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पीलीभीत में बाथरूम बना मौत का फंदा: पत्नी का हाथ टूटा, पति नहला रहे थे… गैस गीजर से दम घुटा और दोनों की दर्दनाक मौत, इला...
22/12/2025

पीलीभीत में बाथरूम बना मौत का फंदा: पत्नी का हाथ टूटा, पति नहला रहे थे… गैस गीजर से दम घुटा और दोनों की दर्दनाक मौत, इलाके में दहशत

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पीलीभीत में गैस गीजर से दम घुटने पर पति-पत्नी की मौत. बाथरूम में ऑक्सीजन की कमी और रिसाव की आशंका. जांच शुरू

‘मम्मी को फांसी दो… तीनों अंकल को भी ले जाओ’: संभल में पति के टुकड़े कर फेंकने वाली पत्नी पर बड़ा खुलासा, 10 साल की बेटी...
22/12/2025

‘मम्मी को फांसी दो… तीनों अंकल को भी ले जाओ’: संभल में पति के टुकड़े कर फेंकने वाली पत्नी पर बड़ा खुलासा, 10 साल की बेटी ने खोला राज

संभल में पति की हत्या कर टुकड़े करने के केस में 10 वर्षीय बेटी का चौंकाने वाला बयान सामने आया, तीन अंकल के आने का राज खोला

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संभल मर्डर केस: मेरठ के सौरभ राजपूत केस जैसा खौफनाक हत्याकांड, पत्नी ने प्रेमी संग टुकड़ों में काटा पति का शव

उत्तर प्रदेश के संभल में एक खौफनाक हत्या ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब पतरौआ रोड के पास ईदगाह के नाले में एक युवक का टुकड़ों में कटा हुआ शव मिला। यह हत्या किसी फिल्मी कहानी जैसी नहीं, बल्कि हकीकत में इंसानी हैवानियत की सीमा पार कर देने वाली घटना थी। पत्नी और उसके प्रेमी समेत तीन लोगों पर आरोप है कि उन्होंने मिलकर राहुल नाम के व्यक्ति की हत्या कर उसकी लाश के कई टुकड़े कर दिए। फिर उन्हें अलग-अलग जगह ठिकाने लगा दिया। इस केस ने लोगों को मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड की याद दिला दी, जिसमें प्रेम प्रसंग के चलते पति की हत्या कर शव को काटकर फेंक दिया गया था।

जांच के दौरान पुलिस के हाथ एक और चौंकाने वाला रहस्य लगा। मृतक राहुल की 10 वर्षीय बेटी ने पुलिस को बताया कि पिता की अनुपस्थिति में घर पर तीन अलग-अलग युवक आया करते थे। बच्ची ने साफ कहा कि उसकी मां और तीनों आरोपियों को फांसी दी जानी चाहिए, क्योंकि उन्हीं की वजह से उसके पिता की मौत हुई। बच्ची के इस बयान ने केस को नया मोड़ दे दिया है।

यह पूरा मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि अवैध संबंध, घरेलू तनाव, लोभ, अविश्वास और रिश्तों के टूटने की कहानी है। संभल जिले के लिए यह घटना किसी सदमे से कम नहीं। पुलिस टीम अब सिर, हाथ और पैर की तलाश में जुटी हुई है। कई सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं कि आखिर तीनों आरोपी घर क्यों आते थे, हत्या की असली वजह क्या थी और शव को कहाँ-कहाँ फेंका गया।

शव की पहचान बाजू पर गुदे टैटू से हुई, शुरुआत में नहीं मिले थे सिर और धड़

सबसे पहले पुलिस को 15 दिसंबर की सुबह सूचना मिली कि ईदगाह के पास नाले में एक बोरी पड़ी है, जिसमें इंसानी अंग भरे हुए हैं। जब थैला खोला गया, तो एक युवक का हाथ मिला, जिस पर ‘राहुल’ नाम का टैटू गुदा था। पुलिस ने तुरंत आसपास के थानों में गुमशुदगी की जानकारी खंगाली। उसी दौरान यह सामने आया कि कस्बा गंवा निवासी राहुल नाम का व्यक्ति 18 नवंबर से लापता था और उसकी पत्नी रूबी ने 24 नवंबर को चंदौसी कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज भी कराई थी।

पोस्टमार्टम में पुष्टि हुई कि शव मानव का है। पुलिस को शक होने लगा कि हत्या घर में ही की गई होगी और शव को बाद में टुकड़े कर अलग-अलग हिस्सों में फेंका गया होगा। उसी आधार पर पुलिस टीम मृतक के घर पहुंची और वहीं सच्चाई का बड़ा हिस्सा उजागर होने लगा।

घर से बरामद स्कूटी, लोहे की रॉड, टॉयलेट ब्रश और हीटर बने अहम सबूत

शव मिलने के बाद पुलिस ने मृतक के घर की तलाशी ली। शक गहराता ही गया, क्योंकि घर से ऐसे औज़ार मिले जिनका इस्तेमाल शव काटने में किया जा सकता था। स्कूटी, बैग, लोहे की रॉड, बिजली हीटर, ब्रश, कपड़े और खून के निशान ने पुलिस को यकीन दिलाया कि शव के अंश घर में ही काटे गए और रात के अंधेरे में ठिकाने लगाए गए।

घर में मिली स्कूटी से पुलिस का संदेह और मजबूत हो गया कि शव के टुकड़े इसी वाहन पर ले जाकर फेंके गए होंगे। घर की सफ़ाई ऐसे की गई थी, जैसे कोई बड़ा राज छिपाया गया हो। लेकिन इसी घर में दो मासूम बच्चे भी रहते थे, जिनकी मौजूदगी ने हत्या को घिनौने स्तर पर पहुंचा दिया।

बच्चों की मौजूदगी में चलता था यह पूरा खेल, 10 वर्षीय बेटी बनी गवाह

राहुल और रूबी के दो बच्चे हैं। बेटी की उम्र 10 साल और भाई उससे छोटा। बेटी ने मां की पोल खोलते हुए कहा कि घर में गौरव, सौरभ और अभिषेक नाम के पुरुष अक्सर आते थे। राहुल जब घर पर नहीं होते थे, तब यह तीनों आते और मां से बात करते। बच्ची के बयान ने पूरे थाना तंत्र को हिला दिया। उसने कहा:

“पापा घर पर नहीं होते थे, तो तीनों अंकल आते थे। हमारे लिए चॉकलेट लाते थे। मम्मी हम दोनों को कमरे से बाहर भेज देती थी। अभिषेक अंकल कहते थे कि कुछ महीनों बाद मम्मी मेरी हो जाएगी।”

