04/11/2025
मुकेश सहनी ने जो आज किया उसका स्वागत होना चाहिए बिना किसी इफ और बट के. उसकी राजनीति ही सहनी वोट पे है और वो सिर्फ़ अपने समाज के वोट को एकत्रित करके खुद को स्थापित करना चाह रहा है. सिर्फ़ VIP के कैंडिडेट को सहनी का वोट नहीं चाहिए बल्कि महागठबंधन को सहनी का वोट चाहिए तभी मुकेश सहनी का वजूद रहेगा राजनीति में.
गौड़ाबौराम से अगर एक ही उम्मीदवार अफजल रहता तो लोग वैसे भी बोलते की सहनी का वोट नहीं मिलेगा. सहनी के वोट न मिलने से अफजल के साथ साथ मुकेश सहनी भी हारेगा क्यूंकि वो सहनी वोट का ठेकेदार बन कर राजनीति में आया है. इस बार तो मुकेश सहनी का फ्लोर टेस्ट हो रहा है कि सहनी सही में आपका वोटर है या नहीं, या भाजपा के नाम पे आपको सहनी का वोट मिलता है. लड़ाई तो सहनी की भी है. अगर सहनी का वोट भाजपा से महागठबंधन में शिफ्ट नहीं हुआ तो आगे भाजपा कभी सहनी को भाव नहीं देगी. सहनी तो अटका पड़ा है मझधार में.
लालू के टाइम ये समाज घोर लालूवादी था एकदम कट्टर समर्थक. लालू ने अपने इस अतिपिछड़ा और दलित वोटबैंक को वापिस लाने की बहुत कोशिश की लेकिन सफ़ल नहीं हुए और आज तक सत्ता से बाहर हैं. मुकेश सहनी के द्वारा इस समाज को फ़िर से एकजुट करके एक समीकरण बनाया जा रहा है. यही कारण है कि लालू ज़्यादा सटा रहे हैं सहनी को. किसी भी हाल में न चुनाव से पहले और न चुनाव के बाद पाला बदलने दिया. सबको याद होगा जब मुकेश सहनी के पिता की हत्या आपसी रंजिश में एक मुस्लिम समाज के नौजवान द्वारा हुई तो मुकेश सहनी को शांत रखा गया. भाजपा चाह रही थी इस मुद्दे को कम्युनल एंगल देना लेकिन मुकेश सहनी ने सूझ बूझ से काम लिया. लालू खुद श्राद्ध कार्यक्रम गए बीमार होने के बावजूद. ताकि समीकरण मज़बूत रहे.
अपने विधानसभा दरभंगा की बात करूं तो बहुत अच्छे तरीके से मज़बूती के साथ मुकेश सहनी के प्रत्याशी को सपोर्ट मिल रहा है मुस्लिम समुदाय से. पिछली बार हार का मार्जिन दस हज़ार था अगर इस बार सहनी समुदाय का आधा वोट परसेंटेज भी VIP को मिल गया तो ये सीट निकल जाएगी क्योंकि ज़्यादा सीट पे जो हार का मार्जिन दस हज़ार से नीचे है वहां सहनी का वोट शिफ्ट हुआ महागठबंधन में तो भाजपा के वोटबैंक में सेंधमारी हो जाएगी. यही बात भाजपा अच्छे से जान रही है. लड़ाई इस बार ज़्यादा टफ़ है, इतनी आसानी से किसी की सरकार न बन रही.