Kumar Anil son of Bihar

Kumar Anil son of Bihar जो लोग आपकोPersonallyनहीं जानते उनकी बातों कोभीPersonallyमत लोआगे बढ़ो राष्ट्र के लिए कुछ करके दिखाओ।

1378 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना - नाम है इरान!1761 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्...
10/12/2025

1378 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना - नाम है इरान!
1761 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना -
नाम है अफगानिस्तान!
1947 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिक राष्ट्र बना -
नाम है पाकिस्तान!
1971 मेँ भारत से एक हिस्सा अलग हुआ, इस्लामिकराष्ट्र बना - नाम हैँ बांग्लादेश!
1952 से 1990 के बीच भारत का एक राज्य इस्लामिक हो गया - नाम है कशमीर!.. और पक्षिम बंगाल,,

इस अखंड भारत से इतना हिस्सा लेने के बाद भी
अब ऐ बताईए बाबर के बाबरी
औलादों एक हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा तो
कौन सी बड़ी बात हो जाएगा।
की आप सब को इतना
मिर्ची लग रहा है आज कल।
🚩🚩🇮🇳💯
Kumar Anil son of Bihar

Anil Kumar








रानी लक्ष्मी बाई जन्म दिन 19/11/1828        झांसी की रानी का मृत्यु 18/06/1858मातृभूमि की रक्षा को जीवन का सर्वोच्च ध्ये...
19/11/2025

रानी लक्ष्मी बाई जन्म दिन 19/11/1828
झांसी की रानी का मृत्यु 18/06/1858

मातृभूमि की रक्षा को जीवन का सर्वोच्च ध्येय बनाने वालीं रानी लक्ष्मीबाई जी ने अपनी दूरदृष्टि से सन् 1857 की क्रांति को आकार देने में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी वीरता, अद्भुत शौर्य और पराक्रम से अंग्रेजों की कूटनीति से लेकर युद्ध के मैदानों तक दाँत खट्टे किए। हर देशवासी को उनकी वीरगाथा अवश्य पढ़नी चाहिए और मातृभूमि के प्रति त्याग व समर्पण की प्रेरणा लेनी चाहिए।

महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जी का उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से वंदन करता हूँ।

मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए बलिदान, वीरता, राष्ट्र प्रेम और अन्याय के विरुद्ध लड़ने की प्रेरणा देती है। यह सिखाती है कि देश के गौरव की रक्षा के लिए हमें किसी भी हद तक त्याग कर देना चाहिए और अन्याय के सामने कभी झुकना नहीं चाहिए। कविता यह भी दर्शाती है कि एक नारी शारीरिक रूप से कोमल होकर भी पुरुष के समान पराक्रमी और शक्तिशाली हो सकती है। 🚩🚩🙏🙏

"मैं अपनी झांसी कभी नहीं दूंगी", "मैं एक अर्थहीन जीवन जीने की अपेक्षा एक अर्थपूर्ण मृत्यु मरना पसंद करूंगा" और "खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी"।


