Vigilant Indians

Vigilant Indians Vigilant Indian is small and Modest step towards creating a Community of cautious, Vigilant and aler Indians Who keep a Watch on Internal enemies

11/23/2025

आपदा में अवसर....
यही तो चाहते थे.. मोदी,योगी,अमित शाह,अजित डोभाल....
कि बिना विदेशी मुस्लिम ताक़तों के भारत में जन्मे, भारत में पले बढ़े, भारत में उच्च शिक्षा प्राप्त, भारत में सरकारी नौकरी में सेट मुसलमानों का सिंडिकेट एक ऐसी बड़ी गलती कर बैठे....
कि मोदी के द्वारा तंत्र के हाथ खोल दिये जा सके.....

और यही गलती कर भी दी भारत के पढ़े लिखे उच्च शिक्षा प्राप्त मुसलमानों के धड़े ने......

पिछले 11 वर्षों में एक नया खेला हुआ है मुस्लिमों के भीतर ही....
जो कि एक निर्धारित रणनीति के तहत अंजाम दिया गया....
2014 से पहले गरीब अनपढ़ मुसलमानों का इस्तेमाल किया जाता था पढ़े लिखे मुसलमानों द्वारा भारत के खिलाफ....

परन्तु बुलडोजर एक्शन के ब्रह्मास्त्र ने गरीब मुसलमानों को हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़ में भाग लेने से किनारा करने के लिए विवश कर दिया गया।।।।
आर्थिक नुकसान गरीब मुसलमान सहन नहीं कर पाए...
शुरू शुरू में तो मकान टूटने पर मुस्लिम संगठनों द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई....
परन्तु ताबड़तोड़ बुलडोजर एक्शन प्लान के कारण मुस्लिम खैरातअलियों के भी हाथ पाँव फूलने लग गए और आर्थिक सहायता प्रदान करने में ढिलाई पड़ने लग गई...

इसके कारण गरीब मुसलमानों ने अपने बच्चों को काबू में करना शुरू कर दिया.....
और मोदी के हटने तक शांत रहने की नीतियां अपनाना शुरू कर दिया....
चूँकि अमीर मुसलमानों के ऊपर विदेशी दबाव डाला जा रहा था भारत में मोदी को अस्थिर करने का....
और दूसरी ओर गरीब मुसलमानों द्वारा सहयोग नहीं मिल रहा था तो एकाएक पढ़े लिखे मुसलमानों ने विदेशी मुस्लिम ताकतों के दबाव में खुद ही आतंकी हमला करने के लिए मजबूर हो गए....

इस बार हुए इस्लामिक आतंकी हमले में शामिल पूरा सिंडिकेट भारत में ही जन्मा हुआ है और मदरसाच्छाप मानसिकता से ओत प्रोत भी है....
शुरुआत में सरकारी एजेंसियों को इन सभी पर सिर्फ कड़ी निगरानी रखने की रणनीति बनाई गई और इन्हें हजारों किलो विस्फोटक खरीदने, इधर उधर इकट्ठा करने व आपस में पूरा आतंकी नेटवर्क तैयार करने दिया गया....

जैसे ही ये प्लान के अंतिम चरण में पहुँचने ही वाले थे कि एकाएक कुछ ही घण्टो में अलग अलग स्थानों से इन पढ़े लिखे जिहादियों की धरपकड़ व विस्फोटक सामग्री की बरामदगी की जाने लगी......

एकाएक धरपकड़ होने से जिहादियों में हड़कंप मच गया और जो लोग गिरफ्तार नहीं हो पाए थे उन्होंने विस्फोटक सामग्री अलग थलग करने का काम अपने अपने हिसाब से ही करना शुरू कर दिया.....

दिल्ली बम विस्फोट इसी आनन फानन की हड़बड़ी का ही नतीजा था....

कई पकड़ लिए गए और कुछेक बम विस्फोट में मर गए और उसके बाद बचे खुचों को भी दबोच लिया जा रहा है...

असली खेल अब शुरू किया जाएगा.....
अबकी बार पाकिस्तान को सबक सिखाने की बजाय भारत में कांग्रेस पोषय आधे मोर्चे के खुंदको पर सर्जिकल स्ट्राइक की जानी शुरू होगी.....