बच्ची ने बताया कि जिस दिन हत्या हुई वह और उसका भाई स्कूल में थे। लौटने के बाद घर का माहौल अलग लगा। वह समझ नहीं पाई कि क्या हुआ है।

बेटी की मांग: ‘मम्मी को फांसी दो, तीनों अंकल को भी ले जाओ’

बच्ची के बयान को सुनकर हर कोई स्तब्ध रह गया। उसने कहा कि वह अपनी मां से बेहद डरती है। बच्ची का कहना है:
“उन्होंने मेरे पापा को मार दिया। उन्हें फांसी होनी चाहिए। मेरी मां और तीनों अंकल को ले जाओ। वे सब गलत हैं।”

यह पहली बार है जब किसी मर्डर केस में 10 साल की बच्ची के भावनात्मक बयान ने केस का सबसे मजबूत आधार तैयार किया है।

पुलिस के शक की वजह बना गर्भ निरोधक इंजेक्शन का हिसाब, प्रेमी संग पकड़ में आई पत्नी

जांच के दौरान पता चला कि रूबी अभिषेक नाम के युवक से प्रेम करती थी। दोनों के बीच छुपकर नजदीकियां बढ़ रही थीं। पति को बीच से हटाना जरूरी था, इसलिए षड्यंत्र रचा गया। धीरे-धीरे गौरव और सौरभ भी शामिल हो गए।

राहुल गायब होने के बाद जब रूबी ने गुमशुदगी दर्ज कराई, तो पुलिस को शक हुआ। वजह यह थी कि रूबी बयान देते समय न तो डर दिखा रही थी और न ही परेशान नजर आ रही थी। बल्कि पूछताछ के दौरान घबराहट साफ देखी जा सकती थी।

18 नवंबर को हुई थी हत्या, शव काटने और टुकड़े फेंकने में लगे कई दिन

जांच से पता चला कि 18 नवंबर को सुबह बच्चे स्कूल चले गए थे। घर पर राहुल और रूबी थे। इसी दौरान तीनों आरोपी आए। हत्या लोहे की रॉड और बिजली हीटर से हमला कर की गई। फिर उसे प्लास्टिक शीट पर रखा गया और धीरे-धीरे शरीर के टुकड़े किए गए। कुछ टुकड़े घर में छिपाए गए, कुछ उसी रात नाले और आसपास के इलाकों में फेंके गए।

कुछ हिस्से जलाने की भी कोशिश की गई। पुलिस ने यह भी पाया कि घर में कुछ रेत और केमिकल इस्तेमाल किए गए थे, ताकि खून के निशान दबे रहें।

पुलिस की टीम शव के बाकी हिस्सों की तलाश में जुटी, नाले, खेत, बाग और जंगल की खाक छानी जा रही है

हत्या के बाद शव के कई हिस्से गायब हैं। खासतौर पर सिर, पैर और कुछ आंतरिक अंगों की तलाश की जा रही है। पुलिस का मानना है कि इन्हें अलग-अलग दिशाओं में ले जाकर ठिकाने लगाया गया।

फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड लगातार तलाश में लगे हैं। आसपास के CCTV कैमरे खंगाले जा रहे हैं। इलाके के मोबाइल टावर लोकेशन भी रिकॉर्ड की जा रही है।

हत्या की वजह: शक, झगड़ा और अवैध संबंध

बच्ची के बयान से काफी हद तक साबित हो गया है कि रूबी का अभिषेक से संबंध था। राहुल को इस बात की भनक थी, इसलिए दोनों के बीच लगातार झगड़े होते थे। कई बार घर से चीखें और बहस पड़ोसियों ने भी सुनी थी।

माना जा रहा है कि राहुल बीच से हट जाए, तो रूबी और अभिषेक साथ रह सकते थे। शायद इसी वजह से पति की हत्या करने का फैसला लिया गया।

स्थानीय लोग दहशत में, गांव में चर्चा— 'शरीर काटने में हिम्मत नहीं, प्लानिंग पुरानी थी'

गांव के लोगों का कहना है कि राहुल शांत स्वभाव का था। शराब नहीं पीता था। मेहनत करता था। कभी लड़ाई झगड़ा नहीं करता था। रूबी के बारे में लोगों को कम जानकारी थी, क्योंकि वह घर से कम निकलती थी।

कई ग्रामीणों ने कहा कि शव काटना किसी सामान्य व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। यह हत्या अचानक नहीं, बल्कि पूरी तैयारी के साथ की गई।

गांव में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल, बच्ची की हालत भावनात्मक रूप से नाजुक

बच्ची ने जो बयान दिया है, वह भावनात्मक तनाव से भरा हुआ है। उसकी मानसिक स्थिति पर असर पड़ा है। बाल कल्याण विभाग अब बच्चे की काउंसलिंग करा रहा है।

लोगों का कहना है कि अपराधी सिर्फ पति को नहीं, बल्कि दो मासूम बच्चों की खुशियां भी छीन गए।

हिरासत में तीन आरोपी: रूबी, अभिषेक और गौरव; सौरभ फरार, तलाश जारी

पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। रूबी, अभिषेक और गौरव से पूछताछ जारी है। वहीं चौथा आरोपी सौरभ फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।

क्राइम हिस्ट्री की जांच, मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन की पड़ताल जारी

जांच टीम ने आरोपी और पीड़ित के मोबाइल जब्त कर लिए हैं। कॉल रिकॉर्ड में कई चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। चैट में भविष्य की योजनाओं के संकेत भी मिल रहे हैं।

लोकेशन ट्रैकिंग से पता चला है कि आरोपी हत्या के बाद शहर के कई इलाकों में घूमे थे, जहां शव के टुकड़े फेंके गए।

जेल भेजे जाने से पहले मेडिकल, बयान रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

आरोपियों का मेडिकल कराया गया। फॉरेंसिक रिपोर्ट जल्द आएगी। उसी के आधार पर अंतिम चार्जशीट तैयार की जाएगी।

परिवार वालों का आरोप: 'इस केस में सिर्फ प्रेम प्रसंग नहीं, पैसों का भी खेल'

राहुल के परिजनों का कहना है कि हत्या सिर्फ प्रेम संबंधों की वजह से नहीं हुई। इसमें पैसे का बड़ा रोल है। राहुल काफी समय से कमाई कर रहा था। बैंक खातों में जमा पैसे, गहने और जमीन को लेकर पत्नी और प्रेमी लालच में थे।

पुलिस प्रवक्ता: 'मामला संवेदनशील है, हर एंगल से जांच होगी'

पुलिस ने बयान दिया कि यह बेहद संवेदनशील केस है। आरोपी दोषी पाए जाते हैं तो कड़ी सजा होगी। बच्‍ची के बयान को पूरी अहमियत दी जाएगी।

केस में आने वाले बड़े सवाल

– हत्या की असली वजह क्या है?
– शव को कहाँ-कहाँ फेंका गया?
– क्या बच्चों को पहले से सच्चाई पता थी?
– क्या और लोग शामिल थे?
– क्या हत्या की साजिश पहले से बनी थी?

