Mukesh Kumar Mishra

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Mukesh Kumar Mishra मुकेश | विचारों की यात्रा
कविता से व्यंग्य तक, संस्कृति से जीवन तक—
जहाँ परंपरा मिलती है आधुनिक सोच से। ।।न कंचित् शाश्वतम्।।

जगत् मिथ्या, मोमो सत्य! आदि शंकराचार्य ने कहा था— "ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या", परंतु आधुनिक 'मोमो वेदांत' के आचार्यों ने इ...
19/05/2026

जगत् मिथ्या, मोमो सत्य!

आदि शंकराचार्य ने कहा था— "ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या", परंतु आधुनिक 'मोमो वेदांत' के आचार्यों ने इसका एक अत्यंत संशोधित और स्वादिष्ट संस्करण प्रस्तुत किया है— "मोमो सत्यं, जगन्मिथ्या, चटनी तु परब्रह्म स्वरूपिणी!"

कहते हैं कि यह संसार माया है। धन, दौलत, पद, प्रतिष्ठा—सब क्षणभंगुर हैं। लेकिन जैसे ही गली के नुक्कड़ पर भाप उड़ाते मोमो दिखाई देते हैं, अंतरात्मा स्वयं उद्घोष कर उठती है— "नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः"। अर्थात् खाली पेट आत्मज्ञान संभव नहीं! पहले दो प्लेट मोमो, फिर मोक्ष की चर्चा।

मोमो दर्शन के अनुसार जब-जब भूख बढ़ती है, तब-तब मोमो अवतरित होते हैं। "यदा यदा हि भूखस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानम् मोमोनां तदात्मानं सृजाम्यहम्॥" वहीं "असतो मा सद्गमय" का आधुनिक अर्थ है— "कच्चे मोमो से पके मोमो की ओर ले चल।" और "कर्मण्येवाधिकारस्ते" का वास्तविक रहस्य यह है कि तुम्हारा अधिकार केवल मोमो खाने पर है, कैलोरी गिनने पर नहीं।

मोमो दर्शन का अगला सूत्र कहता है कि "तीखा जितना गहरा होगा, वैराग्य उतना ही तीव्र होगा।" जब लाल चटनी जीभ पर लगती है, तो आँखों से जो अश्रु बहते हैं, वे संसार के दुखों के नहीं बल्कि मोमो-भक्ति के सात्विक आँसू होते हैं। वहीं मेयोनेज़ मीमांसा बताती है कि यदि तीखी चटनी संसार की माया है, तो मेयोनेज़ ईश्वर की कृपा है, जो दुखों को शांत करती है। दोनों मिलकर अंततः साधक को 'शून्य' अर्थात् खाली प्लेट की अवस्था तक पहुँचा देते हैं।

ज्ञानी कहता है— "यह शरीर नश्वर है।" लेकिन मोमो वाला पूछता है— "भैया, स्टीम या फ्राइड?" और सारा वैराग्य उसी क्षण देह त्याग देता है। जो व्यक्ति सुबह तक संसार को मिथ्या बता रहा था, वही शाम को अतिरिक्त लाल चटनी के लिए मोमो वाले से गहन तर्क-वितर्क करता पाया जाता है।

और अब परम सत्य सुनिए— जो व्यक्ति मोमो खाने के बाद प्लेट में बची हुई अतिरिक्त चटनी को उंगली से चाटकर साफ नहीं करता, उसका ज्ञान अभी अधूरा है। वह अभी भी लोक-लाज की सांसारिक माया में फँसा हुआ है।

निष्कर्ष यही है कि संसार परिवर्तनशील है। रिश्ते बदलते हैं, सरकारें बदलती हैं, मोबाइल के मॉडल बदलते हैं, लेकिन भूखे मनुष्य और गर्म मोमो का आकर्षण सनातन है।

"मोमोऽहम्, मोमोऽहम्, न चान्योऽस्मि कदाचन।"
(मैं मोमोमय हूँ, मेरे भीतर भी मोमो, बाहर भी मोमो।)

ॐ शांतिः शांतिः... मोमो क्रिस्पी क्रंच शांतिः! 🙏🤣

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📸 प्रसिद्धि के परजीवी: एक 'सेल्फी' का सचसोशल मीडिया पर आजकल एक विशेष और अत्यंत मनोरंजक प्रजाति बहुतायत में पाई जाती है— ...
19/05/2026