जहाँ पर आज तक पुलिस,सेना व सुरक्षा एजेंसियों का घुसना बड़ा मुश्किल होता था अब इस आतंकी हमले के बाद उन दड़बों में भी हाथ डाल लिया जाएगा......

भारत के मुसलमानों की पूरी तरह से कागजाति प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी....
कितने मुल्ले, मौलबी,कितने मदरसे, कितनी मस्जिदें, कितनी आबादी इनमें पढ़ रही है और कौन कौन अपने बच्चों को इन मदरसों में पढ़ा कर गजवा के लिए तैयार कर रहे हैं...
अब सब कुछ खंगाला जाना शुरू किया जाएगा...

दिल्ली में मुस्लिम आतंकी हमले के बाद भारत में हिन्दूओ द्वारा आधे मोर्चे की लड़ाई शुरू कर दी गई है....

मोदी सरकार ने सक्षम नेताओं व सक्षम अधिकारियों व एजेंटों के हाथ खोल दिए हैं....
भारत के आंतरिक मामलों में विश्व की कोई ताकत दखलंदाजी करने की हिम्मत नहीं करेगी.....

आतंकवाद के खिलाफ मोदी की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर आ गई है हिन्दूओ......

मोदी ने अपना काम कर दिया है
अब मोदी का तंत्र अपना काम शुरू कर चुका है.....
हैरान मत होइएगा कि आपके शहर में हो सकता है कि आपके गली मोहल्लों में भी तंत्र के लोगों द्वारा आधे मोर्चे की निगरानी रखने की आहट सुनाई दे पड़े.....

वैश्विक ताकतों को फटकारने के बाद अब मोदी ने स्व.CDS विपिन रावत जी द्वारा चेताए गए आधे मोर्चे के गृहयुद्ध के जिहादियों को कुचलने का काम शुरू कर दिया गया है....

भारत के मुसलमानों ने मोदी को मौका प्रदान कर दिया है....
अब सबके गिरेबाँ खंगाले जाएंगे और गान पर लात मारकर जिहादियों को मिट्टी में मिलाया जाएगा....

करोड़ों मुस्लिम घुसपैठिए तो जान बचाने व गिरफ्तारी से बचने के लिए भाग खड़े होंगे....
बाकी के जिहादियों को मोदी का तंत्र सम्भाल लेगा......
नोबत आई तो गली मोहल्लों में तुम भी तैयार हो जाना भारत माँ की सन्तानों.....
हर हर महादेव, जय जय श्री राम व अपने आराध्यों के जातीय युद्धघोशों की जयकार करते हुए मोर्चा संभाल लेना माँ भारती की रक्षा के लिए....
अपने अस्तित्व व अपने बच्चों की रक्षा के लिए तैयार हो जाना...

क्योंकि जिहादियों द्वारा पतन के अंतिम दौर में जरूर कोई न कोई डायरेक्ट एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा हिन्दूओ के खिलाफ 1946 के बंगाल हिन्दू नरसंहार की तरह ही....

आधे मोर्चे पर युद्ध आरम्भ कर दिया गया है.....
अपने हिस्से की तैयारियां शुरू कर लेना भारत माँ के सपूतों....

11/22/2025

The moment the Dubai Air Show crash happened, a predictable campaign began against India and indigenous Tejas. Social media handles from Pakistan and its familiar online ecosystem rushed to declare that the HAL Tejas is “unsafe,” “under-capable,” and “not ready for global stages.” The sa...

11/15/2025
11/15/2025
11/15/2025

प्रिय साथी Vigilant Indians
धन्यवाद आपके संदेश, और साथ के लिए, यह बात समझने के लिए कि हमारे देश को इस्लामिक जेहाद से खतरा है,
इसका मतलब यह है कि भारत के मुसलमान खतरे में हैं।
खतरा illegal प्रवास से है जो जेहादी और कट्टर पंथी मानसिकता के साथ आएगा।

जो मुसलमान हमें गाली दे रहे हैं, वे या तो यह नहीं समझते हैं कि पोस्ट स्वदेशी मुसलमानों के खिलाफ नहीं है, या वे अब इस्लामिक जेहाद का हिस्सा हैं।

