17/08/2026
UGC-NET के English, Commerce और Sociology के पेपर में प्रिंटिंग एरर, गलतियां और पुराने सवालों को दोहराने जैसी गंभीर खामियां थीं। परीक्षा में बैठे अभ्यर्थियों ने परीक्षा के तुरंत बाद ही इन गंभीर अनियमितताओं को उजागर कर दिया था, लेकिन करीब दो महीने बाद NTA ने इन खामियों को स्वीकार किया। यह NTA की घोर अक्षमता और पूरी व्यवस्था की विफलता है।
छात्रों ने महीनों मेहनत की, दिन-रात तैयारी की, परीक्षा दी और अब NTA की गलती की कीमत उन्हें दोबारा परीक्षा देकर चुकानी पड़ेगी। क्या NTA को पेपर छपवाने, जांचने और परीक्षा कराने से पहले अपनी गलतियां दिखाई नहीं दीं?
NTA की नाकामी के कारण छात्रों को मानसिक और शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। छात्रों के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। NTA की जवाबदेही तय होनी चाहिए, जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और छात्रों को हुई परेशानी का उचित समाधान दिया जाना चाहिए।
सिर्फ एक शिक्षा मंत्री को बदल देने से शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जरूरत सिर्फ चेहरे बदलने की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था बदलने की है। शिक्षा तंत्र में व्यापक और बुनियादी रिफॉर्म की जरूरत है। NTA जैसी संस्थाओं की जवाबदेही तय करने से लेकर परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, विश्वसनीय और छात्र-केंद्रित बनाने तक, पूरे सिस्टम में आमूलचूल बदलाव जरूरी है।