MI Life Style RRR

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MI Life Style RRR Working for mi life style

18/05/2020

ानकारी_जिसका_ज्ञान_सबको_होना_चाहिए

🔴1. योग, भोग और रोग ये तीन अवस्थाएं है।

🔴2. *लकवा* - सोडियम की कमी के कारण होता है।

🔴3. *हाई बी पी में* (उच्च रक्तचाप) - स्नान व सोने से पूर्व एक गिलास जल का सेवन करें तथा स्नान करते समय थोड़ा-सा नमक पानी मे डालकर स्नान करे ।

🔴4. *लो बी पी*(निम्न रक्तचाप) - सेंधा नमक डालकर पानी पीयें ।

🔴5. *कूबड़ निकलना*- फास्फोरस की कमी ।

🔴6. *कफ* - फास्फोरस की कमी से कफ बिगड़ता है, फास्फोरस की पूर्ति हेतु आर्सेनिक की उपस्थिति जरुरी है। गुड व शहद खाएं

🔴7. *दमा, अस्थमा* - सल्फर की कमी।

🔴8. *सिजेरियन आपरेशन* - आयरन, कैल्शियम की कमी ।

🔴9. *सभी क्षारीय वस्तुएं दिन डूबने के बाद खायें* ।

🔴10. *अम्लीय वस्तुएं व फल दिन डूबने से पहले खायें* ।

🔴11. *जम्भाई*- शरीर में आक्सीजन की कमी।

🔴12. *जुकाम* - जो प्रातःकाल जूस पीते हैं वो उस में काला नमक व अदरक डालकर पियें ।

🔴13. *ताम्बे का पानी* - प्रातः खड़े होकर नंगे पाँव पानी ना पियें।

🔴14. *किडनी* - भूलकर भी खड़े होकर गिलास का पानी ना पिये।

🔴15. *गिलास* एक रेखीय होता है तथा इसका सर्फेस टेन्शन अधिक होता है। गिलास अंग्रेजो (पुर्तगाल) की सभ्यता से आयी है। अतः लोटे का पानी पियें, लोटे का कम सर्फेस टेन्शन होता है।

🔴16. *अस्थमा, मधुमेह, कैंसर* से गहरे रंग की वनस्पतियाँ बचाती हैं ।

🔴17. *वास्तु* के अनुसार जिस घर में जितना खुला स्थान होगा, उस घर के लोगों का दिमाग व हृदय भी उतना ही खुला होगा ।

🔴18. *परम्परायें* वहीं विकसित होगीं जहाँ जलवायु के अनुसार व्यवस्थायें विकसित होगीं ।

🔴19. *पथरी* - अर्जुन की छाल से पथरी की समस्यायें ना के बराबर हो जाती है।

🔴20. *RO* का पानी कभी ना पियें। यह गुणवत्ता को स्थिर नहीं रखता। कुएँ का पानी पियें। बारिश का पानी सबसे अच्छा, पानी की सफाई के लिए *सहिजन* की फली सबसे बेहतर है।

🔴21. *सोकर उठते समय* हमेशा दायीं करवट से उठें या जिधर का *स्वर* चल रहा हो उधर करवट लेकर उठें ।

🔴22. *पेट के बल सोने से* हर्निया, प्रोस्टेट, एपेंडिक्स की समस्या आती है ।

🔴23. *भोजन* के लिए पूर्व दिशा, *पढाई* के लिए उत्तर दिशा बेहतर है ।

🔴24. *HDL* बढ़ने से मोटापा कम होगा LDL व VLDL कम होगा ।

🔴25. *गैस की समस्या* होने पर भोजन में अजवाइन मिलाना शुरू कर दें ।

🔴26. *चीनी* के अन्दर सल्फर होता है जो कि पटाखों में प्रयोग होता है , यह शरीर में जाने के बाद बाहर नहीं निकलता है। चीनी खाने से *पित्त* बढ़ता है ।

🔴27. *शुक्रोज* हजम नहीं होता है *फ्रेक्टोज* हजम होता है और भगवान् की हर मीठी चीज में फ्रेक्टोज है ।

