01/01/2026
पर्देस में जीना आसान नहीं, यह बात लफ़्ज़ों में उतरती नहीं,
जो रोज़ टूटता है भीतर से, उसकी कहानी बाहर बिखरती नहीं।
माँ की दुआ, पत्नी की हँसी, तस्वीरों में ही कैद रह जाती है,
सीने में समुंदर भर दुख होता है, आँखों तक आते-आते थम जाती है।
किससे कहे अपनी हार यहाँ, हर कोई अपनी मजबूरी में है,
दर्द को ओढ़े मुस्कान पहनकर, वह आदमी रोज़ मज़दूरी में है।
हँसता चेहरा ही पहचान बनी, आँसू रखना गुनाह सा लगता है,
पर्देस सिखा देता है इंसान को, चुप रहना भी एक कला लगता है।