कथा संसार

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खामोशी की उस रात एक कहानी           story    story     in hindi “उस रात… Shruti ने अपनी चीख खुद ही काट दी… क्योंकि वह जा...
10/12/2025

खामोशी की उस रात एक कहानी
story story in hindi
“उस रात… Shruti ने अपनी चीख खुद ही काट दी… क्योंकि वह जानती थी—अगर वो आवाज़ बाहर निकली… तो घर में कोई ज़िंदा नहीं बचेगा।”“पूरे घर में अजीब सन्नाटा था…लेकिन Shruti को पता था—ये सन्नाटा उसका नहीं… किसी और का था।और वो ‘कोई’… पिछले तीन दिनों से उसके कमरे में रह रहा था।”“Shruti Shimla में एक पुराने घर में रहती थी।घर अच्छी हालत में नहीं था…लेकिन किराया कम था, इसलिए उसे रहना पड़ा।पहली रात…उसे लगा कोई उसकी अलमारी के अंदर सांस ले रहा है।दूसरी रात…उसने फोन में एक अनजाना फोटो देखा—एक काली परछाई… ठीक उसके पीछे खड़ी थी।”“आज तीसरी रात थी…और Shruti समझ चुकी थी—वो परछाई इंसान नहीं थी।क्योंकि…
उसकी चाल… इंसान जैसी नहीं थी।और सबसे बड़ी बाजह वह सिर्फ रात के 3:07 बजे ही दिखाई देती थी।”
“Shruti डरी थी… लेकिन आज उसने भागने का प्लान बनाया था।जैसे ही 3:07 हुए,अलमारी के दरवाज़े ने धीरे से ‘टक’ की आवाज़ की।वो frozen हो गई…उसकी सांसें रुक गईं…अलमारी खुद-ब-खुद खुली…और एक लंबी काली आकृति बाहर आई।लेकिन इस बार…वो कमरे के बीच में नहीं रुकी।वो सीधा Shruti की ओर बढ़ने लगी।”“Shruti डर के मारे पीछे हट रही थी…
लेकिन तभी…उस परछाई ने पहली बार अपनी आवाज़ में कहा ‘भाग मत… आज भी मैं तुम्हारी रक्षा करने आया हूँ… जैसे हर रात करता हूँ।’Shruti की आँखें फैल गईं।
सुरक्षा…?यह कौन था?”“परछाई ने धीरे से कहा—‘मैं… Ronit हूँ।’Ronit… उसका बड़ा भाई।वो हादसे में कुछ महीने पहले ही गुजर गया था। Shruti की आँखों में आँसू थे…‘भैया… आप?’काली आकृति ने सिर हिलाया—
‘तुम्हारे इस घर में… कोई और भी है।वो तुम्हें हर रात नुकसान पहुँचाने आता है।मैं तुम्हें बस छुपाता रहा… रोकता रहा…लेकिन आज रात… वो बहुत पास है।’”
“Shruti को लगा जैसे कमरे की दीवारें हिल रही हों।
पंखा अपने आप बंद हो गया।खिड़की अपने आप खुली।
हवा नहीं थी…फिर भी कमरे का दरवाज़ा ज़ोर से बंद हो गया।Ronit की परछाई ने फुसफुसाकर कहा—अब… वो अंदर है।’”“Shruti ने घबराकर मुड़कर देखा…लेकिन वहाँ कोई नहीं था।सिर्फ—एक साया…जो उसी की शक्ल में…उसकी तरफ मुस्कुरा रहा था।“और उसी पल Shruti समझ गई—वो अकेली नहीं है।लेकिन जो उसके सामने खड़ा था…वो Shruti थी ही नहीं…“अगर आप जानना चाहते हैं…कि उस रात Shruti का सामना किससे हुआ…
तो कमेंट में लिखिए— PART 2” हम लेकर आएंगे इस का अगला जो बहुत डरावना होने वाला है।

28/11/2025

हेल्लो नमस्कार सबैलाई,आज म पारिवारिक जीवन को लागि शारीरिक सम्बन्ध मा कमी कमजोरी लाई ठीक पर्ने भियाग्रा भन्दा छिटो र क्स असरदार दवाई को बारे सा विस्तार बताउँदै छु। # family entertainment #कथा संसार

इभिनाफिल (Evinafil / Avanafil) दवाई को नाम हो

यो एउटा PDE-5 inhibitor किसिमको औषधि हो, जुन प्रायः पुरुषमा हुने Erectile Dysfunction (लिंग नउठ्ने समस्या) को उपचारका लागि प्रयोग गरिन्छ।

इभिनाफिलले खास के काम गर्छ?
लिङ्गमा रक्तसञ्चार बढाउने काम गर्छ।
यौन उत्तेजना भएको बेला उठ्ने क्षमतामा सुधार ल्याउँछ।
पुरुषको सेक्सुअल परफर्मेन्स सुधार गर्न मद्दत गर्छ।
प्रभाव छिटो देखिन सक्छ (30–45 मिनेटभित्र धेरैलाई असर गर्छ)।
महत्वपूर्ण कुरा
यौन उत्तेजना बिना यसले काम गर्दैन।
यो कामोत्तेजक (s*x stimulant) होइन – केवल रक्तसञ्चार सुधार्ने मेडिसिन हो।
हृदयसम्बन्धी औषधि (जस्तै Nitroglycerin, Isosorbide) लिनेहरूका लागि खतरनाक हुन सक्छ—डाक्टरको सल्लाह अनिवार्य।

✅ इभिनाफिल (Avanafil) – पूरा जानकारी
यो दवाई किन लिने?
पुरुषमा हुने Erectile Dysfunction (लिंग नउठ्ने / कडा नहुनु) समस्या सुधार गर्छ।
यौन उत्तेजना भएको बेला रक्तसञ्चार बढाएर राम्रो er****on दिन मद्दत गर्छ।

कति डोज लिने? (सामान्य मार्गदर्शन)
डोज हरेक मानिसमा फरक पर्छ। डाक्टरले दिएको डोज नै सही हुन्छ।
तर सामान्यतया:
सुरुआतको डोज: 100 mg
30 मिनेटदेखि 45 मिनेट अगाडि लिनेअसर साधारण तया 6–8 घण्टासम्म रहन्छ।
हल्का डोज: 50 mg
यदि 100 mg धेरै असर गर्‍यो वा side effect आयो भने।
Strong डोज: 200 mg
केवल डाक्टरले भनेमा मात्र—किनकि यो उच्च डोज हो।
दिनमा 1 पटक भन्दा धेरै लिनु हुँदैन।