महारानी लक्ष्मीबाई जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

खूब लड़ी मर्दानी वह तो...
महारानी लक्ष्मीबाई
भारतीय नारी ने समग्र विश्व में अपनी एक विशेष पहचान बनायी है । अपने श्रेष्ठ चरित्र, वीरता तथा बुद्धिमत्ता के बल पर उसने मात्र भारत ही नहीं अपितु समस्त नारी जाति को गौरवान्वित किया है । उसका संयम, साहस व वीरता आज भी प्रशंसनीय है । भारत के इतिहास में ऐसी अनेक नारियों का वर्णन पढ़ने-सुनने को मिलता है ।
झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का नाम भी ऐसी ही महान नारियों में आता है । रानी लक्ष्मीबाई का जीवन बड़े-बड़े विघ्नों में भी अपने धर्म को बनाये रखने तथा परोपकार के लिए बड़ी-से-बड़ी सुविधाओं को भी तृण की भाँति त्याग देने की प्रेरणा देता है ।
सन् 1835 में महाराष्ट्र के एक ब्राह्मण कुल में जन्मी मनुबाई, जिसे लोग प्यार से ‘छबीली’ भी कहते थे, अपनी वीरता एवं बुद्धिमत्ता के प्रभाव से झाँसी की रानी बनी । झाँसी के राजा गंगाधर राव से विवाह के पश्चात् वे ‘रानी लक्ष्मीबाई’ के नाम से पुकारी जाने लगीं ।
गंगाधर राव वृद्ध तथा निःसन्तान थे । उनकी पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी थी । राज्य का उत्तराधिकारी न होने के कारण उन्होंने वृद्धावस्था में भी विवाह किया । अपने धर्म को निभाते हुए लक्ष्मीबाई ने पति की सेवा के साथ-साथ राजनीति में भी रुचि दिखाना प्रारम्भ कर दिया ।
समय पाकर गंगाधर राव को पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई परंतु एक गंभीर बीमारी ने राजकुमार के प्राण ले लिए । गंगाधर राव पर मानो वज्रपात हो गया और उन्होंने चारपाई पकड़ ली । श्वास फूलने लगा । रोगाधीन हो गए । उस समय देश में ब्रिटिश शासन था । सभी राज्य अंग्रेजी सरकार के नियमों के अनुसार ही चलते थे । राजा नाममात्र का शासक होता था । महाराज गंगाधर राव ने ब्रिटिश सरकार को इस आशय का एक पत्र लिखा : ‘‘रानी को अपने परिवार से किसी पुत्र को गोद लेने की अनुमति दी जाय तथा भविष्य में उसी दत्तक पुत्र को झाँसी का शासक बनाया जाय ।’’
ब्रिटिश सरकार ने गंगाधर राव के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया । उसने आदेश पारित किया कि : ‘‘यदि रानी को कोई संतान नहीं है तो झाँसी राज्य को सरकार के आधीन कर लिया जाय ।’’ फिर झाँसी को अंग्रेजों ने हस्तगत कर लिया । गंगाधर राव को एक और चोट लगी और उनकी मृत्यु हो गई । एकलौते पुत्र के बाद अपने पति की मृत्यु तथा अंग्रेजों के प्रतिबन्धों के बावजूद भी भारत की इस वीरांगना ने अपना धैर्य नहीं खोया । उसने राज्य के शासन की बागडोर अपने हाथ में ले ली तथा अपने पति की अंतिम इच्छा को पूरी करने के लिए दामोदर राव को अपना दत्तक पुत्र बना लिया ।
रानी का यह साहसिक कदम अंग्रेजों की चिंता का विषय बन गया । उन्हें लक्ष्मीबाई के रूप में सुलगती क्रांति की चिंगारी साफ-साफ दिखाई देने लगी । अंग्रेजी सरकार ने झाँसी के राज्य को तुरंत अपने अधीन कर लिया तथा गंगाधर राव के नाम पर रानी को मिलनेवाली पेन्शन भी बन्द कर दी । इसके साथ ही सरकार ने झाँसी में गोवध को बंद करने के रानी के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया । चारों ओर से विपरीत परिस्थितियों से घिरे होने तथा सैन्य-शक्ति न होने के बावजूद भी रानी लक्ष्मीबाई के मन मेें झाँसी को स्वतंत्र कराने के ही विचार आते थे ।
इसी समय भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों द्वारा कारतूस में गाय तथा सूअर की चर्बी मिलाये जाने की घटना के कारण अनेक स्थानों पर विद्रोह कर दिया । वीर मंगल पाण्डेय के बलिदान ने देशभर में क्रांति की आग फैला दी तथा 10 मई, सन् 1857 को इस विद्रोह ने भयंकर रूप ले लिया । देशभर में विद्रोह की आँधी चल पड़ी जिससे अंग्रेजों को अपने प्राण बचाने भारी पड़ गये ।
