Man ki baat

Man ki baat अपने मन की बात लोगों तक पहुंचाने का ना?

30/09/2025

😔😨👇🏻 "भला यह भी कोई बात हुई। नीता के पापा को न्यौता देना भी नहीं आता। मेरे रिश्तेदारों ने तो हमेशा शादी विवाह में इन लोगों को न्यौता दिया है और इन लोगों को देखो शर्म भी नहीं आती। मुझे तो कहीं का मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा। नीता के भाई की शादी है और देखो इतने से ही कार्ड देकर गए हैं"|
कुमुद जी का सुबह से ही बड़बड़ाना जारी था। जब से उनकी बहू नीता के पापा उनके बेटे की शादी का न्यौता देकर गए हैं, तब से ही उनका मूड उखड़ा हुआ है। हालांकि नीता को भी रसोई में काम करते हुए सब कुछ सुनाई दे रहा था। पर वह बोली कुछ नहीं, क्योंकि अगर बोलती भी तो बात ही बिगड़नी थी इसलिए चुप रहना ही बेहतर समझा।
नीता कुमुद जी की बहू और सुनील की पत्नी है। नीता की शादी तीन साल पहले ही सुनील के साथ हुई है। सुनील के परिवार में मां कुमुद जी और एक छोटा भाई आयुष है। नीता का मायका महाराष्ट्र में था, वही ससुराल जयपुर में।
नीता का ससुराल का परिवार काफी बड़ा था। कुमुद जी के सात भाई बहन थे। नीता की शादी के बाद के ससुराल में कई लोगों की शादी हुई थी। पर एक चीज कुमुद को बहुत अजीब लगती थी, वो था न्यौता। जो उसके मायकेवालों के लिए होते थे।
अगर कुमुद जी के भाई बहन के परिवार में कोई शादी है और वहां से न्यौता आए तब तो समझ में भी आता था। पर जब दूर की रिश्तेदारी से उसके मायके के लिए न्यौते आते थे, वह बात पल्ले नहीं पड़ती थी। जबकि उसके मायके वाले तो उन लोगों जानते भी नहीं थे। नीता को समझ में नहीं आता था कि अगर मम्मी जी के बहन की बेटी के ससुराल में काम है या फिर मामाजी के बेटे के साले साहब का विवाह है, तो न्यौता मेरे मायके वालों का किस बात का।
और उस पर भी यह उम्मीद करके बैठना कि सामने वाला भी हमें न्यौता दे देगा। उसके माता-पिता तो कभी आ ही नहीं पाते थे। एक तो इतनी दूर से समय और पैसा खर्च करके आना वह भी ऐसे रिश्तो के लिए जो काफी दूर के हैं और जिन्हे जानते भी नहीं, संभव नहीं हो पाता।
शुरू शुरू में तो नीता ने समझाने की कोशिश भी की, पर वही ढाक के तीन पात। उसने कुछ भी कहना छोड़ दिया। पर जब भी किसी शादी विवाह में जाना होता तो परिवार के लोग यही कहते कि नीता तुम्हारे भाई की शादी कब है? तुम्हारे भाई की शादी के बहाने हमारा भी महाराष्ट्र जाना हो जाएगा।

वही कुमुद जी का यही राग रहता कि तेरे माता पिता तो कभी आते नहीं और शगुन के पैसे भी हम ही डालते है।
खैर वक्त बीतता गया। अब नीता की भाई की शादी पक्की हो गई तो आज उसके पापा न्यौता देने आए थे। हालांकि उन्होंने कुमुद जी के सभी भाई बहनों का न्यौता दे दिया था लेकिन कुमुद जी शायद उम्मीद करके बैठी थी कि उनके बच्चों के ससुराल वगैरह को भी न्यौता दिया जाए, जो कि पॉसिबल नहीं था। हालांकि उन्होने नीता के पापा से तो कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके जाने के बाद में बड़बड़ाना शुरू कर दिया।
नीता को बहुत बुरा लग रहा था। आखिर जब बर्दाश्त के बाहर हुआ तो उसने कह दिया|