कसरी र कहिले लिने?
खाली पेट लिँदा छिटो असर गर्छ।
भारी खाना (विशेषगरी तेलिलो) खाएपछि लिँदा असर ढिलो हुन सक्छ।
यौन उत्तेजना (arousal) भए मात्र काम गर्छ—औषधिले मात्रै लिङ्ग उठाउँदैन।
साइड इफेक्ट

टाउको दुखाइ
रातो–रातो तातो महसुस हुनु (flushing)
नाक बन्द वा चिसो लागेजस्तो
हल्लाजस्तो लाग्न सक्छ
हल्का पेट दुखाइ
सामान्यत: यी गम्भीर हुँदैनन् र आफैँ ठिक हुन्छन्।

कसले नलिनु? (महत्वपूर्ण)
यदि तपाईं हृदयको nitrates (nitroglycerin/isosorbide) लिँदै हुनुहुन्छ भने
High BP वा low BP को गम्भीर समस्या
हालसालै हृदयघात/स्ट्रोक भएको छ भने
गंभीर कलेजो/मिर्गौला समस्या
कति छिटो काम गर्छ?
धेरै मानिसमा 15–30 मिनेट भित्र असर सुरू।
तर 45 मिनेट अगाडि लिँदा सबैभन्दा राम्रो परिणाम।

12/11/2025

भीम रावल अछाम १बट जित्न सक्छन्।प्रचण्ड को अझै टुंगो छैन है माहोल अनुसार,अब यही पारा हो भने २०४८ साल मा संयुक्त जनमोर्चा नेपाल नौ स्थान जती जित्न सक्ने सम्भावना टरेको जस्तो छ है बगालौ,,,के छ विचार ??

12/11/2025

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sansar #कथा संसार (भावनाको ठगाना)



kahani #

कहते हैं... कुछ कहानियाँ शुरू ही इसलिए होती हैं,
ताकि अधूरी रह जाएँ।और शायद... मेरी कहानी भी उन्हीं में से एक थी। शहर से आया था — कुछ दिनों के लिए।
पापा का छोटा-सा बिज़नेस प्रोजेक्ट था गाँव में...
और मैंने सोचा था — "थोड़ा काम, थोड़ा सुकून... और फिर वापस अपने दुनिया में लौट जाऊँगा।"लेकिन उस दिन... जब मैं पहली बार उसे देखा —तो लगा जैसे ज़िंदगी अचानक रुक गई हो।वो सड़क के किनारे बैठी थी,
सामने टोकरी में कुछ घर के बने पकौड़े और मिठाइयाँ रखे हुए।धूप में पसीना झलक रहा था, पर चेहरे पर एक अजीब सी चमक थी... सच्चाई की। मैने उनको पूछा – “कितने के हैं ये?”वो बोली – “आपके जैसे लोगों के लिए... जितने देना चाहो उतने।”मैं मुस्कुराया,क्योंकि जवाब में शरम भी थी... और एक अजीब सी इज़्ज़त भी।-धीरे हम बात करने लगे।कभी मैं उसके ठेले पर रुकता था ,कभी वो रास्ते के किनारे मुझे देख कर मुस्कुरा देती।
उसकी हँसी... जैसे थकी हुई ज़िंदगी में सुबह की पहली धूप। में उसको खूब निहारता तो मुझे अजीब सुकून मिलती थी मन में और दिमाग में ठंडक भी। ओह कहती थी —“लोग पैसे से अमीर होते हैं, पर मैं तो सपनों से अमीर बनना चाहती हूँ।”और शायद...उसी दिन मुझे उससे प्यार हो गया था। मैंने पूछा — “अगर कभी मैं चला गया तो?”वो हँसकर बोली — “तो क्या हुआ... याद तो यहीं छोड़ जाओगे ना?”उसकी सादगी में जो सच्चाई थी,
वो मेरे शहर की नकली मुस्कानों में कभी नहीं मिली। दिन बीतते गए...हमारा साथ आदत बन गया... और आदत धीरे-धीरे ज़रूरत।पर हर कहानी में एक मोड़ होता है —
जहाँ दिल की राहें और दुनिया के रास्ते अलग हो जाते हैं।
एक दिन पापा आए गाँव में...उन्होंने उसे देखा, और मुझे बस इतना कहा —“ये दुनिया तेरे लिए नहीं बनी बेटा...
याद रख, कुछ रिश्ते सिर्फ दिल तक अच्छे लगते हैं, ज़िंदगी में नहीं।”मैं खामोश था।पहली बार... अमीरी बोझ लगने लगी थी।मैने उससे कहा — “शायद... मैं अब लौट जाऊँ।”वो मुस्कुराई, मगर आँखें नम थीं।बोली — “जाओ... लेकिन अगर कभी मेरे ठेले के पास से गुजरना,
तो देखकर जाना... पकौड़े अब भी वैसे ही गर्म होते हैं।”
मैं लौट आया शहर...वक़्त बीता, काम बढ़ा, लेकिन सुकून कम हो गया।फिर एक दिन...गाँव के एक पुराने दोस्त का फोन आया। उसने कहा — “यार, याद है वो लड़की जो पकौड़े बेचती थी...?अब वो किसी और के साथ शादी कर चुकी है।”मैं मुस्कुराया... या शायद मुस्कुराने की कोशिश की।क्योंकि मैं खुश था... कि वो अब अकेली नहीं।पर अंदर कहीं... कुछ टूट गया था।कभी सोचता हूँ...काश मैं थोड़ा कम अमीर होता,और थोड़ा ज़्यादा उसका होता।अब भी जब बारिश होती है,
तो पकौड़ों की खुशबू हवा में फैलती है...और मैं महसूस करता हूँ —वो कहीं न कहीं मुस्कुरा रही होगी।कहानी ख़त्म हुई नहीं... बस वहीं रुक गई,जहाँ ज़िंदगी और मोहब्बत आमने-सामने खड़ी थीं।> “जिसे मैंने अपनाया... वो किसी और की तक़दीर बन गई।” 💔
मुझे लगता है यह हर जीवन का एक रूटीन है।

    Story   storytelling     Love story कहानी का टाइटल:"उसकी मुस्कान के पीछे.."इस कहानी की मास्टर माइंड है आयान, जो वीआई...
25/10/2025

