Johar Dhanbad

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Johar Dhanbad Political posts, independent writer with no affiliation to any party.

10/04/2026

विधायक की के कितने रंग ? 🎨🤡

जब 8 लेन सड़क का काम रुक BJP के सरकार में तोह विधायक जी ने बताया 8 लेन धनबाद के लिए अनुपयोगी है।

फिर JMM के सरकार में किया विधायक जी ने राज्य सरकार का विरोध किया और फिर बताया उसे उपयोगी।

फिर 2026 के महापौर चुनाव के दौरान बताया 8 लेन सड़क मोदी जी का देन है ।

सिन्हा जी, आपसे निवेदन है कि अपनी कही एक बार मैं बुनिये । जनता और समाज को आप जैसे जनप्रतिनिधि गधा समझते है, पर ऐसा नहीं है।

10/04/2026

Girgit se jyada rang Vidhayak ji badalte hai 😂😂
Yeh clip News ANP ke interview se liya gaya hai.

08/04/2026

क्या 2029 में धनबाद विधान सभा से JMM को चांस मिलना चाहिए ?

03/04/2026

उस बाउंड्री वॉल को JCB से गिरवा देना चाहिए... जिसका BP बढ़ेगा उसी का वो बाउंड्री वॉल होगा। 😂

02/04/2026

Raj Sinha बोलते है भाजपा के कार्यकर्ता हर बूथ पे है।
शत्रुघ्न महतो बोलते है अवैध कोयला खनन का उन्हें जमीन धसने से पहले पता नहीं था। 😂😂

Indian Oil ने बढ़ाया ईंधन की कीमत, प्रीमियम पेट्रोल Rs. 160 प्रति लीटर, जेट फ्यूल के दाम बढ़ने से हवाई उड़ान हुई महंगी।व...
02/04/2026

Indian Oil ने बढ़ाया ईंधन की कीमत, प्रीमियम पेट्रोल Rs. 160 प्रति लीटर, जेट फ्यूल के दाम बढ़ने से हवाई उड़ान हुई महंगी।

विधायक Raj Sinha जी का जुमला हुआ फेल ।
पहले महापौर इलेक्शन में कैंडिडेट फेल, धनबाद का विकास करने में फेल, और अब पेट्रोल/डीजल का जुमला भी फेल होता दिख रहा।

सवाल तोह सिर्फ इतना है, क्या 5 राज्यों के चुनाव के बाद भी दाम कम रखा जाएगा ? या फिर इसमें बढ़ोतरी होगी ?

  क्या हमारे सांसद Dhullu Mahto अपनी आय और संपत्ति को लेकर पूरी तरह पारदर्शी हैं? 💲🤔2019 से 2024 के बीच उनके द्वारा घोषि...
31/03/2026


क्या हमारे सांसद Dhullu Mahto अपनी आय और संपत्ति को लेकर पूरी तरह पारदर्शी हैं? 💲🤔

2019 से 2024 के बीच उनके द्वारा घोषित आय के आंकड़ों को देखें, तो पहला पहलू यह सामने आता है कि उनकी सालाना आय एक विधायक (MLA) के रूप में मिलने वाली वैध सैलरी और भत्तों से कहीं अधिक दिखाई देती है। इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि उनके पास अन्य आय के स्रोत भी हैं। लेकिन जनता भली-भांति जानती है कि उनका कोई स्पष्ट व्यवसाय, नौकरी या ऐसा कोई सार्वजनिक स्रोत सामने नहीं है। अगर वास्तव में उनके पास अतिरिक्त आय के स्रोत हैं, तो उन्हें जनता के सामने स्पष्ट रूप से रखना चाहिए।

दूसरा और अधिक गंभीर पहलू यह है कि 2019 से 2024 के बीच उनकी कुल घोषित आय को जोड़कर देखें, तो यह उनकी संपत्ति में हुई वृद्धि के मुकाबले काफी कम पड़ती है। 2019 में लगभग ₹3.33 करोड़ की संपत्ति 2024 तक बढ़कर करीब ₹7 करोड़ हो जाती है। यानी लगभग ₹3.5 करोड़ की वृद्धि। जबकि इन पांच वर्षों की कुल घोषित आय को जोड़ने पर यह आंकड़ा इस वृद्धि को संतुलित नहीं करता। यहां यह भी समझना जरूरी है कि यह जो आय है, वही उनकी “ग्रॉस इनकम” है—इसी में से उनके घर का खर्च, गाड़ियों का खर्च, ईंधन, सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियां, सब कुछ चलता है। अगर पूरी आय ही संपत्ति खरीदने में लग गई, तो क्या उनका घरेलू खर्च बिना किसी स्रोत के चल रहा था?