'मम्मी जी, मैंने आपको पहले भी समझाने की कोशिश की थी इतने दूर दूर के रिश्ते नहीं निभते। लेकिन उसके बावजूद भी आप मेरे मम्मी पापा के नाम पर उन लोगों से कार्ड ले लेते थे। अब उनसे उम्मीद मत कीजिए आप लोग कि वह उन लोगों के लिए कार्ड देंगे। आइंदा से मेरे माता-पिता को मत बुलाया कीजिए'|
'तेरे कहने से क्या होता है। रिश्तेदारी में तो मेरी नाक कट जाएगी। अगर मैं उनके मुंह पर यह कह दूंगी कि भाई इसके माता-पिता को तो मत बुलाया करो। और भी तो बहूए हैं जिनके माता-पिता को बुलाया जा रहा है'|
'हां और बहूए है जिनके परिवार यहीं पर मौजूद है। मेरे माता-पिता को समय और पैसा खर्च करके दूर से आना पड़ता है, जो कि हर समय संभव नहीं है'|

'हां तेरे ही माता-पिता अनोखे है, जो नहीं आ सकते। मैं तो अपने रिश्तेदारों से कभी इस तरह ना कहूं'|

'ठीक है, आपसे कहते नहीं बनता तो मैं खुद कह दूंगी कि आप मेरे माता-पिता को मत बुलाया कीजिए'|

उस दिन के बाद से जब भी किसी दूर के रिश्तेदार के यहाँ से नीता के माता-पिता के लिए न्यौता आता तो नीता खुद ही कह देती है कि प्लीज मेरे माता-पिता का आना संभव नहीं, तो उनका कार्ड रहने ही दीजिए। धीरे-धीरे ऐसे न्यौते आने बंद हो गए। अब नीता को बेवजह की परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
ठीक है, एक बार मुंहफट बन जाने में कोई हर्ज नहीं। आखिर हमेशा की परेशानी तो नहीं उठानी पड़ती।

✍️

26/09/2025

मैं चाहता था कि मेरी पत्नी को बच्चे के जन्म के बाद वेतन पर रखूँ, लेकिन मेरे दोस्तों ने मुझे हतोत्साहित कर दिया।

मेरी पत्नी ने जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया था। वह एक फर्म में सेक्रेटरी का काम करती थी, लेकिन गर्भावस्था और उसके काम की प्रकृति के कारण उसे छुट्टी दी गई और कहा गया कि वह डिलीवरी के तीन महीने बाद लौटे।

सौभाग्य से, उसने जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया, और वापस काम पर जाना आसान नहीं था क्योंकि उसे वास्तव में घर पर रहकर बच्चों की देखभाल करनी थी। वह हमेशा से अपनी कमाई करने वाली महिला रही है, इसलिए मैंने सोचा कि उसे वेतन पर रख दूँ, ताकि जब भी वह अपने लिए कुछ खरीदना चाहे या जो भी खाना चाहे, उसे आसानी से मिल सके।

लेकिन मेरी गलती यह थी कि मैंने यह विचार अपने कुछ करीबी दोस्तों से साझा कर लिया।

मैंने उनसे पूछा,

“दोस्तों, क्या यह गलत होगा अगर मैं अपनी पत्नी को वेतन दूँ? उसने अभी-अभी बच्चे को जन्म दिया है और उसे हाथ में पैसे की ज़रूरत होगी?”

मेरे एक दोस्त ने तुरंत कहा –

“वेतन किस बात का? तुम अपनी पत्नी को वेतन क्यों दोगे? वह तुम्हारी पत्नी है, तुम्हारी नौकरानी नहीं।”

मैंने शांत स्वर में कहा,

“नहीं, लेकिन मैं बस सोच रहा हूँ… यह वही है जिसने पूरी ज़िंदगी काम किया है। अब वह बच्चों के साथ घर पर फँस गई है। कम से कम उसके पास कुछ तो होना चाहिए।”

दूसरे दोस्त ने गुस्से में कहा,

“यही लोग औरतों को बिगाड़ते हैं। आज तुमने यह शुरू किया तो कल वह तुम्हारी बीवी से कहेगी और मेरी बीवी मुझे परेशान करना शुरू कर देगी। भाई, ऐसा मत करो जिसे निभा न सको। घर का खर्चा दे दो, वही काफी है। जब तक वह काम पर नहीं लौटती, उसे मैनेज करने दो।”

मैंने गहराई से सोचा और मान लिया कि शायद वे सही कह रहे हैं। इसलिए मैंने पत्नी को किसी वेतन पर नहीं रखा।

अब मेरी पत्नी ऐसी है जो माँगना नहीं जानती। उसने हमेशा स्वतंत्र रहना सीखा है, और मैं उसी में उलझा रहा।

एक शाम मैं काम से लौटा और बेडरूम में गया। मेरी पत्नी ने अगले दिन के लिए मेरे कपड़े पहले से प्रेस करके रख दिए थे, जैसा वह हमेशा करती थी। जुड़वाँ बच्चे पालने में सो रहे थे, और वह रसोई में खाना बना रही थी।

तभी उसका फोन बजा। फोन बिस्तर पर रखा था, तो मैंने उठाकर उसे दिया और बाहर निकल गया।

मैंने बातचीत सुनी। वह उसके बड़े भाई का फोन था।

औपचारिक बातें करने के बाद भाई ने पूछा,

“बहन, कैसी हो? खुश नहीं लग रही हो। सब ठीक है?”

