19/05/2026
📌सुप्रीम कोर्ट ने CDR सबूत की वैधता पर सुनाया ऐतिहासिक फैसला!
सुप्रीम कोर्ट की बेंच – जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया ने एक मामले में एक अहम निर्णय दिया है, जो इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की वैधता को लेकर नए मानक स्थापित करता है।
📌 मामले का संक्षिप्त विवरण:
🔹यह मामला राजस्थान में 2010 की एक महिला हत्या से जुड़ा है। अभियोजन ने आरोप लगाया कि पीड़िता के पति ने आरोपी पूरनमल के साथ साजिश रची थी।
🔹अभियोजन ने इस साजिश को साबित करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, FSL रिपोर्ट और बरामद नकद राशि को सबूत के तौर पर पेश किया।
🔹राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बनाये रखा और आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।
📌 सुप्रीम कोर्ट का निर्णय:
🔹सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तभी सबूत के रूप में स्वीकार किए जा सकते हैं, जब उनके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65‑B के तहत प्रमाणित सर्टिफिकेट मौजूद हो।
🔹अभियोजन पक्ष 65‑B सर्टिफिकेट प्रस्तुत नहीं कर पाया, इसलिए CDR को सबूत के रूप में अमान्य घोषित किया गया।
🔹FSL रिपोर्ट और बरामद नकद राशि पर भी भरोसा करने योग्य प्रमाणिकता नहीं पाई गई।
🔹परिणामस्वरूप, सुप्रीम कोर्ट ने पूरनमल की दोषसिद्धि रद्द कर उन्हें बरी कर दिया।
💡 कानूनी महत्व:
🔹यह फैसला डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैधता पर मार्गदर्शन देता है।
🔹अब किसी भी CDR या डिजिटल रिकॉर्ड पर भरोसा करने से पहले 65‑B प्रमाण पत्र अनिवार्य है।
🔹न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि साक्ष्य वैध नहीं है, तो उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
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