28/10/2025
औरतें हमेशा ये सोचती हैं कि मर्द औरत के अतीत को लेकर इतने जुनूनी क्यों होते हैं…
कई तो ये सवाल भी उठाती हैं कि जब खुद मर्दों का अतीत भी परफेक्ट नहीं होता, तो उन्हें किसी औरत के अतीत के बारे में जानने का हक़ क्यों होना चाहिए?
लेकिन सच्चाई ये है —
शादी "बराबरी" का रिश्ता नहीं होती।
ये दो लोगों का ऐसा संबंध है, जिसमें एक "नेता" होता है और दूसरा "उसके अधीन" चलता है।
मर्द नेता होता है, और औरत उसका अनुसरण करती है।
अब अगर बात करें कि औरत शादी में क्या लेकर आती है —
तो उसका सबसे बड़ा और असली योगदान वफादारी होती है।
और किसी इंसान की वफादारी का सबसे बड़ा सबूत होता है — उसका अतीत।
जिस तरह एक नौकर जिसने अपने पुराने मालिक को धोखा दिया,
वो नए मालिक के साथ भी वैसा ही करेगा,
वैसे ही एक औरत का अतीत यह बताता है कि वह अपने पति के प्रति कितनी वफादार रहेगी।
गलत मत समझिए —
जब कोई औरत शादी करती है, तो वह अपने पति के अधीन हो जाती है।
शादी में बराबरी का कोई कांसेप्ट नहीं होता।
क्योंकि —
• दूल्हा दहेज नहीं, बल्कि कन्यादान लेता है और कन्या का अधिकार पिता से अपने नाम करता है।
• औरत अपने पिता का घर छोड़कर पति का नाम अपनाती है।
• बच्चे उसी के नाम से जाने जाते हैं।
• वही उनकी सुरक्षा, खर्च और भविष्य की जिम्मेदारी उठाता है।
• और घर के बड़े फैसलों में उसकी राय सर्वोपरि मानी जाती है।
तो ज़ाहिर है — दोनों बराबर नहीं हैं।
और इसी वजह से औरत से ज़्यादा वफादारी की उम्मीद की जाती है।
और उस वफादारी को मापा जाता है उसके अतीत से।
एक ऐसी औरत जिसने कई मर्दों के साथ संबंध बनाए हों,
वो एक आदमी के साथ मानसिक और शारीरिक रूप से वफादार नहीं रह सकती।
ऐसी औरत हमेशा अपने पति की तुलना अपने एक्स से करती रहेगी,
जिससे रिश्ता धीरे-धीरे टूटने लगता है।
इसलिए मर्द हमेशा औरत के “body count” पर सवाल उठाते हैं —
क्योंकि उसके पीछे एक गहरी मनोवैज्ञानिक वजह होती है।
वहीं, मर्द के अतीत की परवाह इसलिए नहीं की जाती,
क्योंकि उसकी असली काबिलियत उसके वर्तमान और भविष्य में होती है —
वो कितना नेतृत्व कर सकता है, सुरक्षा दे सकता है,
और अपने परिवार का भविष्य बना सकता है — यही असली मायने रखते हैं।
औरतें भी ये बात भीतर से जानती हैं,
इसीलिए वो अक्सर अपने पति की गलती या बेवफाई को माफ़ कर देती हैं —
जो कि कोई मर्द कभी नहीं करता।
यही दिखाता है कि दोनों से वफादारी की अपेक्षा अलग-अलग होती है।
इसलिए अगर कोई औरत “body positivity”, “freedom” या “modern feminism” के नाम पर
अपना अतीत बिगाड़ लेती है —
तो उसे शादी के वक्त उसी की कीमत चुकानी पड़ती है।
क्योंकि सच्चाई ये है —
मर्द को औरत का अतीत मायने रखता है,
जैसे औरत को मर्द का भविष्य मायने रखता है।
औरत की क़ीमत उसके अतीत में छिपी होती है,
जैसे मर्द की क़ीमत उसके भविष्य में।