उसने हंसने की कोशिश की,

“मैं ठीक हूँ। सब कुछ ठीक है।”

लेकिन भाई ने ज़ोर दिया,

“नहीं, तुम्हारी आवाज़ ठीक नहीं लग रही। सच बताओ, क्या हुआ?”

थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने धीरे से कहा,

“भैया, क्या आप मेरे लिए फोन रिचार्ज कर सकते हैं? बैलेंस खत्म हो गया है। और अगर हो सके तो डाटा भी करा दीजिए। एक हफ्ते से बंद है।”

भाई हैरान रह गया,

“तुमने पहले क्यों नहीं बताया? मुझे पहले ही कहना चाहिए था।” उसने तुरंत पैसे भेजने का वादा किया।

कॉल खत्म होने के बाद मैं सन्न रह गया। मेरा सीना भारी हो गया। एक आदमी के रूप में यह मुझे गहरा चोट पहुँचा गया। मेरी पत्नी को इतनी छोटी चीज़ के लिए, जैसे कि रिचार्ज और डाटा, अपने भाई से मदद माँगनी पड़ी, जबकि मैं यहीं था और कुछ नहीं किया।

मुझे बहुत बुरा लगा, क्योंकि घर का पुरुष होने के नाते ज़िम्मेदारी मेरी थी। अगर शादी के बाद भी पत्नी को अपने भाई या परिवार से मदद माँगनी पड़े, तो इसमें मेरी ही कमी है। न पैसे की तंगी थी, न हम गरीब थे। सब ठीक था। बस मैंने ज़िम्मेदारी नहीं निभाई।

मेरे लिए यह अपने चेहरे पर तमाचा था। बड़ा तमाचा।

बाद में, रात के खाने के समय मैंने उससे धीरे से पूछा,

“तुमने मुझे क्यों नहीं बताया कि तुम्हें इन चीज़ों के लिए पैसे चाहिए?”

उसने नज़रें नीची कर दीं और बोली,

“तुम मुझे जानते हो। मैं माँगना नहीं जानती। मैं हमेशा काम करती रही हूँ और मेरे पास अपना होता था। अब छोटे-छोटे कामों के लिए माँगना मेरे लिए आसान नहीं है।”

मेरे दिल में दर्द उठा। मैंने उसका हाथ पकड़ा और कहा,

“माफ करना। आज से मैं ध्यान रखूँगा कि तुम्हें किसी चीज़ की कमी न हो।”

वह हल्का-सा मुस्कुराई, लेकिन उसकी आँखों में उदासी साफ थी। खाने के बाद मैंने उसे पैसे दिए। और मेरी हैरानी की बात, वह रो पड़ी।

मैं घबरा गया,

“क्या हुआ?”

उसने आँसू पोंछते हुए कहा,

“तीन महीने से, डिलीवरी के बाद से, मैं बिल्कुल खाली हूँ। मैं अपना पसंदीदा शॉर्टब्रेड भी नहीं खरीद पाई। दुकान में दिखता तो आँखें बंद करके निकल जाती। जो भी चीज़ मुझे पसंद आती, मैं दिखावा करती कि मुझे ज़रूरत नहीं। बहुत मुश्किल रहा है।”

मेरा गला भर आया, और मुझे शर्म महसूस हुई। उसी पल मैंने वचन लिया कि उसे दोबारा कभी यह हाल न होने दूँगा।

उस दिन से मैंने उसे मासिक खर्च देना शुरू कर दिया। उसने कभी बेकार नहीं किया, बल्कि बहुत सोच-समझकर खर्च किया। जब भी मैं उसे पैसे भेजता, वह खुशी से उछल पड़ती और गाते-गुनगुनाते हुए मेरे चारों ओर घूमती,

“मेरे पति, मेरे पति, मेरे ओडोग्वू बुबू!” और नाचने लगती।

मैं शर्मा जाता और हंसता, और कभी-कभी उसे और भी पैसे दे देता, सिर्फ उसकी वह चमकती मुस्कान देखने के लिए। उन लम्हों ने हमारे घर में शांति और सुकून ला दिया, क्योंकि अब उसे पता था कि वह अहम है और उसकी देखभाल हो रही है।