🔴28. *वात* के असर में नींद कम आती है ।

🔴29. *कफ* के प्रभाव में व्यक्ति प्रेम अधिक करता है।

🔴30. *कफ* के असर में पढाई कम होती है ।

🔴31. *पित्त* के असर में पढाई अधिक होती है ।

🔴33. *आँखों के रोग* - कैट्रेक्टस, मोतियाबिन्द, ग्लूकोमा , आँखों का लाल होना आदि ज्यादातर रोग कफ के कारण होता है ।

🔴34. *शाम को वात*-नाशक चीजें खानी चाहिए ।

🔴35. *प्रातः 4 बजे जाग जाना चाहिए* ।

🔴36. *सोते समय* रक्त दबाव सामान्य या सामान्य से कम होता है ।

🔴37. *व्यायाम* - *वात रोगियों* के लिए मालिश के बाद व्यायाम , *पित्त वालों* को व्यायाम के बाद मालिश करनी चाहिए । *कफ के लोगों* को स्नान के बाद मालिश करनी चाहिए ।

🔴38. *भारत की जलवायु* वात प्रकृति की है , दौड़ की बजाय सूर्य नमस्कार करना चाहिए ।

🔴39. *जो माताएं* घरेलू कार्य करती हैं उनके लिए व्यायाम जरुरी नहीं ।

🔴40. *निद्रा* से *पित्त* शांत होता है , मालिश से *वायु* शांति होती है , उल्टी से *कफ* शांत होता है तथा *उपवास* (लंघन) से बुखार शांत होता है ।

🔴41. *भारी वस्तुयें* शरीर का रक्तदाब बढाती है , क्योंकि उनका गुरुत्व अधिक होता है ।

🔴42. *दुनियां के महान* वैज्ञानिक का स्कूली शिक्षा का सफ़र अच्छा नहीं रहा, चाहे वह 8 वीं फेल न्यूटन हों या 9 वीं फेल आइस्टीन हों ,

🔴43. *माँस खाने वालों* के शरीर से अम्ल-स्राव करने वाली ग्रंथियाँ प्रभावित होती हैं ।

🔴44. *तेल हमेशा* गाढ़ा खाना चाहिएं, सिर्फ लकडी वाली घाणी का , दूध हमेशा पतला पीना चाहिए ।

🔴45. *छिलके वाली दाल-सब्जियों से कोलेस्ट्रोल हमेशा घटता है ।*

🔴46. *कोलेस्ट्रोल की बढ़ी* हुई स्थिति में इन्सुलिन खून में नहीं जा पाता है । ब्लड शुगर का सम्बन्ध ग्लूकोस के साथ नहीं, अपितु कोलेस्ट्रोल के साथ है ।

🔴47. *मिर्गी दौरे* में अमोनिया या चूने की गंध सूँघानी चाहिए ।

🔴48. *सिरदर्द* में एक चुटकी नौसादर व अदरक का रस रोगी को सुंघायें ।

🔴49. *भोजन के पहले* मीठा खाने से बाद में खट्टा खाने से शुगर नहीं होता है ।

🔴50. *भोजन* के आधे घंटे पहले सलाद खाएं, उसके बाद भोजन करें ।

🔴51. *अवसाद* में आयरन , कैल्शियम , फास्फोरस की कमी हो जाती है । फास्फोरस गुड और अमरुद में अधिक है

🔴52. *पीले केले* में आयरन कम और कैल्शियम अधिक होता है । हरे केले में कैल्शियम थोडा कम लेकिन फास्फोरस ज्यादा होता है तथा लाल केले में कैल्शियम कम आयरन ज्यादा होता है । हर हरी चीज में भरपूर फास्फोरस होती है, वही हरी चीज पकने के बाद पीली हो जाती है जिसमे कैल्शियम अधिक होता है ।

🔴53. *छोटे केले* में बड़े केले से ज्यादा कैल्शियम होता है।

🔴54. *रसौली* की गलाने वाली सारी दवाएँ चूने से बनती हैं ।

🔴55. हेपेटाइट्स A से E तक के लिए चूना बेहतर है ।

🔴56. *एंटी टिटनेस* के लिए हाईपेरियम 200 की दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दे ।