Story storytelling Love story

कहानी का टाइटल:"उसकी मुस्कान के पीछे..
"इस कहानी की मास्टर माइंड है आयान, जो वीआईपी बिजनेस मेन के खानदान से ताल्लुक रखने वाला, और यौवन से उन्नमत्त और लड़की बाज। हाई प्रोफाइल पार्टी में उसने एक बहुत सुंदर लड़की देखा।लड़की को पीछा करते करते बाथरूम तक पहुंच गया।बाथरूम में लड़की को पीछे से पकड़कर उसकी टांगे फाड़कर लहंगा उठाया और अंडरवियर को फाड़ दिया,लड़की भी अपने बचाब में जुटी रही थी।आयान ने पीछे से लड़की को हर जगह किस करते हुए टांगे फटाने की कोशिश बहुत किया,
लड़की ने खुदको बचाने के लिए बहुत संघर्ष कर रही थी, ,एक बार तो आयान ने इतना बड़ा झटका दिया कि लड़की के टांगे फट गई और आयान ने अपने कोबरा लड़की के गुफा में ल्वाम्मम ल्वाम्मम पूरा अंदर डाल ही दिया।दो बार गुफा को जोड़ से धक्का देते ही खुद को सुकून महसूस कर थोड़ा हाथ ढीला क्या किया था, आयान की किस्मत ने धोखा दे दिया, नमस्कार मेरे प्यारे दर्शकों एवं श्रोताओं आज की कहानी अब बिस्तार से जानते है आइए। बरिसकी बुंदों से भरी रात,, सुनसान सड़के,और शहर की सबसे हाई-प्रोफाइल पार्टी अपने आखिरी पड़ाव पर थी। हर जगह सिर्फ रौशनी, म्यूज़िक और महंगी खुशबुओं की मिलीजुली महक। लोगोंका, गेस्टका आना जाना हो रहा था।एक आदमी, अयान, ब्लैक सूट में, ड्रिंक हाथ में लिए, हॉल के कोने में खड़ा होकर सबको देख रहा था। उसके चेहरे पर मुस्कान थी... लेकिन वो मुस्कान उतनी ही खतरनाक थी जितनी किसी शिकारी की होती है शिकार पर झपटने से पहले। उसी वक्त एक खुब सुरत लडकी लाल ड्रेस में आयान के सामने से गुजररती है तब आयन के अंदर छिपा हुआ सिकारी जरा जरा बाहर निकल्ने लगा, लडकी को देखकर मुस्कुराते हुए उसके पीछा करने लगता है,लड़की लाल ड्रेस में इतनी सूरत दिखती है कि कोई शब्द नहीं है उसकी सुरती बयां करने की,वो भी पीछे मुड़कर मुस्कुराई तो आयान के हाथ से ड्रिंक का ग्लास छूट गया,जब फ्लोर में ग्लास टूटने का आवाज आई तब आयान को पता चला,ओह सॉरी आयान बोला।तब माहौल में हल्की हल चल हुई क्या हुआ, कैसे हुआ क्यों कि आयान चीफ़ गेस्ट में से एक था,फिर भी आयान की नजरें वही लड़की को ढूंढ रही थी लड़की कहा गई पता नहीं चला।कुछ देर में माहौल शांत होने के बाद आयान इधर उधर देखते देखते उसी लड़की को ढूंढने निकला,हर जगह देखने पर भी लड़की नहीं दिखी,आयान को बड़ी बेचैनी हुई, कुछ गुस्सा भी था।उसकी दिमाग में वो लड़की की छाप बैठ गई थी, फिर आयान बाथरूम गया। बगल में लेडीज और दूसरी साइड में मेल बाथरूम था,बाथरूम में अपना कम खत्म करके बाहर निकलते हुए उसने दूसरी ओर बाथरूम में कुछ आवाज सुनी।उसने उदर की तरफ खुद को बढ़ाया क्यों कि वोह तो वोही लड़की ढूंढ रहा था।चुपके से बाथरूम में झांका तो आयान का खुशी का ठिकाना नहीं रहा, वहां लड़की वोही थी,ड्रेस ठीक कर रही थी,आयान चुपके से लड़की को पीछे से जोड़ से पकड़ कर अपनी बाहों में लेकर गाल पर किस दे दिया,लड़की ने अपने को बचाने के लिए बहुत कोशिश की,आयान ने लड़की को कमर में हाथ से खींच कर उसकी ड्रेस का बटन खोलने लगा लड़की शोर मचा रही थी पर बाहर चारों तरफ म्यूजिक चल रहा था,लोग सब ड्रिंक्स में मस्त थे।किसी को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। इसी मौकेको फायदा उठाने लगा आयान,उसकी असली शिकार मिलचुकी थी लड़की।आयान ने जोर जबरजस्ती लड़की की लहंगाको उठाया और अंडरवियर को फाड़ दिया,तब तक लड़की अपने बचाब में जुटी रही थी।आयान ने पीछे से टांगे फटाने की कोशिश बहुत किया, लड़की को हर जगह किस किया पर लड़की ने खुदको बचाने की कोशिश करती रही,अब आयान भी अपना पैंट खोलकर कोबरा को लड़की के पीछे से गुफा में डालने की कोशिश करता रहा और लड़की अपने आप बचाने में लगी रही दोनों को युद्ध चरम पर था।आयान ने लड़की को नीचे झुकाने में बहुत कोशिश किया,पीछे से अपना कोबरा डसने के लिए तैयार था,तकरीबन 9इंच से बड़ा लंबा नाग,, दोनों के लड़ाई में कभी लड़की की पिछवाड़े कमर तक छूता था कभी दोनों जांघों के बीच में हल्की फुल्की छुता था,इस दौरान कोबरा भी बड़ा फुल साइज में इदर उधर छूता गया,आयान बहुत बेचैन था कोबरा को घुसाने के लिए।