सीख

कभी भी बाहरी लोगों की बातों को अपने घर की व्यवस्था पर हावी न होने दें। आप और आपके जीवनसाथी सबसे अच्छी तरह जानते हैं कि आपके परिवार के लिए क्या ठीक है।

शादी साझेदारी और देखभाल का नाम है। अपने जीवनसाथी की छोटी-छोटी ज़रूरतें पूरी करना भी प्यार का ऐसा बीज है जो शांति, खुशी और सम्मान में बदलता है।

( ChatGPT द्वारा अनुवादित)

Original post :

I wanted to place my wife on a salary after giving birth but my friends discouraged me.

After my wife gave birth, she had given birth to twins at the time. She was working as a secretary in a firm, but because of her pregnancy and the nature of her job, she was given leave to return three months after delivery.

Fortunately, she gave birth to twins, and going back was not easy because she really needed to stay at home and tend to the kids. Being someone who always had her own money, I thought it wise to place her on salary so that whenever she wanted to buy something for herself or eat what she desired, she could easily get it.

But the mistake I made was discussing this idea with some close friends at work.

I asked them,

“Guys, is it really bad if I place my wife on salary, seeing that she just gave birth, and will need money at hand?”

One of my friends snapped immediately.

“Salary for what? Why would you give her a salary? Is she not your wife? Is she your housemaid?”

I replied calmly,

“No, but I’m just thinking… This is someone who has worked all her life. Now she’s stuck at home with the babies. At least she should have something to hold on to.”

But another friend cut in angrily,

“It is you people that empower women. When you start this now, tomorrow she’ll go and tell my wife, and that one will start disturbing me. My brother, don’t start what you cannot finish. If you give her money for the house, that’s enough. Let her manage herself till she resumes work.”

I thought about it deeply and concluded that maybe they were right. I didn’t place her on any salary.

Now, my wife is the kind of woman who doesn’t know how to ask. All her life she has been independent, and I got carried away by that.

One evening, I returned from work and went into the bedroom. My wife had already ironed and arranged my clothes for the next day, as she always did. The twins were asleep in their cot, and she was in the kitchen preparing dinner.

Just then, her phone rang. It was lying on the bed, so I picked it up and handed it to her before stepping out.

I overheard the conversation. It was her elder brother.

After the exchange pleasantries, her brother asked,

“My sister, how are you doing? You don’t sound happy. Is everything alright?” he asked.

She tried to sound cheerful.

“I’m fine. Everything is okay.”

But her brother pressed further.

“No, you don’t sound fine. Tell me, what’s wrong?”

After a pause, she said softly,

“Please, can you help me recharge my phone? I’ve run out of airtime. And if you can, help me subscribe for data too. I’ve been out for a week now.”

Her brother was shocked.

“Why didn’t you say so? You should have told me earlier.” He promised to send her some money immediately.

When she ended the call, I stood frozen. My chest felt tight. As a man, it struck me hard. My wife had to reach out to her brother for something as little as airtime and data, while I was there, doing nothing.

I really felt bad because as the man of the house, I am supposed to be the provider. If a man gets married to his wife and she still has to reach out to her brothers or family for help, then something is wrong. It’s not like I didn’t have the money. It’s not like we were poor. We were okay. I was okay. I just failed to take responsibility.

To me, it was a slap to my face. A big slap.

Later, during dinner, I asked her gently,

“Why didn’t you tell me you needed money for these things?”

She lowered her eyes and replied,

“You should know me by now. I don’t know how to ask. I’ve always worked and had my own. It’s not easy for me to come and start asking you for small things.”

I felt a sting in my heart. I reached for her hand.

“I’m sorry. From today, I’ll make sure you don’t lack anything.”

She smiled faintly, but I could see the sadness in her eyes. After the meal, I gave her some money. To my surprise, she broke down in tears.

“What’s the matter?” I asked, alarmed.

She wiped her eyes and whispered, “For over three months now, since I gave birth, I’ve been so broke. I couldn’t even buy shortbread, my favorite snack. I would see it in the shop, but I’d just close my eyes and walk away. Anything I see that I like, I pretend as if I don’t need it. It has not been easy for me.”

My throat tightened, and I felt ashamed. Right there, I promised myself never to let her go through that again.

From that day onward, I placed her on a monthly allowance. She never squandered it; instead, she used it wisely. Anytime I sent her money, she would rush to me with excitement, singing my praises,

“My husband, my husband, my Odogwu Bubu!” and dance around the room.

