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"आस्था का फाइव-स्टार ऑफर और पीआर (PR) संतों की माया"हमारे देश में जब तक क्रिकेट, सिनेमा और चमत्कारी बाबा सुरक्षित हैं, त...
06/10/2026

"आस्था का फाइव-स्टार ऑफर और पीआर (PR) संतों की माया"

हमारे देश में जब तक क्रिकेट, सिनेमा और चमत्कारी बाबा सुरक्षित हैं, तब तक मनोरंजन और विवादों की कभी कमी नहीं हो सकती। अब नया तमाशा देखिए—दावा किया जा रहा है कि भारतीय क्रिकेट के ‘किंग’ विराट कोहली को वृंदावन के आश्रम में सिर झुकाने के लिए पूरे 5 करोड़ रुपये का 'अटेंडेंस बोनस' दिया गया था!

वाह रे कलयुग की आस्था! पहले लोग मोक्ष और मानसिक शांति की तलाश में हाथ जोड़कर, नंगे पैर बाबाओं की चौखट पर हफ्तों लाइन में लगते थे। लेकिन अब ज़माना 'स्मार्ट स्पॉन्सरशिप' का है। अगर यह आरोप सच है, तो इसका मतलब है कि अब भगवान के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए भी बकायदा 'कोटेशन' (Quotation) मंगवाया जाता है। एक तरफ आम जनता 500 रुपये की वीआईपी पास की पर्ची कटवाने के लिए पसीने से तर-बतर रहती है, और दूसरी तरफ सेलिब्रिटीज के लिए 'आओ, हाथ जोड़ो और करोड़ों ले जाओ' वाला बंपर ऑफर चल रहा है!
हद तो यह है कि इसमें भी 'भू-माफिया' और 'बिल्डर लॉबी' का तड़का लगा हुआ है। लगता है अब प्रॉपर्टी डीलर जमीन के प्लॉट बेचने के साथ-साथ भगवान के घर में 'भक्ति के प्लॉट' भी बुक करने लगे हैं। सीधा हिसाब है—विराट कोहली जैसे बड़े नाम को आश्रम में बिठाओ, रील्स और वीडियो वायरल करवाओ, आश्रम की 'ब्रांड वैल्यू' बढ़ाओ और फिर उसी नाम पर भक्तों की जेब साफ करो। यह धर्म कम और "डिवाइन मार्केटिंग" (Divine Marketing) ज्यादा लगती है।

27/09/2026

स्पेन के सांसद जी के घर के बाहर का दृश्य,

वाटर लॉगिंग फ़ॉलोस man🤡

#पार्षद #लोकतंत्र

26/09/2026

“सांसद जी और पार्षद जी की बातचीत सुनकर लगा कि दोनों के पास जनता की समस्या का पूरा ज्ञान है… बस समाधान का पता किसी के पास नहीं है! 😂
एक-दूसरे को समझाते रहे कि जिम्मेदारी किसकी है, और जनता सोचती रही—‘साहब, हमें भाषण नहीं, काम चाहिए।’
वाह लोकतंत्र! समस्या जनता की, चर्चा नेताओं की और जिम्मेदारी… वो आज भी रास्ते में है!” 😄🎯

#सांसद #पार्षद #राजनीतिकव्यंग्य #जनताकीसुनो #लोकतंत्र #व्यंग्य #वाराणसी #मोदी

70 साल पुरानी समस्या का 'ताजा' भूमि पूजनकहते हैं कि बनारस में समय बहुत धीरे-धीरे बदलता है, लेकिन भेलूपुर वार्ड ने तो इति...
24/09/2026

70 साल पुरानी समस्या का 'ताजा' भूमि पूजन

कहते हैं कि बनारस में समय बहुत धीरे-धीरे बदलता है, लेकिन भेलूपुर वार्ड ने तो इतिहास ही रच दिया! पूरे 70 साल पुरानी सीवर और पेयजल की समस्या का समाधान करने के लिए आखिरकार 'बुधवार' का वो शुभ दिन आ ही गया, जब माननीय महापौर और विधायक जी ने कुदाल उठाकर भूमि पूजन कर दिया।