सबसे बड़ा सवाल उनकी पत्नी की आय को लेकर उठता है। सार्वजनिक रूप से यह ज्ञात है कि उनकी पत्नी एक गृहिणी हैं—न कोई नौकरी, न कोई व्यवसाय। इसके बावजूद 2019-20 जैसे वर्ष में लगभग ₹50 लाख की आय दिखाना आम जनता के लिए संदेह पैदा करता है। जब कोई स्पष्ट आय का स्रोत नहीं है, तो इतनी बड़ी रकम का आना स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।

इन सभी तथ्यों को देखते हुए जनता के मन में यह सवाल उठना लाज़मी है—क्या सांसद महोदय की आय, खर्च और कुल संपत्ति वास्तव में एक-दूसरे से मेल खाते हैं, जैसा कि उनके द्वारा दाखिल शपथपत्र में दर्शाया गया है? अगर सब कुछ वैध और पारदर्शी है, तो इसकी स्पष्ट व्याख्या सामने आनी चाहिए। अन्यथा, यह संदेह और गहरा होता है कि कहीं यह आय ऐसे स्रोतों से तो नही आ रही, जो सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं हैं। इन सब विषयों पे जितना गौर करे, उतना 40000 करोड़ की केस में दम लगता है ।

    क्या संजीव सिंह धनबाद के अगले सांसद बन सकते हैं?धनबाद नगर निगम चुनाव के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि Sanjeev Sin...
28/03/2026


क्या संजीव सिंह धनबाद के अगले सांसद बन सकते हैं?

धनबाद नगर निगम चुनाव के परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया कि Sanjeev Singh अब केवल एक स्थानीय नेता नहीं रहे, बल्कि एक मजबूत जनाधार वाले जननेता के रूप में उभरकर सामने आए हैं। कड़े मुकाबले के बावजूद, जहाँ एक ओर भाजपा समर्थित उम्मीदवार Sanjeev Kumar और दूसरी ओर पूर्व महापौर Chandrashekar Agarwal जैसे मजबूत दावेदार मैदान में थे, वहाँ संजीव सिंह ने न केवल बढ़त बनाई, बल्कि एकतरफा जीत दर्ज कर “क्लीन स्वीप” का संकेत दिया। यह जीत केवल एक पद की जीत नहीं, बल्कि जनता के व्यापक विश्वास और स्वीकृति का प्रमाण है।

दूसरी ओर, यह चुनाव Raj Sinha और Dhullu Mahto जैसे वर्तमान भाजपा नेतृत्व के लिए कई गंभीर सवाल भी छोड़ गया है। जिस प्रकार पूरे संगठनात्मक बल, बाहरी नेताओं और संसाधनों के बावजूद उनका समर्थित उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहा, वह केवल एक हार नहीं, बल्कि जमीनी पकड़ और रणनीतिक समझ में कमी को दर्शाता है। लगातार विकास के वादों के बावजूद, शहर में बुनियादी समस्याएँ जैसे सड़क, पानी और सफाई आज भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं — और यही असंतोष चुनावी परिणामों में झलकता है।

संजीव सिंह की यह जीत यह भी दर्शाती है कि धनबाद की जनता अब व्यक्ति के कार्य, जमीनी जुड़ाव और भरोसे को प्राथमिकता दे रही है, न कि केवल पार्टी या बड़े चेहरों को। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है — क्या यही जनसमर्थन आगे चलकर लोकसभा चुनाव में भी दिख सकता है? क्या वे एक मजबूत संसदीय विकल्प बनकर उभरेंगे?

धनबाद की जनता अब पहले से अधिक जागरूक है — और यह चुनाव संकेत देता है कि आने वाले समय में राजनीति की दिशा बदल सकती है।

27/03/2026

आम जनता को राहत नहीं।
क्या इलेक्शन तक का ही है यह जुमला?

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