18/05/2026
हिंदी सिनेमा में कई हीरोइनें आईं और चली गईं।
कई चेहरे सुपरस्टार बने।
लेकिन एक चेहरा ऐसा भी था, जिसने बिना हीरोइन बने करोड़ों दिल जीत लिए।
वो चेहरा था रीमा लागू का।
पर्दे पर उनका आना मतलब घर जैसा अपनापन।
उनकी मुस्कान में मां की ममता दिखती थी।
उनकी आंखों में दर्द भी था और सुकून भी।
यही वजह रही कि सलमान खान से लेकर शाहरुख खान तक, हर स्टार की मां के रूप में दर्शकों ने उन्हें दिल से अपनाया।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में आने से पहले रीमा लागू बैंक में नौकरी करती थीं।
वह यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क थीं।
सुबह बैंक और शाम को थिएटर।
यही उनकी जिंदगी थी।
फिर एक दिन ऐसा आया, जब उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अभिनय को अपना सबकुछ बना लिया।
यहीं से शुरू हुई उस महिला की कहानी, जिसने मां के किरदार को नई पहचान दी।
असली नाम था नयन भडभडे, लेकिन दुनिया ने उन्हें रीमा लागू के नाम से जाना
रीमा लागू का जन्म 21 जून 1958 को हुआ था।
उनका असली नाम नयन भडभडे था।
उनकी मां मंदाकिनी भडभडे मराठी थिएटर की बड़ी अभिनेत्री थीं।
घर में अभिनय का माहौल था।
इसलिए बचपन से ही रीमा का झुकाव कला की तरफ होने लगा था।
उन्होंने छोटी उम्र में ही मराठी फिल्मों में बाल कलाकार के तौर पर काम किया।
हालांकि जिंदगी आसान नहीं थी।
परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई करें और सुरक्षित नौकरी करें।
इसी वजह से उन्होंने बैंक की नौकरी जॉइन की।
1979 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में वह कर्मचारी बनीं।
लेकिन दिल अब भी मंच पर धड़कता था।
बैंक के इंटर-कल्चरल प्रोग्राम्स में जब उन्होंने अभिनय किया, तब सहकर्मी भी हैरान रह गए।
सबको लगा कि यह महिला सिर्फ बैंक के लिए नहीं बनी।
उसके अंदर कलाकार छिपा बैठा है।
बैंक की कुर्सी छोड़कर चुना अभिनय का अनिश्चित रास्ता
उस दौर में सरकारी नौकरी छोड़ना आसान नहीं था।
लोग जिंदगीभर ऐसी नौकरी पाने का सपना देखते थे।
लेकिन रीमा लागू ने वही नौकरी छोड़ दी।
क्योंकि उनका मन कैमरे और मंच में बस चुका था।
उन्होंने थिएटर करना शुरू किया।
धीरे-धीरे टीवी की दुनिया में कदम रखा।
1985 में उनका टीवी डेब्यू शो “खानदान” आया।
इसके बाद “श्रीमान-श्रीमती” और “तू तू मैं मैं” ने उन्हें घर-घर पहुंचा दिया।
उनकी कॉमिक टाइमिंग शानदार थी।
लोग उनके डायलॉग्स का इंतजार करते थे।
वह सिर्फ इमोशनल रोल नहीं निभाती थीं।
कॉमेडी में भी उनका जवाब नहीं था।
यही वजह रही कि टीवी इंडस्ट्री में भी उनका अलग मुकाम बना।
‘कयामत से कयामत तक’ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर
1988 में रीमा लागू ने फिल्म “कयामत से कयामत तक” से बॉलीवुड में कदम रखा।
वह जूही चावला की मां बनी थीं।
उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह अभिनेत्री आगे चलकर बॉलीवुड की सबसे यादगार मां बनेगी।
फिर आई “मैंने प्यार किया”।
सलमान खान की मां बनकर उन्होंने ऐसा असर छोड़ा कि लोग भावुक हो उठे।
उनकी आंखों में सच्चाई दिखती थी।
उनका प्यार नकली नहीं लगता था।
यहीं से रीमा लागू का जादू शुरू हुआ।
इसके बाद “साजन”, “हम आपके हैं कौन”, “रंगीला”, “कुछ-कुछ होता है” और “कल हो ना हो” जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया।
हर फिल्म में उनका किरदार छोटा था।
लेकिन असर सबसे बड़ा होता था।
जब रीमा लागू की एक्टिंग से श्रीदेवी भी असहज हो गईं
1993 में फिल्म “गुमराह” रिलीज हुई।
इस फिल्म में श्रीदेवी, संजय दत्त और रीमा लागू साथ थे।
