28/05/2023
Sengol ka itihas भारत में हजारों वर्षों पुराना है प्राचीन समय में चोल साम्राज्य में जब एक राजा अपने पद से हटकर दूसरे राजा को शक्ति हस्तांतरण करता है तो वह प्रतीक के रूप एक यह राजदंड दूसरे राजा को देता है ।
सेंगोल का इतिहास आधुनिक भारत से भी जुड़ा हुआ है, भारत की आजादी के समय जब अंग्रेजों से भारत को आजाद करना तय हुआ तब कागजी कार्यवाही होने के पश्चात यह प्रश्न उठा की भारत को अंग्रेजी शासन से मुक्त करने का प्रतीक क्या था कब से मना जायेगा की भारत अब स्वतंत्र है क्या हाथ मिला कर भारत को आजाद किया जाए या सलामी देकर, तो अंग्रेजो ने नेहरू से यह सवाल किया तो नेहरू ने सी राजगोपालाचारी जी से यह बात की तब सी राजगोपालाचारी जी उन्हें प्राचीन तमिल परंपरा के बारे में बताया ।
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जी के सुझाव के बाद सेंगोल का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया, 14 अगस्त 1947 को आधी रात में तमिलनाडु की जनता द्वारा प्रधान मंत्री नेहरू को यह राजदंड सौंपा गया ।
सेंगोल प्राचीन भारतीय परंपरा में सत्ता स्थानांतरण के प्रतीक लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्रकार का राजदंड है, ज....