना-जाना था क्योंकि मेरे प्रिय मित्र पीताम्बर श्याम विज का मकान यहीं था।

अंसार चौक की दहलीज़:
इस भीड़-भाड़ वाले बाज़ार को पार करते हुए, जहाँ दो आदमी भी कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चल सकते, हम अंत में अंसार चौक में दाखिल होते हैं। यहाँ की रौनक, यह शोर, यह भीड़ – यही पानीपत की असली पहचान है।
जिसने अंसार चौक की यह सैर नहीं की, उसने पानीपत को देखा ही नहीं।

यह सफ़र सिर्फ़ गलियों का नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति, दोस्ती और संघर्ष की यादों का है। हर मोड़ पर एक कहानी, हर दुकान पर एक किस्सा। पानीपत की ये गलियाँ सिर्फ़ रास्ते नहीं, जीती-जागती किताबें हैं।
Ram Mohan Rai,
Panipat/ Panipat Ke Hanuman Ji Sewa Club

06/11/2025

शिक्षा मंत्री बोल आराम हराम है... बिहार में जरूर होगी. #सरदारवल्लभभाई #बिहारराजनीति HIGH LIGHT Mahipal Dhanda

पानीपत की गलियां-13पानीपत की गलियों का सफ़र: सलारजंग गेट तक की ऐतिहासिक सैरआज सुबह-सुबह, जब सूरज की पहली किरणें पानीपत क...
06/11/2025

पानीपत की गलियां-13
पानीपत की गलियों का सफ़र: सलारजंग गेट तक की ऐतिहासिक सैर

आज सुबह-सुबह, जब सूरज की पहली किरणें पानीपत की पुरानी दीवारों पर पड़ रही थीं, मैंने फैसला किया कि शहर की उन गलियों की सैर करूँ जो सदियों से इतिहास की गवाह रही हैं। मेरा सफ़र शुरू हुआ चरखी से, जहाँ ज्ञान हलवाई की पुरानी दुकान थी जो अपनी मिठास बिखेरती थी। यहाँ से मैं सलारजंग की ओर रवाना हुआ, पैदल, धीरे-धीरे, हर कदम पर अतीत की खुशबू को सूँघते हुए। पानीपत की ये गलियाँ सिर्फ़ रास्ते नहीं, बल्कि जीती-जागती कहानियाँ हैं – व्यापार, संस्कृति, संघर्ष और परिवर्तन की। आइए, इस सफ़र में मेरे साथ चलें।

शुरुआत: ज्ञान हलवाई से सलारजंग गेट तक:
सफ़र की शुरुआत हुई चरखी यानी ज्ञान हलवाई की दुकान से। यहाँ की गर्म जलेबियाँ और रसगुल्ले अब भी मुंह में पानी ला देते हैं। दुकान के बाहर खड़े होकर मैंने देखा कि कैसे पुराने कम्बल व्यापारी श्री ईश्वर चंद्र जैन का मकान अब भी अपनी भव्यता बनाए हुए है। ठीक सामने श्री देवकीनंदन गर्ग का घर, उसके सामने ही हलवाई की दुकान शुरू होती है। यह दुकान पानीपत की मशहूर मिठाई की दुकानों में से एक रही है – यहाँ की बर्फी और पेड़े तो जैसे सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक हैं।

कुछ कदम आगे बढ़ते ही हिंदू सत्संग मंदिर दिखाई दिया। मंदिर की घंटियों की ध्वनि हवा में घुली हुई थी, और सामने वाली गली ने मुझे अपनी ओर खींच लिया। यह गली घूमती-फिरती कायस्थ मोहल्ले से गुजरती है। एक तरफ़ घेर अराइयान, और दूसरी तरफ़ घाटी बार की ओर जाती सड़क। गली के मुहाने पर एक पुराना दरवाज़ा लगा हुआ है – सुरक्षा की दृष्टि से हर रात बंद कर दिया जाता था। यह दरवाज़ा अब भी खड़ा है, जैसे शहर की रक्षा का प्रतीक। उसी नुक्कड़ पर दौलत हलवाई की दुकान थी, जहाँ की चाट और पकौड़ियाँ बचपन की यादें ताज़ा कर देती हैं। ठीक सामने बाबूराम बिशन स्वरूप की कम्बल आढ़त की दुकान – इसका विशाल दरवाज़ा कभी व्यापारियों की भीड़ से गुलज़ार रहता था। लेकिन अब? अब ये सब स्मृतियों में कैद हैं। जगह-जगह मार्केट बन गई है, चमचमाती दुकानें, लेकिन पुरानी आत्मा कहीं खो सी गई है।