आपसे अनुरोध है कि इस आर्टिकल को फैलाने के लिए आने वाले सप्ताह में कम से कम तीन बार अपनी time line पर साझा करें।

यह किसी भी चीज पर खर्च नहीं करेगा, लेकिन अधिक भारतीयों तक पहुंच जाएगा जो खतरे से अनजान हैं।

यह हमारी अगली पीढ़ी के लिए है न कि हमारे लिए।
आज नहीं जागे तो हमारा कल भी ऐसा ही होगा।
आज आप जानते है कि। कैसे केरल, वेस्ट बंगाल और कश्मीर में एक एक कर के हिन्दुओं को मारा और भगाया जा रहा।
देखिए जो औरते बुर्के में रहती है कैसे देश की राजधानी के सड़क में दिन रात बैठी है।
इससे आप को नहीं लगता कि कितने कट्टर और देश विरोधी गुट है।

इनकी कोशिश देश के चार कोनों में मुस्लिम बहुल होना है, ताकि आराम से यह देश में मुसलमान को इंपोर्ट कर सके।

गौर फरमाइए
उत्तर में कश्मीर
पश्चिम में गुजरात,पंजाब और राजस्थान
दक्षिण में केरल और पूर्व में बंगाल और असम ।
क्या यह मात्र एक संयोग है?
यह ब्लॉग किसी भी पार्टी से किसी भी राजनीतिक दान को स्वीकार नहीं करता है और आप जैसे देशभक्त भारतीयों की वजह से बढ़ रहा है।
अग्रिम में समर्थन और शेयरों के लिए धन्यवाद
सतर्क भारत
सूरक्षित भारत

उस पांच सितारा ऑडिटोरियम के बाहर प्रोफेसर साहब की आलीशान कार आकर रुकी , प्रोफेसर बैठने को हुए ही थे कि एक सभ्य सा युगल य...
08/12/2024

उस पांच सितारा ऑडिटोरियम के बाहर प्रोफेसर साहब की आलीशान कार आकर रुकी , प्रोफेसर बैठने को हुए ही थे कि एक सभ्य सा युगल याचक दृष्टि से उन्हें देखता हुआ पास आया और बोला ," साहब , यहां से मुख्य सड़क तक कोई साधन उपलब्ध नही है , मेहरबानी करके वहां तक लिफ्ट दे दीजिए आगे हम बस पकड़ लेंगे । "

रात के साढ़े ग्यारह बजे प्रोफेसर साहब ने गोद मे बच्चा उठाये इस युगल को देख अपने "तात्कालिक कालजयी" भाषण के प्रभाव में उन्हें अपनी कार में बिठा लिया । ड्राइवर कार दौड़ाने लगा ।

याचक जैसा वह कपल अब कुटिलतापूर्ण मुस्कुराहट से एक दूसरे की आंखों में देख अपना प्लान एक्सीक्यूट करने लगा । पुरुष ने सीट के पॉकेट मे रखे मूंगफली के पाउच निकालकर खाना शुरू कर दिया बिना प्रोफेसर से पूछे /मांगे ।
लड़की भी बच्चे को छोड़ कार की तलाशी लेने लगी ।एक शानदार ड्रेस दिखी तो उसने झट से उठा ली और अपने पर लगा कर देखने लगी ।
प्रोफेसर साहब अब सहन नही कर सकते थे ड्राइवर से बोले गाड़ी रोको ,लेकिन ड्राइवर ने गाड़ी नही रोकी बस एक बार पीछे पलटकर देखा , प्रोफेसर को झटका लगा ,अरे ये कौन है उनके ड्राइवर के वेश में ?? वे तीनों वहशियाना तरीके से हंसने लगे , प्रोफेसर साहब को अपने इष्टदेव याद आने लगे ,थोड़ा साहस एकत्रित करके प्रोफेसर साहब ने शक्ति प्रयोग का "अभ्यासहीन " प्रयास करने का विचार किया लेकिन तब तक वह पुरुष अपनी जेब से एक लाइटर जैसा पदार्थ निकाल चुका था और उसका एक बटन दबाते ही 4 इंच का धारदार चाकू बाहर आ चुका था प्रोफेसर साहब की क्रांति समयपूर्व ही गर्भपात को प्राप्त हुई ।