झाँसी में क्रांति की आग न लगे, इसके लिए ब्रिटिश सरकार ने अपनी कूटनीति का सहारा लिया । सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई से प्रार्थना की कि : ‘‘जगह-जगह युद्ध छिड़ रहे हैं और इसके पहले कि झाँसी भी इसकी चपेट में आये, आप राज्य की रक्षा का दायित्व अपने हाथ में ले लें और हम सबकी रक्षा करें । झाँसी की जनता आपसे अत्यधिक प्रेम करती है अतः आपकी इच्छा के विपरीत वह विद्रोह नहीं करेगी ।’’
रानी के लिए राज्य-प्राप्ति का यह एक सुंदर अवसर था जब अंग्रेज स्वयं उन्हें झाँसी राज्य का शासन सौंप रहे थे । रानी के एक ओर झाँसी का सिंहासन था तथा दूसरी ओर स्वतंत्रता की वह क्रांति जो देशभर में फैल रही थी । रानी चाहती तो सरकार की सहायता करके तथा झाँसी की क्रांति को रोककर अपने खोये हुए राज्य को प्राप्त कर सकती थी । परंतु धन्य है भारत की यह निर्भीक वीरांगना जिसने देश की स्वतंत्रता के लिए सिंहासन को भी ठुकरा दिया । रानी ने स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे देशभक्तों की सहायता करने का निश्चय किया । उन्होंने सरकार को जवाब देते हुए कहा : ‘‘जब मेरे सामने राज्य-प्राप्ति की समस्या थी तब तो मुझे राज्य नहीं दिया गया । आज आप लोगों के हाथों से वही राज्य छिन जाने का समय आ गया है तो राज्य की रक्षा का दायित्व मुझे दे रहे हैं ।’’
रानी के ये शब्द अंग्रेजी सरकार को तीर की भाँति चुभे । रानी ने अंग्रेजी सेना को अपने यहाँ शरण नहीं दी अतः उन्हें निराश होकर जाना पड़ा । सैनिक विद्रोह ने जोर पकड़ा तथा झाँसी में भी क्रांति की लहर चल पड़ी । अंग्रेजों की छावनियाँ तहस-नहस कर दी गईं तथा अंग्रेजों को झाँसी छोड़कर भागना पड़ा । झाँसी का राज्य क्रांतिकारियों के हाथों में आ गया । वहाँ उन्होंने लक्ष्मीबाई को रानी के रूप में स्वीकार कर लिया ।
रानी ने झाँसी में लगभग एक वर्ष तक शांतिपूर्वक शासन किया परंतु कुछ समय बाद झाँसी के राज्य पर फिर से अंग्रेजों की काली दृष्टि पड़ी । जनरल ह्यू रोज के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने झाँसी पर आक्रमण कर दिया ।
रानी लक्ष्मीबाई के पास सैन्य-शक्ति अधिक नहीं थी । उधर उनकी सहायता के लिए आ रहे नाना साहब तथा तात्या टोपे की सेना को अंग्रेजों की विशाल सेना ने रास्ते में ही रोक लिया । रानी के कई वफादार एवं वीर सिपाही युद्ध में शहीद हो गये । ऐसी परिस्थिति में भी लक्ष्मीबाई के साहस में कोई कमी नहीं आयी तथा परतंत्रता के जीवन की अपेक्षा स्वतंत्रता के लिए मर-मिट जाना उन्हें अधिक अच्छा लगा । उन्होंने मर्दों की पोशाक पहनी तथा अपने दत्तक पुत्र को अपनी पीठ पर बाँध लिया । महलों में पलनेवाली रानी लक्ष्मीबाई हाथ में चमकती हुई तलवार लिये घोड़े पर सवार होकर रण के मैदान में उतर पड़ीं ।
मुशर नदी के किनारे रानी लक्ष्मीबाई एवं जनरल ह्यू रोज की सेनाओं के बीच घमासान युद्ध हुआ तथा रानी की लपलपाती तलवार अंग्रेजी सेना को गाजर-मूली की तरह काटने लगी । रानी की छोटी-सी सेना अंग्रेजों की विशाल सेना के आगे अधिक देर तक नहीं टिक सकी । दुर्भाग्यवश रानी के मार्ग में एक नाला आ गया जिसे उनका घोड़ा पार नहीं कर सका । फलतः चारों ओर से ब्रिटिश सेना ने उन्हें घेर लिया । अंततः अपने देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ते-लड़ते रानी वीरगति को प्राप्त हुईं जिसकी गाथा सुनकर आज भी उनके प्रति मन में अहोभाव उभर आता है । छोटे-से ब्राह्मण कुल में जन्मी इस बालिका ने अपनी वीरता, साहस, संयम, धैर्य तथा देशभक्ति के कारण सन् 1857 के महान क्रांतिकारियों की शृृंखला में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में लिखा दिया ।🙏🙏🚩🚩🌄