आगे की सैर: पशुओं के चारे की दुकानों से शिंगला मार्केट तक:
थोड़ी दूर चलते हुए चारे और पशुओं के खाद्य पदार्थों की दुकानें आईं। घोड़ों के लिए चना, गायों के लिए भूसा – ये दुकानें पानीपत के ग्रामीण अतीत की याद दिलाती हैं। कुछ आगे बढ़कर सिंगला मार्केट पहुँचा। पहले यह शिंगला परिवार की निजी संपत्ति थी, अब यहाँ एक पूरी मार्केट बस गई है। लेकिन खुशी की बात यह कि पानीपत के मशहूर अमृतसरी समोसे और मिठाइयाँ यहीं मिलती हैं। गरमागरम समोसे, चटपटी चटनी – मैं रुककर एक प्लेट ले ही लिया। स्वाद वही पुराना, लेकिन दुकानें नई।

मार्केट के सामने गंजो गढ़ी वाली गली है। पहले यहाँ अराई, दर्जी, नाई और मुस्लिम बिरादरी के मेहनतकश लोग रहते थे – लोहार, बढ़ई, मजदूर। गली पार करते ही घेर अराइयान की ओर निकलती है। यहाँ की संकरी गलियाँ, पुराने मकान, और हवा में घुली मिट्टी की खुशबू – सब कुछ प्राचीन पानीपत की झलक देता है।

तिराहों का जाल: घेर अराइयान से सालारजंग गेट तक:
गली पार करके मैं एक तिराहे पर पहुँचा। एक रास्ता घिराइयाँ, घाटी बार और हजरत बू अली शाह कलंदर की दरगाह की ओर सीधा जाता है। दरगाह ! वह जगह जहाँ सूफी संत की दरगाह अब भी शांति का संदेश देती है। यहाँ से आगे बढ़ते ही दूसरा तिराहा – एक रास्ता अंसार चौक की ओर, दूसरा सालारजंग गेट की तरफ।

पहले यह जगह सुनसान थी, सिर्फ़ एक मस्जिद हुआ करती थी। अब पुरुषार्थी सिख भाइयों ने इसे गुरुद्वारे में बदल दिया है – गुरुद्वारा रामगढ़िया। गुरुद्वारे की पवित्रता और लंगर की खुशबू हवा में फैली हुई है। सामने मार्केट बन गई है, गुरुद्वारे के साथ-साथ सालारगंज गेट तक दुकानों की कतार – चाट-पकौड़ों की दुकानें, होम्योपैथिक दवाइयाँ, किराना, कपड़े, कॉस्मेटिक्स। सब कुछ उपलब्ध, जैसे शहर की धड़कन यहीं धड़कती हो।

सलारजंग से पहले आमने-सामने दो गलियाँ हैं। एक घूमकर मोहल्ला अंसार में हकीम वाले मकान की ओर जाती थी, अब सुखदेव नगर में बदल गई है। सामने वाली गली, जहाँ पहले मकबरे थे, अब पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में समा गई है। और ठीक सामने – बुलंद सालारजंग गेट!

