15/09/2026
क्या आपने कभी सुना है कि एक राजा के रथ के पहियों से बनी सात विशाल खाइयाँ आगे चलकर सात समुद्रों में परिवर्तित हो गईं?
यह कथा है महाराज प्रियव्रत की—जिन्होंने धर्मपूर्वक विशाल साम्राज्य संभाला, लेकिन अंततः उसी वैभव से विरक्त होकर आध्यात्मिक जीवन की ओर लौट गए।
श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित यह कथा हमें एक गहरी सीख देती है—
कर्तव्य निभाओ, लेकिन अपने जीवन का अंतिम लक्ष्य मत भूलो।
अगर कथा नई लगी हो तो कमेंट में “हरि” जरूर लिखें। 🙏