🔴57. *ऐसी चोट* जिसमे खून जम गया हो उसके लिए नैट्रमसल्फ दो-दो बूंद 10-10 मिनट पर तीन बार दें । बच्चो को एक बूंद पानी में डालकर दें ।

🔴58. *मोटे लोगों में कैल्शियम* की कमी होती है अतः त्रिफला दें । त्रिकूट (सोंठ+ कालीमिर्च+ मघा पीपली) भी दे सकते हैं ।

🔴59. *अस्थमा में नारियल दें।* नारियल फल होते हुए भी क्षारीय है ।दालचीनी + गुड + नारियल दें ।

🔴60. *चूना* बालों को मजबूत करता है तथा आँखों की रोशनी बढाता है ।

🔴61. *दूध* का सर्फेस टेंशन कम होने से त्वचा का कचरा बाहर निकाल देता है ।

🔴62. *गाय का घी सबसे अधिक पित्तनाशक फिर कफ व वायुनाशक है ।*

🔴63. *जिस भोजन* में सूर्य का प्रकाश व हवा का स्पर्श ना हो उसे नहीं खाना चाहिए।

🔴64. *गौ-मूत्र अर्क आँखों में ना डालें ।*

🔴65. *गाय के दूध* में घी मिलाकर देने से कफ की संभावना कम होती है लेकिन चीनी मिलाकर देने से कफ बढ़ता है ।

🔴66. *मासिक के दौरान* वायु बढ़ जाता है , 3-4 दिन स्त्रियों को उल्टा सोना चाहिए इससे गर्भाशय फैलने का खतरा नहीं रहता है । दर्द की स्थति में गर्म पानी में देशी घी दो चम्मच डालकर पियें ।

🔴67. *रात* में आलू खाने से वजन बढ़ता है।

🔴68. *भोजन के* बाद वज्रासन में बैठने से *वात* नियंत्रित होता है ।

🔴69. *भोजन* के बाद कंघी करें। कंघी करते समय आपके बालों में कंघी के दांत चुभने चाहिए । बाल जल्द सफ़ेद नहीं होगे ।

🔴70. *अजवाईन* अपान वायु को बढ़ा देता है, जिससे पेट की समस्यायें कम होती है

🔴71. *अगर पेट* में मल बंध गया है तो अदरक का रस या सोंठ का प्रयोग करें।

🔴72. *कब्ज* होने की अवस्था में सुबह पानी पीकर कुछ देर एडियों के बल चलना चाहिए ।

🔴73. *रास्ता चलने*, श्रम कार्य के बाद थकने पर या धातु गर्म होने पर दायीं करवट लेटना चाहिए ।

🔴74. *जो दिन मे दायीं करवट पर सोता है तथा रात्रि में बायीं करवट पर सोता है उसे थकान व शारीरिक पीड़ा कम होती है।*

🔴75. *बिना कैल्शियम* की उपस्थिति के कोई भी विटामिन व पोषक तत्व पूर्ण कार्य नहीं करते है ।

🔴76. *स्वस्थ व्यक्ति* सिर्फ 5 मिनट शौच में लगाता है ।

🔴77. *भोजन* करते समय डकार आपके भोजन को पूर्ण और हाजमे को संतुष्टि का संकेत है ।

🔴78. *सुबह के नाश्ते* में फल , *दोपहर को दही* व *रात्रि को दूध* का सेवन करना चाहिए ।

🔴79. *रात्रि* को कभी भी अधिक प्रोटीन वाली वस्तुयें नहीं खानी चाहिए । जैसे - दाल , पनीर , राजमा , लोबिया आदि ।

🔴80. *शौच और भोजन* के समय मुंह बंद रखें , भोजन के समय टी वी ना देखें ।

🔴81. *मासिक चक्र* के दौरान स्त्री को ठंडे पानी से स्नान, व आग से दूर रहना चाहिए ।

🔴82. *जो बीमारी जितनी देर से आती है, वह उतनी देर से जाती भी है ।*

🔴83. *जो बीमारी अंदर से आती है, उसका समाधान भी अंदर से ही होना चाहिए।*

🔴84. *एलोपैथी* ने एक ही चीज दी है , दर्द से राहत । आज एलोपैथी की दवाओं के कारण ही लोगों की किडनी, लीवर , आतें , हृदय ख़राब हो रहे हैं । एलोपैथी एक बिमारी खत्म करती है तो दस बिमारी देकर भी जाती है ।

