24/05/2026
*नागौर* रे धोरां रे बीच एक छोटो सो गांव हो—*करनू*। उण गांव में एक गरीब विधवा मां **केसर बाई** और उणरो बीस साला रो बेटो **जगमाल** रहता। दोई जणां मिहनत-मजदूरी करता, पण उणांरे घर रो एक नियम हो—सांझ री रोटी जद भी बणती, पैला घर रे बाहरे देख्या जाता कि कोई भूखो-तीसो राहीगीर (यात्री) तो कोनी निकळ रह्यो है।
# # # **आंधी तूफान री वो रात**
एक बार आसाढ रो महीनो हो। आथण (शाम) होते ही काळा-डिबाण बादल छा गया और धोरां में भयंकर अंधड़ (रेतीली आंधी) चालण लागी। बिजली कड़क रही ही और मूसलाधार मीं (बारिश) शुरू हो गई।
केसर बाई और जगमाल चूल्हे कने बैठ रोटियां सेक रहा हा। उण बखत बाहरे सूं किसी रे कराहण (कराहने) री आवाज आई।
जगमाल तुरंत किवाड़ खोल्या। बाहरे देख्यो तो तीन मिनख, जो कटी दूर देश सूं आ रहा हा, आंधी-मीं में रास्ता भटक गया हा। उणांरा कपड़ा भीग्योड़ा हा और वे ठंड सूं धूज रहा हा।
केसर बाई उणांने तुरंत माईने (अंदर) लिया।
* जगमाल अपनी सूखी साकळी (लौंगड़ी) जळाई ताकि उणांने ताप (गर्मी) मिल सके।
* केसर बाई उणांने सूखा कपड़ा दिया।
**थाली रो त्याग**
जद जीमबा (खाने) रो बखत आयो, तो घर में सिर्फ चार-पांच रोटियां ही ही, जो सिर्फ मां-बेटे वास्ते पूरी होती। केसर बाई जगमाल कानी देख्यो। बिना कुछ बोल्या ही बेटो मां री आखंां रो भाव समझ गयो।
मां-बेटे उण तीनों अणजाण मेहमानों ने पाट माथे बिठाया और आदर-सत्कार सूं वो साजो भोजन उणांने जीमा दियो। मेहमान तृप्त होया और उणां री आत्मा राजी हुई। उण रात मां और बेटो सिर्फ पाणी पीकर, भूखे पेट ओरण री चटाई माथे सो गया, पण उणांरे चेहरे माथे एक मोटो सुकूं (संतोष) हो।
# # # **सेवा रो उजळो सवेरो**
सवेरे जद मीं रुकी, तो वे मेहमान जावण लाग्या। उणां में सूं एक मिनख बडो व्यापारी हो। उणने जद ठा पड़्यो कि मां-बेटे उणने जीमावण वास्ते खुद भूखा सोया, तो उणरी आंख्यां छलक गी।
वो बोल्यो—*"खम्मा घणी माई! म्हे घणो धन देख्यो, मोटो-मोटो म्हाल देख्या, पण थारे इण झोंपड़े ज्यूं मोटो हिवड़ो कटी कोनी देख्यो। आ मरुधरा धन्य है जिणमें थारा ज्यूं सेवाभावी मिनख है।"*
व्यापारी जगमाल ने शहर में अपने व्यापार में साझीदार (पार्टनर) बणा दियो, जिणसूं उणां री गरीबी हमेशा वास्ते मिट गी।
**कहानी री सीख (Moral)**
मारवाड़ में कैवे कि—**"घर आया ने टुकड़ो भलो, चाहे खुद भूखा सोए"**।
आ कहानी म्हाने सिखावे कि सच्ची सेवा उणने ही कैवे जिणमें खुद री परवाह कूर्या बिना, सामण वाले री मदद की जाए। शरणागत और भूखे री सेवा सूं मोटो कोई धरम कोनी।
**हुकम, आ कहानी कस्यां लागी?**