06/07/2025
मां, वो खिड़की अभी भी खुलती है क्या? जहाँ से तुम मुझे हर सुबह स्कूल जाते देखती थीं?
राजीव अब एक बड़ी कंपनी में काम करता है, मेट्रो शहर में।
AC ऑफिस, चमचमाती बिल्डिंग, लाखों की सैलरी।
पर रात को जब फोन उठाता है, तो सबसे पहले मां का नंबर देखता है...
और फिर कांपते हाथों से वही एक लाइन बोलता है –
मां खाना खा लिया क्या?
लेकिन इस सवाल में बहुत कुछ छुपा होता है।
उसके चेहरे पर मुस्कान होती है, लेकिन आंखों में एक अकेलापन...
क्योंकि मां वो खाना अब उसके साथ नहीं खा सकती।
हर छुट्टी में मां कॉल करके पूछती है –
"बेटा, इस बार आएगा ना?"
राजीव चुप हो जाता है, और बोल देता है –
"प्रोजेक्ट चल रहा है मां, छुट्टी नहीं मिलेगी..."
मां हँसती है फोन पर...
पर फोन कटते ही बर्तन धोते धोते चुपचाप आंखें पोंछ लेती है।
पापा अब कमजोर हो चले हैं।
जो कभी साइकिल पर बैठा कर उसे स्कूल छोड़ते थे,
अब खुद लाठी के सहारे चलते हैं।
एक दिन ऑफिस में किसी की मां का कॉल आया।
उस सहकर्मी ने कहा –
"मां रोज़ कॉल करती है, बोर कर देती है..."
राजीव की आंखें नम हो गईं...
क्योंकि उसे मां की बात किए हुए कई दिन बीत चुके थे।
उसे याद आया वो आख़िरी बार गांव कब गया था...
शायद एक साल पहले...
तब मां ने भात में घी डालते वक्त कहा था –
"जब तू नहीं होता, तो रसोई भी सूनी लगती है..."
अब जब भी राजीव होटल में खाना खाता है,
तो हर रोटी में मां के हाथ की गंध ढूंढता है।
जब ऑफिस से थककर लौटता है,
तो चाहता है कोई पांव दबा दे...
पर वहां कोई नहीं होता...
सपनों के पीछे भागते हुए वो बेटा समझ गया है,
कि असली खुशी मां के आँचल और पिता के साए में ही होती है।
"सपनों के लिए घर छोड़ा था,
अब घर ही एक सपना बन गया है..."
❤️ अगर आप भी किसी शहर में नौकरी कर रहे हैं, तो एक बार घर फोन ज़रूर करिए...
कभी कभी एक कॉल भी किसी मां की पूरी दुनिया बन जाती है।
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