📸 प्रसिद्धि के परजीवी: एक 'सेल्फी' का सच

सोशल मीडिया पर आजकल एक विशेष और अत्यंत मनोरंजक प्रजाति बहुतायत में पाई जाती है— 'सेल्फी-जीवी'।

ये वो महानुभाव हैं जो किसी प्रसिद्ध नेता, अभिनेता या संत के साथ एक फोटो खिंचवाकर फेसबुक या इंस्टाग्राम पर ऐसे छाती चौड़ी करते हैं, जैसे दुनिया का सारा गुरुत्वाकर्षण इन्हीं के कंधों पर टिका हो।

आपने बिल्कुल सही नब्ज़ पकड़ी है। इस पूरे प्रहसन में सबसे बड़ा मज़ाक यही है कि यह तथाकथित "प्रेम" या "सम्मान" व्यक्ति का नहीं, उसकी 'कुर्सी' और 'फेम' का है। अगर उस फ्रेम में खड़ा व्यक्ति अचानक अपनी प्रसिद्धि खो दे, तो ये भाई साहब उसे अपनी गली के नुक्कड़ पर एक कप चाय तक न पूछें!

आइए इनके इस 'फोटो-ऑप' (Photo-Op) का थोड़ा पोस्टमार्टम करते हैं—

🏛️ 1. नेता जी के साथ: "माननीय के साथ कुछ खास पल"

सच्चाई यह है कि माननीय को इनका नाम तो छोड़िए, यह भी याद नहीं होता कि ये किस तरफ से फ्रेम में घुसे थे। नेता जी की नज़र कैमरे के लेंस पर होती है और इन भाई साहब की नज़र नेता जी के आभामंडल पर।

फोटो में इनकी मुस्कान 32 दांतों की परिधि लांघ कर कानों तक पहुँच रही होती है। अगर कल को नेता जी चुनाव हार जाएं, तो यही भाई साहब उन्हें सड़क पर देखकर ऐसे मुंह फेर लेंगे जैसे उन्होंने कोई उधार मांग लिया हो।

🕉️ 2. संत-महात्मा के साथ: "परम श्रद्धेय के चरणों में..."

अगर कोई संत 5-स्टार आश्रम वाले हैं, महंगी गाड़ियों के काफिले में चलते हैं और उनके पास वीआईपी पास लगता है, तो इन भाई साहब की भक्ति अचानक उफान मारने लगती है।

अगर वही संत हिमालय से उतरा कोई सच्चा लेकिन आम फक्कड़ साधु होता, तो ये उनकी तरफ एक अठन्नी उछालना भी अपनी तौहीन समझते। इन्हें ज्ञान से कोई मतलब नहीं, इन्हें बस दुनिया को यह बताना है कि—

"भगवान के सीधा संपर्क वाले एजेंट से मेरी अच्छी जान-पहचान है।"

🎬 3. अभिनेता के साथ: "भाई के साथ कैजुअल मीटिंग"

असल में ये वहां बाउंसर्स की गालियां खाकर और भीड़ में धक्के खाकर उस फ्रेम में किसी तरह अपनी गर्दन घुसाने में कामयाब हुए थे।

कैप्शन ऐसे लिखते हैं जैसे बचपन में दोनों ने साथ में कंचे खेले हों। अगर वो अभिनेता किसी नुक्कड़ नाटक का आम कलाकार होता, तो ये उसकी तरफ देखते भी नहीं।

🎭 निष्कर्ष का कड़वा सच

ये तस्वीरें दरअसल उस प्रसिद्ध व्यक्ति को सम्मान देने के लिए नहीं डाली जातीं।

ये तस्वीरें इन भाई साहब के अपने 'अस्तित्व के संकट' (Existential Crisis) का इलाज हैं। ये समाज को चीख-चीख कर बताना चाहते हैं कि—

"देखो! मैं भी कोई आम आदमी नहीं हूँ, मेरा भी बड़े लोगों में उठना-बैठना है।"

सच तो ये है कि प्रसिद्धि की चमक से अपनी बेरंग ज़िंदगी चमकाने की इस जद्दोजहद से बड़ा कोई चुटकुला नहीं है।

व्यंग्यात्मक शेर अर्ज़ है—

"फ्रेम में उनके साथ खड़े, और चमक रही है नाक,
अगर न होती वो कुर्सी वहां, तो कौन पूछता खाक!"