Anil Kumar
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#रानीलक्ष्मीबाईझांसी

10/11/2025

अच्छेलाल प्रसाद यादव जी निर्दलीय प्रत्याशी 20 चिरैया विधानसभा क्षेत्र से जिनका चुनाव चीन प्रेशर कुकर छाप हैं। जो क्रमांक संख्या 6 पर उपस्थित हैं। आप सभी भाई एवं बहनों से अनुरोध हैं कि इस बार अच्छेलाल प्रसाद यादव जी को एक मौका अवश्य दें। धन्यवाद 🙏

राष्ट्रीय एकता, अखंडता और किसानों के सशक्तीकरण के प्रतीक लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी का उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र...
01/11/2025

राष्ट्रीय एकता, अखंडता और किसानों के सशक्तीकरण के प्रतीक लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी का उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से वंदन करता हूँ. 🚩🇮🇳🇮🇳💐🌹🙏

आधुनिक भारत के शिल्पकार, महान स्वाधीनता सेनानी, राष्ट्रीय एकता के प्रतीक सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती पर नई दिल्ली के पटेल चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। सरदार साहब ने देश निर्माण से लेकर स्वावलंबी भारत की नींव रखने तक, जितने लोकहित के कार्य किए, उसके लिए यह राष्ट्र उनका सदैव कृतज्ञ रहेगा।


लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के निधन के बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक घोषणा की और आदेश जारी किया।

आदेश में दो मुख्य बातें यह थी कि सरदार पटेल को दी गई सरकारी कार तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया जाए।
दूसरी बात यह थी कि गृहमंत्रालय के सचिव/अधिकारी वगैरह जो भी सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में बंबई जाना चाहते हैं वो अपने व्यक्तिगत खर्चें पर जाएं।

लेकिन उस समय के तत्कालीन गृह सचिव वी पी मेनन ने एक अचानक बैठक बुलाई और सभी अधिकारियों को अपने खर्चे पर बबंई भेज दिया और नेहरू के आदेश का जिक्र ही नहीं किया।

नेहरू ने कैबिनेट की तरफ़ से तत्कालीन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद को सलाह भिजवाया कि सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में शामिल ना हों लेकिन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने कैबिनेट की सलाह नहीं माना और सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में शामिल होने का निर्णय लिया।
जब यह बात नेहरू को पता चली तो वंहा सी राजगोपालाचारी को भेज दिया और सरकारी स्मारक पत्र पढ़ने के लिए राष्ट्रपति के बजाय सी राजगोपालाचारी को दे दिया।

कुछ दिनों बाद कांग्रेस में ही मांग उठी कि इतने बड़े नेता के सम्मान में कुछ करना चाहिए स्मारक वगैरह बनना चाहिए पहले तो नेहरू ने मना कर दिया फिर तैयार हुए।

फिर नेहरू ने कहा सरदार पटेल किसानों के नेता थे हम उनके नाम पर गांवों में कुंए खोदेंगे यह योजना कब आई कब बंद हुई कोई कुंआ खुदा भी या नहीं किसी को नहीं पता या फिर सिर्फ एक व्यंग्य था।

नेहरू के खिलाफ कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में सरदार पटेल को रखने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता पुरूषोत्तम दास टंडन को पार्टी से निकाल दिया।

सरदार पटेल को अगर असली सम्मान किसी ने दिया है तो वो है भाजपा।
दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाकर प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल को असली सम्मान दिया जिसके वो हकदार थे।

कांग्रेस का सरदार पटेल से नफ़रत का आलम यह है कि आज भी कांग्रेस नेता स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से दूरी बनाए रखते हैं।
Anil Kumar

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🚩🚩🙏🙏🇮🇳🇮🇳🌄🌄

छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!उमंग, उत्साह और उल्लास से भरा यह महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और समृद्धि का संचा...
27/10/2025

छठ महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ!

