30/12/2021
संपादक :- Palash surjan उत्तरप्रदेश में इस वक्त चुनाव की गहमागहमी है और एक बार फिर से जाति आधारित मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए राजनैतिक दल रणनीतियां बनाने में लग गए हैं। सत्तारूढ़ भाजपा इस संबंध में सर्वाधिक सक्रिय नज़र आ रही है। जुलाई में जब मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था, तो उसमें उत्तरप्रदेश से तीन पिछड़े, तीन दलित और एक ब्राह्मण बिरादरी के सांसद को मंत्री बनाया गया था। इसके बाद विधानसभा चुनावों के पहले एनडीए का कुनबा बढ़ाने में भी भाजपा ने इस सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान दिया। सवर्णों के साथ ही गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलितों को साथ लेने की कोशिश की। उन क्षेत्रीय दलों से गठबंधन किया, जिनका प्रभाव पिछड़े वर्ग के लोगों पर है। इस बीच संकेत मिलने लगे कि ब्राह्मण मतदाता भाजपा से नाराज हैं, तो अब ब्राह्मणों पर भाजपा ध्यान देने में लग गई है। चुनावों में ब्राह्मणों को पार्टी के साथ बनाए रखने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है जिसमें प्रदेश से जुड़े ब्राह्मण नेताओं को सदस्य बनाया गया है और समिति की अध्यक्षता गोरखपुर से राज्यसभा सांसद शिवप्रताप शुक्ल करेंगे। यह समिति राज्य की सभी विधानसभा सीटों पर ब्राह्मणों से संपर्क कर उन्हें भाजपा के साथ जोड़ने का काम करेगी। उत्तरप्रदेश की राजनीति में राज्य की आबादी के 12 प्रतिशत ब्राह्मणों का आशीर्वाद सत्ता के लिए जरूरी समझा जाता है। एक वक़्त था जब मायावती को यह आशीर्वाद मिला था, अब भाजपा इसी कोशिश में लगी हुई है।...
संपादक :- Palash surjan उत्तरप्रदेश में इस वक्त चुनाव की गहमागहमी है और एक बार फिर से जाति आधारित मतदाताओं को अपने पाले में क....