सालारजंग गेट – पानीपत का प्रवेश द्वार:
यह गेट कोई साधारण दरवाज़ा नहीं, बल्कि एक बुलंद इमारत है। 18वीं शताब्दी में हैदराबाद के नवाब सालारजंग की याद में बनवाया था। ऊँची दीवारें, नक्काशीदार मेहराबें – यह पानीपत शहर की असली शुरुआत का प्रतीक है। यहीं से पुराना पानीपत शुरू होता था, जहाँ व्यापारी, योद्धा और यायावर आते-जाते थे। गेट के नीचे खड़े होकर मैंने सोचा – तीन युद्धों की धरती, कम्बल उद्योग की राजधानी, और अब आधुनिक मार्केट्स का केंद्र।

छोटा सफ़र, बड़ी यादें:
क्या यह सफ़र बहुत लंबा था? बिल्कुल नहीं – बस आधा किलोमीटर। लेकिन इसकी खासियत ऐतिहासिक है। जगह-जगह बढ़ते कदम, तरह-तरह की दुकानें – हलवाई की मिठास, कम्बल की गर्माहट, समोसों की चटपटाहट, गुरुद्वारे की शांति, और गेट की भव्यता। ये सब नए और प्राचीन पानीपत की याद दिलाते हैं। परिवर्तन आया है, मार्केट्स ने पुरानी दुकानों को निगल लिया है, लेकिन गलियों की आत्मा वही है। अगर आप पानीपत आएँ, तो पैदल चलें इन गलियों में। हर मोड़ पर एक कहानी इंतज़ार कर रही है।
Ram Mohan Rai,
Panipat

पानीपत की गलियां-12    ( हलवाई हट्टा से माधो गंज दरवाज़ा ) सुबह की हल्की ठंडक में जब मैंने पानीपत की पुरानी गलियों में क...
05/11/2025

पानीपत की गलियां-12
( हलवाई हट्टा से माधो गंज दरवाज़ा )
सुबह की हल्की ठंडक में जब मैंने पानीपत की पुरानी गलियों में कदम रखा, तो हलवाई हट्टा की मिठास भरी खुशबू ने स्वागत किया। जलेबी की चाशनी की महक, गर्म-गर्म रबड़ी की भाप और तली हुई मिठाइयों की चटकती आवाज़ें—यहाँ का हर कोना बचपन की यादों से भरा है। दुकानों पर चाँदी के वर्क चढ़ी मिठाइयाँ सजी थीं, और हलवाइयों की ठक-ठक चल रही थी। यहीं से हम चले, माधो गंज दरवाज़े की ओर।

यह दरवाज़ा पानीपत के उन 15 प्राचीन प्रवेशद्वारों में से एक है, जो कभी शहर की सुरक्षा कवच थे। ऊँची दीवारों के अवशेष आज भी गवाही देते हैं कि यहाँ से गुज़रने वाले हर यात्री को शहर की आत्मा का स्पर्श मिलता था। दरवाज़े के पास ही एक पुराना कुआँ है, जिसके चारों ओर बनी सीढ़ियाँ अब भी लोगों की बैठकों का गवाह हैं।

किले की चढ़ाई और ठठेरान बाजार :
माधो गंज से आगे बढ़ते ही किले की ऊँचाई नज़र आने लगी। सीढ़ियाँ चढ़ते हुए हवा में पुराने पत्थरों की सोंधी खुशबू थी। किला, जो कभी महाभारत का दर्शक रहा, आज भी अपनी भव्यता लिए खड़ा है। नीचे उतरते ही हम ठठेरा बाज़ार में दाखिल हुए।

कभी यहाँ पीतल, कांसे और तांबे के बर्तनों की ठक-ठक गूँजती थी। थथेरे (कारीगर) अपने हथौड़ों से प्रत, कटोरी, टोकनी और थाली बनाते थे। पानीपत के बर्तन मुरादाबाद के बाद सबसे ज़्यादा पसंद किए जाते थे। लेकिन अब... अब यहाँ स्टील और मशीनों का ज़माना है। पुरानी दुकानों की जगह चाँदी-सोने के आभूषणों की चमकदार दुकानें हैं। बीच-बीच में मसालों की चक्कियाँ चल रही हैं—हल्दी, धनिया, गर्म मसाले पीसने की तीखी महक हवा में घुली है। नाक में घुसती यह खुशबू बाज़ार को जीवंत बनाती है।