🔴85. *खाने* की वस्तु में कभी भी ऊपर से नमक नहीं डालना चाहिए, ब्लड-प्रेशर बढ़ता है ।

🔴86 . *रंगों द्वारा* चिकित्सा करने के लिए इंद्रधनुष को समझ लें , पहले जामुनी , फिर नीला ... अंत में लाल रंग।

🔴87 . *छोटे* बच्चों को सबसे अधिक सोना चाहिए , क्योंकि उनमें वह कफ प्रवृत्ति होती है , स्त्री को भी पुरुष से अधिक विश्राम करना चाहिए।

🔴88. *जो सूर्य निकलने* के बाद उठते हैं , उन्हें पेट की भयंकर बीमारियां होती है , क्योंकि बड़ी आँत मल को चूसने लगती है ।

🔴89. *बिना शरीर की गंदगी* निकाले स्वस्थ शरीर की कल्पना निरर्थक है , मल-मूत्र से 5% , कार्बन डाई ऑक्साइड छोड़ने से 22 %, तथा पसीना निकलने से लगभग 70 % विजातीय तत्व शरीर से निकलते हैं ।

🔴90. *चिंता , क्रोध , ईर्ष्या करने से गलत हार्मोन्स का निर्माण होता है जिससे कब्ज , बवासीर , अजीर्ण , अपच , रक्तचाप , थायरायड की समस्या उत्पन् होती है*

🔴91. *गर्मियों में बेल , गुलकंद , तरबूजा , खरबूजा व सर्दियों में सफ़ेद मूसली , सोंठ का प्रयोग करें ।*

🔴92. *प्रसव* के बाद माँ का पीला दूध बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को 10 गुना बढ़ा देता है । यदि यह मिलता है तो बच्चो को टीके लगाने की आवश्यकता नहीं होती है ।

🔴93. *रात को सोते समय* सर्दियों में देशी मधु लगाकर सोयें, त्वचा में निखार आएगा।

🔴94. *दुनिया में कोई चीज व्यर्थ नहीं , हमें उपयोग करना आना चाहिए*।

🔴95. *जो अपने दुखों* को दूर करके दूसरों के भी दुःखों को दूर करता है , वही मोक्ष का अधिकारी है ।

🔴96. *सोने से* आधे घंटे पूर्व जल का सेवन करने से वायु नियंत्रित होती है, लकवा, हार्ट-अटैक का खतरा कम होता है ।

🔴97. *स्नान से पूर्व और भोजन के बाद पेशाब जाने से रक्तचाप नियंत्रित होता है*।

🔴98 . *तेज धूप* में चलने के बाद, शारीरिक श्रम करने के बाद, शौच से आने के तुरंत बाद जल का सेवन निषिद्ध है।

🔴99. *त्रिफला अमृत है* जिससे *वात, पित्त, कफ* तीनो शांत होते हैं। इसके अतिरिक्त भोजन के बाद पान व चूना।

🔴100. इस विश्व की सबसे मँहगी *दवा "लार"* है, जो प्रकृति ने तुम्हें अनमोल दी है, इसे तंबाकू, पान पराग के साथ व्यर्थ ना करें ।

*जनजागृति हेतु लेख को पढ़ने के बाद साझा अवश्य करे।।

06/05/2020
06/05/2020
14/04/2020

सभा का विषय: यम और नियम

*प्रवक्ता: अन्तराष्ट्रीय वेदिक विद्वान् आचार्य प्रभामित्र जी*

*ओ३म*

*सभी को सादर नमस्ते* 🙏

महर्षि पतञ्जलि ने योग को 'चित्त की वृत्तियों के निरोध' के रूप में परिभाषित किया है। योगसूत्र में उन्होंने पूर्ण कल्याण तथा शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि के लिए आठ अंगों वाले योग का एक मार्ग विस्तार से बताया है। अष्टांग, आठ अंगों वाले, योग को आठ अलग- अलग चरणों वाला मार्ग नहीं समझना चाहिए; यह आठ आयामों वाला मार्ग है जिसमें आठों आयामों का अभ्यास एक साथ किया जाता है।