अमृत काल की कछुआ गति: समस्या 70 साल पुरानी है, यानी जब देश आज़ाद हुआ था और पहली बार सीवर लाइनें सोचना शुरू की गई थीं, तब से लेकर आज तक यहाँ की जनता 'गंदे पानी' और 'ओवरफ्लो' के साथ सह-अस्तित्व की भावना से रह रही थी। सात दशकों की इस तपस्या के बाद अब जाकर शासन और प्रशासन की नींद टूटी है।

बजट का भारी-भरकम गणित: 78.26 करोड़ रुपये की यह भारी-भरकम राशि सुनकर ऐसा लगता है जैसे सीवर और पाइपलाइन नहीं, बल्कि भेलूपुर के नीचे अंडरग्राउंड बुलेट ट्रेन का ट्रैक बिछाने की तैयारी है। जनता को डर बस इस बात का है कि कहीं इस करोड़पति सीवर लाइन के बनने के बाद उनका हाउस टैक्स भी 'बुलेट ट्रेन' की रफ्तार से न भागने लगे।

17 किलोमीटर का सफरनामा: 17 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। बनारस की तंग गलियों और भेलूपुर की सड़कों का मिजाज देखते हुए ऐसा लगता है कि अगले कुछ महीनों (या सालों) तक भेलूपुर की जनता को 'सड़क' की जगह केवल 'खाइयाँ' और 'मिट्टी के पहाड़' ही नसीब होने वाले हैं। विकास का यह रास्ता हमेशा खुदाई से होकर ही गुजरता है!

स्थायी समाधान का 'दावा': हर चुनाव और हर योजना के उद्घाटन पर यह 'स्थायी समाधान' शब्द किसी जड़ी-बूटी की तरह छिड़का जाता है। 70 साल पुरानी समस्या का दावा तो 'स्थायी' है, लेकिन देखना यह है कि यह नई पाइपलाइन कितने साल टिकती है, या फिर अगले साल की पहली ही बारिश में यह 'दावा' भी सीवर के पानी में तैरता हुआ नज़र आएगा।एक कड़वी बात:मेयर और विधायक जी ने भूमि पूजन तो बड़े जोर-शोर से रामलीला मैदान में कर दिया, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब जनता को नल खोलने पर सचमुच साफ पानी मिलेगा, न कि सीवर मिश्रित 'अमृत'। तब तक भेलूपुर की जनता सड़कों पर होने वाली खुदाई और ट्रैफिक जाम को 'विकास का प्रसाद' समझकर ग्रहण करने के लिए तैयार रहे!

महादेव 🙌

#वाराणसी #मोदी

बधाई का ‘टैक्स’ और लाचार खुशियां कहते हैं कि बेटियां घर में लक्ष्मी का रूप बनकर आती हैं। हमारे घर भी लक्ष्मी आई, तो चारो...
22/09/2026

बधाई का ‘टैक्स’ और लाचार खुशियां

कहते हैं कि बेटियां घर में लक्ष्मी का रूप बनकर आती हैं। हमारे घर भी लक्ष्मी आई, तो चारों तरफ खुशियों का माहौल था। हर कोई मुस्कुरा रहा था, लेकिन तभी दरवाजे पर एक ऐसी ‘सशस्त्र सेना’ ने दस्तक दी, जिसके आगे अच्छे-अच्छे सूरमाओं के पसीने छूट जाते हैं। जी हां, हमारे आंगन में किन्नर पधार चुके थे।

परंपरा कहती है कि किन्नर दुआएं देने आते हैं, लेकिन आज की हकीकत यह है कि वे दुआओं का 'प्रीपेड रिचार्ज' करवाने आते हैं, और वह भी अपनी मर्जी के महंगे प्लान के साथ!