बाज़ार के बीच में चौधरियों का मंदिर है—एक छोटा-सा, लेकिन भक्तों से भरा। इसके ठीक आगे एक और छोटा मंदिर है, जहाँ शाम को दीप जलते हैं। यहीं से एक तंग गली मोहल्ला ठठेरान की ओर मुड़ती है, जो घुमावदार रास्तों से होते हुए फिर हलवाई हट्टा में मिल जाती है।

माधो गंज गेट के बाहर: तीन रास्ते, तीन कहानियाँ
दरवाज़ा पार करते ही रास्ता दो हिस्सों में बँट जाता है:
1. बायीं ओर: कुरेशियाँ मोहल्ला, जहाँ वैद्य ओम प्रकाश जी का कोने का घर आज भी पुरानी हवेली की तरह खड़ा है।
2. दायीं ओर: घाटीबार की ओर, जहाँ रास्ते में एक छोटी-सी मस्जिद है—सादगी भरी, लेकिन नमाज़ की आवाज़ से गूँजती।

हम मुख्य रास्ते पर चले। थोड़ी दूर पर फिर तीन रास्ते:
- एक घाटीबार की ओर,
- दूसरा किले और दरगाह कलंदर की ओर,
- तीसरा S.D. गर्ल्स स्कूल और पब्लिक स्कूल से होते हुए देव नगर की ओर।

पब्लिक स्कूल के साथ ही एक गली देव नगर को जाती है—वह इलाका जो कभी जोहड़ (तालाब) था, जहाँ मेंढक टर्राते थे और बच्चे कागज़ की नावें तैराते थे।

श्री राम चौक से देवी मंदिर तक :
मुख्य रास्ता आगे चलकर दल्लूवाड़ा की ओर निकलता है। लेकिन हम श्री राम चौक से होते हुए देसराज कॉलोनी की ओर मुड़े। यहीं से एक रास्ता पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी को क्रॉस करता हुआ माई जी मोहल्ला पहुँचाता है—जहाँ कलंदर साहब के माता-पिता का मजार है। शांति और सुगंधित अगरबत्ती की खुशबू यहाँ की पहचान है।

अंत में हम पहुँचे देवी मंदिर चौक। यहाँ का देवी मंदिर सदियों पुराना है। मंदिर के सामने वाला इलाका—माई जी को छोड़कर—लगभग 50 साल पुराना है।

मेरी याद: बचपन में यहाँ खेत थे। श्री राम चौक पर हमारे पारिवारिक बुजुर्ग श्री राम सैनी जी के खेत थे। देव नगर की जगह एक बड़ा जोहड़ था। देवी मंदिर जाने के लिए खेतों के कच्चे रास्तों से गुज़रना पड़ता था—पैरों में कीचड़, सिर पर धूप, और हाथ में माँ के लिए फूल।

आज वही खेत गुलज़ार कॉलोनियाँ बन गए हैं। पक्की सड़कें, ऊँची इमारतें, दुकानें—पानीपत का विस्तार मीलों तक फैला है।
यह सैर सिर्फ़ गलियों की नहीं, समय की भी थी। जहाँ एक तरफ़ पुरानी ठक-ठक और मसालों की महक बाकी है, वहीं नई पीढ़ी स्टील की चमक और मशीनों की गूँज में जी रही है। पानीपत की ये गलियाँ इतिहास की किताब नहीं, जीती-जागती यादें हैं।

अगली यात्रा में मिलेंगे—शायद किसी गली, मोहल्ले या बाजार की ओर।
जय पानीपत! 🙏
Ram Mohan Rai.
Panipat haryana

*वाहन चोर गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार, चोरी की एक इक्को गाड़ी व दूसरी के पार्टस बरामद*पानीपत....सन्नी कथूरिया।पुलिस अधीक्ष...
04/11/2025