संभल का यह केस 2025 का सबसे सनसनीखेज मामला बन गया

प्रेम प्रसंग, हत्या, टुकड़े, प्लास्टिक बैग, बच्चों का बयान, लाश की तलाश—इन सभी के मिश्रण ने इस घटना को यूपी का सबसे बड़ा क्राइम अपडेट बना दिया है।

पोलीथिन में कटे इंसानी शरीर के हिस्से मिलने के बाद जो कहानी उजागर हुई, उसने समाज को झकझोर दिया। यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, एक परिवार के बिखरने का, विश्वास टूटने का और इंसानियत शर्मसार होने का है।

आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस और जांच एजेंसियां हर बिंदु पर निगरानी बनाए हुए हैं।

यह केस कानून, मनोविज्ञान और सामाजिक रिश्तों की दिशा में नई चर्चा छेड़ने वाला है। बाद में अदालत में क्या फैसला होगा, यह समय बताएगा। फिलहाल प्रदेश में चर्चा का हर केंद्र यही सवाल है—

एक पत्नी ने पति को टुकड़ों में कैसे काट दिया?

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21/12/2025

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रायबरेली के मलकान क्रॉसिंग पर मालगाड़ी रोकने को लेकर सिगरेट विवाद, रेलवे ने सिग्नल समस्या बताया, वीडियो वायरल

इबादत से पहले मौत ने चुपके से छू लिया: खंडवा की जामा मस्जिद में वुजू कर रहे हाजी अलीम को आया हार्ट अटैक, CCTV में कैद आख...
21/12/2025

इबादत से पहले मौत ने चुपके से छू लिया: खंडवा की जामा मस्जिद में वुजू कर रहे हाजी अलीम को आया हार्ट अटैक, CCTV में कैद आखिरी पल

खंडवा की जामा मस्जिद में वुजू करते समय हाजी शेख अलीम को आया दिल का दौरा, इशा की नमाज से पहले ही अल्लाह से मुलाकात हो गई।

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नमाज की तैयारी में आया अंत का संदेश

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक दर्दनाक और बेहद भावुक कर देने वाली घटना ने न केवल शहर को बल्कि पूरे मुस्लिम समाज को गहरे शोक में डुबो दिया है। खंडवा के हरिगंज इलाके की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में सोमवार की रात एक ऐसा मंजर देखने को मिला, जिसने अल्लाह की इबादत और मौत की हकीकत दोनों को एक साथ सामने ला दिया। मस्जिद की कमेटी के वरिष्ठ सदस्य और जाने-माने समाजसेवी हाजी शेख अलीम ठेकेदार (56) इशा की नमाज से पहले रोज की तरह वुजू कर रहे थे। लेकिन यह रात उनकी जिंदगी की आखिरी रात बन जाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

अल्लाह के घर में अलविदा कह गए हाजी शेख अलीम

रोजाना की तरह वे पैदल चलते हुए मस्जिद पहुंचे थे। उनकी चाल में वही सादगी और चेहरे पर वही इमानदारी की चमक थी, जो पिछले 20 वर्षों से मस्जिद कमेटी में उनकी सेवा का हिस्सा रही थी। मस्जिद में बनी वुजू की जगह पर वे पहुंचे और इत्मीनान से वुजू करना शुरू किया। फिर वह सीढ़ियों पर बैठकर अजान खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। लेकिन तभी अचानक वह पीछे की ओर झुके और जमीन पर गिर पड़े।

कैमरे में कैद हुआ आखिरी लम्हा

यह दृश्य मस्जिद के सीसीटीवी कैमरे में पूरी तरह कैद हो गया। कैमरे की फुटेज में साफ देखा गया कि हाजी साहब वुजू करने के बाद सीढ़ियों पर बैठे और कुछ ही पलों में उनका शरीर एकदम ढीला पड़ गया। पहले तो किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ, लेकिन जब पास जाकर उन्हें हिलाया गया तो उनकी सांसें थम चुकी थीं। कोई चीख नहीं, कोई कराह नहीं, अल्लाह की इबादगाह में एक सुकून भरी मौत ने उन्हें अपनी गोद में ले लिया।

अस्पताल पहुंचाने की हर मुमकिन कोशिश

घटना के तुरंत बाद मस्जिद में मौजूद लोगों ने उन्हें खंडवा जिला अस्पताल पहुंचाया। रास्ते में हर किसी की आंखें नम थीं और दिल दुआओं में लगा हुआ था कि अल्लाह उनके हाजी को बचा ले। लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर जैसे ही बाहर आई, पूरे खंडवा शहर और मुस्लिम समाज में मातम की लहर दौड़ गई।

20 साल से मस्जिद सेवा में समर्पित थे

हाजी शेख अलीम ठेकेदार को खंडवा में एक जिम्मेदार और धार्मिक व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वह करीब दो दशकों से मस्जिद की हर व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। चाहे रमज़ान के महीने में इफ्तार की तैयारी हो या ईद पर सफाई व्यवस्था, वह हर कार्य में सबसे आगे रहते थे। लोगों का कहना है कि हाजी साहब हर किसी की मदद करने वाले इंसान थे, जिन्हें कभी गुस्से में नहीं देखा गया।

मौत आई पर कोई आहट नहीं हुई

सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि उन्हें किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं थी। ना कोई दिल की बीमारी, ना ही कोई अन्य पुरानी तकलीफ। वह पूरी तरह स्वस्थ नजर आते थे। उनके दोस्तों और परिजनों ने बताया कि घटना के कुछ घंटे पहले ही वह मुस्कुराते हुए बातचीत कर रहे थे और घर पर भी सामान्य दिनचर्या में थे।

मस्जिद बनी अंतिम साक्षी

जिस जामा मस्जिद को उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा दिया, वहीं उन्हें अल्लाह से मिलने का मौका भी मिला। यह दृश्य जितना दुखद है, उतना ही गहरा भी कि किसी को मौत उस जगह मिले जहां वह रोज रूह की सच्ची पाकीज़गी के लिए आता रहा हो। मस्जिद के एक अन्य सदस्य ने कहा कि यह मौत शायद उनके अच्छे कर्मों का सिला है कि उन्हें अल्लाह के घर में ही सुकून से बुला लिया गया।