उसके धड़कन तेज हो रही थीं पर लड़की अपने को बचाने में संघर्षरत थी, दोनों लड़ते रहे आपने अपने हुसूल पूरा करने के लिए,एक बार तो आयान ने इतना बड़ा झटका दिया कि लड़की के टांगे फट गई और आयान ने अपने कोबरा लड़की के गुफा में ल्वाम्मम ल्वाम्मम कराके पूरा अंदर डाल ही दिया।दो बार गुफा को जोड़ से धक्का देते ही खुद को सुकून महसूस कर थोड़ा हाथ ढीला क्या किया था,आयान की किस्मत ने धोखा दे दिया, लड़की ने आयान को पीछे की तरफ इतनाजोड़ से धक्का दिया कि आयान के सिर दीवार पर बजगई और वह नीचे गिर गया तब लड़की वहां से निकल गई। कुछदेर बाद आयान कपडे को ठीक कर बहुत गुस्से में बाहर निकला, लाल आँखें ,लाल चेहरा।कुछ देर ड्रिंक्स पार्टी में टीका रहा पर उसकी नजरें फिर उसी लड़की को भीड़ में इदर उधर ढूंढ रही थी । कुछ देर बात फिर से अचानक उसके सामने से गुज़री वोही लड़की जिसका नाम ज़ारा था वोही लाल ड्रेस में,उसकीआँखें तेज तर्रार बन गई थी।उसकी हर अदाओं में एक चुंबकीय खिंचाव था।लेकिन ज़ारा भीड़ में किसी को नहीं ढूंढ रही थी..उसकी नज़रें किसी और को तलाश रही थीं।फिर अयान की आंखें भी उसी पर टिक गईं। उसने पहले का मंसूबा पूरा करना था, जो बाथरूम में अधूरा रह गया था,पर उसने सिर्फ देखा... पास नहीं गया। वो सही मौके की तलाश में था।अयान खुद से: बहुत "इंटरेस्टेड था लेकिन ये कहानी जितनी दिख रही है, उतनी आसान नहीं होने वाली थी..पार्टी खत्म होने के करीब थी, और तभी एक साइलेंट कॉर्नर से हल्की चीख सुनाई देती है। म्यूज़िक की वजह से किसी को पता नहीं चला.. पर अयान सुन चुका था।वो आवाज़ ज़ारा की थी। अयान उस कॉर्नर तक पहुंचता है...और जो सीन वहां दिखता है, उसने सब कुछ बदल दिया। जारा के सामने एक आदमी बेजान पड़ा था जमीन पर.. । जारा ने उस आदमी को गौर से देख रही है।लेकिन जारा इतनी कठोर हुई थी कि उसको कुछ फरक नहीं पड रहा था। सान्त चुपचाप होकर बेजान सख्श को जारा देख कर भी लग रहा था कि थी।ज़ारा अयान को देखती है,बिल्कुल शांत, जैसे कुछ हुआ ही न हो। और मुस्कुराकर बोलती है: मैं "तुम्हें ढूंढ रही थी..अयान।" अब हम बताते की यह खुन क्यों कि जारा ने? असली वजह। क्या है?
अब सवाल यह है कि आखिर जारा कौन थी, और यह नाम उसका असली था या नहीं ??वो यह सब क्यों कर रही थी?आइए जानते हैं-जारा एक सोशल एक्टिविस्ट थी।जब कोई महिला, बहने, रेप ,घृणा, दहेज की मामले में समाज से परिवार से घर से निकालने और मार पीटाई होती तो जारा(उसका असली नाम नहीं हैं,जब वो भी.आई.पी. वर्ल्ड में फेमस हुई तब का नाम है जारा।यह सब हम कहानी में खुलासा करेंगे आगे।) ने सबके कानूनी कार्य में हाथ बढ़ाकर सब को न्याय दिलाती थी,ऐसे केश में एक दिन वो पुलिस स्टेशन में बहस कर रही थीं,वो दिन जारा की जिंदगी ने एक नई मोड लेली , उसका किया कराया सब कुछ बरबाद हो गया था,न नाम रहा,न मान सम्मान रहा न तो परिवार समाज में उसका इज्जत,सब कुछ बदल गई जीवन एक नरक बनगई थी उस थाने में।हुआ यह था कि रेप पीड़िता के बहस के दौरान उस थाने का इंचार्ज ने खाली कागज में साइन करवाया जबरजस्ती, और लड़की को जेल के अंदर डाल दिया। कई दिनों तक किसीको भनक नहीं लगने दिया कि ओह कहा है,हर रात जेल को गुप्त कमरे में लेजाकर उसको रेप किया,आगे पीछे हर जगह से उसने लड़की को हवस की शिकार बना लिया।थाने में किसी को कुछ नही पता।उसने लड़की के साथ जो किया उस सभी क्षण को भीड़ियों बनाकर दैनिक धमकाकर, अपनी हवस की ख्वाहिश पूरा करता था। इंसान प्रतिकार तब तक करता है,जब तक उसमें हिम्मत और हौसला साथ देता।जब हिम्मत, और हौसला हार जाते न..तब आदमी मजबूर होकर अपने शरीर और किसीको सौंप देना बेहतर समझता। ठीक ऐसा ही जारा के साथ हुआ और थाना इंचार्ज के सामने अपने शरीर सौंप दि।इंचार्ज अपने मन से जो आया वह करता गया। बहुत दिन अपने हवस पूरा करने के बाद इंचार्ज ने अपने प्राइवेट गाड़ी में जारा को डालकर बहुत दूर नदी किनारे पास बेहोशी हालत में छोड़ दिया और वापस थाने में आकर, जो खाली कागज में दस्तखत करवाया था उसी में,जारा को पुलिस कर्मी के साथ बत्तमीजी करने, पुलिस के वर्दी में हाथ डालकर बर्दी फाड़ने,और मारने का आरोप पत्र तैयार करके तीन चार केस फाइल दर्ज करके खोजी तलाशी में सबको मददत् मांगकर हर चौराहों पर पत्र टांस कर लोगों से अपील किया।