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Aamit.AI "समय,पैसा,प्यार या व्यापार उनपर ही लुटाइए जो भरोसे के काबिल हों !"

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के निवेश निर्णयों से खुद को अलग कर लिया है। उ...
10/06/2026

राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन राजेश मेहता ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के निवेश निर्णयों से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने कहा कि स्थिति चाहे जो भी हो, आम खुदरा शेयरधारकों को फायदा ही होगा। कंपनी पर रेगुलेटरी प्रेशर और समस्याओं में घिरी गोल्‍ड जूलरी कंपनी में एलआईसी के निवेश को लेकर चिंताओं के बीच उन्होंने यह बात कही।

मेहता ने कहा, 'एलआईसी ने ये शेयर कल या पिछले साल नहीं खरीदे हैं। एलआईसी की ये खरीदारी लगभग 20 सालों की अवधि में हुई है। एलआईसी ने ये शेयर खुले बाजार से शेयर बाजार से खरीदे हैं।'

10/06/2026

यदि आप स्वयं खतरे में हैं 2 तरीके किडनैप की स्थिति में...
तुरंत 112 पर कॉल करें (भारत की आपातकालीन सेवा)।
अपनी लोकेशन किसी भरोसेमंद व्यक्ति को शेयर करें।
यदि बात करने का मौका न हो, तो मैसेज, WhatsApp Live Location या कोई पूर्व-निर्धारित कोड वर्ड भेजें।
सार्वजनिक जगह की ओर बढ़ें, लोगों का ध्यान आकर्षित करें।
वाहन में जबरन बैठाने की कोशिश हो तो हर संभव तरीके से प्रतिरोध करें और शोर मचाएं।
यदि किसी का अपहरण हो चुका है
तुरंत पुलिस (112/नजदीकी थाना) को सूचना दें।
आखिरी बार कब और कहाँ देखा गया था, यह जानकारी नोट करें।
मोबाइल नंबर, वाहन नंबर, CCTV फुटेज और गवाहों की जानकारी जुटाएं।
फिरौती या धमकी भरे कॉल आने पर शांत रहें और पुलिस को सूचित करें।
सोशल मीडिया पर अपुष्ट जानकारी फैलाने से बचें, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।
यदि अपहरणकर्ता के कब्जे में हों
शांत रहने की कोशिश करें।
आसपास की जानकारी (स्थान, आवाजें, रास्ते, लोगों की संख्या) याद रखने का प्रयास करें।
अपहरणकर्ताओं को उकसाने या अनावश्यक बहस से बचें।
सुरक्षित अवसर मिलने पर अपनी स्थिति का संकेत दें।

भारत में अक्सर खेल, मनोरंजन और राजनीति की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन कई बार देश के युवा वैज्ञानिकों की उपलब्धिय...
09/06/2026

भारत में अक्सर खेल, मनोरंजन और राजनीति की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन कई बार देश के युवा वैज्ञानिकों की उपलब्धियां उतनी चर्चा नहीं पातीं जितनी उन्हें मिलनी चाहिए। नोएडा के 14 वर्षीय दक्ष मलिक ने कम उम्र में एक एस्टेरॉयड की खोज कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस उपलब्धि के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सराहना हुई और उन्हें उस खोज से जुड़े नामकरण की प्रक्रिया में भी सम्मान मिला।
जहां दुनिया भर के लोग उनकी प्रतिभा की तारीफ कर रहे हैं, वहीं भारत में अभी भी बहुत से लोग उनके नाम और उपलब्धि से अनजान हैं। यह कहानी याद दिलाती है कि देश की असली ताकत उसके युवा वैज्ञानिक, शोधकर्ता और नवाचार करने वाले बच्चे हैं, जिन्हें पहचान और प्रोत्साहन की जरूरत है।

देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के बीच परिवहन विशेषज्ञों ने नई और व्यापक शहरी...
09/06/2026

देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि के बीच परिवहन विशेषज्ञों ने नई और व्यापक शहरी परिवहन नीति की आवश्यकता पर जोर दिया है।इंडियन स्कूल आफ पब्लिक पालिसी (आइएसपीपी) ने सोमवार को वर्ष 2006 में लागू राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति की समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की।आइएसपीपी द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारत में पंजीकृत वाहनों की संख्या वर्ष 2006 में लगभग नौ करोड़ थी, जो वर्ष 2025 तक बढ़कर 41.3 करोड़ से अधिक हो गई है। पिछले दो दशकों में करीब 32 करोड़ नए वाहन सड़कों पर आए हैं, जिससे शहरी परिवहन व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा है।

