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ओ… प्रि–ये…आ… जा…ओ… प्रि–ये…धड़कनें थक चली हैं प्राण,अब साँसें भी बोझिल लगती हैंतेरे बिन हर घड़ी जैसे,राख-सी पल-पल जलती ...
11/11/2025

ओ… प्रि–ये…
आ… जा…
ओ… प्रि–ये…

धड़कनें थक चली हैं प्राण,
अब साँसें भी बोझिल लगती हैं

तेरे बिन हर घड़ी जैसे,
राख-सी पल-पल जलती हैं

तू आ जाए तो शायद ये जान,
फिर से मुस्कुराना सीख ले

वरना ये देह बस छाया है,
आत्मा तेरा नाम लिख ले …

ओ प्रिये…

मेरी अधूरी साँसों की तू अंतिम प्रार्थना

आ जा, वरना टूट पड़ेगी
जीवन-डोरी की यह अर्चना

तेरे बिन मेरी दुनिया में,
किस बात का उजियारा

ओ प्रिये… आ जाओ…
मैं जा रहा हूँ हारा…

तेरे जाने से सूनी आँखें,
अब सपनों को पढ़ना भूलीं

तू लिख जाती थी जो ख़त में,
वो पंक्तियाँ भी रूठीं–फूलीं

तकिये की सिलवट पर अब भी,
तेरे गजरे की खुशबू महके

पर दरवाज़े की दहलीज़ें,
तेरे पाँव की धुन को तरसे

यदि जीवन की रीत यही,
मिलकर फिर तन्हा मर जाना

क्यों देते हो दिल में घर,
फिर दिल से बेघर कर जाना?

मेरी नब्ज़ कह रही है बस,
कुछ पल और ठहर जाऊं

शायद तेरी पुकार सुनूँ,
फिर जीने का हक पा जाऊँ

अगर अगले जन्म मिला,
तेरी बाँहों में आ सिमटूँ

अधूरी प्रीत न रह पाए,
मैं फिर तुझसे ही लिपटूँ

मरते क्षण भी बस तेरा नाम,
लिखा है दिल की दीवार में
ओ प्रिये… आ जा…
मेरी रुह है तेरी पुकार में…

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

कजरी – “प्राण के पृष्ठ पर”प्राण के पृष्ठ पर, नाम तोहार लिखे जाऊँसाँवर सरगम में, साँस-साँस गुनगुनाऊँप्राण के पृष्ठ पर, ना...
11/11/2025

कजरी – “प्राण के पृष्ठ पर”

प्राण के पृष्ठ पर, नाम तोहार लिखे जाऊँ
साँवर सरगम में, साँस-साँस गुनगुनाऊँ

प्राण के पृष्ठ पर, नाम तोहार लिखे जाऊँ

नैना बोल गइल, दिल खोइल राह
नदिया-सा बहे, तोहर मोर चाह
भींजे मनवा रे, भींजे सपना रात
प्राण के पृष्ठ पर, तोर प्रेम के बात

कागज़ ना कलम, ना चाँद साक्षी
मनवा के पन्ना, तोरे नाम राखी
धड़कन गिन-गिन, सुरवा सजल सात
प्राण के पृष्ठ पर, उकेरूँ हर बात

घाट किनारा पे, बाजे कजरी तान
हवा कहे चुरी, मिलि जइबू जान
गावा गाँव भरि, तोर मोर बरसात
प्राण के पृष्ठ पर, रंग तोहर छात

लिख-लिख मिटा दौँ, फिर लिखे लगाउँ
प्राण के पृष्ठ पर, तोहार छवि सजाउँ

घाट किनारा पे, चंदा दिहल झाँक,
नाव चिरइली, बहि-बहि जाए आँक।
लहरन कहेली, जोड़ गइल परछात,
प्राण के पृष्ठ पर, तोहे मोर सौगात।

सुर में सहेजू तोर नांव रे,
मन के पात लिहल छांव रे।

तोहरा बिना रे, घड़ी ना कटे रात,
पियवा के रूपिया, तौहरी कर याद।
चुपचाप बैठे, पिया-पथ ताकत,
प्राण के पृष्ठ पर, नाम तोहर जागत।

फूलन में महकी, तोर मोर कहनी,
सुख-दुख संगवा, रहबू जीवन-गहनी।
जोनी जनम भर, ना छूटे एह नाथ,
प्राण के पृष्ठ पर, तोहे मोर साथ।

मन-मन पुतली में, तोर छवि बसाऊँ,
साँस-साँस पूजा, तोर रूप सजाऊँ।
कजरी में कहनी, रस-रस घुलि जात,
प्राण के पृष्ठ पर, तोहार ही परछात।

प्राण के पृष्ठ पर, नाम तोहार लिखे जाऊँ
साँवर सरगम में, साँस-साँस गुनगुनाऊँ

प्राण के पृष्ठ पर, नाम तोहार लिखे जाऊँ.....