रीमा लागू ने श्रीदेवी की मां का किरदार निभाया था।
लेकिन शूटिंग के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिसकी चर्चा आज भी होती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रीमा लागू का अभिनय इतना दमदार था कि कई सीनों में वह श्रीदेवी पर भारी पड़ रही थीं।
बताया जाता है कि पोस्ट-प्रोडक्शन के समय रीमा के कई सीन काट दिए गए।
कहा गया कि इससे फिल्म का फोकस बदल रहा था।
हालांकि इस बात की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई।
लेकिन इंडस्ट्री में यह चर्चा लंबे समय तक रही।
यश जौहर को इस बात का अफसोस था।
इसीलिए उन्होंने रीमा से वादा किया कि आगे उनकी फिल्मों में मां का रोल वही निभाएंगी।
बाद में “कुछ-कुछ होता है”, “डुप्लीकेट” और “कल हो ना हो” में यही देखने को मिला।
प्यार हुआ, शादी हुई… लेकिन रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला
रीमा लागू की निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी जैसी रही।
बैंक में नौकरी के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेता विवेक लागू से हुई।
दोनों थिएटर से जुड़े थे।
धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।
1978 में दोनों ने शादी कर ली।
शादी के बाद नयन भडभडे बन गईं रीमा लागू।
कुछ साल बाद उनकी बेटी मृण्मयी लागू का जन्म हुआ।
लेकिन बेटी के जन्म के बाद रिश्ते में दूरियां आने लगीं।
आखिरकार दोनों अलग हो गए।
हालांकि उन्होंने कभी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर आरोप नहीं लगाए।
यही उनकी परिपक्वता थी।
तलाक के बाद भी दोनों ने प्रोफेशनल रिश्ते बनाए रखे।
कई साल बाद दोनों ने एक नाटक में साथ काम भी किया।
लोग हैरान रह गए थे।
लेकिन विवेक लागू ने साफ कहा था कि निजी और पेशेवर रिश्ते अलग होते हैं।
आखिरी सांस तक अभिनय करती रहीं रीमा लागू
रीमा लागू अभिनय को सिर्फ काम नहीं मानती थीं।
वह इसे अपनी जिंदगी समझती थीं।
फिल्मों के ऑफर कम हुए तो उन्होंने टीवी पर वापसी की।
वह “नामकरण” शो में नजर आ रही थीं।
17 मई 2017 की शाम तक उन्होंने शूटिंग की।
सबकुछ सामान्य था।
लेकिन रात में उन्हें सीने में दर्द हुआ।
परिवार उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल लेकर पहुंचा।
फिर अचानक खबर आई कि रीमा लागू अब नहीं रहीं।
18 मई 2017 की वह सुबह पूरे बॉलीवुड को रुला गई।
सलमान खान, आमिर खान, काजोल और कई सितारे उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
सबकी आंखें नम थीं।
क्योंकि बॉलीवुड ने सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं खोई थी।
उसने अपनी सबसे प्यारी मां खो दी थी।
आज भी क्यों अधूरी लगती है बॉलीवुड की मां वाली दुनिया?
रीमा लागू ने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया।
उन्होंने मां के किरदार को रोने-धोने तक सीमित नहीं रखा।
उनकी मां आधुनिक भी थी और संस्कारी भी।
वह दोस्त भी बनती थीं और सहारा भी।
यही वजह रही कि लोग उन्हें असली मां जैसा महसूस करते थे।
आज भी जब “हम आपके हैं कौन” या “कल हो ना हो” टीवी पर आती है, तो लोग ठहर जाते हैं।
क्योंकि स्क्रीन पर सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं दिखती।
वह घर का हिस्सा लगती हैं।
रीमा लागू ने साबित किया था कि बिना ग्लैमर के भी स्टार बना जा सकता है।
सिर्फ सच्चे अभिनय से भी दिलों पर राज किया जा सकता है।
शायद इसलिए आज भी लोग कहते हैं —
“रीमा मां जैसी कोई नहीं।”
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