उमंग, उत्साह और उल्लास से भरा यह महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और समृद्धि का संचार करे।
छठी मैया की कृपा सभी पर बनी रहे।🚩🌄🪔🚩

जय छठी मैया।
आस्था का यह महापर्व🚩🚩

सूर्य देव और छठी मैया का आशीर्वाद आपके जीवन को सकारात्मकता और सफलता से भर दे, आपके मार्ग को प्रकाशित करे। छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं!" "जैसा कि आप सूर्य देव और छठी मैया को अपनी प्रार्थना अर्पित करते हैं, आपके जीवन को अनंत आनंद, सौभाग्य और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिले।🚩🌄

छठी मैया और भगवान सूर्य की कृपा सभी पर अनवरत बरसती रहे, सुख, समृद्धि और सौभाग्य का दीप सर्वदा देदीप्यमान रहे, सबका मंगल व कल्याण हो, यही प्रार्थना है। जय छठी मैया! आप सभी को आस्था,पवित्रता व सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं।
🚩🚩🌄🪔🙏🙏
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प्रकाश और उल्लास के पर्व दीपावली की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।🙏🪔✍️ "सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। यह ...
20/10/2025

प्रकाश और उल्लास के पर्व दीपावली की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।🙏🪔✍️

"सभी देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पावन पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियाँ लेकर आए।" या "रोशनी के इस त्योहार पर, दीपों की तरह आपका जीवन भी उज्जवल हो। दीपावली की हार्दिक बधाई!" 🚩

"आपको और आपके पूरे परिवार को दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। मां लक्ष्मी जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।"
"यह दिवाली आपके जीवन में नए सपनों, नई उम्मीदों और नए रास्तों को रोशन करे।"
"दीपावली के इस शुभ अवसर पर, सभी देशवासियों को सुख, शांति और समृद्धि की हार्दिक शुभकामनाएं।"
"आपके जीवन में खुशियों की फुलझड़ियाँ हर दिशा में छा जाएं। शुभ दीपावली!"
"दीयों की रोशनी में हर अंधेरा दूर हो और आपके जीवन में हमेशा खुशियाँ आती रहें। पुनः आपको दीपावली की हार्दिक बधाई।" 🙏🙏💐
🚩🚩🪔🪔🪔🪔

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जय माता दी 🚩 🚩  🙏 माँ दुर्गा का आशीर्वाद आपके जीवन को विजय, आशा और शक्ति से भर दे। माँ दुर्गा की दिव्य ऊर्जा आपको नकारात...
22/09/2025

जय माता दी 🚩 🚩 🙏

माँ दुर्गा का आशीर्वाद आपके जीवन को विजय, आशा और शक्ति से भर दे।
माँ दुर्गा की दिव्य ऊर्जा आपको नकारात्मकता से बचाए और सफलता की ओर ले जाए।
इस पावन दिन पर, माँ दुर्गा की उपस्थिति आपके और आपके परिवार के लिए शांति, सुरक्षा और समृद्धि लेकर आए।


हर घर में विराजी अंबे मां, हम सबकी जगदंबे मां।
जय माता दी!
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।
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श्री गणेश चतुर्थी के पावन पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। गणपति बाप्पा से सभी के जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करता ह...
27/08/2025

श्री गणेश चतुर्थी के पावन पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। गणपति बाप्पा से सभी के जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करता हूँ।💐

गणपति बाप्पा मोरया।🚩🚩

हमारी कामना है कि भगवान श्री गणेश की कृपा से आप सभी का जीवन सुख-समृद्धि से परिपूर्ण रहे। आप सभी को श्री गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई। यह शुभ अवसर आपके सभी विघ्न-बाधाओं को दूर कर, सुख, शांति और समृद्धि लेकर आए।
गणपति बप्पा मोरया। 🙏🙏🚩🚩

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*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!🙏* कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! भगवान कृष्ण आपकी सभी चिंताओं को द...
16/08/2025

*श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!🙏*

कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ! भगवान कृष्ण आपकी सभी चिंताओं को दूर करें और कृष्ण जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर आपको शांति और खुशियाँ प्रदान करें! भगवान कृष्ण आपको शक्ति प्रदान करें और जीवन की सभी समस्याओं का साहसपूर्वक सामना करने के लिए प्रेरित करें। आपको जन्माष्टमी की शुभकामनाएं 💐 🚩 🚩