📸 प्रसिद्धि उधार ली जा सकती है,
पर व्यक्तित्व नहीं।

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कैलाश हो या श्मशान, शिव हर जगह 'शिव' हैं। ​वे हमें सिखाते हैं कि प्रसन्नता का संबंध किसी स्थान या बाहरी साधनों से नहीं, ...
19/05/2026

कैलाश हो या श्मशान, शिव हर जगह 'शिव' हैं।
​वे हमें सिखाते हैं कि प्रसन्नता का संबंध किसी स्थान या बाहरी साधनों से नहीं, बल्कि 'मनःस्थिति' से होता है। जब आप अपने भीतर के शिव से जुड़ जाते हैं, तो बाहर की परिस्थितियाँ आपका आनंद नहीं छीन सकतीं।
​याद रखें—सुख स्थान बदलने से नहीं, अपनी दृष्टि और विचार बदलने से मिलता है।

एक दौर था जब उत्तर प्रदेश की पहचान कानून-व्यवस्था के संकट, अवैध कट्टों के कुटीर उद्योग और रंगदारी से होती थी। अपराध की इ...
19/05/2026

एक दौर था जब उत्तर प्रदेश की पहचान कानून-व्यवस्था के संकट, अवैध कट्टों के कुटीर उद्योग और रंगदारी से होती थी। अपराध की इस संवेदनशीलता ने राज्य को विकास की दौड़ में पीछे धकेल दिया था।
लेकिन आज कहानी बदल चुकी है!
जिस यूपी में कभी अवैध कट्टे गूंजते थे, आज उसी यूपी की धरती पर दुनिया की सबसे आधुनिक और अचूक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' (Brahmos-NG)* बनने जा रही है। यह महज एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि यूपी के 'क्रिमिनॉमिक्स' से 'इकॉनॉमिक्स' की ओर बढ़ने का एक ऐतिहासिक प्रमाण है।

🛠️ क्या बदला है आज के उत्तर प्रदेश में?

*डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट जैसे 6 नोड्स के जरिए रक्षा उत्पादन का एक विशाल इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।
*अपराध पर 'जीरो टॉलरेंस': सुरक्षित माहौल और पारदर्शी नीतियों के कारण देश-विदेश के बड़े निवेशक अब यूपी को अपनी पहली पसंद मान रहे हैं।
* इन्फ्रास्ट्रक्चर की क्रांति: एक्सप्रेसवे का जाल, नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स और निर्बाध बिजली ने उद्योगों को रफ्तार दी है।
* युवाओं को तकनीकी रोजगार: अब यूपी का युवा कट्टों के साए में नहीं, बल्कि एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अत्याधुनिक तकनीकी अनुसंधान में अपना भविष्य तलाश रहा है।
यह नया उत्तर प्रदेश है—सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत का नया ग्रोथ इंजन! 🇮🇳

Krish Mishra

19/05/2026

@ [642895491409636:49210:]

19/05/2026

#बड़ामंगल #हनुमान #जयमातादी #जयश्रीराम

19/05/2026

18/05/2026

#जयमातादी

18/05/2026

आतंकी का कबूलनामा:
"हमें पाकिस्तान में बताया गया था कि कश्मीर में जुल्म हो रहा है। वहां के लोग भूखे मर रहे हैं। लेकिन जब मैं यहां (भारतीय कश्मीर) आया, तो मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं! यहां का मामला तो बिल्कुल उल्टा है। यहां के लोग हमसे (पाकिस्तान से) हजार गुना ज्यादा सुखी हैं। यहां बेहतरीन अस्पताल हैं, शानदार सड़कें हैं, चौतरफा तरक्की है। हमारी तरफ वाले (POK) कश्मीर में तो इस विकास का 1 प्रतिशत भी नहीं है!"

18/05/2026

🚂 रहस्यलोक एक्सप्रेस : उरे, मरे, परे और दरे का गुप्त साम्राज्य #अतरंगी_सतरंगी_रेलवे

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