महऋषि पतंजली ने योगदर्शन के पाद 2 सूत्र 29 मे योग को आठ भागो मे विभाजित किया हैं:

*यम नियमासन प्राणायाम प्रत्याहार*
*धारणा ध्यान समाधयोङष्टावंगानि॥*

*अर्थात:-*
आष्टांग योग के आठ अंग हैं:
1) यम 2) नियम 3) आसान 4)प्राणायाम 5) प्रत्याहार 6) धारणा
7) ध्यान 8) समाधि

इन आठ अंग मे से प्रारम्भिक दो अंगो का महत्व सबसे अधिक है इसलिए उन्हे प्रथम स्थान दिया गया हो।

*यम-नियम क्या हैं?*

यम है धर्म का मूल। यह हम सब को संभाले हुए है। निश्चित ही यह मनुष्य का मूल स्वभाव भी है। यम से मन मजबूत और पवित्र होता है। मानसिक शक्ति बढ़ती है। इससे संकल्प और स्वयं के प्रति आस्था का विकास होता है। यम समाजिक होते है अर्थात दूसरो के साथ पालन करने मे होते हैं।

योगदर्शन के पाद 2 सूत्र 30 मे यम के सम्बंध मे बताया गया है-

*अहिंसा सत्यास्तेय ब्रह्मचय्यार्परिग्रहा यमाः।*

*अर्थात:-*
(1) अहिंसा (2) सत्य (3) अस्तेय (4) ब्रह्मचर्य और (5) अपरिग्रह यह पांच यम है।

(1) *अहिंसा:-* "आत्मवत् सर्वभूतेषु" अर्थात सबको स्वयं के जैसा समझना ही अहिंसा है।

पातंजलि योगदर्शन के पाद 2 सूत्र 35 मे कहा गया है कि:-

*अहिंसा प्रतिष्ठायां तत्सन्निधो बैर त्याग:*

*अर्थात:-* अहिंसा की साधना से उस योगी के निकट-मन मे से बैर भाव निकल जाता हैं।

मन, वचन और कर्म से हिंसा न करना ही अहिंसा माना गया है, लेकिन परमार्थ के लिए की हुई हिंसा को किसी भी प्रकार अहिंसा से कम नही ठहराया जा सकता हैं।

अहिंसा का इससे भी व्यापक अर्थ है। स्वयं के साथ अन्याय या हिंसा करना भी अपराध । क्रोध करना, लोभ, मोह पालना, किसी वृत्त‍ि का दमन करना, शरीर को कष्ट देना आदि सभी स्वयं के साथ हिंसा है।

"अहिंसा" का अर्थ है सर्वदा तथा सर्वदा (मनसा, वाचा और कर्मणा) सब प्राणियों के साथ द्रोह का अभाव। *अंहिसा सर्वथा सर्वदा सर्वभूतानामनभिद्रोह* (व्यासभाष्य, योगसूत्र 2। 30)। अहिंसा के भीतर इस प्रकार सर्वकाल में केवल कर्म या वचन से ही सब जीवों के साथ द्रोह न करने की बात समाविष्ट नहीं होती, प्रत्युत मन के द्वारा भी द्रोह के अभाव का संबंध रहता है। योगशास्त्र में निर्दिष्ट यम तथा नियम अहिंसामूलक ही माने जाते हैं। यदि उनके द्वारा किसी प्रकार की हिंसावृत्ति का उदय होता है तो वे साधना की सिद्धि में उपादेय तथा उपकार नहीं माने जाते। "सत्य" की महिमा तथा श्रेष्ठता सर्वत्र प्रतिपादित की गई है, परंतु यदि कहीं अहिंसा के साथ सत्य का संघर्ष घटित होता है तो वहाँ सत्य वस्तुत: सत्य न होकर सत्याभास ही माना जाता है। कोई वस्तु जैसी देखी गई हो तथा जैसी अनुमित हो उसका उसी रूप में वचन के द्वारा प्रकट करना तथा मन के द्वारा संकल्प करना "सत्य" कहलाता है, परंतु यह वाणी भी सब भूतों के उपकार के लिए प्रवृत्त होती है, भूतों के उपघात के लिए नहीं। इस प्रकार सत्य की भी कसौटी अहिंसा ही है। इस प्रसंग में वाचस्पति मिश्र ने "सत्यतपा" नामक तपस्वी के सत्यवचन को भी सत्याभास ही माना है, क्योंकि उसने चोरों के द्वारा पूछे जाने पर उस मार्ग से जानेवाले सार्थ (व्यापारियों का समूह) का सच्चा परिचय दिया था। हिंदू शास्त्रों में अहिंसा, सत्य, अस्तेय (न चुराना), ब्रह्मचर्य तथा अपरिग्रह, इन पाँचों यमों को जाति, देश, काल तथा समय से अनवच्छिन्न होने के कारण समभावेन सार्वभौम तथा महाव्रत कहा गया है (योगसुत्र 2। 31) और इनमें भी, सबका आधारा होने से, "अहिंसा" ही सबसे अधिक महाव्रत कहलाने की योग्यता रखती है।