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्यौहार है। यह भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, जिसे जन्माष्टमी या गोकुलाष्टमी भी कहा जाता है. इस दिन, भक्त भगवान कृष्ण के बालरूप की पूजा करते हैं, उपवास रखते हैं, और रात में उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं. कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

भगवान कृष्ण का जन्म: जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार, भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है. दुष्टों का नाश: पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था, जहाँ उनके मामा कंस का शासन था, जो अत्याचारी था. कृष्ण ने कंस के अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई. धार्मिक महत्व: यह त्यौहार भगवान कृष्ण के जीवन और शिक्षाओं का स्मरण कराता है, और भक्तों को उनकी भक्ति और प्रेम का संदेश देता है.🚩🚩💐

मुख्य बातें: तिथि: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि. उत्सव: भक्त उपवास रखते हैं, मंदिरों में पूजा करते हैं, कृष्ण के बालरूप की झांकी सजाते हैं, और रात में कृष्ण जन्म का उत्सव मनाते हैं.

महत्व: यह त्यौहार भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव है और भक्तों के लिए उनकी भक्ति और प्रेम का प्रतीक है.

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आज़ाद भारत में India gate पर सबसे पहले तिरंगा फ़हराने वाले (वाइसराय लार्ड माउंटबेटन के ADC) ब्रिगेडियर हुकुम सिंह यादव -...
15/08/2025

आज़ाद भारत में India gate पर सबसे पहले तिरंगा फ़हराने वाले (वाइसराय लार्ड माउंटबेटन के ADC) ब्रिगेडियर हुकुम सिंह यादव -----
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के यदुवंशी अहीर क्षत्रियो के प्रसिद्ध जंगी ठिकाने "सिंघावली अहीर" के एक यदुवंशी अहीर ज़मींदार घराने में जन्में ब्रिगेडियर हुकुम सिंह उर्फ़ चौधरी हुकुम सिंह यादव भारत के अंतिम अँगरेज़ वाइसराय लार्ड माउंटबेटन के ADC थे और सबसे पहले तिरंगा भी उन ने ही फ़हराया था आज़ाद भारत में i

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*******अहीरवाल की ही भाँती पश्चिमी उत्तरप्रदेश का ब्रज खंड जो आगरा, इटावा से लेकर बदायूं तक फैला है, जंगजू यदुवंशी रणबांकुरों का गढ़ है और "यादव लैंड" के नाम से विख्यात है।************

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सन 1935 में चौधरी साहेब हुकुम सिंह यादव पड़ाई पूरी करने के लिए मसूरी के जाने माने स्कूल Woodstock School आ गए।

इसके बाद हुकुम सिंह Indian Artillery के Royal Regiment mein posted हुए।

अपने मेहनत, ईमानदारी के कारण चौधरी हुकुम सिंह यादव ने मात्र 20 वर्ष की आयु में Captain की रैंक हासिल करली।

और 1942 में पहले भारतीय बने जिन्हें as an instructor appoint किया गया था Gunnery में।

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विश्वयुद्ध 2 में बर्मा मोर्चे पर अपार शौर्य और पराक्रम दिखाने के फलस्वरूप ब्रिगेडियर साहब को Lord Mountbatten का Liaison officer नियुक्त किया और फिर General Sir Montagu Stepford का मुख्य ADC (Aide De Camp) नियुक्त किया गया।

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आखिरकार वो दिन आगया। 15 अगस्त का वो दिन था और भारत गुलामी की ज़ंजीरें तोड़ जश्न-ए-आज़ादी मना रहा था।

India gate पर लाखों की तादाद में पहूँचे लोग आज़ादी का उत्सव मनाने को।

इसी बीच वाइसराय लार्ड माउंटबेटन को झंडा फहराना था। पर वाइसराय लार्ड माउंटबेटन ने इसका सम्मान ब्रिगेडियर हुकुम सिंह यादव को दिया।

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भारतीय सेना में ब्रिगेडियर हुकुम सिंह यादव सबसे सम्मानित अफ़सरों में से एक है तथा इन्हें इनके अतुलनीय योगदान, बहादुरी के लिए जाना जाता है।