मुस्लिम समाज में गम का माहौल

हाजी शेख अलीम की मृत्यु की खबर ने पूरे मुस्लिम समुदाय को सदमे में डाल दिया। मस्जिद कमेटी से लेकर शहर के प्रमुख उलेमा, व्यापारी वर्ग, रिश्तेदार और मोहल्ले के आम लोग तक, सभी उनके जनाजे में शामिल होने पहुंचे। जनाजे में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए और हर आंख नम थी। दफन के वक्त पूरा कब्रिस्तान सिसकियों से भर गया था।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

मस्जिद के सीसीटीवी में कैद हुई यह घटना जब दो दिन बाद सामने आई, तो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। लोग इस वीडियो को देखकर भावुक हो गए और इसे अल्लाह का बुलावा करार दिया। कई लोगों ने इसे "खुशकिस्मत मौत" बताया और दुआ मांगी कि उन्हें भी ऐसी पाक और शांत मौत नसीब हो।

जिला प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं ने जताया दुख

खंडवा जिला प्रशासन ने हाजी शेख अलीम के निधन पर शोक व्यक्त किया है। स्थानीय विधायक, सांसद और नगरपालिका अध्यक्ष ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। वहीं कई धार्मिक संगठनों ने एक प्रस्ताव पारित कर उनके नाम पर मस्जिद में विशेष दुआ और कुरान खानी आयोजित की है।

अल्लाह की रहमत या कुदरत का पैगाम?

इस घटना ने न केवल मुस्लिम समुदाय को बल्कि अन्य धर्मों के लोगों को भी झकझोर दिया है। यह एक ऐसा पल था जिसने जीवन और मृत्यु के फासले को एक पल में समाप्त कर दिया। एक तरफ जहां लोग नमाज की तैयारी कर रहे थे, वहीं एक इंसान अल्लाह के दरबार में पहुंच गया। यह दृश्य एक सबक भी देता है कि जिंदगी कितनी नाजुक है और मौत कभी भी किसी को बुला सकती है।

अंतिम संस्कार में उमड़ा जनसैलाब

हाजी शेख अलीम का अंतिम संस्कार मंगलवार को किया गया, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी। जनाजे की नमाज में खंडवा के सभी प्रमुख धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अंतिम विदाई के वक्त कब्रिस्तान में सिर्फ सिसकियों की गूंज सुनाई दे रही थी।

एक अध्याय का अंत, यादें बाकी

हाजी शेख अलीम ठेकेदार अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विनम्रता, धार्मिकता और सेवा भावना की मिसाल हमेशा जीवित रहेगी। मस्जिद की सीढ़ियों पर गिरते हुए उनका वीडियो एक दृश्य मात्र नहीं है, बल्कि यह एक अलौकिक संदेश है कि मौत भी पाकी ज़मीन को चुन सकती है, और अल्लाह के घर में भी इबादत से पहले ही बुलावा आ सकता है।

एक लाख का इनामी, 30 वारदातों का मास्टरमाइंड: यूपी STF से भिड़ा 'शार्प शूटर सिराज अहमद', मुठभेड़ में मारा गयासहारनपुर में...
21/12/2025

एक लाख का इनामी, 30 वारदातों का मास्टरमाइंड: यूपी STF से भिड़ा 'शार्प शूटर सिराज अहमद', मुठभेड़ में मारा गया

सहारनपुर में STF ने मुठभेड़ में एक लाख के इनामी शार्प शूटर सिराज अहमद को ढेर किया, 30 से अधिक केसों में था वांछित

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मुठभेड़ में खत्म हुआ सिराज अहमद का अपराध अध्याय

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुए एक जबरदस्त एनकाउंटर में यूपी स्पेशल टास्क फोर्स ने पूर्वांचल के कुख्यात अपराधी और एक लाख के इनामी बदमाश सिराज अहमद उर्फ पप्पू को ढेर कर दिया। अपराध की दुनिया में सिराज एक जाना-पहचाना नाम था, जिसकी क्राइम हिस्ट्री न केवल लंबी थी, बल्कि हैरान करने वाली भी। वह पूर्वांचल के संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़ा एक प्रमुख चेहरा था, जिसकी तलाश पुलिस को कई वर्षों से थी।

आर्मी परिवार में जन्मा, अपराध की ओर मुड़ा

सिराज अहमद एक रिटायर्ड आर्मी मैन का बेटा था। जिस घर से अनुशासन, देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा मिलनी चाहिए थी, वहीं से निकलकर सिराज ने अपराध का रास्ता चुना। शुरुआत में उसकी जिंदगी सामान्य थी, लेकिन धीरे-धीरे वह जुर्म की दुनिया में गहराई तक उतरता चला गया। पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, सिराज ने 2006 में एक लूट और मारपीट की वारदात से अपने आपराधिक सफर की शुरुआत की थी।

30 से अधिक संगीन अपराधों में शामिल था सिराज

एक बार अपराध की राह पर चलने के बाद सिराज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। धीरे-धीरे वह हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती, रंगदारी, गैंगवार, आर्म्स एक्ट, गैंगस्टर एक्ट जैसे मामलों में लिप्त होता चला गया। पुलिस के अनुसार, उसके खिलाफ 28 से अधिक मुकदमे दर्ज थे, जिनमें अधिकतर में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी थी। कुछ केस अभी न्यायालय में विचाराधीन थे।

मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ने के बाद बढ़ी क्रूरता

जांच में सामने आया है कि सिराज अहमद मुख्तार अंसारी के गिरोह से जुड़ा हुआ था। वह इसी गैंग में बतौर शार्प शूटर काम करता था और मुन्ना बजरंगी के संपर्क में भी था। उसका नेटवर्क सुल्तानपुर, लखनऊ, बलिया, जौनपुर से लेकर पश्चिमी यूपी तक फैला हुआ था। वह गैंगवार में सामने से नेतृत्व करता था और पुलिस को बार-बार चकमा देकर फरार हो जाता था।

वकील आजाद अहमद की हत्या ने सिराज को बनाया वांटेड चेहरा

6 अगस्त 2023 को सिराज ने सुल्तानपुर के देहात कोतवाली क्षेत्र में वकील आजाद अहमद की सरेआम हत्या कर दी थी। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। यही वह केस था जिसके बाद पुलिस ने सिराज पर ₹1 लाख का इनाम घोषित किया और उसकी गिरफ्तारी के लिए STF को लगाया गया।