अहिंसक भाव रखने से मन और शरीर स्वस्थ होकर शांत‍ि का अनुभव करता है।

(2) *सत्य:-* "विचारों में सत्यता, परम-सत्य में स्थित रहना"

सत्य का आमतौर पर अर्थ माना जाता है झूठ न बोलना। सत् और तत् धातु से मिलकर बना है सत्य, जिसका अर्थ होता है यह और वह- अर्थात यह भी और वह भी, क्योंकि सत्य पूर्ण रूप से एकतरफा नहीं होता। रस्सी को देखकर सर्प मान लेना सत्य नहीं है, किंतु उसे देखकर जो प्रतीति और भय उत्पन हुआ, वह भी सत्य है।

सत्य को समझने के लिए एक तार्किक बुद्धि की आवश्यकता होती है। तार्किक‍ बुद्धि आती है भ्रम और द्वंद्व के मिटने से। भ्रम और द्वंद्व मिटता है मन, वचन और कर्म से एक समान रहने चाहिए।

यम की दुसरी सीढ़ी सत्य बोलना नही, सत्य परायण होना हैं। ईश्वर, जीव, प्रकृती के सम्बंध मे जानकारी प्राप्त करके अपने को भ्रम बंधनो से बचाते हुए परम पद प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ना मनुष्य जीवन का ध्रुव सत्य हैं। उसी सत्य को प्राप्त करने के लिए हमारा निरंतर प्रयास होना चाहीए।

(3) *अस्तेय:-* "चोर-प्रवृति का न होना"

इसे अचौर्य भी कहते हैं अर्थात चोरी की भावना नहीं रखना, न ही मन में चुराने का विचार लाना। धन, भूमि, संपत्ति, नारी, विद्या आदि किसी भी ऐसी वस्तु जिसे अपने पुरुषार्थ से अर्जित नहीं किया या किसी ने हमें भेंट या पुरस्कार में नहीं दिया, को लेने के विचार मात्र से ही अस्तेय खंडित होता है। इस भावना से चित्त में जो असर होता है उससे मानसिक प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है। मन रोगग्रस्त हो जाता है।

(4) *ब्रह्मचर्य:-* इसके दो अर्थ हैं:

1) चेतना को ब्रह्म के ज्ञान में स्थिर करना
2) सभी इन्द्रिय-जनित सुखों में संयम बरतना

इसका अर्थ भी व्यापक है। आमतौर पर गुप्तेंद्रियों पर संयम रखना ही ब्रह्मचर्य माना जाता है। ब्रह्मचर्य का शाब्दिक अर्थ है उस एक ब्रह्म की चर्या या चरना करना। अर्थात उसके ही ध्यान में रमना और उसकी चर्चा करते रहना ही ब्रह्मचर्य है। समस्त इंद्रियों के संयम के अस्खलन को ही ब्रह्मचर्य कहते हैं।