I would blush and laugh, and sometimes I would send her even more, just to see that glow on her face. Those moments brought peace into our home, because she knew she was valued and cared for.

Marriage is not about listening to outsiders. It is about protecting your home, prioritizing your partner, and making sure their needs are met in love.

Morals

Never allow external voices to dictate how you run your home. You and your spouse know what works best for your family.

Marriage is about partnership and care. Providing for your spouse, even in small ways, is a seed of love that grows into peace, happiness, and respect.
Vivek Kaushik

आयरन और विटामिन सी से भरपूर सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाएं ताकत दे होममेड आवला च्यवनप्राश बनाने की रेसिपी । सामग्री ▪︎1 क...
13/02/2025

आयरन और विटामिन सी से भरपूर सर्दियों में इम्यूनिटी बढ़ाएं ताकत दे होममेड आवला च्यवनप्राश बनाने की रेसिपी ।
सामग्री ▪︎

1 किलो आंवला
500 ग्राम गुड़
100 ग्राम खजूर
दो बड़ा चम्मच देसी घी
8 से 10 तुलसी पत्ता
दो टुकड़ा दालचीनी
दो चम्मच सौंफ
दो चम्मच जीरा
एक चम्मच काली मिर्च
तीन से चार तेज पत्ता
5 से 6 लौन्ग
5 से 6 पिपली
5 से 6 इलायची
दो चम्मच सोंठ पाउडर
दो से तीन चम्मच शहद

होममेड च्वयनप्राश बनाने की विधि ।

1 ▪︎ आंवले को धोकर प्रेशर कुकर में डालें आधा कप पानी डालकर दो से तीन सीटी आने तक उबाल लें ।

2▪︎ उबालने के बाद ठंडा करके आंवले से बीज निकाल कर अलग कर ले अब आंवले के गूदे को मिक्सी के जार में डालकर पीसकर पेस्ट बना लें ।

3▪︎ आप सभी खड़े मसाले लौंग ,इलायची, सौंफ, जीरा, पिपली ,दालचीनी, काली मिर्च, तेजपत्ता को धीमी आंच पर हल्का सेक ले ठंडा करके मसाले को दरदरा रहा पीस लें ।

4▪︎ खजूर के बीज निकालकर अलग कर लें अब एक जार में खजूर का गुदा डालें साथ में तुलसी के पत्ते और थोड़ा सा पानी डालकर पीसकर इसका भी पेस्ट बना ले ।

5 ▪︎ कढ़ाई में घी गर्म करें अब आंवले के पेस्ट को डालकर धीमी आंच पर 7 से 8 मिनट पकाएं ।

6 ▪︎ आप पिसे हुए खजूर का पेस्ट ,गुड़ और साथ में पिसे हुए पाउडर मसाले डालें । आप सभी चीजों को मिलने और गुड़ को घुलने तक धीमी आंच पर 7 से 8 मिनट पकाना है ।

7 ▪︎ आखिर में सोंठ पाउडर और शहद डालकर अच्छी तरह मिला ले च्यवनप्राश बनकर तैयार है ठंडा होने के बाद इसे किसी एयरटाइट डब्बे में भरकर रख ले पूरी सर्दियाँ इस होममेड च्यवनप्राश को खाएं इम्यूनिटी बढ़ाए ।
deepsikhagautam
Kaushik Vivek


20/06/2024
29/03/2024

पानी पूरी का चटपटा पानी 🥣
1 कप ताज़ा धनिया
2 कप ताज़ा पुदीना
नमक स्वादानुसार
1 चम्मच काला नमक
1 चम्मच चाट मसाला
1 चम्मच भुना जीरा पाउडर
1/2 कप इमली पेस्ट
1/2 इंच अदरक का टुकड़ा
2 हरी मिर्च
1/2 कप गुड़
1/2 कप बूंदी
4 कप पानी
विधि - धनिया, पुदीना, अदरक, हरी मिर्च को एक साथ पीसकर पेस्ट बना ले.... एक बड़े से कटोरी में पानी डाले और अब पेस्ट मिला दे....सभी मसाले मिला दे..... बूंदी ,इमली पेस्ट और गुड़ भी मिला दे.... कुछ देर सबको अच्छे से मिला दे.... 15 मिनट रख दे....पानी पूरी का चटपटा पानी तैयार है.... चाहे तो जीरा और हिंग का तड़का लगा के इसका ज़ायका बढा सकते हैहै....

10/01/2023

khaiye durust rahenge tandurust saag ka kmaal saag machaega dhmaal ...

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