Mr. Chaubey

Mr. Chaubey सारे जहाँ के मालिक, तेरा ही आसरा है l
राजी हैं हम उसी में, जिसमें तेरी रजा है ll

20/05/2026

Mr. Chaubey.......
Yea & nay........

13/05/2026

Mr. Chaubey.....

तुझे देखने को तरसती हैं आंखे..........

03/04/2026

इन फूल से नाजु़क होंठों से
गैरों की शिकायत ठीक नहीं,
बदनाम करें दिल वालों को ये
इनकी ये शरारत ठीक नहीं।
चंचल ये तेरे दो नैन मुझे
दिल का रोगी क्यों बनाते हैं,
तूने छेड़े हैं दिल में ख्वाब कई
तेरी इतनी नजाकत ठीक नहीं।
हर हाल में जीने मरने की
कसम उठा लेता है तू,
ऐ सुन ले मोहब्बत करने वाले
तेरी इतनी शराफत ठीक नहीं।
हर दिल को दवा मिल जाती है
और दिल को दुआ मिल जाती है,
दिल को जो कैद रखे ऐसे
चाहत की सिआसत ठीक नहीं।

मेरी धड़कनों में घुल रही है कोई पावन कामना,अधरों पर थरथराती है एक मौन प्रार्थना ।दूरी में भी कोई निकटता दिखने लगा है,बिन...
04/03/2026

मेरी धड़कनों में घुल रही है कोई पावन कामना,
अधरों पर थरथराती है एक मौन प्रार्थना ।
दूरी में भी कोई निकटता दिखने लगा है,
बिन कहे ही दिल बात समझने लगा है ।
मेरे नयनों की गहराई में अनकहा प्यास है,
अधरों पर ठहरे मीठे रंगों का एहसास है ।
ना अति, ना अल्प है, बस मधुर संतुलन का आस है,
हर स्पंदन में आदर का मिलन खास है।
हर स्पंदन में आदर का मिलन खास है।।

लेखन- हर्षद चौबे

© [2026] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

शून्य शिखर से झरता स्वर,चेतन चंद्र उजास जगाए;रूखा रेतिल हृदय प्रदेशप्रेम-प्रसून से हरा हो जाए।विभूति-विलसित विश्वास हमार...
15/02/2026

शून्य शिखर से झरता स्वर,
चेतन चंद्र उजास जगाए;
रूखा रेतिल हृदय प्रदेश
प्रेम-प्रसून से हरा हो जाए।

विभूति-विलसित विश्वास हमारा
अश्रु-अर्घ्य बन चरणों में ढलता,
प्रेमाभिषिक्त यह उर-दीपक
शिवत्व-सरोवर में अविरल जलता।

लेखन- हर्षद चौबे

© [2026] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

"आश की देहरी पर मेरी साँसे सहमे"आश की देहरी पर मेरी साँसे सहमे,तेरी यादों की खुशबू में मेरी आँखें लगती हैं बहने…हर लम्हा...
09/01/2026

"आश की देहरी पर मेरी साँसे सहमे"

आश की देहरी पर मेरी साँसे सहमे,
तेरी यादों की खुशबू में मेरी आँखें लगती हैं बहने…

हर लम्हा तेरे संग अब गीत गाता है,
तेरी मुस्कानों से मेरा दिन बन जाता है।

छू ले जो हाथ मेरा, हर दुख दूर हो जाए,
तेरी बातें खुशियों का पूरा शहर बसाएं।

मेरी हर साँस, हर धड़कन बस तुझसे जुड़ी हुई,
तेरी दुनिया में खो कर मेरी दुनिया पूरी हुई।
तेरे आँखों में जो प्यार है, वही मेरा संसार है,
तू जहाँ है हम वहाँ हैं, तेरे होने से ही ये मेरा जहाँ है।

आश की देहरी पर मेरी साँसे सहमे,
जब तुम पास न हो मेरे,
तेरी यादों की खुशबू में मेरी आँखें लगती हैं बहने।
घटाओं में तेरे ही जुल्फों का नाम है,
फिजाओं में उड़ कर शाम कर देना इसका काम है।

तुम में खो कर, तुम्हें ही साँस-साँस गुनगुनाऊँ,
जहाँ मैं जाऊँ बस तुम्हें ही पाऊँ।
मेरी-तेरी प्रेम कहानी कहीं अधूरी न रह जाए,
बचें जो कसक इसमें थोड़ी, उसको भूल कर निभाएं।
प्यार में ऐसे पंख लगे, दुनिया देखती रह जाए… हाय!

आश की देहरी पर मेरी साँसे सहमे,
तेरी यादों की खुशबू में मेरी आँखें लगती हैं बहने…

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

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