यह समीक्षा आइएसपीपी के सेंटर फार अर्बन ट्रांजिशन (आइसीयूटी) के माध्यम से की जा रही है। कार्यक्रम में परिवहन, शहरी विकास और सार्वजनिक नीति से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। समीक्षा के प्रारंभिक निष्कर्षों में कहा गया है कि सार्वजनिक परिवहन और गैर-मोटर चालित साधनों को बढ़ावा देने का लक्ष्य अपेक्षित स्तर तक हासिल नहीं हो पाया।

विशेषज्ञों ने बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2026 में नई शहरी परिवहन नीति लागू करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में बताया गया कि मौजूदा नीति के तहत कई शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई, लेकिन उन्हें समग्र परिवहन नेटवर्क और भूमि उपयोग योजनाओं के साथ पर्याप्त रूप से नहीं जोड़ा गया।

इसके अलावा पार्किंग प्रबंधन, शहरी माल परिवहन, छोटे शहरों की आवाजाही संबंधी आवश्यकताएं, एप-आधारित परिवहन सेवाएं, ई-कामर्स लाजिस्टिक्स तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

आइएसपीपी के डीन और सह-संस्थापक डा. पार्थ शाह ने कहा कि भारत में अब तक कोई व्यापक शहरीकरण नीति नहीं रही है। उन्होंने कहा कि शहरों को लंबे समय तक विकास की प्राथमिकता में पीछे रखा गया, जिसके कारण 2006 की नीति जिन समस्याओं को हल करने के लिए बनाई गई थी, उनमें से कई आज और अधिक गंभीर हो गई हैं।

मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े प्रयास को नाकाम कर दिया। बैंकॉक से लौटे एक या...
08/06/2026

मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कस्टम विभाग ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े प्रयास को नाकाम कर दिया। बैंकॉक से लौटे एक यात्री के सामान की जांच के दौरान अधिकारियों को उसके सूटकेस से 29 दुर्लभ और विदेशी जंगली जीव बरामद हुए। सभी जीवों को बेहद सीमित जगह में बंद कर छिपाकर लाया जा रहा था।

क्या है पूरा मामला?

कस्टम अधिकारियों को यात्री की गतिविधियों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसके सामान की गहन जांच की गई। जांच में सूटकेस के भीतर कई विदेशी प्रजातियों के जीव पाए गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ये जीव भारत में अवैध रूप से बेचने या पालतू जानवरों के अवैध व्यापार के लिए लाए जा रहे थे।

क्यों गंभीर है यह मामला?

🦎 विदेशी वन्यजीवों की तस्करी दुनिया के सबसे बड़े अवैध कारोबारों में से एक मानी जाती है।

🌍 ऐसे जीव स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन सकते हैं और कई बार दुर्लभ बीमारियों के वाहक भी हो सकते हैं।

⚖️ भारत में वन्यजीव संरक्षण कानूनों और अंतरराष्ट्रीय CITES समझौते के तहत बिना अनुमति ऐसे जीवों का आयात प्रतिबंधित है।

आगे क्या होगा?

आरोपी यात्री को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।

यह पता लगाया जा रहा है कि उसके पीछे कोई बड़ा तस्करी नेटवर्क तो नहीं है।

बरामद सभी जीवों की पहचान और स्वास्थ्य जांच की जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार इन जीवों को उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

बड़ी तस्वीर

पिछले कुछ वर्षों में भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर विदेशी सांप, कछुए, गिरगिट, मकड़ियां और अन्य दुर्लभ जीवों की तस्करी के कई मामले सामने आए हैं। सोशल मीडिया और विदेशी पालतू जीवों की बढ़ती मांग के कारण यह अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है।

यह कार्रवाई केवल एक यात्री की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

🦎✈️🌍

भारतीय रेलवे अगस्त 2026 से अपने लगभग 40 साल पुराने Passenger Reservation System (PRS) को नए AI-सक्षम प्लेटफॉर्म से बदलने...
08/06/2026

भारतीय रेलवे अगस्त 2026 से अपने लगभग 40 साल पुराने Passenger Reservation System (PRS) को नए AI-सक्षम प्लेटफॉर्म से बदलने जा रही है। इसका उद्देश्य टिकट बुकिंग को तेज, स्मार्ट और अधिक पारदर्शी बनाना है। �
Akashvani News +1
क्या-क्या बदलेगा?
🎫 1. टिकट बुकिंग की क्षमता बढ़ेगी पुराना सिस्टम 1986 से चल रहा था। नए प्लेटफॉर्म में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे एक साथ बहुत अधिक टिकट बुक किए जा सकेंगे और वेबसाइट/ऐप पर लोड कम होगा।