अवैध कमाई से खड़ी की करोड़ों की संपत्ति

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सिराज ने अपराध को ही अपनी आजीविका बना लिया था। हत्या, रंगदारी, अवैध वसूली, लूट जैसे अपराधों से वह मोटी कमाई करता था और इस धन से उसने लोलेपुर गांव में एक आलीशान मकान, लखनऊ व सुल्तानपुर में प्लॉट, पाइप फैक्ट्री और लगभग 8 बीघा जमीन भी खरीदी थी। पुलिस का कहना है कि यह संपत्ति उसकी घोषित आमदनी से कहीं अधिक है और उसे जब्त करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी थी।

बार-बार जेल से जमानत पर बाहर आकर दोहराता था अपराध

पुलिस के अनुसार, सिराज ने अपने खिलाफ दर्ज 27 मामलों में जमानत ली और हर बार बाहर निकलकर नए अपराधों को अंजाम दिया। कानून के दायरे से बाहर रहते हुए वह लगातार पुलिस और न्याय व्यवस्था को चुनौती देता रहा। इसी वजह से उस पर गैंगस्टर एक्ट की धाराएं लगाई गईं और संपत्ति कुर्की की कार्यवाही भी की गई थी।

ऑपरेशन क्लीन में आया अंत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में चल रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत पुलिस लगातार अपराधियों का नेटवर्क ध्वस्त कर रही है। इसी क्रम में STF को खुफिया इनपुट मिला कि सिराज सहारनपुर के पास किसी ठिकाने पर छिपा हुआ है। STF की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उसे घेर लिया। घेराबंदी के दौरान सिराज ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में STF ने भी मोर्चा संभाला और हुई मुठभेड़ में सिराज को मार गिराया गया।

वकील परिवार को मिला न्याय, सीएम योगी को कहा धन्यवाद

वकील आजाद अहमद की हत्या से टूट चुके उनके परिवार को अब जाकर न्याय मिला है। सिराज के मारे जाने की खबर मिलते ही परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपी STF का आभार जताया और कहा कि भले ही यह न्याय ढाई साल बाद मिला, लेकिन अब उन्हें सुकून है। परिवार ने इसे अपराध के खिलाफ एक बड़ी जीत बताया।

एनकाउंटर के बाद STF की कार्रवाई पर उठे सवाल भी

हालांकि एनकाउंटर के बाद कुछ मानवाधिकार संगठनों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। लेकिन पुलिस का कहना है कि सिराज जैसे शार्प शूटर न केवल पुलिस के लिए खतरा थे, बल्कि पूरे समाज की शांति व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती थे। उसके जिंदा रहते कई और हत्याएं, लूट और गैंगवार की आशंका थी।

सिराज का खात्मा: पूर्वांचल माफिया नेटवर्क को लगा झटका

सिराज अहमद की मौत के साथ ही पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में सक्रिय संगठित माफिया नेटवर्क को एक बड़ा झटका लगा है। पुलिस का मानना है कि सिराज मुख्तार अंसारी के नेटवर्क का फील्ड ऑपरेशनल शूटर था, जो जमीनी स्तर पर रंगदारी वसूलने, विरोधियों को ठिकाने लगाने और डर का माहौल बनाने में लगा रहता था।

आगे क्या? STF की सूची में अभी कई बड़े नाम बाकी

सिराज की मुठभेड़ के बाद अब STF की निगाहें प्रदेश में सक्रिय अन्य इनामी और गैंगस्टर बदमाशों पर हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई और कुख्यात अपराधियों की लोकेशन ट्रेस की जा चुकी है और अगले कुछ हफ्तों में ऑपरेशन क्लीन के तहत और भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

गुरुग्राम में ऑनर किलिंग! मुस्लिम प्रेमी से शादी चाहती थी बहन, भाई ने दोस्त संग रची साजिश, दुष्कर्म के बाद हत्या https:/...
21/12/2025

गुरुग्राम में ऑनर किलिंग! मुस्लिम प्रेमी से शादी चाहती थी बहन, भाई ने दोस्त संग रची साजिश, दुष्कर्म के बाद हत्या

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गुरुग्राम में बहन की ऑनर किलिंग, मुस्लिम प्रेमी से शादी चाहने पर भाई ने दोस्त संग मिलकर हत्या कर दी, पुलिस ने दोनों .....

गाजियाबाद में किरायेदारों ने की मकान मालकिन की बेरहमी से हत्या: कूकर से वार, फिर घोंटा गला… पोस्टमार्टम में बड़े खुलासेग...
20/12/2025

गाजियाबाद में किरायेदारों ने की मकान मालकिन की बेरहमी से हत्या: कूकर से वार, फिर घोंटा गला… पोस्टमार्टम में बड़े खुलासे

गाजियाबाद में किराया विवाद पर मकान मालकिन दीपशिखा शर्मा की हत्या, पोस्टमार्टम में सिर पर कूकर से वार और गला घोंटने का खुलासा

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गाजियाबाद मर्डर केस: पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले राज़
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में मकान मालकिन की हत्या का मामला धीरे-धीरे और भयावह रूप लेता जा रहा है. शुरुआती जांच में हत्या की वजह किराया विवाद बताई गई थी, लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि दीपशिखा शर्मा की हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई थी. रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि हत्या के दौरान उनके सिर पर भारी वस्तु से प्रहार किया गया और फिर गला घोंटकर जान ले ली गई. इससे पहले आरोपी किरायेदार कपल उनकी लाश को फ्लैट के बेड के नीचे ब्रीफकेस में छुपाकर रखते रहे, ताकि पुलिस को शक न हो पाए. इस घटना ने पूरे शहर में सनसनी मचा दी है और सवाल उठ रहे हैं कि किराया विवाद इतना बढ़ कैसे गया कि जान लेनी पड़ी

ओरा कायमेरा सोसाइटी में खून से रंगा सच
यह घटना राजनगर एक्सटेंशन स्थित ओरा कायमेरा सोसाइटी के एम ब्लॉक की है, जहां दीपशिखा और उनके पति उमेश शर्मा का एक फ्लैट था. दीपशिखा दादरी के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिन विभाग में कार्यरत थीं, वहीं उनके पति उमेश हरियाणा के फरीदाबाद में एक कंपनी में जनरल मैनेजर हैं. कपल की एक बेटी दिल्ली की एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करती है. दीपशिखा इस फ्लैट को 18,000 रुपये महीने पर किराए पर देती थीं. इस फ्लैट में उनके किरायेदार अजय गुप्ता और उनकी पत्नी आकृति गुप्ता रहते थे. आर्थिक तंगी से जूझ रहे अजय पिछले छह महीनों से किराया नहीं दे रहे थे. दीपशिखा लगातार उनसे पैसे मांग रही थीं, जिसके चलते विवाद बढ़ता जा रहा था