समाज के लोगों को लगा कि यह जारा ने ठीक नहीं किया।दिन पर दिन समाज परिवार रिश्तेदारी सब का सब जारा के खिलाफ हो गए। उदर जारा कहा है किस हाल में है वो किसीको कुछ मतलब नहीं हैं। मरी है या जिंदा है कोई भी जारा को खोजने तलाशने में मतलब नहीं रखता,बस हर कोई जारा के खिलाफ बातें कर रहे हैं। काफी बख़्त गुजर गया, उदर जारा को नदी किनारे से कोई गांव वालों ने किसी आश्रम को बुलाकर उद्धार में मददत किया,काफी दिनों के बाद जारा होस में आई। आने के बाद वह एक महीना आश्रम में रहकर बिदा हुई, दिल और दिमाग में उसके साथ जो हुआ उन सभी रक्षेसो को अपनी ही कानून से बध करने की ठान ली थी। वह उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो गई थी। चलते चलते वो एक छोटी बाजार से गुजर कर आगे बड़ा बाग के अंदर शांत एक छोटा घर था। पानी पीने के लिए वहां गुहार लगाई तो एक अंकल जी बाहर आय और बातों बातों पर पता चला कि वो अंकल बेघर हुए बच्चियों, बूढों को पाल रहे थे,आत्म रक्षा के लिए थोड़ा बहुत ज्ञान और हथियार चलाना भी सिखाते थे और जीवनपयोगी
गतिविधि भी बताते, कराते थे।जारा ने भी वहीं अंकल जी के साथ कुछ सीखने और जब तक रहेगी तब तक कुछ काम में हाथ बढ़ाने शर्त के साथ वही रही।7/8महीने तक निरंतर अपने मनसूबे हासिल करने के लिए सुबह,साम, रात तक बहुत मेहनत करके आत्म रक्ष्या के तालीम लेकर वहां से निकल पड़ी लेकिन जाने का रास्ता कहीं भी नहीं था। जाते जाते एक पार्क में बैठकर सोच विचार करते करते दिन पूरा निकल गई लेकिन आगे क्या करना कुछ भी सूझ नहीं रहा था,रात हो गई, बड़ा परेशान होकर,वहां से चलपड़ी,आगे कहा रहना,ठहरने का कोई जगह नहीं,चलते चलते सड़क किनारे खड़ी थी, लंबी,बिखरी पड़ी बाल,नीली आंखे, लंबी नाक,रसीली होंठ, कमी कुछ नहीं था,उसके सुंदरता बयां करने के लिए।सड़क किनारे जारा के सामने आकर एक बड़ी काली सीसा वाली गाड़ी रुकी,सीसा खोलकर ड्राइवर ने जाना है तो पहुंचादेने की बात करके गाड़ी में बुलाया,अब जो कुछ भी होगा देखा जाएगा सोचकर गाड़ी में बैठ गई, करती भी क्या?जब चारों ओर से रास्ता बंद पड़े थे।गाड़ी में दो लोग पीछे सीट में। ड्राइवर के साथ एक था अब जारा भी, चलते गए जो गाड़ी में थे वह शहर के बड़े नामी लोग में से थे।भी.आई.पी.लोग।बातों बातों पे जारा को सम्बंध बनाने के लिए आफर देने लगे,जारा चुप रही बहुत देर तक,क्यों कि करे तो क्या करे, बोले तो क्या बोले, जाएं तो कहा जाएं बड़े कंफ्यूजन में दुविधा में थी। आफर के दौरान एक आदमी ने ऑफर दिया- खाना,रूम, पैसा,जो भी चीजें जरूरत हैं सब देंगे लेकिन बदले में जाराको भी.आई पी.लोगों को सर्विस देना होगा, यह सब गुप्त रहेगा,कभी कभी भेष बदलवाकर पार्टी में शामिल कराएंगे।यह आफर उसको बेस्ट लगा,उसने हां कर दी। उसके बाद उन लोगों ने उसको दूर कही फार्म हाउस में एक कमरा दिया,जरूरत कपड़े, श्रृंगारिक चीजें सब कुछ दिया गया। जारा को फ्रेश होने के लिए बाथरूम में भेजागया।फिर उसको श्रृङ्गार करवाने के लिए ब्यूटी पार्लर से व्युटिसियन को कल करके जारा को मेकअप करवादिया गया।उसके बाद जो लोग थे उनका होस उड्गए जारा को सुन्दरता देख कर।वा.. कित्नी सुन्दर थी वो।अब उदर ही छोटी ड्रिङ्क पार्टी की आयोजन हुई, जारा को भी पिने की आफर दियागया,जारा को दिल में कडवाहट तो थी पर मजबूर भी।इस लिए उसने पीई। हलकी नशे में वह लोगों ने जारा के शरीर से जित्ना दिल लगे तबतक खेले,जब तक उनके अंदर का मर्दानगी कायम थी।कै साल बाद उसने थोडी मन में कडवाहट हो कर भी मजे लिए,कोई ऊपर से मुँह में डाल दे रहा तो कोई नीचे से डाल दे रहा,आगे पीछे, ऊपर सब जगह से किए उन्होने।लेकिन अब जारा को इसि जरिए से बदला लेने का था,तो चुप करके विस्तर पर उन लोगों को केहना मान लेतिथी। बखत वितता गया, और जारा भी.आई. पी. वर्ल्ड में फेमस होती गई..अलग अलग नाम से।उसका रुतबा बहुत चर्चित था,।अब तो जारा एक असिस्टेंट के साथ जाती थी।कही जाने के लिए भी टाइम सेट होने लगा अब जारा बहुत व्यस्त रहने लगी।इसी दौरान पार्टी में शामिल होने का ऑफर आया,तो वो चली जाती थी। वह दिन जो आयान ने हरकत किया था,बाथरूम ने उस दिन भी भीआईपि पार्टी था।