जैसे ही उन्हें पता चला कि घर में बेटी हुई है, उनके चेहरों पर दुआओं से ज्यादा 'रिकवरी एजेंट' वाली चमक आ गई। उन्होंने सीधे पांच अंकों वाली एक ऐसी धनराशि की मांग रख दी, जिसे सुनकर लगा कि शायद वे बच्ची का नामकरण करने नहीं, बल्कि उसका कॉलेज फंड एडवांस में लेने आए हैं। जब हमने विनम्रतापूर्वक वाराणसी प्रशासन और पुलिस की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए कहा कि सरकार ने नेग की सीमा तय की है, तो उनका रूप बदल गया।

फिर शुरू हुआ कुतर्कों का वह दौर, जिसके सामने देश के बड़े से बड़े वकील भी फेल हो जाएं। ताली बजाने की गति के साथ उनकी भाषा का स्तर भी नीचे गिरने लगा। जो जुबान कुछ देर पहले 'जुग-जुग जियो' कहने के लिए खुली थी, वह अब अभद्रता और ऐसी गंदी बातों की बौछार कर रही थी कि कान बंद करने पड़ जाएं।

देश में इनकम टैक्स, जीएसटी और न जाने कितने टैक्स हैं, जिनसे बचने के लिए सरकार नियम बनाती है। लेकिन इस 'बधाई टैक्स' का कोई ऑडिट नहीं होता। यहां न तो कोई रसीद मिलती है और ना ही कोई डिस्काउंट। अगर आप इनके मनमुताबिक पैसे न दें, तो ये अपनी दुआओं को तुरंत 'श्राप' के सॉफ्टवेयर में अपग्रेड करने की धमकी देने लगते हैं। सवाल यह उठता है कि क्या किसी की दुआएं इतनी कमजोर और बिकाऊ हो सकती हैं कि चंद कागजी नोट कम मिलने पर वे बददुआ में बदल जाएं? संस्कृति और परंपरा के नाम पर चल रही यह गुंडागर्दी आखिर कब तक चलेगी?

सरकार व प्रशासन ने ट्रांसजेंडर टॉयलेट व नियम तो बना दिए हैं कि शादी पर ₹1100 और बच्चे के जन्म पर ₹500 से ज्यादा जबरन नहीं लिया जा सकता, लेकिन इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए जब ये लोग घर में घुसकर हंगामा करते हैं, तो शरीफ इंसान अपनी इज्जत बचाने के लिए झुक जाता है। आज जरूरत इस बात की है कि समाज इस अभद्रता के खिलाफ एकजुट हो, क्योंकि खुशियां कभी किसी के दबाव या डर की मोहताज नहीं होनी चाहिए।

बधाई मांगना कभी एक लोक-परंपरा थी, जहाँ दुआओं की महत्ता होती थी और पैसों की हैसियत महज़ एक शगुन की। लेकिन आज के 'आधुनिक' किन्नर समाज ने इस पवित्र परंपरा को एक हाई-प्रोफाइल 'रिकवरी बिजनेस' में बदल दिया है। ऐसा लगता है कि अब दुआएं दिल से नहीं, बल्कि सीधे बैंक के लॉकर से निकलती हैं।

आज के कुछ गुटों का रवैया देखकर लगता है कि उन्होंने बाकायदा एक 'प्राइवेट लिमिटेड कंपनी' खोल ली है। शहर के वार्ड और मुहल्ले इनके 'बिजनेस टेरिटरी' (व्यापारिक क्षेत्र) बन चुके हैं, जहाँ किसी दूसरे गुट की एंट्री का मतलब है—गैंगवार!

किन्नर समाज के लिए सोचने वाली बात यह है:

अगर पाँच अंकों की रकम मिली, तो दुआओं का नेटवर्क 'फुल 5G' स्पीड से काम करेगा। और अगर किसी गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार ने अपनी जेब के हिसाब से शगुन थमा दिया, तो दुआएं तुरंत 'बददुआ और अभद्रता' के वायरस में बदल जाती हैं। क्या दुआओं का कोई 'मिनिमम सपोर्ट प्राइस' (MSP) होता है?
ताली की गूँज बनाम खौफ: किसी ज़माने में आपके आने की ताली सुनकर लोग खुश होते थे कि घर में कोई मंगल काम होने वाला है। आज लोग ताली की आवाज़ सुनते ही दरवाज़े और खिड़कियाँ ऐसे बंद कर लेते हैं जैसे कोई टैक्स वसूलने वाला 'विजिलेंस दस्ता' आ गया हो। सम्मान की जगह खौफ पैदा करना कहाँ की समझदारी है?
संस्कार और भाषा की गिरावट: समाज में आपकी पहचान एक विशिष्ट और पूजनीय स्थान की थी। लेकिन सरेआम गंदी बातें करना, गाली-गलौज करना और अभद्रता पर उतर आना आपके अपने ही समाज की गरिमा को तार-तार कर रहा है।