प्रोफेसर साहब समझ चुके थे कि आज कोई बड़ी अनहोनी निश्चित है उन्होंने खुद ही अपना पर्स निकालकर सारे पैसे उस व्यक्ति के हाथ में थमा दिये लेकिन वह व्यक्ति अब उनके आभूषणों की तरफ देखने लगा, दुखी मन से प्रोफेसर साहब ने अपनी अंगूठियां ,ब्रेसलेट और सोने के चेन उतार के उसके हाथ में धर दिए , अब वह व्यक्ति उनके गले में एक और लॉकेट युक्त चैन की तरफ हाथ बढ़ाने लगा । प्रोफेसर साहब याचना पूर्वक बोले - इसे छोड़ दो प्लीज यह मेरे "पुरुखों की निशानी " है जो कुल परंपरा से मुझ तक आई है , इसकी मेरे लिए अत्यंत भावनात्मक महत्ता है । लेकिन वह लुटेरा कहां मानने वाला था उसने आखिर वह निशानी भी उतार ही ली ।
बिना प्रोफ़ेसर साहब के पता बताएं वे लोग उनके आलीशान बंगले के बाहर तक पहुंच गए थे ।
युवक बोला ," लो आ गया घर , ऐसे ढेर सूखे मेवे , कपड़े , पैसा और प्रोफेसर साहब की ल.......
उसकी आँखों मे आई धूर्ततापूर्ण बेशर्म चमक ने शब्द के अधूरेपन को पूर्णता दे दी ।

प्रोफेसर साहब अब पूरे परिवार की सुरक्षा एवं घर पर पड़े अथाह धन-धान्य को लेकर भी चिंतित हो गये उनका रक्तचाप उछाले मारने लगा लेकिन करें भी तो क्या ??
लगे गिड़गिड़ाने ," भैया मैंने आपको आपत्ती में देखकर शरण दी और आप मेरा ही इस तरह शोषण कर रहे हैं यह अनुचित है । ईश्वर का भय मानिए यह निर्दयता की पराकाष्ठा है ।अब तो छोड़ दीजिए मुझे भगवान के लिए ।
प्रोफेसर फूट फूट कर रोने लगे ।।

वे पति पत्नी अपना बच्चा लेकर कार से उतर गये और वह ड्राइवर भी , उनके द्वारा लिया गया सारा सामान उन्होंने वापस प्रोफेसर साहब के हाथ में पकड़ाया और बोले

" क्षमा कीजिएगा सर ! रोहिंग्या मुसलमानों के विषय मे शरणागत वत्सलता पर आज आपके द्वारा उस ऑडिटोरियम मे दिए गए "अति भावुक व्याख्यान" का तर्कसंगत शास्त्रीय निराकरण करने की योग्यता हममें नहीं थी अतः हमें यह स्वांग रचना पड़ा ।
"आप जरा खुद को भारतवर्ष और हमें रोहिंग्या समझ कर इस पूरी घटना पर विचार कीजिए और सोचिये की आपको अब क्या करना चाहिए इस विषय पर । "

वो मूंगफली नही इस देश का अथाह प्राकृतिक संसाधन है जिसकी रक्षार्थ यंहा के सैनिक अपना उष्ण लाल लहू बहाकर करते है सर , मुफ्त नही है यह ।
वो आपकी बेटी/बेटे की ड्रेस मात्र कपड़ा नही है इस देश के नागरिकों के स्वप्न है भविष्य के जिसके लिए यंहा के युवा परिश्रम का पुरुषार्थ करते है ,मुफ्त नही है यह ।
आपकी बेटी / पत्नी मात्र नारी नही है देश की अस्मिता है सर जिसे हमारे पुरुखों ने खून के सागर बहा के सुरक्षित रखा है , खैरात में बांटने के लिए नही है यह ।
आपका ये पर्स अर्थव्यवस्था है सर इस देश की जिसे करोड़ो लोग अपने पसीने से सींचते है , मुफ्त नही है यह ।