अब आयान के बारे में जानते है, आइए, आयान वो था ,जो जारा के फॉर्म हाउस के मालिक का बेटा अक्सर विदेश में पढ़ाई करता था,कभी छुट्टीयां मनाने घर आता तो फार्म हाउस में घूमने आता था,दो चार बार जारा के साथ हल्की फुल्की मुलाकात भी हुई थी पहले।आयान भी जारा के लिए मर रहा था,फार्म हाउस में मौका नहीं मिलपाता ज्यादा बात करने के लिए,क्यों कि आयान के फादर बड़े नामी लोग में से एक थे,उस शहर के।शहर के भी. आई.पी.पार्टी में शामिल होने के लिए वो दीन जारा भी गई थी,जारा के साथ आयान का मामला हम ने ऊपर ही बताया है,और अब हम आपको बताते है कि जो खून जारा ने की थी वो क्यों?दरअसल जब एक एकट्विस्ट को जेल में बंद करके जारा को शिकार बनाने वाला थाने का इंचार्ज अब डी.एस.पी.बनगया था।और उसदीन वो भी.आई.पी. लोगों को सुरक्षार्थ अपने कमान में वहां ड्यूटी पर था। बहुत बार रात दिन लगाकर जारा ने उस आदमी की पता लगाया और उसी दिन सर्वनाश करने की पूरी तैयारी के साथ वहां घूम रही थी। जारा वो दिन भयानक सुंदरी हो कर,मेकअप में लाखों रुपए खर्च करके अपने को तैयार की थी ताकि जो लोग देखें तो जारा को देखें। जब डीएसपी साहब भरी पार्टी में थे,तब जारा उनके इर्द गिर्द घूमती रही,उन साहब को देखकर मुस्कुराती थी।तब साहब को क्या चाहिए,तेज म्यूजिक गाने चल रही पार्टी में कौन किसको देखेगा सब ड्रिंक्स पार्टी की लुफ्त उठारहे थे, ऐसा ही स्थिति में जारा और वो डीएसपी साहब आपस में कुछ बातें कर रहे थे।जारा ने साहब को उधर बेसमेंट की ओर जाने वाली कोने में बात करने के लिए बुलाई, तब वोह साहब बेपरवाह चले गए,म्यूजिक बहुत जोर शोर की थी,तब जारा ने अच्छा मौका देख कर वार पे वार करती गई,किसी को कुछ नहीं पता शिवाय आयान को। ईतनी सुंदर लड़की लाल ड्रेस में दुल्हन कि तरह सजी सजाव होकर उसने अपनी मनसूबों को पूरा अंजाम तक पहुंचाई,आयान तो देखते रहा गया,उसको लगा कि कोई सपना तो नहीं देखा आयान ने?आयान खुद को सम्हाल लिया और जारा के सामने दिखाया कि उसने ऐसा कुछ नहीं देखा।अयान चौंकता नहीं...बल्कि हल्की हंसी हंसता है। मन ही मन सोचता हैं,"तो ये खेल है... लेकिन खेल किसका?" इतनी देर में ज़ारा आगे बढ़कर उसके कान में फुसफुसाती है:"अगर आज रात मुझे यहां से जिंदा नहीं निकालोगे... तो अगला नाम तुम्हारा होगा। यह सुनते ही आयान बहुत डर जाता है और सोचने लगता है कि अपना भी यह हाल तो नहीं करेगी,मन में खलबली मचता है आयान की"फिर वोह जारा को घूरता है,और उसकी आंखों में पहली बार एक सवाल दिखता है।"ये लड़की कौन है?और इसने ये क्यों किया?अब कहानी पार्टी से निकलकर एक चेज़ में बदल जाती है—लेकिन ये चेज़ सिर्फ भागने की नहीं थी... ये चेज़ थी भरोसे और धोखे की।
ज़ारा अयान को अपनी डार्क दुनिया में खींच रही थी—जहां सब कुछ इल्यूज़न था। हर मोड़ पर एक ट्विस्ट।
एक सीन में पता चलता है कि जो आदमी मरा था, वो अयान और जारा का दुश्मन था।दूसरे सीन में पता चलता है कि ज़ारा का असली नाम ज़ारा नहीं है।यह तो हम ने पहले ही बता चुकें हैं और तीसरे ट्विस्ट में... अयान खुद उस मर्डर प्लान का हिस्सा था—बस उसे ये नहीं पता था कि ज़ारा उसकी चाल से आगे है।अंत में जब अयान सोचता है कि उसने गेम जीत लिया है,और ज़ारा को अपने जाल में फंसा लिया है...पर ज़ारा मुस्कुराती है,और एक चौंकाने वाला सच सामने आता है: "अयान... ये सब तुम्हें यहां तक लाने के लिए था। तुम्हारे सारे पैसे, तुम्हारी पॉवर...अब मेरी है।और हां, ये मर्डर? तुमने किया है... और सबूत भी तुम्हारे पास हैं।"अयान हैरान रह जाता है—उसकी पूरी प्लानिंग उसी के खिलाफ हो चुकी थी। और ज़ारा... भीड़ में गुम हो जाती है। जारा की आवाज गूंजती है-"हमेशा याद रखना, अयान... खेल में जितनी बड़ी शख्सियत होगी, उसका पतन उतना ही शोर मचाएगा।"
आयान हैरत भरी नजर और पहले उसने जारा के साथ जो किया था ,उस वजह से उसका दिल रुक जाता था अगर मेरे साथ ऐसा कुछ जारा सोच रही होगी तो...अरे बाफ़ रे...दिमाग हिल गया था आयान का।वो जारा को ढूंढ ने लगा खोज रहा था पर जारा किधर चली,आयान को समझ नहीं आया,वो देखता रहगया और जारा गुमशुदा हो गई,। इस कहानी के पात्र का असलियत क्या है, और जारा कहा गई यि सब रहस्यों का अगले कहानी में खुलासा करेंगे ,आपको यह कहानी कैसी लगी आप सब ने कमेंट में जरूर बताएं, और video को शेयर जरूर करें।