हत्या से पहले क्या हुआ फ्लैट में?
18 दिसंबर की दोपहर यह विवाद उस समय और भड़क उठा जब दीपशिखा एक बार फिर किराया वसूलने फ्लैट पहुंचीं. सोसाइटी के सीसीटीवी में भी दर्ज हुआ कि वह उस दिन दो बार किराया मांगने पहुंची थीं. दूसरी बार पहुंचने के बाद हालात इतने बिगड़े कि अजय और आकृति ने हत्या की योजना बनाई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि दीपशिखा के सिर पर दबाव से भारी प्रहार किया गया था. पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह प्रहार कूकर से किया गया था. इसके बाद उनकी सांस रोककर हत्या की गई. रिपोर्ट में गला घोंटने के स्पष्ट निशान भी दर्ज किए गए हैं

पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्या कहती है?
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दीपशिखा के सिर पर जो घाव मिला वह किसी भारी धातु से वार के कारण हुआ. सिर में आई गंभीर चोट और रक्तस्राव को मृत्यु का मुख्य कारण माना गया है. गला घोंटने के निशान होने से यह स्पष्ट हो गया कि वार के बाद उनकी सांस भी रोकी गई. इसके अलावा, उनके शरीर पर संघर्ष के दौरान चोटों के कई निशान पाए गए हैं. इन निशानों ने यह भी संकेत दिया है कि दीपशिखा ने अपनी जान बचाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन दोनों आरोपी मिलकर उन पर भारी पड़े

लाश को सूटकेस में भरकर छुपाया गया
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को टुकड़ों में काटने की योजना बनाई थी, लेकिन वह इसे पूरा नहीं कर सके. इसके बाद उन्होंने एक बड़ा ब्रीफकेस निकाला, शव को उसमें भरा और बेड के नीचे छुपा दिया. पुलिस ने जब जांच की तो बेड के नीचे से पड़ी तेज बदबू ने अधिकारियों को सच तक पहुंचा दिया. आरोपी इतनी योजना बनाकर हत्या करेंगे, पुलिस ने शायद सोचा भी नहीं था, लेकिन उनके व्यवहार और बयान में छिपे झूठ ने मामले को जल्द उजागर कर दिया

अजय गुप्ता की लाइफस्टाइल और आर्थिक बर्बादी
अजय गुप्ता पहले ट्रांसपोर्ट कारोबार में था. लेकिन दो साल के भीतर उसका काफी नुकसान हुआ, जिससे वह कर्ज में डूब गया. इसी दौरान किराया देना बंद कर दिया और मालिकान ने पैसे मांगने शुरू किए. आर्थिक तनाव इतना बढ़ गया कि कपल को लगा पुलिस शिकायत से उन्हें बेदखल कर देगी और यही डर हत्या की वजह बन गया. पुलिस ने बताया कि आरोपी पूरी तरह टूट चुके थे और पैसे न होने के कारण मकान खाली नहीं कर रहे थे. अजय और आकृति पहले तो किराया देने की बात कहकर टालते रहे, फिर मालिकान के दबाव में हत्या का रास्ता चुन लिया

18 दिसंबर… कत्ल की तारीख
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में दर्ज समय के अनुसार हत्या शाम 4 बजे के करीब हुई. दीपशिखा, जैसे ही किराया मांगने फ्लैट में दाखिल हुईं, कपल ने उन पर हमला कर दिया. पहले कूकर से सिर पर वार किया, जिससे वह बेहोश हो गईं. फिर गला दबाकर उन्हें मार दिया गया. हत्या के दौरान बेडरूम और किचन में खून के छींटे मिले, जिन्हें बाद में पोछकर मिटाने की कोशिश की गई. पुलिस की टीम ने मौके से खून के नमूने भी बरामद किए हैं

गिरफ्तारी और पुलिस का बयान
ACP नंदग्राम उपासना पांडे ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद हत्या के हर पहलू की पुष्टि हो चुकी है. दोनों आरोपी अजय और आकृति को गिरफ्तार कर लिया गया है. दोनों ने हत्या की बात कबूल कर ली है और बताया कि छह महीने से किराया न देने के चलते यह तनाव बढ़ता जा रहा था. आरोपियों ने बताया कि दीपशिखा ने धमकी दी थी कि वह पुलिस को रिपोर्ट करेंगी. इसी डर से हत्या कर दी गई

दीपशिखा का परिवार सदमे में
दीपशिखा के पति उमेश शर्मा घटना के समय ऑफिस में थे. जैसे ही उन्हें सूचना मिली, वे तुरंत घर पहुंचे. बेटी दिल्ली से रात को ही गाजियाबाद पहुंच गई और मां का शव देखकर बदहवास हो गई. परिवार ने बताया कि दीपशिखा हर महीने मेहनत से घर चलाती थीं और किराए पर दिए फ्लैट से भी आय होती थी. किराया न मिलने के कारण वही खुद आर्थिक दबाव में थीं. परिवार का आरोप है कि अजय पहले भी कई बार धमकी दे चुका था, लेकिन दीपशिखा ने उसे नजरअंदाज कर दिया

सोसाइटी का माहौल दहशत में
ओरा कायमेरा के निवासियों में डर है कि एक साधारण किराया विवाद भी इतनी भयानक हत्या में बदल सकता है. सोसाइटी के लोग हैरान हैं कि आरोपी कपल इतने दिनों तक शव को फ्लैट में छुपाकर सामान्य तरीके से जीवन जीते रहे. पड़ोसियों ने बताया कि अजय और आकृति सामान्य कपल की तरह रहते थे और कभी किसी विवाद में नहीं दिखे. घटना वाली शाम सोसाइटी में किसी को यह अंदाजा नहीं लग पाया कि भीतर क्या चल रहा है

हत्या के बाद आरोपियों ने क्या किया?
हत्या के बाद आरोपी कपल घर से निकल कर सामान लेने गए. लौटकर उन्होंने साफ-सफाई की और शव को ब्रीफकेस में भरकर बेड के नीचे छुपा दिया. दोनों ने पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश में यह योजना बनाई कि वे कहेंगे दीपशिखा फ्लैट से चली गईं. लेकिन परिवार के कॉल न उठाने पर मामला बिगड़ गया और क़त्ल का राज खुल गया

