21/02/2026
चार दिन की ज़िंदगी बताई गई थी… लेकिन लोग वही EMI, वही नौकरी, वही “कल से जिम शुरू” वाला वादा करते-करते 30 साल निकाल दे रहे हैं।
कभी-कभी तो शक होता है कि कहीं हम गलती से अमर तो नहीं हो गए? 🤔
सुबह उठो – वही चाय, वही ट्रैफिक, वही बॉस का ज्ञान।
शाम को आओ – वही मोबाइल, वही रील, वही “बस पाँच मिनट और”…
लगता है भगवान ने ऊपर से कहा होगा –
“चार दिन” का मतलब था चार फेज —
बचपन में शरारत,
जवानी में मोहब्बत,
शादी में जिम्मेदारी,
और बुढ़ापे में दवाई!
लेकिन हम तो हर फेज में टेंशन को ही मेन कैरेक्टर बना बैठे हैं।
ज़िंदगी चार दिन की है या चालीस साल की —
कन्फ्यूजन तो बना हुआ है,
पर इतना तय है कि अगर ऐसे ही चलता रहा
तो ऊपर वाले को भी लगेगा —
“अरे ये लोग तो ट्रायल वर्ज़न में ही पूरी लाइफ निकाल दे रहे हैं!” 😆
इसलिए भाई, थोड़ा हँसो, थोड़ा जीयो…
वरना कहीं सच में अमर हो गए तो
इतनी बोरिंग लाइफ कौन झेलेगा? 😂