Manoj kumar

Manoj kumar �iuqalaab zindabaad � i dare to question the system which is almost dead

16/12/2025
14/12/2025

“18 साल का क्रांतिकारी”

2. “सबसे युवा शहीद”

3. “हँसते-हँसते फाँसी”

4. “खुदीराम बोस की शहादत”

5. “डर नहीं था मौत का”

6. “अंग्रेज़ों से टकराया 18 साल का शेर”

7. “भारत का सबसे कम उम्र का बलिदान

10/12/2025

Deshbhakti kya hai #

09/12/2025

#आज़ाद #

07/12/2025

बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती है, लेकिन हमारे युवाओं में अपार संभावनाएं हैं। डिग्री हासिल करने के बाद भी नौकरी न मिलने की स्थिति में भी वे अपने जीवन को संवारने के लिए नए अवसरों की तलाश कर सकते हैं और अपने सपनों को पूरा करने के लिए काम कर सकते हैं।

04/12/2025

हमे अंग्रेजो से आज़ादी तो मिल गई थी लेकिन ओहि brastachar गरीबी अंधभक्ति लूटमार वही न्याय नही मिलना रिश्वत खोरी सरकार अपनी जेब भरने में लगी रहती है चाहे जिसकी हो किसी पॉलिटिकल पार्टी की बात हो

18/11/2025

रानी लक्ष्मीबाई

 (जन्म का नाम मणिकर्णिका) 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख वीरांगना थीं, जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें झांसी की रानी के नाम से भी जाना जाता है। 

जीवन परिचय और विद्रोह

प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 19 नवंबर, 1828 को वाराणसी में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्हें प्यार से 'मनु' कहा जाता था। उन्होंने कम उम्र में ही घुड़सवारी और अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुणता हासिल कर ली थी।

विवाह और गोद लेना: 1842 में, उनकी शादी झांसी के महाराजा गंगाधर राव नेवलेकर से हुई और वह झांसी की रानी बन गईं। राजा की मृत्यु के बाद, अंग्रेजों ने 'व्यपगत के सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) के तहत उनके दत्तक पुत्र दामोदर राव (जिन्हें पहले आनंद राव के नाम से जाना जाता था) को झांसी का वैध उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया।

संघर्ष: अंग्रेजों के इस निर्णय के विरुद्ध रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी झांसी को बचाने का संकल्प लिया और कहा, "मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी"। उन्होंने एक स्वयंसेवक सेना का गठन किया, जिसमें महिलाओं को भी शामिल किया गया।

युद्ध और बलिदान: 1858 में, उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भीषण युद्ध लड़ा। झांसी से निकलकर वे कालपी और फिर ग्वालियर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने तात्या टोपे के साथ मिलकर लड़ाई जारी रखी। युद्ध के दौरान, उन्होंने अपने बेटे को पीठ पर बांधकर दुश्मनों से लोहा लिया। अंत में, 18 जून, 1858 को ग्वालियर के पास कोटा-की-सराय में लड़ते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुईं। 

रानी लक्ष्मीबाई का साहस, नेतृत्व क्षमता और बलिदान उन्हें भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अमर प्रतीक बनाता है। सुभद्रा कुमारी चौहान की प्रसिद्ध कविता "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी" उनकी वीरता का गुणगान करती है।

14/11/2025

#भगतसिंह #इंडियन अगर ऐसा ही होता रहा फिर आम आदमी मरेगा या फिर गलत कदम उठाएगा......... इंकलाब ज़िंदाबाद

08/11/2025

Manoj kumar

Address

Mahoba

Telephone

+919198533882

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Manoj kumar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Manoj kumar:

  • Want your business to be the top-listed Media Company?

Share