गृहस्थ जीवन मे रहते हुए भी ब्रह्मचर्य का पालन कर सकते हैं।

ब्रह्मचर्य मे व्यक्ति आत्मिक, शारीरिक और मानसिक रूप से सबल हो जाता हैं। उसके अन्दर की कमजोरी भय मिट जाता है और वह निडर बन जाता है।

(5) *अपरिग्रह:* "आवश्यकता से अधिक संचय नहीं करना और दूसरों की वस्तुओं की इच्छा नहीं करना।"

इसे अनासक्ति भी कहते हैं अर्थात किसी भी विचार, वस्तु और व्यक्ति के प्रति मोह न रखना ही अपरिग्रह है। कुछ लोगों में संग्रह करने की प्रवृत्ति होती है, जिससे मन में भी व्यर्थ की बातें या चीजें संग्रहित होने लगती हैं। इससे मन में संकुचन पैदा होता है। इससे कृपणता या कंजूसी का जन्म होता है। आसक्ति से ही आदतों का जन्म भी होता है।

मन, वचन और कर्म से इस प्रवृत्ति को त्यागना ही अपरिग्रही होना है। इस परिस्थिती मे व्यक्ति अपने पिछ्ले, इस और अगले जन्म को जान लेता है की वह कौन है, कहा से आया है क्यो आया है इस परिस्थिती मे उसे धन का लालच नही रह्ता वह अपनी आवश्यकताओ को सीमित कर लेता हैं।

आवश्यकता को जितना कम करेगे उतना इसका पालन कर महतत्व बन सकेगे क्योकिं जितने अधिक संसाधन होगे मनुष्य उतना अधिक उसमे व्यस्थ होंगा और उसी मे मनुष्य अपना जीवन त्याग देता हैं परंतु यह सृष्टि चलती रहती हैं वह आया था तब भी वो गया तब भी इसिलिए जितनी आवश्कता हैं उतनी ही वस्तुओं का उपभोग करना चाहिए।

अंतत: उक्त पाँच 'यम' कहे गए है यह अष्टांग योग का पहला चरण है। यम को ही विभिन्न धर्मों ने अपने-अपने तरीके से समझाया है किंतु योग इसे समाधि तक पहुँचने की पहली सीढ़ी मानता है। यह उसी तरह है जिस तरह की प्राथमिक स्कूल में दाखिला लिया जाता है। निश्चित ही इसे साधना कठिन जान पड़ता है किंतु सिर्फ उन लोगों के लिए जिन्होंने जमाने की हवा के साथ बहकर अपना स्वाभाविक स्वभाव खो दिया है।

*🙏धन्यवाद🙏*

06/04/2020

*WORLD HEALTH ORGANISATION PROTOCOL&PROCEDURE OF LOCKDOWN PERIODS FOR CONTROLLING ON MOST DANGEROUS VIRUS*

STEP 1 - 1 DAY.
STEP 2- 21 DAYS.
AFTER 5 DAYS.
STEP 3- 28 DAYS.
AFTER 5 DAYS.
STEP 4 - 15 DAYS.

The sameway, our Indian governments are follow:
MAR22-1 DAY ( TRIAL LOCKDOWN)

MAR24-APR14 - 21 DAYS(FIRST LOCKDOWN)

APRIL15- APRIL19 - RELAX FROM LOCKDOWN.

APR20 - MAY 18 - 28DAYS(SECOND LOCKDOWN)

*INCASE,Covid19 patient ratio is Zero*
Withdraw the LOCKDOWN.
Otherwise,
May19 - May 24 - Relax from LOCKDOWN.

May 25 - June 10 - 15 days (FINAL LOCKDOWN).

25/03/2020

*जीवन में आप कितने भी*
_Positive_ हों

*लेकिन वर्तमान मेंआपकी रिपोर्ट*
_*Negative*_ आना जरूरी है!