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24/10/2025

हिजो को भाइटीका को दिन कसैको प्रतीक्षा गर्दा गर्दै बित्यो,

22/10/2025

#नेपाली कथा
#दु:खभोग
#नेपालीसमाज
#मायाकोकथा
#नारीशक्ति
मलाई याद छ,पहिलो पटक उसको नजर ममाथि परेको दिन —ऊ त्यही नजरबाट हटाउन चाहन्थ्यो।शायद उसको नजर मलाई हेरेर होइन,मलाई नहेरेर नै ढुक्क थियो।म कालो थिएँ —ऊज्यालो रोज्ने समाजको आँखाले हेर्दा म मात्र एक “छायाँ” थिएँ।तर उसले बुझेन —छायाँ तब मात्र देखिन्छ, जब उज्यालो भित्र घाम पुग्छ।नवराज दुवईबाट आएको केही हप्ता मात्रै भएको थियो।उसको गह्रौँ झोला भन्दा पनि गह्रौँ थियो उसको घमण्ड —"गोरी केटी पाउँछु, ठूलो घर बनाउँछु, राम्रो जिन्दगी जिउँछु" भन्ने सपना बोकेको तर उसकी आमाले मलाई रोजे—मेरो नाम सरिता।"सरिता बुहारी भएपछि हाम्रो घर जस्तै उज्यालो बन्छ," भनेर।उनीहरूले मभित्र देखेकी उज्यालोपन नवराजले कहिल्यै देख्न सकेन बिहेपछि,मैले उसलाई मायाको कुनै पाना बाँकी नराखेर समर्पण गरेँ।हरेक बिहान उसलाई चिया दिनु,कपडा मिलाउनु,उसको आमालाई सासू नभई आमा सम्झनु —मेरा कर्म थिएनन्, ती मेरो श्रद्धा थिए।तर त्यो श्रद्धा,ऊज्यालो खोज्ने उसको नजरमा अन्धकार मात्र थियो।ऊ उमा नामकी एउटी गोरीसँग लभ-चक्करमा थियो।मलाई थाहा थियो —उसका फोनको मुस्कान, उसका बेलुकी फर्किन ढिला हुने बहाना,सबै उही गोरीको नाममा लुकेका थिए।तर म केही बोलिनँ।म त त्यही थिएँ —छायाँ, जसले उज्यालोको जीवनमा बाधा पुर्याउने अधिकार कहिल्यै पाएकी थिइनँ। तर सधैं मौन बस्न सकिन्न।एक रात,जब उ आफ्नो मोबाइल ओछ्यानमै सुताउँदै थियो, र उसको 'उमा' सँगको सन्देश मैले देखेँ —त्यो दिन मेरो मनको झ्याल खुलेको थियो।मैले केही भनेको थिइनँ —तर भोलिपल्ट त्यो झ्यालबाट आफूलाई बाहिर निकाल्ने साहस निकालें।"तपाईं माया गर्न सक्नुभएन,तर म तपाईंलाई घृणा गर्न पनि चाहन्न। म अब आफ्नै शान्तिको लागि बाँच्न चाहन्छु..."मैले नभरिएको आँखाबाट त्यो निर्णय सुनाएँ।ऊ हाँस्यो —"जा, ढिलो भइस्।"म पनि हाँसेँ —किनकि अब ढिलो भइसकेको थिएन,मैले समयमै आफूलाई बाँचेको थिएँ।पाँच वर्ष बिते।म अहिले अर्को शहरमा छु —बिहे गरेकी छु,एक छोरीकी आमा बनेकी छु।म मेरा दिनहरू छोरीको "बाबा" भन्ने आवाजबाट सुरु गर्छु।उसले मलाई 'सरिता' भन्दैन,ऊ मलाई 'आमा' भन्छ —त्यो शब्द जुन मलाई जिन्दगीले कहिल्यै चिनेको थिएन।आज अचानक मोबाइल बज्यो। "हेल्लो बाबा?" — छोरीले उठाई।म भान्सामा थिइँ।बोल्न गएँ —फोन काटियो।स्क्रिन हेरेँ —नवराज।उसको नम्बर मैले ब्लक गरेकी थिइनँ,किनभने म कुनै पनि अतीतसँग घृणा गर्दिनँ।म त्यसलाई सम्झनासँग बाँधेर राखने ल्याकत राखछु —आफ्नो आत्मबलको एक अध्यायको रूपमा।सायद उसले पछुताएको छ।तर म फर्केर हेर्दिनँ।किनभने अब म उज्यालोमा छु —त्यो उज्यालो,जसको मूल्य कसैले नाप्न सकेको थिएन,र जसको चमक,मैले आफैंभित्र फेला पारेकी छु। म भन्न चाहन्छु कि छाला मात्र रङको कुरा होइन,हृदयको उज्यालोपन हो।जो हेरिरहेको छ,उनी सक्षम हुन् त्यो उज्यालो देख्न।तर जो 'सिर्फ गोरो र राम्री' खोज्छ,उनीहरूले जीवनको गहिरो अर्थ कहिल्यै बुझ्दैनन्।उनीहरू संग आडम्बर कहिलै समाप्त हुँदैन जब आडम्बर समाप्त हुन्छ तब त्यसको बर्बादी निश्चित हुन्छ।

22/10/2025

कथा उनी र म BreakupStory
म उता दुवईमा थिएँ, बिहान-साँझ पसिना बगाउने काममा व्यस्त। पाँच वर्षपछि घर फर्कँदा, मेरो जीवनको ठहराव भइसकेको थियो। आमाले भनिन् — "बाबू, उमेर भइसक्यो, अब बिहे गर्नु पर्छ।"उनीहरूले रोजेकी थिइन् सर्मिला — हाम्रो गाउँकै केटी, अलिक कालो वर्णकी, अलिक चुपचाप स्वभावकी। म त खुरुक्कै असन्तुष्ट — काली केटी मलाई मनै पर्दैनथ्यो। आमाले आँखा रसाएर भनिन् — “हेर्दै जाऊ, यस्तै केटीले घर सम्हाल्छे।”मैले सर्मिलासँग बिहे गरें — बिना मन, बिना सपना। सर्मिला बोल्दिन थिइन् धेरै,तर सधैँ बोल्दिन थिइन भन्ने पनि होइन।उनको बोलाइ चिया बोकेको गिलासमा हुन्थ्यो,
"थाक्नु भो होला, पिउनुहोस्।"उनको माया तातो पानी जस्तो हुन्थ्यो —जुन सतहमा शान्त लागे पनि, भित्र कतै बाफिँदै हुन्थ्यो।तर मैले त्यो ताप कहिल्यै महसुस गर्न चाहिन।म सदरमुकामको एउटी गोरी केटी — रमासँग मुग्ध थिएँ।सामाजिक सञ्जालमा रमा मुस्कुराउँथी, मलाई अशाध्यै मन पर्थि । सर्मिला सधैं चुपचाप बस्थी।एकदिन,मेरो फोनमा सर्मिलाले रमाको म्यासेज देखिन्।उनले केही भनिनन् —तर त्यो दिन उनले राती ननिदाइ बसेकी थिइन्।म त निदाएको नाटक गर्थें,तर साँचो भन्ने हो भने —मैले उनको सासको गहिराइ सुनेको थिएँ,र आँसुको सुक्दै गएको आवाज ।फेरि पनि उनी बिहान उठिन्,चिया बनाइन्,कपडा मिलाइन् ।म भने उनलाई "काली" भन्ने शब्दले मात्र सम्बोधन गर्थें — नाम कहिल्यै उच्चारण गरेन।अन्ततः,एउटा साँझ, उनले मलाई हेरेर भनेकी थिइन्: “तपाईंले कहिल्यै माया गर्न सक्नुभएन।तर म तपाईंको घरलाई माया गरें।अब म जान्छु,तर याद रहोस् —मलाई चिढ्याउने तिमी होइनौ,। मलाई माया गर्न नजान्ने तिमी हौ।”र उनी गइन्।त्यसपछिका वर्षहरू एउटा धुँवाझैं बिते।बुबा मौन, आमा चुप, घर सुनसान।हाम्रो घरको आँगनमा कहिल्यै फुल नफुले जस्तो लाग्यो।आमाले मलाई खाना त दिन्थिन्, तर स्वास्नी लाखटेर बसेको छोरो’ जस्तो व्यवहार गर्थिन्।बुबा, जो पहिले चुरोट खाएर कुरा गर्नुहुन्थ्यो,अन्तिम दुई वर्ष केही बोल्नुभएन।आज, सर्मिलाको मोबाइलमा कल गरेँ।फोन उठाउने साना हातको आवाजले “बाबा...” भन्यो। मेरो मन मा चिसो परयो।त्यो बच्चा मेरो होइन,तर त्यो शब्द...कहिल्यै मैले सुन्न नपाएको सम्बोधन थियो — “बाबा।” सर्मिलाको आवाज आयो —"कसको फोन हो बाबू?"त्यसपछि शान्ति।फोन काटियो।सायद उनले चिनिन्—यो नम्बर आफैले ब्लक गर्न बिर्सिएको हुन सक्छ।सायद उनले बिर्सन खोजेकी थिइन्,तर मचाहिँ...बिर्सन सकेको थिइन।अब म बुझ्छु — काली भनेको रङ होइन, दृष्टिकोण हो। सर्मिला कालो वर्णकी थिइन्,तर उनको मनको उज्यालोले नै हाम्रो घर बलेको रहेछ।आज त्यो उज्यालो कहीँ छैन।छ त औँसी को रात झै चकमन्न एउटा अधुरो परिवार।अब म एउटा उज्यालो अनुहार पछ्याउँदै काली आत्माको छायामा हराएको मान्छे भएको छु ।अन्त्य मा म भन्न चाहन्छु कि कथाहरू लेखिरहन सकिन्छ —तर सर्मिलाजस्ता पात्रहरू बाँच्दैनन् केवल कथा मात्र।उनीहरू हाम्रो बेवास्ता, घमण्ड, र 'रङ' को घेराभित्र मर्न बाध्य हुन्छन्। तपाईं हरु लाई कहानी मन परे लाइक शयेर अनि पेज लाई फलो गर्न नभुल्नुस्।