तमिलनाडु सरकार ने छात्रों के लिए एक बड़ी और राहतभरी पहल की शुरुआत की है। नई व्यवस्था के तहत अब स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर यात...
08/06/2026

तमिलनाडु सरकार ने छात्रों के लिए एक बड़ी और राहतभरी पहल की शुरुआत की है। नई व्यवस्था के तहत अब स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर यात्रा करने वाले छात्र राज्यभर की सरकारी बसों में मुफ्त सफर कर सकेंगे। इस फैसले का उद्देश्य विद्यार्थियों पर पड़ने वाले परिवहन खर्च को कम करना और शिक्षा तक उनकी पहुंच को और आसान बनाना है।
इस योजना से विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लाखों छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। कई लोगों का मानना है कि ऐसी पहल न केवल शिक्षा को बढ़ावा देती है बल्कि विद्यार्थियों को नियमित रूप से स्कूल जाने के लिए भी प्रोत्साहित करती है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले की जमकर सराहना हो रही है और लोग मांग कर रहे हैं कि देश के अन्य राज्यों में भी इस तरह की योजनाएं लागू की जाएं।

क्या ज़रूरत थी मसीहा बनने की?कोचिंग चल रही थी, नाम था, शोहरत थी, लाखों छात्र थे, ऑनलाइन दुनिया में दबदबा था। आराम से कॉर...
08/06/2026

क्या ज़रूरत थी मसीहा बनने की?

कोचिंग चल रही थी, नाम था, शोहरत थी, लाखों छात्र थे, ऑनलाइन दुनिया में दबदबा था। आराम से कॉर्पोरेट मॉडल बनाते, लाखों की फीस लेते, बड़े-बड़े कैंपस खड़े करते, हॉस्टल बनाते, पैकेज बेचते और करोड़ों कमाते।

लेकिन किसी ने सोचा कि शिक्षा सिर्फ़ कारोबार नहीं, अवसर भी हो सकती है।

₹200-300 में पढ़ाने की ज़िद क्यों की?

OPD ₹20 में, ECG ₹25 में, X-Ray ₹35 में और मामूली शुल्क पर जाँच कराने वाला अस्पताल बनाने की ज़रूरत क्या थी?

हज़ारों छात्रों के बीच रहना, उनके सुख-दुख में शामिल होना, समाज के लिए कुछ लौटाने की कोशिश करना... शायद यही सबसे बड़ी गलती थी।

हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि जब कोई व्यक्ति अपनी पहचान से ऊपर उठकर समाज के लिए काम करता है, तब कुछ लोग उसके काम से ज़्यादा उसकी पहचान का हिसाब लगाने लगते हैं।

इतिहास गवाह है, समाज अक्सर अपने सबसे लोकप्रिय लोगों की परीक्षा तब लेता है, जब वे सबसे अधिक लोगों के काम आ रहे होते हैं।

बाकी, आरोप और मुकदमे अपनी जगह हैं, और कानून अपना काम करेगा।

लेकिन एक सवाल फिर भी रहेगा...

क्या हम लोगों को उनके काम से पहचानेंगे, या सिर्फ़ उनके नाम से?

एक पल के लिए सोचिए... जब कोई इंसान मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहा हो, तब उसे बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालना कितना ब...
07/06/2026

एक पल के लिए सोचिए... जब कोई इंसान मौत और जिंदगी के बीच जूझ रहा हो, तब उसे बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालना कितना बड़ा साहस होता है। कांस्टेबल दीपक सोलंकी ने भी कुछ ऐसा ही किया। वर्दी में ही गहरे तालाब में छलांग लगाकर उन्होंने एक डूबती हुई लड़की की जान बचाई और यह साबित कर दिया कि कर्तव्य सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान है।

जिस समय हर सेकंड कीमती था, उस समय उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना मदद का हाथ बढ़ाया। अगर थोड़ी सी भी देर हो जाती, तो शायद एक परिवार अपनी बेटी को हमेशा के लिए खो देता। ऐसे मौके पर लिया गया फैसला किसी पुरस्कार या सम्मान से कहीं बड़ा होता है, क्योंकि वहाँ दांव पर किसी की पूरी जिंदगी लगी होती है।

कई बार असली हीरो फिल्मों में नहीं, हमारे आसपास होते हैं। वे बिना किसी उम्मीद के अपना फर्ज निभाते हैं और किसी की दुनिया उजड़ने से बचा लेते हैं। ऐसे बहादुर लोगों को जितना सम्मान मिले, उतना कम है। उनके साहस और मानवता को दिल से सलाम।

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