और आपके पुरुखों की निशानी यह चैन मात्र सोने का टुकड़ा नही है सर , अस्तित्व है हमारा , इतिहास है इस महान राष्ट्र का जिसे असंख्य योद्धाओ ने मृत्यु की बलिवेदी पर ढेर लगाकर जीवित रखा है , मुफ्त तो छोड़िए इसे किसी ग्रह पर कोई वैज्ञानिक भी उत्पन्न नही कर सकते ।

कुछ विचार कीजिये सर ! कौन है जो खून चूसने वाली जोंक को अपने शरीर पर रहने की अनुमति देता है , एक बुद्धिहीन चौपाया भी तत्काल उसे पेड़ के तने से रगड़ कर उससे मुक्ति पा लेता है ।

उस युवक ने वह लाइटर जैसा रामपुरी चाकू प्रोफेसर साहब के हाथ में देते हुए कहा यह मेरी प्यारी बहन जो आपकी पुत्री है उसे दे दीजिएगा सर क्योंकि अगर आप जैसे लोग रोहिंग्या को सपोर्ट देकर इस देश में बसाते रहे तो किसी न किसी दिन ऐसी ही किसी कार में आपकी बेटी को इसकी आवश्यकता जरूर पड़ेगी

#बांग्लादेशीऔर रोहिंग्या को देश से निकालो....!!

03/20/2024

03/20/2024

आजकल कांग्रेस एक नया खेल खेल रही है।
वह पब्लिक में यह धारणा फैला रही है कि मोदी की जीत सुनिश्चित है।
और उसके
इस झांसे में बहुत से लोग आने भी लगे है।
यह कितना बड़ा खतरा हो सकता है इसे एक सामान्य बुद्धिवाला मनुष्य नहीं समझ सकता।
यह बीजेपी के मतदाताओं को निश्चिंत कर वोट डालने से विरक्त करने की चाल है।
क्योंकि
विपक्षी दलों के परंपरागत वोट तो शतप्रतिशत डलते आए है और इस बार भी डलेंगे।
लेकिन
बीजेपी का कोर वोटर बहुत जल्दी इन षड्यंत्रों के झांसे में आकर मतदान के महत्वपूर्ण दिनों को एक सिंपल हॉलिडे मानकर सपरिवार छुट्टी मनाने बाहर निकल पड़ता है।
यह ट्रेंड शहरों से अब गांवों तक पहुंचने लगा है।
जबकि
बीजेपी का कोर वोटर या कहें कि उसकी ताकत शहरी वोटर ही है।
अब आप अनुमान लगाइये की "मोदी जी की जीत पक्की है।" इस अफीम के नशे में एक बूथ के 5 परिवार भी मतदान के दिन बाहर निकल जाते है तो मिनिमम 15 से 20 वोट का नुकसान हो जाता है।
अब यदि किसी शहर या महानगर में 50 बूथों पर यह अफीम काम कर गई तो गए ना आपके 1000 वोट?
आज जब मोदी जी एक एक सीट के लिए इतना प्रयास कर रहे है।
अपने बूढ़े शरीर को एक बड़े उद्देश्य की प्राप्ति के लिए खपा रहे है तो क्या एक साथ एक शहर के हजारों वोट का नुकसान क्या हमारी मूर्खता का उदाहरण नही होगा ?
अटल जी के समय कांग्रेस यह खेल सफलता पूर्वक खेल चुकी है।
"इंडिया शायनिंग"
के नाम से और अटल जी मात्र कुछ परसेंट वोट की कमी से पुनः सत्ता में आने से चूक गए थे।
और हम सब उसका घातक परिणाम भी भुगत चुके है।
2004 से 2014 के UPA शासन के दौरान देश गुलामी के लगभग लगभग करीब पहुंच ही चुका था।
वह तो भला हो कि सोनिया का वॉइलेंस बिल संसद से पास नही हो पाया वरना देश से सनातन भी खत्म होना तय ही था।
प्रत्येक मोदी समर्थक को यह चुनाव
"डू आर डाई"
"करो या मरो"
की तर्ज पर लड़ना है।
यह चुनाव प्रत्याशी या पार्टी नही लड़ रही है।
यह चुनाव मोदी जी लड़ रहे है और
हमे भी इस लड़ाई में भले ही गिलहरी की तरह का योगदान देना हो पर देना ही है।
इस बार न तो हमे और न ही अपने आसपास हमारे परिचितों सम्बन्धियों को इस बात से निश्चिंत होकर बैठना या बैठने देना है कि मोदी जी की जीत पक्की है।
आप तो यह मानकर भीड़ जाईये की यदि अबकी बार 400 पार से एक सीट भी कम आई तो इसमें हम मोदी की हार होगी।
इसलिए इस चुनाव में शतप्रतिशत वोटिंग करना करवाना आपका ध्येय होना चाहिए।
कांग्रेसियों की अफीम उन्ही को मुबारक हो।
यदि मेरी बात में आपको कुछ दम नजर आता हो तो इस निवेदन को आगे और आगे पहुंचाईए।
अक्षय साखरे
रायपुर छ ग
*हर हर मोदी घर घर मोदी*