एक कड़वा सच:जिस आदर और अधिकारों (Transgender Rights) के लिए सिनेमा से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी गई, उसे चंद लालची गुटों की बदतमीजी सड़क पर नीलाम कर रही है। जब तक आप अपने ही समाज के भीतर बैठे इन 'वसूली भाईयों' को नहीं रोकेंगे, तब तक आम जनता के दिल में आपके प्रति सम्मान की जगह सिर्फ डर और नफ़रत ही बचेगी। सच्ची दुआ वो है जो स्वेच्छा से मिले ₹1100 में भी उतनी ही शिद्दत से निकले, जितनी ₹10,000 में निकलती है। वरना ज़बरदस्ती छीनी गई रकम को 'नेग' नहीं, 'उगाही' कहते हैं!

अंत में बस इतना ही रुपए-पैसे तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन जो सम्मान एक बार चला जाए, वह दोबारा लौटकर नहीं आता। असली नेग वो है जो इंसान अपनी खुशी से, मुस्कुराते हुए आपकी झोली में डाले, चाहे वह एक छोटा सा सिक्का ही क्यों न हो। डर की छांव में वसूली गई रकम से कभी किसी का घर नहीं फलता-फूलता। काश, यह समाज फिर से अपनी उसी पुरानी गरिमा को पहचान पाए, जहाँ पैसों की भूख से बड़ी दुआओं की ताकत हुआ करती थी।

महादेव सद्बुद्धि दे 🙌

#किन्नर #वाराणसी #ट्रांसजेंडर

11/09/2026

गुटखा बेचने वालों का भी कमाल है गुरु—पहले मुँह में मसाला डालो, फिर उसी मुँह से समाजसेवा, स्वास्थ्य और जागरूकता के भाषण सुनो! 😂
व्यापार ऐसा कि कमाई भी आपकी, बीमारी भी आपकी और जागरूकता का कार्यक्रम भी आपका!
बस जनता सोच रही है—गुटखा छोड़ें या पहले इनकी मार्केटिंग की कला समझें? 😏

10/09/2026

“अमेरिका में चुनावी मौसम आया तो ट्रंप जी ने भी ‘लाड़ला अमेरिकन योजना’ निकाल दी—वोट दो और 5000 डॉलर लो! 😂
लगता है अब लोकतंत्र में Manifesto नहीं, Cashback Offer चलेगा…
बस अगली बार वोट डालने से पहले UPI PIN भी न माँग लें! 🤣🇺🇸”

वाह मोदीजी वाह 😂🤣🤣

#मोदी

मित्रो रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं चाहिए भले वो मोदी एक्ट में फंसा के ही मिले ।महादेव 🙌    #युवाओंकीआवाज  #रोजगार        ...
10/09/2026

मित्रो रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं चाहिए भले वो मोदी एक्ट में फंसा के ही मिले ।

महादेव 🙌

#युवाओंकीआवाज #रोजगार #मोदी

फीस का जाति से क्या लेना देना?फीस आर्थिक आधार पर होना चाहिए गुरुदेख लो भक्तों लेकिन तुम थाली और ताली बजाते हुए मोदी मोदी...
10/09/2026

फीस का जाति से क्या लेना देना?

फीस आर्थिक आधार पर होना चाहिए गुरु

देख लो भक्तों लेकिन तुम थाली और ताली बजाते हुए मोदी मोदी का 108 माला जरूर जपना ये आदमी काशी का सांसद लेकिन देश में असमानता को बढ़ावा दिए जा रहा है ये अगड़ा बनाम पिछड़ा करवा के मानेंगे ।

सांसद महोदय Narendra Modi आप तो बांटे जा रहें एक रहेंगे तो नेक रहेगा नारा भी अब जुमला ही लग रहा है आपका 2024 से आपका समय आपके लक्षण ठीक नहीं लग रहे हैं बाकी महादेव आपको सद्बुद्धि प्रदान करें।

महादेव 🙌

#मोदी #युवाओंकीआवाज #रोजगार

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