06/06/2024
"युद्धों को बीते हुए तीन साल से ऊपर हो चुके थे, मगर उनके परिणाम अभी भी हर दिशा में देखे जा सकते थे। मनुष्यों ने एक बार और अपनी ज़मीन को ज़ख्मी किया था। हालाँकि इस बार इसके पीछे सिर्फ़ शक्ति-धर्म आदि जैसे पारम्परिक कारण ही नहीं शामिल थे, बल्कि वो छोटा सा कीड़ा भी था जिसे हमनें ही पैदा किया था, और फिर उसे समय के साथ पाल-पोसकर एक भयानक राक्षस के रूप में तब्दील कर दिया था। जो बना था धरती के सबसे विध्वंसक युद्ध की सबसे बड़ी वजह, और कुछ ही वक़्त में निगल गया था तकरीबन पूरी मानवता को। प्रदूषण, इससे बुरा कुछ भी नहीं देखा था हम सभी ने।"
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"युद्धों को बीते हुए तीन साल से ऊपर हो चुके थे, मगर उनके परिणाम अभी भी हर दिशा में देखे जा सकते थे। मनुष्यों ने एक बार और अपनी ज़मीन को ज़ख्मी किया था। हालाँकि इस बार इसके पीछे सिर्फ़ शक्ति-धर्म आदि जैसे पारम्परिक कारण ही नहीं शामिल थे, बल्कि वो छोटा सा कीड़ा भी था जिसे हमनें ही पैदा किया था, और फिर उसे समय के साथ पाल-पोसकर एक भयानक राक्षस के रूप में तब्दील कर दिया था। जो बना था धरती के सबसे विध्वंसक युद्ध की सबसे बड़ी वजह, और कुछ ही वक़्त में निगल गया था तकरीबन पूरी मानवता को। प्रदूषण, इससे बुरा कुछ भी नहीं देखा था हम सभी ने।"
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विचारों में पली
!!"परखनली"!!
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