16/01/2023
"प्राण की लौ से तुझे जिस काल बारूँ ,
और अपने कंठ पर तुझको संवारूँ ,
कह उठे संसार, आया ज्योति का क्षण,
गीत मेरे, देहरी का दीप- सा बन।"
- हरिवंशराय बच्चन
ऐसे ही भावों से प्रेरित होकर जीवन के कुछ अनुभवों और विचारों को आवाज़ देने की कोशिश की है हमारे कविकुमार और कुमारियों ने।
क्षितिज परिवार आप सभी का स्वागत करता है, काव्यांजलि में।
18 जनवरी । बुधवार । सांय 6:15 बजे । MAC ऑडिटोरियम