😊सदा मुस्कुराते रहिये😊

20/03/2020

*22 मार्च 2020 - जनता कर्फ्यू का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक अर्थ - अत्यंत सूझबूझ का परिचायक*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 मार्च 2020 को घोषित जनता कर्फ्यू, कोरोना वायरस के विरुद्ध एक अत्यंत ही सूझबूझ भरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कदम है। आपने इस बारे में समझने की अगर कोशिश की, तो आप इस कदम में 100% प्रतिशत न केवल साथ देंगे बल्कि जब पूरे मन से और पूरे उत्साह से साथ देंगे तो अविश्वसनीय परिणाम सामने आएंगे। आइए इसको समझने की कोशिश करते हैं।

क्या आप जानते है कि कोरोना वायरस की उम्र अलग अलग परिस्थितियों में कितनी होती है। कोरोना वायरस आम लेकिन अलग अलग परिस्थितियों में 3 से 72 घण्टे तक सक्रिय रह सकता है यानि कि उसकी उम्र इतनी ही है, वो भी अधिकतम 72 घण्टे तक, लेकिन ज़्यादातर 36 घण्टे में ये समाप्त हो जाता है। अब अगर सरकार पूरे देश को क्वारंटाइन करना चाहे या आइसोलेशन वार्ड में एडमिट करना चाहे तो क्या ये मुमकिन है, बिल्कुल नही। इसलिए बहुत समझदारी से मोदीजी और उनके सलाहकारों ने रविवार का दिन चुना, जिस दिन सभी देशवासियों को घर पर रोकना आसान है। अब इसे गौर से समझिए। जब हमें 22 तारीख को सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक जनता कर्फ्यू के रूप में घर पर रहने के लिए कहा गया है वो भी रविवार को छुट्टी वाले दिन तो इसका साफ मतलब है कि पूरे देशवासियों को 36 घंटे तक क्वारंटाइन में रहने के लिए एक समझदारी भरे निवेदन से मनाना । क्योंकि हम सब 21 मार्च की शाम या रात से अपने घर आ जाएंगे और पूरी रात घर पर ही रहते हैं जो की जाहिर सी बात ही तो है, फिर अगले दिन सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की वजह से घर पर रहेंगे और फिर उसके बाद फिर घर पर ही सो जाएंगे तो 23 मार्च सुबह जाग कर उठेंगे। इसका मतलब की 21 मार्च की रात से 23 मार्च की सुबह तक जब हम घर पर ही रहेंगे तो 36 घण्टे का हम अपने आप को घर में क्वारंटाइन निवास ही करेंगे। यानी कि कोरोना वायरस अगर कही है तो उसे, 36 घँटे के इस क्वारंटाइन वास या आइसोलेशन वार्ड जैसी स्थिति के चलते पनपने का माध्यम नही मिलेगा और वो लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच जायेगा। इस प्रकार से पूरा भारत एक वैज्ञानिक प्रयोग के माध्यम से कोरोना को हरा सकने की सशक्त स्थिति में आ जाएगा।
दूसरी तरफ जब शाम को 5 बजे, जब लोग अपनी खिड़की या दरवाजे पर खड़े होकर 5 मिनट तक थाली या ताली बजाकर उन लोगो को धन्यवाद देंगे तो ये भी एक आध्यात्मिक प्रयोग ही तो है जिसके माध्यम से प्राणाकर्षण करके कोरोना से लड़ने वालो को सशक्त व सम्बल प्रदान किया जाएगा। अंग्रेजी में इसे LAW OF ATTRACTION कहते हैं।

तो इस प्रकार श्री नरेंद्र मोदीजी की सरकार अभूतपूर्व सूझबूझ से कोरोना वायरस का जड़मूल से नाश करने का आग्रह कर रही है। इस योजना को समझने और क्रियान्वयन करने की महती आवश्यकता है।

*हम सब सावधान रहें और जागरूकता के साथ कदम बढ़ाते हुए इस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक योजना को समर्थन देते हुए इसका क्रियान्वयन में दिल से सहयोग दें।*

🙏🏻🙏🏻🌹🙏🏻🙏🏻

18/03/2020

CORONA शब्द में ही छुपा है, कोरोना से बचाव!

C - Clean Your Hands 🖐
O- Off From Gatherings 🏃
R- Raise Your Immunity 😇
O- Only Sick to Wear Mask 😷
N - No to Hand Shake 👏
A- Avoid Rumours🚫

सावधान रहें, स्वस्थ रहें!

Crona
18/03/2020

Crona

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