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सन् 1947 में ब्रिगेडियर चौधरी हुकुम सिंह यादव ने British Lady Ann Connorton से धूमधाम से विवाह किया।

किसी अंग्रेज़ अफसर की ललड़की से विवाह करना उन दिनों में बहोत बड़ी बात समझी जाती थी और किसी आम हिंदुस्तानी को ऐसा करने पर सज़ा तक हो जाती थी।

चौधरी साहब और Lady Ann Connorton की प्रेमकथा बड़ी ही रोचक थी।

एसा कहा जाता है कि Lady Ann Connorton वाइसराय लार्ड माउंटबेटन के ही स्टाफ़ में अफ़सर थीं।

Lady Ann Connorton, चौधरी हुकुम सिंह यादव के तीखे नयन-नक्श, गोरा रंग, बुलंद आवाज़ और सरल स्वभाव से बहुत प्रभावित थी और 1947 में पूरे लावलश्कर और हिन्दू रिती रिवा़जों के साथ चौधरी साहब और Lady Ann Connorton का विवाह सम्पन्न हुआ सिंघवाली स्थित उनकी पुश्तैनी हवेली में ।

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चौधरी साहब की एक पुत्री Lady Maya Singh Yadav, Woodstock School में शिक्षिका हैं।

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ब्रिगेडियर हुकुम सिंह ने अपनी पूरी उम्र भारतीय सेना में निष्ठा और ईमानदारी से गुज़ार दी।

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सन् 1968 में हुकुम सिंह यादव ने रिटायरमेंट ले लिया लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी वे समाजसेवा से जुड़े रहे।

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Brigadier चौधरी हुकुम सिंह जी एक अच्छे writer भी रहे हैं और कई प्रसिद्ध Novels इनहोंने लिखे जैसे 'Against the Rising Sun' , 'British lions and Indian Tigers' etc.

चौधरी साहब ने वन रैंक वन पैंशन, विदवा पैंशन सहित आदि कई कल्याणकारी schemes के लिए आवाज़ बुलंद की थी और इससे कई लाख Millitary के और Civil Pensioners को फायदा पहूँचा था।

वर्ष 2005 में ब्रिगेडियर हुकुम सिंह यादव का स्वर्गवास हो गया।

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लगभग आज से 1.5 वर्ष पूर्व इस पोस्ट को हमने स्वयं लिखा था तथा लोगों ने काफ़ी सराहा और उसके बाद ये हमारा लेख कई अखबारों तथा magzines में समाज के सजग लोगों द्वारा छपवाया गया था जिसके लिए हम उन सभी आदरणीयो के प्रति आभारी हैं।

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भारतवर्ष के इन शूरवीर यदुवंशी योद्धा को एक सलाम।
***वीर अहीर अजीत है अभीत है***
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वीर भोग्य वसुंधरा।

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By Kumar Anil son of Bihar
# Anil Kumar 1691

-----------------------🇮🇳💐🙏🚩💪💪

अहीर रेजिमेंट अहीरवाल राइफल्स राष्ट्र रक्षा देशित हेतू।
अहिर रेजिमेंट हक है हामारा।🇮🇳
Kumar Anil son of Bihar @@ #
Anil Kumar 1691

समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।आजादी के आंदोलन में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले स्वाधीनता से...
15/08/2025

समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

आजादी के आंदोलन में अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले स्वाधीनता सेनानियों को नमन करता हूँ। साथ ही, देश की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के लिए दिन-रात एक करने वाले वीर जवानों का भी वंदन करता हूँ।

आइए, हम सब मिलकर स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों के सपनों को चरितार्थ करें और विकसित, आत्मनिर्भर व हर क्षेत्र में श्रेष्ठ भारत के निर्माण में अपना सर्वोच्च योगदान देने का संकल्प लें।
🙏🇮🇳💪✍️💐💐

भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली। इस दिन हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का सम्मान करते हैं। पूरा देश राष्ट्रीय ध्वज फहराकर स्वतंत्रता दिवस मनाता है। स्वतंत्रता दिवस हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवकाश है।
Kumar Anil son of bihar
Kumar Anil son of Bihar
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