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

11/11/2025

प्राण के पृष्ठ पर लिखि दिहलस,
सनेह के दो बोल हो।
मनवा के मंजरिया में,
बस गइलs अँजोरिया घोल हो।

नयनवा के कागज पर, भाव के अक्षर गढ़े,
कहबो से ना कहाइल, चुपे-चुपे दिल पढ़े।
मन के राग सुरतिया, धीरे-धीरे संजोवलूं,
मिटे ना यह लिखावट, चाहे लाखों बेर मेटवलूं।

प्राण के पृष्ठ पर लिखि दिहलस,
सनेह के दो बोल हो।
मनवा के मंजरिया में,
बस गइलs अँजोरिया घोल हो।

छोट-छोट एहिस भावन, लागे अमिया रस घोल,
सादगी में लिपटाइल, प्रेम के परसैइया तोल।
धड़कन के दप-दप पर, नाम उभरि आवे,
मिटाइब त मीत, फगुनवा सा फिर खिलि जावे।

प्राण के पृष्ठ पर लिखल पंक्ति,
मनवा में बस मोर सिंगार।
संजो-संजो के राखलs तोहरा,
बनि गइलs जीवन के आधार।

बीन बोले बात समझले,
मन के गुनगुन सुरिया।
एह लिखल–मिटल प्रेम में,
बसलs मधुर पवन पुरइया।

तू लिखs, हम संजोई—
ऐसे चलत रहे यह डोर।
प्राण पृष्ठ पर अंकित स्नेहवा,
रउरा बनलs हमार चिर मौर।

प्राण के पृष्ठ पर लिखि दिहलस,
सनेह के दो बोल हो।
मनवा के मंजरिया में,
बस गइलs अँजोरिया घोल हो।

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

वो हसीं बाला,तुम्हारी निगाहों को हमने दिया है अपनी नज़र का प्याला,बुन रहे हैं हम नयनों से तुम्हारे, मोहब्बत की माला।तुम्...
29/10/2025

वो हसीं बाला,
तुम्हारी निगाहों को हमने दिया है अपनी नज़र का प्याला,
बुन रहे हैं हम नयनों से तुम्हारे, मोहब्बत की माला।
तुम्हारी नशीली आँखों को जाना मैंने मधुशाला,
वो हसीं बाला।

लचकते अश्कों से भरी सुरमे-दानी,
रहती जिसमें मोहब्बत भरी जवानी।
तुम्हारे इश्क़ का अंदाज़ हुआ है निराला,
वो हसीं बाला।
तुम्हारी निगाहों को हमने दिया है अपनी नज़र का प्याला,
वो हसीं बाला।

तेरी चाल में फूलों की नरमी,
लम्हे थिरकते जाएँ।
तेरी हँसी की छन-छन से,
सपने मेरे महकते जाएँ।

तेरे गेसुओं के झोंके से,
रातों में शफक़ उतर आए,
तेरी बातें शहद की धारा,
दिल को मीठा जाम पिलाए।

लबों पे तेरे ठहर जाए जो,
एक हल्की-सी मुस्कान प्यारी—
उसमें इश्क़ की झिलमिल नदियाँ,
बहने लगती हैं बन क्यारी।

तेरी रूह की महक में डूबे,
मेरी साँसों का सरगम,
तेरा नाम ही बनकर उभरे,
मेरे दर्द-ए-दिल का मरहम ।
बुन रहे हैं हम नयनों से तुम्हारे, मोहब्बत की माला।
वो हसीं बाला।
तुम्हारी निगाहों को हमने दिया है अपनी नज़र का प्याला,
वो हसीं बाला।

तेरी धड़कन की धीमी ताल पर,
मेरी तन्हाई नाचे,
तू छू ले बस एक नज़र से,
कोरा मन भी प्रेम को बाँचे ।

तेरी आवाज़ की रिमझिम से,
मन का सावन झर-झर बरसे,
इश्क़ की तेरे रेशमी डोरी,
मुझे अपनी ओर खींचे दर से।

तू जब पास मेरे आ बैठी,
समय भी ठहर-सा जाता है,
तेरी पलकों की रेशमी छाया,
दिल को झूला झुलाता है।
तुम्हारी नशीली आँखों को जाना मैंने मधुशाला,
वो हसीं बाला।
तुम्हारी निगाहों को हमने दिया है अपनी नज़र का प्याला,
वो हसीं बाला।

