06/06/2026
जब किसी के साथ छोटा-मोटा अन्याय होता है, तो पहले वह उसे सहन कर लेता है। *"फिर और अन्याय होने पर वह अन्यायकारी को सूचित करता है। फिर और अन्याय होने पर वह उसको चेतावनी देता है। यदि अन्याय फिर भी न रुके, तो फिर वह बदला लेने के लिए क्रोध करता है। मन से वाणी से और कभी-कभी शरीर से मारपीट भी कर लेता है। इसे बदला लेना या प्रतिशोध कहते हैं।"*
कुछ समय बाद जब क्रोध करने के परिणाम सामने आते हैं, तब वह दुखी होता है, और पश्चाताप करता है कि *"मैंने क्रोध क्यों किया। उसका परिणाम तो मेरे पक्ष में नहीं आया, कोई लाभ नहीं हुआ। उल्टा हानि ही हुई। इसलिए मुझे क्रोध नहीं करना चाहिए था।"* तब वह इस प्रकार से पश्चाताप करता है।
तो बुद्धिमान व्यक्ति को सोचना चाहिए, कि *"मैं ऐसी मूर्खता क्यों करूं? जिसके अंत में मुझे पश्चाताप करना पड़े।"*
तो अब इस समस्या का समाधान क्या है। समाधान यह है कि "व्यक्ति क्रोध करने से पहले ही उसके परिणाम पर विचार करे, कि *"इसमें कुल मिलाकर मुझे लाभ नहीं होगा। इसलिए मुझे क्रोध नहीं करना चाहिए।" "यदि इस प्रकार का आत्म सुझाव (ऑटो सजेशन) प्रतिदिन व्यक्ति स्वयं को देवे, तो उसकी क्रोध करने की आदत धीरे-धीरे कम हो जाएगी, और एक दिन छूट जाएगी।"*
परंतु जब दूसरा व्यक्ति अन्याय करता है, तब क्रोध तो आता ही है। उसको रोकें कैसे? तब ऐसा सोचें कि *"यह व्यक्ति अज्ञानी और स्वार्थी है। अपने अज्ञान के कारण अथवा स्वार्थ के कारण मुझ पर अन्याय करता है। यदि वे अन्याय छोटे-छोटे स्तर के हों, तो ये तीन शब्द अपने मन में बोलकर वह उस अन्याय को सहन कर ले, "कोई बात नहीं।"*
*"यदि कुछ बड़ा अन्याय हो, और दूसरे व्यक्ति को अपने ऊपर अन्याय करने से रोक न पा रहा हो, तो ऐसी स्थिति में वह उसे ईश्वर के न्याय पर छोड़ दे।"* तब अपने मन में ये तीन शब्द बोले, *"ईश्वर न्याय करेगा।"* परंतु भविष्य में अपनी सुरक्षा जरूर रखे, कि *"भविष्य में यह दुष्ट व्यक्ति दोबारा मेरी हानि न कर पाए।"* इतना पुरुषार्थ उसे करना होगा।
*"जब वह उस अन्याय को ईश्वर के न्याय पर छोड़ देगा, और बार-बार उस अन्याय की घटना को याद नहीं करेगा, तब वह दुखी नहीं होगा, और क्रोध भी नहीं करेगा।" "सही समय आने पर ईश्वर उसकी हानि की पूर्ति भी कर देगा, और उस अन्यायकारी व्यक्ति को अवश्य ही दंडित भी करेगा।" "इस प्रकार से अपना चिंतन और व्यवहार बनाकर व्यक्ति क्रोध करने से बच सकता है, तथा अपने क्रोध पर विजय प्राप्त कर सकता है। और जब वह व्यक्ति क्रोध नहीं करेगा, तब उसके मन में बहुत शांति होगी।"*
*"अतः क्रोध के परिणामों को पहले ही विचार कर व्यक्ति क्रोध करने से बचे, और ऐसी मूर्खता क्यों करें कि अंत में उसे पछताना पड़े।"*