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02/08/2026

लोकतंत्र का मतलब अराजकता नहीं होता, और अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब देश की सेना, सैनिकों और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान ...
31/07/2026

लोकतंत्र का मतलब अराजकता नहीं होता, और अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब देश की सेना, सैनिकों और संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करने का लाइसेंस बिल्कुल नहीं है।

यदि जांच में यह साबित होता है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने सिर्फ वायरल होने के लिए अश्लील, अभद्र और आपत्तिजनक वीडियो बनाए, सेना के जवानों और अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और उस कंटेंट को सोशल मीडिया पर फैलाया, तो केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं होना चाहिए।

मेरी स्पष्ट राय है कि ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के सोशल मीडिया अकाउंट, चाहे वे किसी भी प्लेटफ़ॉर्म पर हों, संबंधित कानूनों और प्लेटफ़ॉर्म की नीतियों के अनुसार स्थायी रूप से बंद किए जाने पर भी विचार होना चाहिए। जो लोग सोशल मीडिया को गाली-गलौज, अश्लीलता और नफ़रत फैलाने का हथियार बना देते हैं, उन्हें डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का विशेषाधिकार नहीं मिलना चाहिए।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन मर्यादा के भीतर। विरोध के नाम पर अश्लीलता, बदसलूकी और संस्थाओं का अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

यह मेरी व्यक्तिगत राय है। अंतिम निर्णय कानून, निष्पक्ष जांच और सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होना चाहिए।

27/07/2026

🚩 क्या हम वाकई कभी शहीद भारत तिवारी को इंसाफ दिला पाएंगे?सवाल बहुत बड़ा है, लेकिन इसका जवाब उससे भी ज्यादा कड़वा है। हम ...
24/07/2026

🚩 क्या हम वाकई कभी शहीद भारत तिवारी को इंसाफ दिला पाएंगे?
सवाल बहुत बड़ा है, लेकिन इसका जवाब उससे भी ज्यादा कड़वा है। हम लोग हमेशा किसी न किसी नए मुद्दे में खो जाते हैं। हमारी सबसे बड़ी कमजोरी यही है कि हमें कोई भी, जब चाहे और जहां चाहे, किसी भी मुद्दे में उलझाकर बिजी कर सकता है।
और अफसोस की बात यह है कि इस बार भी सरकार ने हमारे साथ वही किया।

🔹 मुद्दा कैसे डायवर्ट किया गया?

भारत भूषण एक मजबूत मुद्दा था: भारत तिवारी के लिए इंसाफ की मांग इतनी बुलंद थी कि सरकार पर पूरा दबाव था और ऐसा लग रहा था कि सरकार बस झुकने ही वाली है।

नए एजेंडे की एंट्री: तभी सरकार को 'कॉकरोच पार्टी' का एजेंडा नजर आया और उन्होंने पूरे देश को उसी मुद्दे पर बिजी कर दिया।

जानबूझकर समय देना: अगर सरकार चाहती तो इस धरना-प्रदर्शन को सिर्फ दो दिन में जड़ से समाप्त कर सकती थी, लेकिन सरकार ने इसे लगातार 15 दिन से भी ज्यादा समय तक चलने दिया।

🔹 इसके पीछे की क्रोनोलॉजी और रणनीति

सरकार ने इसे लंबा क्यों खींचने दिया? इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति थी:

1. माइंडसेट बदलना: जो लोग भारत तिवारी के लिए इंसाफ मांग रहे थे, उनके दिमाग में यह बात घुसेड़ दी गई कि यह 'कॉकरोच पार्टी' उनके बच्चों के भविष्य के लिए लड़ रही है।

2. मोटिव कन्वर्ट करना: इसका असली मकसद यह था कि लोग सरकार का विरोध भारत तिवारी के लिए न करके, 'कॉकरोच पार्टी' के समर्थन में करने लगें।

3. और हम बेवकूफ बन गए: हमारा मूल मकसद (Motive) पूरी तरह से डायवर्ट हो गया। जिस प्रदर्शन को हम भारत तिवारी के समर्थन में कर रहे थे, वह प्रदर्शन अब हम अनजाने में 'कॉकरोच पार्टी' के लिए करने लगे।

🔹 कड़वा सच क्या है?

