17/07/2025
अभी महीना, दो महीना पहले ही सीरिया में अल-क़ायदा प्रमुख जोलानी ट्रंप से गलबहियां कर रहा था। ट्रंप उसको स्मार्ट ब्वाय बता रहा था। ट्रंप की तारीफ से लहालोट जोलानी गैंग के लोग कह रहे थे इज़रायल हमारा दुश्मन नहीं है। हमारी लड़ाई अमेरिका या इज़रायल से नहीं है। और फिर हस्बे दस्तूर, इज़रायल आया और जोलानी एंड कंपनी का बंदर बनाना शुरु कर दिया। अमेरिका तमाशा देख रहा है क्योंकि सबकुछ उसी की मंशा के मुताबिक़ हो रहा है।
लोग नहीं समझते, साम्राज्यवादी, विस्तारवादी और मनोरोगी शासक किसी के सगे नहीं होते। इज़रायल का ऐजेंडा फरात नदी से नील नदी के दरमियान सयून साम्राज्य का विस्तार करना है। इससे बचने का एकमात्र रास्ता प्रतिरोध है। जो झुकेगा, वो दो लात भी खाएगा और ज़लील भी कहलाएगा। सीरियाई शासक ज़लील किए जा रहे हैं। कुर्द, और द्रूज़ अपने शहरों पर आज़ादी के परचम लहरा रहे हैं। आम सीरियाई अवाम दोहरी मार झेल रहे हैं। ज़मीन पर जोलानी के ग़ुंडे ख़ून-ख़राबा कर रहे हैं और आसमान से इज़रायली बम बरसा रहे हैं।
बहरहाल, लीबिया, इराक़, और अफग़ानिस्तान के बाद अब सीरिया में भी अमेरिकी लोकतंत्र सफलतापूर्वक स्थापित हो गया है। अगला नंबर देखते हैं मिस्र का लगता है या पहले लेबनान में लोकतंत्र आता है। आप कुर्सी की पेटी बांधे रखिए। अमेरिका और इज़रायल जबतक अपने हर 'मित्र देश' का कबाड़ा करके पूर्ण लोकतांत्रिक दास राज्य नहीं बना देंगे, धरती पर शांति स्थापित नहीं होगी।
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