03/18/2024

राजकुमारी जॉयमती जिनका इतिहास 19वी सदी में दबा दिया गया
यह ऐसी राजकुमारी जो किसी भी डर के आगे नहीं झुकीं अंत मे अपने प्राण त्याग दिए।
असम राज्‍य पर अहोम राजाओं का शासन था और राज्‍य सन् 1671 से 1681 तक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा था। कई राजाओं के प्रधान सेवकों की अकुशलता ने राज्‍य में परेशानियों को बढ़ा दिया था। यह वह समय था जब लोरा राजा और उनके प्रधानमंत्री लालुकास्‍ला बोरफूकन ने राजगद्दी हासिल करने के लालच में अपने कई उत्‍तराधिकारियों को मरवा दिया था। राजकुमार गोडापानी, जो जॉयमती के पति थे, उनकी हत्‍या की साजिश भी रची जा चुकी थी।

जब लोरा राजा और उनके सिपाही उन्‍हें पकड़ने आए, राजकुमार गोडापानी बचकर निकल गए और नागा हिल्‍स पहुंच गए। इसी समय लोरा राजा ने पत्‍नी जॉयमती को पकड़ लिया। जॉयमती को इस उम्‍मीद में पकड़ा गया था कि वह डर के मारे अपने पति के बारे में राजा को बता देंगी। कई दिनों तक राजकुमारी को 14 दिनों तक इसी मैदान पर टॉचर्र किया गया। कहते हैं कि उन्‍हें उन्‍हें कंटीलें तार के साथ एक कांटे से साथ बांध दिया गया था फिर भी राजकुमारी जॉयमती किसी भी डर के आगे नहीं झुकीं और उन्‍होंने अपने पति के बारे में कोई भी सूचना राजा को नहीं दी। राजकुमारी दो बच्‍चों 14 साल के लाई और 12 साल के लेशाई की मां थीं और घटना के समय गर्भवती थीं। 14 दिनों तक प्रताड़ना झेलने के बाद उन्‍होंने 27 मार्च 1680 को दम तोड़ दिया। राजकुमारी जॉयमती को आज भी सती का दर्जा मिला हुआ है। आज भी असम के हर निवासी के दिल में उनके लिए सर्वोच्‍च सम्‍मान है।

असम के लोकगीतों, नाटकों और स्‍थानीय फिल्‍मों में जॉयमती की कहानी सुनने को या देखने को मिल जाएगी। असम में हर वर्ष 27 मार्च को सती जॉयमती दिवस मनाया जाता है। हालांकि अभी तक असम में या फिर भारत के दूसरे हिस्‍सों में उनकी वीरता के बारे स्‍कूल की किताबों में पढ़ाया नहीं जाता है। सन. 1935 में एक फिल्‍म भी उन पर बनी थी जिसमें अडियू हांदिक ने जॉयमती का किरदार निभाया था।

आज भी मौजूद हैं राजकुमारी की यादें

जिस जगह पर राजा ने जॉयमती को प्रताड़ना दी थी, वहां पर इस समय जॉयसागर नाम से एक तालाब बना है. उनके बड़े बेटे लाई जिन्‍हें रुद्र सिंघा के नाम से जाना गया, उन्‍होंने मांग की याद में यह तालाब बनवाया था. यह अहोम राजाओं की तरफ से बनवाए गए सभी तालाबों में सबसे बड़ा है। दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से कभी शाही महल में पानी की सप्‍लाई की जाती थी।

03/16/2024

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New Delhi, IL

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