*वाहन चोर गिरोह के दो आरोपी गिरफ्तार, चोरी की एक इक्को गाड़ी व दूसरी के पार्टस बरामद*

पानीपत....सन्नी कथूरिया।
पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह आईपीएस के मार्गदर्शन में कार्रवाई करते हुए जिला की एंटी व्हीकल थेप्ट पुलिस टीम ने चार पहियां वाहनों को चोरी करने वाले गिरोह के दो आरोपियों को काबू करने में कामयाबी हासिल की है। आरोपियों ने पूछताछ में पानीपत व सोनीपत की वाहन चोरी की एक-एक वारदात को अंजाम देने बारे स्वीकारा। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की एक इक्को गाड़ी व दूसरी के पार्टस बरामद किए।

एंटी व्हीकल थेप्ट इंचार्ज सब इंस्पेक्टर राकेश ने बताया कि गत 31 अक्तूबर को गश्त के दौरान उनकी टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि संदिग्ध किस्म के दो युवक सेक्टर 25 में ट्रक युनियन के पास वाहन चोरी की फिराक में घूम रहे है। पुलिस टीम ने तुंरत मौके पर दबिश देकर दोनों युवकों को काबू किया। पूछताछ में उन्होंने अपनी पहचान सोनीपत के कतलुपुर गांव निवासी मंजीत व दिल्ली के नरेला स्थित स्वतंत्र नगर निवासी साहिल के रूप में बताई।
गहनता से पूछताछ करने पर दोनों आरोपियों ने फरार अपने एक अन्य साथी आरोपी के साथ मिलकर 16 अक्तूबर की रात सेक्टर 11/12 में गोसअली मोहल्ले से एक इक्को गाड़ी चोरी करने की वारदात को अंजाम देने बारे स्वीकारा। गाड़ी चोरी की वारदात बारे थाना चांदनी बाग में गोसअली मोहल्ला निवासी मोहम्मद आरीफ की शिकायत पर अभियोग दर्ज है।
चोरी की गाड़ी बरामद करने व वारदात में शामिल फरार आरोपी के ठीकानों का पता लगा काबू करने के लिए पुलिस ने 1 नवबंर को दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश कर 3 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया।
रिमांड अवधि के दौरान आरोपियों ने पूछताछ में सोनीपत के मुरथल से 16 अगस्त की रात एक अन्य इक्को गाड़ी चोरी करने की वारदात को अंजाम देने बारे स्वीकारा। गाड़ी चोरी की उक्त वारदात बारे सोनीपत के थाना मुरथल में जलदीप निवासी मुरथल की शिकायत पर अभियोग दर्ज है।

इंचार्ज सब इंस्पेक्टर राकेश ने बताया कि रिमांड अवधि के दौरान पूछताछ में आरोपियों ने बताया उन दोनों ने फरार अपने साथी आरोपी के साथ मिलकर शार्टकट तरिके से पैसे कमाने के लिए इक्को गाड़ी चोरी की उक्त वारदातों को अंजाम दिया।
पूछताछ में आरोपी मंजीत ने बताया गांव में अडडे पर उसकी वर्कशॉप है। उन्होंने पानीपत गोसअली मोहल्ले से चोरी की इक्को गाड़ी को वर्कशॉप में ले जाकर काट दिया। कटी गाड़ी के कुछ पार्ट फरार इनको साथी आरोपी बेचने के लिए ले गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों से चोरी की गाड़ी के बचे पार्टस इंजन, सीएनजी किट, सस्पेंशन, वॉयरिंग, चार सीट व सोनीपत के मुरथल से चोरी की इक्को गाड़ी बरामद की । पुलिस ने मंगलवार को तीन दिन की रिमांड अवधि पूरी होने पर दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश किया जहा से उन्हें न्यायिक हिरासत जेल भेज दिया।

04/11/2025

थैलसीमिया से पीड़ित बच्चों की गुजारिश पर हरयाणवी गाने पर नाचते हरियाणा के एडीजीपी आलोक मित्तल जी।

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