किराएदारी और कानूनी सवाल
घटना के बाद शहर में किराएदारी विवाद और मकान मालिकों की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं. कई घरों और सोसाइटी में रहने वाले लोग इस बात से चिंतित हैं कि अगर कोई किरायेदार किराया न दे, तो कानूनी प्रक्रिया से उसे बाहर निकालना बेहद कठिन है. कुछ लोग माना रहे हैं कि कानून की धीमी प्रक्रिया भी ऐसे विवादों को बढ़ावा देती है. विशेषज्ञों का मानना है कि किराएदारी समझौतों को और सख्त करना होगा

पुलिस ने कहा जल्द होगा दाखिल चार्जशीट
ACP का कहना है कि चूंकि आरोपियों के बयानों, सबूतों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पूरा सच मिल चुका है, इसलिए पुलिस जल्द ही आरोपियों पर हत्या और सबूत मिटाने के प्रयासों की धाराओं में चार्जशीट दाखिल करेगी. फिलहाल दोनों आरोपी जेल में हैं और पूछताछ जारी है

किराया विवाद का दर्दनाक अंत
दीपशिखा, एक कामकाजी और शांत स्वभाव की महिला थीं. बेहतर भविष्य के लिए उन्होंने किराए पर घर देकर अतिरिक्त आय का साधन बनाया था, लेकिन आर्थिक दबाव और गलतफहमियों ने यह रिश्ता एसी स्थिति में बदल दिया जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. उनकी हत्या की खबर सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रही है और लोग दुख और आक्रोश प्रकट कर रहे हैं

क्या इस मामले में और खुलासे होंगे?
जांच एजेंसियों का कहना है कि फोन कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जांच जारी है. पुलिस को संदेह है कि आरोपियों के पास पहले से हत्या की योजना थी. सोसाइटी का सीसीटीवी और मोबाइल डेटा इस केस में और भी नए तथ्य सामने ला सकता है

गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ हत्या का मामला नहीं, बल्कि बदलते शहरी जीवन में किराया विवादों और आर्थिक दबावों की भयावह तस्वीर है. एक साधारण पारिवारिक महिला को सिर्फ किराया मांगने की वजह से जान गंवानी पड़ी. यह केस फिलहाल समाज में किराएदारी सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ चुका है और सवाल यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या व्यवस्था होगी

इस मर्डर केस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि हत्या योजनाबद्ध तरीके से और क्रूरता के साथ की गई. अब पूरा शहर न्याय की प्रतीक्षा में है और पुलिस आरोपियों के खिलाफ मजबूत सबूतों के साथ आगे बढ़ रही है जो आने वाले दिनों में मुकदमे की दिशा और गति तय करेंगे

कानपुर में शादीशुदा प्रेमिका ने प्रेमी की हत्या का किया खुलासा, बोली- ‘उसने मेरी बेटी के साथ गलत हरकत…’ जंगल से मिला कंक...
20/12/2025

कानपुर में शादीशुदा प्रेमिका ने प्रेमी की हत्या का किया खुलासा, बोली- ‘उसने मेरी बेटी के साथ गलत हरकत…’ जंगल से मिला कंकाल

कानपुर में युवक की हत्या उसकी शादीशुदा प्रेमिका ने की। आरोप- बेटी पर गलत नजर। 49 दिन बाद जंगल से कंकाल मिला, कोर्ट में पेशी जारी

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घटना की शुरुआत और मौत के बाद फैला सन्नाटा

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में सामने आई हत्या की यह कहानी सिर्फ अपराध का अध्याय नहीं है, बल्कि इंसानी रिश्तों के अंधेरे पक्ष का वह सच भी है, जिससे पूरा गांव कांप उठा है। 49 दिनों से जिस युवक की लापता होने की खबर गांव में चर्चा का विषय बनी हुई थी, उसका सच तब सामने आया जब पुलिस ने एक घने जंगल से युवक का कंकाल बरामद किया। यह कोई साधारण मौत नहीं थी, यह हत्या थी और हत्यारिन वही महिला निकली, जिसके साथ युवक का पिछले चार साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। मामला कानपुर के रसूलाबाद कोतवाली क्षेत्र के रौतापुर कला गांव का है, जहां रहने वाले 35 वर्षीय विवाहिता लक्ष्मीदेवी गौतम को पुलिस ने हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

लापता युवक की पहचान गोरेलाल के रूप में हुई, जो गांव का ही रहने वाला था। उसकी अचानक गुमशुदगी ने परिवार को तोड़ दिया था और पिता रामस्वरूप रोज पुलिस स्टेशन और अस्पतालों के चक्कर लगाते हुए अपने बेटे की तलाश में दर-बदर भटक रहे थे। खोज-बीन और दौड़-धूप के बाद परिवार की उम्मीदें धूमिल होने लगी थीं, लेकिन पुलिस ने इस मामले की परत दर परत खोलकर अंत में वो सच खोज निकाला, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

चार साल से चल रहा था प्रेम संबंध, गांव में खूब होती थी चर्चा

जांच से पता चला कि मृतक गोरेलाल और आरोपी लक्ष्मीदेवी के बीच पिछले चार वर्षों से प्रेम संबंध चल रहे थे। दोनों का रिश्ता छुपा नहीं था और गांव में उनके बारे में बातें होती थीं। लक्ष्मीदेवी शादीशुदा है और उसके घर में पांच बेटियां और एक बेटा है। इन सबके बीच प्रेम प्रसंग जारी रहा। दोनों अक्सर मिलते, बातें करते और कई बार लोगों की निगाहों में भी आ जाते। गांव के बड़े-बुजुर्गों ने इस रिश्ते को गलत बताते हुए दोनों को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन इसका असर नहीं हुआ।

धीरे-धीरे मामला बदलने लगा। पुलिस के अनुसार रिश्ते में गहराई और नजदीकियों के साथ साथ तनाव भी पैदा हो गया था। एक ओर गोरेलाल इस रिश्ते को आगे बढ़ाना चाहता था तो दूसरी ओर लक्ष्मी अपनी घरेलू जिम्मेदारियों और समाज की नजरों में फंसी थी। ऐसे में दोनों के बीच विवाद भी शुरू हो गया। हालांकि कोई भी अंदाजा नहीं लगा सकता था कि यह रिश्ता इतना खतरनाक मोड़ ले लेगा।

बेटी पर गलत नजर डालने से बदला दिशा

शुरुआती जांच में पुलिस को यह पता चला कि हत्या प्रेम प्रसंग की वजह से नहीं, बल्कि मृतक की कथित हरकतों की वजह से हुई। पूछताछ में आरोपी लक्ष्मी ने वो बात कही, जिसने पूरे मामले को नए एंगल पर ला दिया। लक्ष्मी का दावा है कि गोरेलाल की नीयत उसकी 13 वर्षीय बड़ी बेटी पर खराब हो गई थी। वह बच्ची पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालने लगा था और ऐसा न होने पर लक्ष्मी के बेटे को जान से मारने की धमकी देता था।

