05/06/2026
बहुत दिन के बाद फेर से कवि रूप मेंः आजु हिमालयन लिटरेचर फेस्टिवल में आपन भोजपुरी कविता ‘जीवन लक्ष्य’ पढ़नी ।
लक्ष्य एके गो की आज से बेहतर बिहान होखो
सब आदमी के आदमी लाखा सम्मान होखो
जात, रंग, भाषा, धर्म के नाम पर, केकरो ना अपमान होखो
सब आदमी के आदमी लाखा सम्मान होखो
दया के पात्र ना होखो केहु, निफिकिर होके दौडो मन
उत्सव मनाओ हरक्षण हियरा, रहो हरदम कञ्चन तन
भातृत्व के राग अलापो, सरल सजग सक्षम जीवन
जिवन्त स्वतन्त्र मस्तिष्क, रहो सब में भाव अपनापन
प्रेम ही सार हर धर्म के, बात ई सबका ज्ञान होखो
सब आदमी....
ना बांटो दुनिया के, घर के चौकठ भा संस्कृति के सिवान
उँच नीच के भाव ना होखो, गुण के होखो सगरो सम्मान
मानवता के कर्तव्य पथ पर, मानव मात्र सबकर पहचान
इश्वर अल्लाह नाही दुजा, दुजा नाही गीता बाइबल कुरान
सत्य ही धर्म, कर्म ही पूजा के सगरो अर्जान होखो
सब आदमी....
ना कबो माई के आँचर रोओ, ना कहियो सहमो बचपन
ना ढहो कबो घर प्रेम के, ना जरो कहो शान्त मधुवन
केकरो जमीर कबो ना सुतो, बदरी ना छेको सोच श्रृजन
परम आत्मा के तलाश में बिचरो, अन्तरआत्मा में पवन
खाली सफलता ही ना, जीवन लक्ष्य समाधान होखो
सब आदमी.....
#कविता_आनन्द_गुप्ता