02/02/2026
____अभी भी अपवित्रता ही कहेंगे ❓____
🙏🏻 एक बार जरूर पढ़िए इसे 🙏🏻
खून ही तो निकल रहा ना ?
उसके लिए तो पैड है, कपड़ा बना है, मेंस्ट्रुअल कप ( Menstrual Cup)है ,टैम्पोन (Tampons), है तो उसे इस्तमाल करो न।
ये स्त्री woman का पार्ट ऑफ़ लाइफ है ,ये तो हर महीने लगा ही रहता है।
लेकिन जब आपके शरीर के किसी हिस्से में खरोच भी लग जाए ,और खून आने लगे तो आप तुरंत हाथों से दबा लेते,उस पर मरहम लगाने लगते हैं, बैंडेज लगाने लगते, हल्दी लगाने लगते हैं ,सारे प्रयास करते हैं खून रोकने के लिए ।
क्योंकि वह खून आपके लिए बहुत पवित्र है , वो शरीर से जाना नहीं चाहिए ,
लेकिन एक महिला का खून जा रहा हो, तब वो अपवित्र हो जाते हैं( impure) हो जाता हैं।
आप सब को पता है पीरियड के शुरुआती दिन के सफर मैं जो blood का flow निकल रहा होता है ना, वो केवल से पानी जैसा खून नहीं आता है।
वॉशरूम में कमोड पर बैठने के बाद में blood flow के साथ (रक्त के थक्के) भी आ रहा होता है,
ये 3,4 दिन कितना दर्दनाक ( )होता है , एक लड़की (women) के लिए जिसे लिखना बताना किसी के बस का नहीं है।
रिसर्च कहता है कि पीरियड्स का पेन #हार्ट_अटैक के पेन की बराबर होता है ।
और आप कितनी आसानी से कहते हो #अपवित्रता तब मुझे लगता है, जब ये आपवित्रता है तो आपके घर में तो बच्चा पैदा होता ही नहीं होगा ना इस अपवित्रता के वजह से ।
बच्चा चाहिए तो पीरियड आना चाहिए लेकिन पीरियड्स आए तो वहां अपवित्रता आ जाती है,
सच में मेरे को यह समझ में नहीं आता।
यह कौन सी अपवित्रता है यार .?
पता है यह आपकी बौद्धिक स्तर का विकास न होने की अपवित्रता है ,यह आपके ओछी मानसिकता की अपवित्रता है यह रूढ़िवादी परंपराओं की अपवित्रता है।
मुझे तो आजकल की लड़कियों का भी समझ में नहीं आता कि इतनी एजुकेटेड होने के बावजूद भी ,आप अभी तक अपवित्रता और पवित्रता के बंधन में फंसे पड़े हो।
आप इतनी अपवित्र हो जाती हो कि आप भगवान के सामने जाना नहीं चाहती ,
आप अपनी परछाई तक पहुंचने नहीं देना चाहती।
शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं में पीरियड्स (मासिक धर्म) को मुख्य रूप से शारीरिक शुद्धि की एक प्रक्रिया, है ।
एक स्त्री के लिए भगवान से वरदान स्वरुप में मिला है , फिर भी इसे आप अपवित्र मानती हो,
तो सुनो बहन आपकी सोच में अपवित्रता है ,
भगवान ने कभी नहीं कहा कि मेरे सामने मत आओ ,रामायण भागवत गीता जैसे पवित्र ग्रंथों में इसे अपवित्र नहीं बताया गया है ।
आज मैने इसलिए लिखा ना कि मुझे महीने के हर 4 से 5 दिन ये बातें ये, रूढ़ी वादी सोच मेरे को बहुत चुभता (pinch )है ,मुझे बहुत परेशान करता है।.
क्योंकि आए दिन में मेरे घर में भी यही बाते ,यही सोच से में खुद सामना करती हूं ,🥺
यह मत छूना, वह मत करना, ऐसे मत करो भगवान जी के पास मत जाओ, घर में कुछ फंक्शन हो रहा है पूजा हो रहा है तो दूर बैठी रहूं एक बंद कमरे में।
अरे यार इन दिनों हार्मोनल में बदलाव से मूड स्विंग्स के कारण
इतना गुस्सा, चिड़चिड़ापन ,रोना आता ,फिर भी हम खुद को अकेले ही संभालते हैं ,कोई नहीं होता जो इस प्रॉब्लम को समझ पाए और हमारी हेल्प करें ।
इतना कुछ अकेले सहन करने के बाद भी, आप पवित्रता और अपवित्रता वाला लॉजिक घुसेड देते ।
बहुत हो गया यार बंद करो अब तो,🙏🏻
मैं मेरे पीरियड्स में भी कभी कभी मंदिर चली ही जाती हू, मुझे डर नहीं लगता कि कुछ पाप कर रही हूं , या कुछ गलत हो जाएगा मेरे साथ,
कुछ लोगों को मेरी बातें बहुत बुरी लगेगी कुछ लोग ज्ञान भी देंगे।
लेकिन i don't care इस अपवित्रता का लॉजिक ,मेरे परमात्मा के साथ मत जोड़िए 🙏🏻
मेरा और उनका बहुत प्यार कनेक्शन है। मेरे परमात्मा को पीरियड्स के अपवित्रता से कोई दिक्कत नहीं उनके लिए तो मन की पवित्रता ही बहुत जरूरी है।
तो मन को पवित्र रखने की कोशिश करो ,ये समाज तुमको अपनाए या ना अपनाए लेकिन परमात्मा तो इस #पीरियड_के_अपवित्रता के साथ भी तुमको अपना लेंगे! 🫂❤️
क्षत्राणी सौम्या सिंह ✍🏻