लक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि एक दिन तो हद ही हो गई, जब उसने अपनी आंखों के सामने गोरेलाल को बच्ची के साथ गलत हरकत करते हुए पकड़ लिया। यह दृश्य देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने तुरंत उससे यह संबंध खत्म करने की बात कही, लेकिन गोरेलाल ने उसके ऊपर दबाव डालकर धमकियां देनी शुरू कर दीं।

लक्ष्मी ने पुलिस को बताया कि वह अपने बेटे और बेटियों को खतरे में नहीं छोड़ सकती थी। वह मानसिक दबाव में आ चुकी थी, इस डर ने उसे हत्या के रास्ते पर धकेल दिया।

हत्या की प्लानिंग और एक दिन पहले की गतिविधियां

हत्या कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। पुलिस के अनुसार 31 अक्टूबर की रात लक्ष्मी ने अपने भतीजे ईशू को साथ मिलाकर हत्या की योजना बनाई। जांच में यह भी सामने आया कि ईशू को भी इस बात की जानकारी थी कि गोरेलाल बच्ची पर गलत नजर रखता था, इसलिए वह भी हत्या में शामिल हो गया।

वारदात वाले दिन लक्ष्मी ने गोरेलाल को यह कहकर बुलाया कि उसके मायके में एक लड़की है, जिससे वह गोरेलाल की शादी करा देगी। शादी की बात सुनकर गोरेलाल फौरन तैयार हो गया और दोनों साथ शाह निवादा पहुंचे। यहां ईशू पहले से मौजूद था। उसने शराब की बोतलें रखीं और गोरेलाल को लगातार शराब पिलाई।

जब शराब का नशा चढ़ता गया, गोरेलाल का शरीर सुस्त पड़ गया और वह बेहोशी जैसी हालत में गिर गया। उसी समय दोनों ने मिलकर गमछे से उसका गला दबा दिया। पुलिस का कहना है कि यह सब प्लान के तहत हुआ। ईशू ने शव उठाने में मदद की और बाद में दोनों ने मिलकर शव को घसीटते हुए घर से करीब 300 मीटर दूर घने जंगल में फेंक दिया।

रात भर दोनों इस बात को लेकर डरे रहे कि कहीं कोई उन्हें देख न ले। लेकिन जंगल का इलाका निर्जन था और किसी को भनक नहीं लगी।

घर और गांव में फैली थी बेचैनी

1 नवंबर की सुबह जब गोरेलाल घर नहीं लौटा तो घरवालों ने पहले आसपास खोज की। फिर रिश्तेदारों, दोस्तों, गांव वालों से पूछताछ शुरू हुई। किसी ने उसे आखिरी बार शराब पीते देखा था। किसी ने कहा वह बाइक पर शाह निवादा की ओर गया। लेकिन इसके अलावा कोई सुराग नहीं मिल सका।

2 नवंबर को पिता रामस्वरूप ने थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और गांव वालों के बयान जुटाना शुरू कर दिया। जांच जब लक्ष्मी के पास पहुंची तो शक गहराया। पुलिस ने लक्ष्मी के कॉल रिकॉर्ड चेक किए और पता चला कि हत्या के दिन वह और गोरेलाल लगातार बातचीत में थे।

यही से पुलिस को बड़ा सुराग मिला।

पुलिस ने कठोरता से किया सामना, आरोपी टूट गई

पुलिस हिरासत में लक्ष्मी से कई घंटे तक पूछताछ हुई। शुरुआत में उसने खुद को बचाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार वह टूट गई और सब कुछ बता दिया। उसने मृतक की बेटी से जुड़े दावे सामने रखे और पूरी हत्या की कहानी स्वीकार कर ली।

इसके बाद पुलिस कार्रवाई तेज हुई और जंगल में खोजबीन की गई। जमीन खोदकर पुलिस को अंदर हड्डियों का ढांचा मिला, जो बाद में फॉरेंसिक जांच में गोरेलाल का कंकाल साबित हुआ। जंगल में फैले कपड़े, टुकड़े, हड्डियां और मिट्टी के निशान सबूत बन गए।

अदालत में पेशी और गांव में चर्चा

आरोपी लक्ष्मी और उसके भतीजे ईशू को कोर्ट में पेश किया गया। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। गांव में इस घटना की चर्चा जोरों पर है। कोई इसे बेटी की सुरक्षा का मामला बता रहा है तो कोई इसे रिश्तों की क्रूरता में बदलती कहानी।

उधर मृतक का परिवार सदमे में है। उनका कहना है कि आरोपी झूठ बोल रही है और यह हत्या लालच और जलन के कारण हुई। परिवार ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आगे की जांच

मृतक की हड्डियों को पोस्टमार्टम और डीएनए टेस्ट के लिए भेजा गया है। पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या हत्या से पहले मारपीट हुई थी, क्या किसी और की भूमिका है, क्या मोबाइल फोन से अतिरिक्त सबूत मिल सकते हैं।

पुलिस ने मृतक की मोबाइल लोकेशन, शराब की बोतलों और जमीन से प्राप्त सामान को सील किया है।

मृतक का परिवार और गांव के हालात

मृतक के माता-पिता बदहवास हैं। पिता रामस्वरूप रोते हुए कहते हैं कि उन्होंने अपने बेटे को कभी गलत काम करते हुए नहीं देखा था। मां की हालत बेहद खराब है। गांव में पुलिस की मौजूदगी बनी हुई है और हर कोई इस घटना की चर्चा करते नहीं थक रहा।

इस घटना ने उठाए कई बड़े सवाल

यह खबर न सिर्फ कानपुर बल्कि पूरे प्रदेश में गूंज रही है। सवाल यह भी है कि क्या इंसान अपने निजी रिश्तों में इतना अंधा हो सकता है कि हत्या उसकी मंजिल बन जाए? समाज, रिश्ते, सम्मान, शक और सुरक्षा के बीच यह कहानी इंसानी मनोविज्ञान की गहराइयों को झकझोर देती है।

कानपुर की यह हत्या सिर्फ एक व्यक्ति की मौत की कहानी नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, अपराध और भय के मिश्रण से बनी वह तस्वीर है, जिसमें हर किरदार अपने स्तर पर टूटा हुआ दिखाई देता है। पुलिस आगे की जांच में जुटी है और कंकाल का डीएनए मिलान इस केस की दिशा और परिणाम दोनों तय करेगा। गांव अब भी सदमे में है और मृतक का परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है।

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