विपक्षी पार्टियों का टूल: हमेशा से 'कॉकरोच पार्टी' के लोग सिर्फ एक विपक्षी पार्टियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले टूल (Tool) थे।

शुरुआती चेहरे: शुरुआत में जो लोग उस धरने में जुड़े थे, वे उन्हीं परिवारों के बच्चे थे जो 2014 से ही मोदी-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहते आए हैं।

सरकार की ढील: सरकार ने काफी लूज पॉइंट (Dheel) दिए और ऐसा जानबूझकर होने दिया, ताकि जो लोग कभी भारत तिवारी के लिए इंसाफ मांग रहे थे, उनका माइंडसेट चेंज होकर 'कॉकरोच पार्टी' की तरफ चला जाए।

💭 सवाल खुद से: आखिर कब तक?

जब भी किसी न्याय की लड़ाई में हम जीत के करीब होते हैं, हमारे सामने एक नया मुद्दा परोस दिया जाता है और हम अपने असली मकसद को भूलकर दूसरों का एजेंडा चलाने लगते हैं।
अगर हम ऐसे ही हर बार नए मुद्दों में भटकते रहे और बेवकूफ बनते रहे, तो शायद हम कभी भी शहीद भारत तिवारी को वह इंसाफ नहीं दिला पाएंगे जिसके वे हकदार हैं।
समय आ गया है कि हम अपनी आंखें खोलें और अपने मूल मुद्दे से ध्यान भटकने न दें!

21/07/2026

सम्राट चौधरी की धमकी

दोस्तों, जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का 'आमरण अनशन' अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। और इसकी सबसे बड़ी वजह है—...
19/07/2026

दोस्तों, जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का 'आमरण अनशन' अब पूरी तरह से खत्म हो चुका है। और इसकी सबसे बड़ी वजह है—**जनता का भारी गुस्सा और आक्रोश!**
जहाँ आज पूरा देश शहीद भारत तिवारी के लिए इंसाफ की मांग कर रहा है, वहीं ये लोग जंतर-मंतर पर बैठकर सिर्फ और सिर्फ अपनी गंदी राजनीति चमका रहे थे। हैरान कर देने वाली बात यह है कि इन लोगों ने अपने पूरे धरने में एक बार भी भारत तिवारी का नाम तक नहीं लिया!
# # # ❌ जनता ने फेरा मुंह, नहीं मिला समर्थन
यही वजह है कि इनके समर्थन में देश का कोई भी 'आम आदमी' आगे नहीं आया। जंतर-मंतर पर जो मुट्ठी भर लोग दिखाई भी दे रहे थे, वे ज्यादातर विपक्षी दलों द्वारा इकट्ठा किए गए भाड़े के लोग थे।
जब इन ड्रामा करने वालों को समझ आ गया कि देश की जनता इनके साथ नहीं है, तो इन्होंने माहौल बिगाड़ने और पुलिस से उलझने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस अनशनकर्ता सोनम को उठाकर अंदर कर दिया है और अस्पताल में नजरबंद कर दिया है।
# # # 🔍 देश के सामने बड़े सवाल:
* क्या विदेशी फंडिंग लेकर राजनीति करने वालों को जनता के दुख-दर्द से कोई लेना-देना है?
* क्या भारत विरोधी एजेंडा चलाने वालों को देश के शहीदों की कोई परवाह है?
* जिसके साथ देश की जनता ही नहीं है, उसे भला सरकार का साथ कैसे मिल सकता है?
> **साफ बात है:** आज पूरा देश और जनता सिर्फ और सिर्फ **शहीद भारत तिवारी** के साथ खड़ी है!
>
आप इस पूरे मुद्दे पर क्या सोचते हैं? नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर साझा करें। इस सच को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाने के लिए पोस्ट को शेयर करें!
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