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

अर्घ्य व्रत पूजन आचमन में, सूर्य का प्रतिबिंब है निस्तब्ध नयन में,अर्धचेतन की तपन में बस एक सम्मान मांगा है। नभ के किनार...
26/10/2025

अर्घ्य व्रत पूजन आचमन में,
सूर्य का प्रतिबिंब है निस्तब्ध नयन में,
अर्धचेतन की तपन में बस एक सम्मान मांगा है।
नभ के किनारे खड़ा, समर्पण से भरा,
स्वप्न में भी सृष्टि सृजन का स्वाभिमान मांगा है।।
अमर साधना सांझ के डूबते मन में,
व्रत करुणा उपासना प्रण में,
उन्मुक्त कामना के सृजन में,
बस एक वरदान मांगा है ।
अर्घ्य की अंजुरी लिए पुण्य का दान मांगा है ।।
मौन अधरों से जपती है कोई विनती अधूरी।
थरथराते जल का संगीत है अर्घ्य की अंजुरी।
व्रत में प्यास चुनकर, अर्घ्य में आस बुनकर ,
हठ योग से प्राण मांगा है ।
बस एक वरदान मांगा है ।
अर्घ्य की अंजुरी लिए पुण्य का दान मांगा है ।

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

जब अमावस की देह पर अंतःकरण के जलते दीप कहते हैं।कण-कण निशीथ की शिराओं में अंधकार के सीप रहते हैं।जब स्वर्ण शंखों के शोर ...
20/10/2025

जब अमावस की देह पर अंतःकरण के जलते दीप कहते हैं।
कण-कण निशीथ की शिराओं में अंधकार के सीप रहते हैं।
जब स्वर्ण शंखों के शोर में द्रवित उत्सव का प्रदीप होता हैं।
तब सतरंगी भावों में प्रेम-रक्त हृदय के समीप होता हैं।

लेखन- हर्षद चौबे

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व्योम पर झिलमिलाते स्मृति के  स्वप्नों में ।मन की मृणालिनी बसी है कुबेर के मानस रत्नों में ।स्वर्ण कणों से रंजित कंचन नह...
18/10/2025

व्योम पर झिलमिलाते स्मृति के स्वप्नों में ।
मन की मृणालिनी बसी है कुबेर के मानस रत्नों में ।
स्वर्ण कणों से रंजित कंचन नहीं मांगा, इस बार प्राणों ने ।
प्रणय श्वासों का निस्तब्ध आभा मांगा है, इस बार अधूरे स्मरणों ने।

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

उम्मीद का एक साया सदा साथ होता है। तूफान को भी हृदय अंतश मात देता है । व्रत धारण कामना में, अंजुरी अर्घ्य अंजना में , जि...
07/10/2025

उम्मीद का एक साया सदा साथ होता है।
तूफान को भी हृदय अंतश मात देता है ।
व्रत धारण कामना में, अंजुरी अर्घ्य अंजना में ,
जिनके सिर पे मां का हाथ होता है ।

लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।

हमारी आंखों को तुमने गर ये अदाएं न दी होती, तो क्या ये मचल पाती lहमारी सांसों को तुमने गर ये हवाएं न दी होती,तो क्या ये ...
02/10/2025

हमारी आंखों को तुमने गर ये अदाएं न दी होती,
तो क्या ये मचल पाती l
हमारी सांसों को तुमने गर ये हवाएं न दी होती,
तो क्या ये चल पाती l
हमारी धड़कनों को तुमने गर ये सदाएं न दी होती,
तो तुम्ही कहो ये जाने जाना, क्या ये हलचल मचाती l

लेखन - हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।



तड़पाओगे! तड़पा लो! हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे........लता मंगेश्कर 🙏
02/10/2025

तड़पाओगे! तड़पा लो! हम तड़प तड़प कर भी तुम्हारे........लता मंगेश्कर 🙏

जब हृदय के गहरे कोनों में,अनकहे जज्बातों के मधुर सरगम बेमन होते हैं। जब जीवन की राहों में, अंधकार सघन होते हैं ।तब प्रति...
02/10/2025

जब हृदय के गहरे कोनों में,

अनकहे जज्बातों के मधुर सरगम बेमन होते हैं।

जब जीवन की राहों में,

अंधकार सघन होते हैं ।

तब प्रति पल सहमे जीवन के सूने पथ पर,

अदृश्य निष्काम प्रेम के सौम्य प्रकाशित अमर गीत जीवन्त होते हैं ।

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लेखन- हर्षद चौबे

© [2025] [Harshad Chaubey]. All rights reserved. यह कविता/कथा/रचना बिना लिखित अनुमति के पुनः प्रकाशित, अनुवादित, वितरित या व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रयुक्त नहीं की जा सकती।
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