17/10/2025

and heart touching story katha #कथा संसार viral short audio telling

एक बार एक छोटे से गाँव में एक गरीब मजदूर रहता था। उसके पास खोने लायक कुछ नहीं था। एकसुंदर बेटी और एक बेटे थे।बहुत छोटे होते ही उनकी म धरती से उत्चुकी थीं।बाप ने कई दिन खाकर कई दिन भूखे रहकर, सुबह,साम कभी रात तक काम करके बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया, कई सालों में बच्चे पढ़ लिख कर बेटे वकील और बेटी डाक्टर बन गई, बाप मजदूरी कम करता था।मन ही मन में बहुत गर्व से छाती चौड़ा होता था उसका, डाक्टर बनने की कुछ महीनों बाद बेटी ने बाप को कुछ अलग नजरिया से देखने लगी। पहले जैसी नहीं रही, उसका डाक्टर बनने का रुतबा ने बाप को नौकर जैसे बर्ताव करने लगी ,शुरुआत में उसकी बर्ताव देखकर बिचारा मजदूर बाप को बहुत दिल दुखा, अकेले में जाकर रहने लगा, रोने लगा क्या हुआ इतनी दुख तकलीफ से पढ़ा लिखाकर आज उसको बहुत बत्तमीजी सहन करना पड़ रहा अपने ही बेटी से।बेटा गई से बहुत दूर वकालत करता था, घर आना जाना बहुत ही कम था उसका।बाद में पता चला लड़की अपने ड्यूटी के साथ कम करने वाला लैब असिस्टेंट से प्यार करने लगी थी।अब बाप को और टेंशन बढ़ गई क्यों कि अब बड़े लोगों को अपनी बेटी के साथ कैसे शादी करेगा,न कोई पैसे न कोई ज्यादा प्रापर्टी।बिना दहेज को क्या करे, अब बाप रात दिन सोच सोच कर हैरानी में था।इदार बेटी बाप को नौकर की तरह बर्ताव करने लगी।बाप ने कभी सुना था किसी टिचर से- "ज्ञान सबसे बड़ी पूँजी है। तुम अपनी मेहनत से बच्चों को पढ़ाओगे, तो आने वाली पीढ़ियां अमीर होंगी।" लेकिन पढलिखकर इतनी दुख झेलना पड़े तो यह जिन का क्या फायदा?बेटी का बर्ताव से बाप का दिल और दिमाग कम करना छोड़ने लगा था,अब तो बेटी मारपीट पर उतर आने लगी थी।एक दिन सही मौका देख कर मजदूरी करने जाते जाते बेटी से पूछा - "जो प्यार तुम करती हो उनसे हमारी हैसियत नहीं मिलती मेरे पास दहेज के लिए कुछ नहीं,तुम सोच समझकर करना बेटी"।तब बेटी ने बाप को थप्पड़ मारी और प्रॉपर्टी नाम पर करने की धमकी भरी आवाज में बोली..तब बिचारा बाप कुछ नहीं बोल्पाया। और चक्कर खाकर नीचे गिर गया।कुछ घंटे बाद होस खुलने पर वहां बेटी नहीं थी,चली गई होगी ड्युटी पर।अब तो बिचरा मजदूर बाप का कुछ समझ में नहीं आया क्या करें।कम नहीं करेगा तो भूखा रहना पड़ता ,बेटी ने कभी भी कुछ खाने पीने का इंतजाम कुछ पैसे नहीं देती थी, खुद बाहर खाकर रहने के लिए आती थी।बेटा कुछ ही सालों में वरिष्ठ वकील बन गया था ,बेटे भी कई साल हो गए थे घर नहीं आता था ..नहीं तो बाप के बारे में कोई जानकारी रखता था.. बाप का स्थिति देख कर खुद को थूकता, फिर रोता था.. क्या नसीब पाया है मैंने??बेटी का बर्बरता दैनिक बढ़ता जाता था, अब तो खुद भी बहुत बूढ़ा होगया था, कम करने का क्षमता भी पहले जैसे नहीं था। अब तो बेटी भी कभी कभी आती घर फिर लड़ती झगडती जब भी आती। जब आती तब दुखी होता जब नहीं आती तब टेंशन में होता,क्यों कि बेटी बेटा एक जैसा नहीं होती...बाप का मन मानता नहीं पर जब सामने में बेटी दिखगई तब डर लगता था।अब तो बेटी ने हद करने लगी। जब आएगी तो थोड़ा सा जमीन भी नाम करने के लिए धमकाती रहती।एक दिन तो अगर नहीं नाम किया तो तुम्हे धरती से उठवादूंगी... ऐसी ऐसी बातें करने लगी कि सोच कर डरने लगा बाप।थोड़ा सा जमीन भी उसके नाम करेगा तो भूखा रहजायेगा। बेटी के नाम करने से मना कर ही दिया। तब अगर तू ने नाम किया तो तू गया देखलेना बोलकर ड्यूटी पर चली गई,कई दिन नहीं आया बाप के घर में। अब आयेगी तो नाम कर दूंगा सोच रहा था पर ओह बेटी कई दिन से आई नहीं।कुछ हफ्ते बाद गांव में हल्ला मचगया की वो डाक्टर बेटी ने बाप के साथ ओह किया जो कोई रिश्तेदारी में कल्पना भी नहीं की जा सकती।पुलिस के जांच में पता चला कि रातको उस बूढ़े बाप को बेजान कर दिई थी। जांच पड़ताल में पता चला कि यह जो कारनामा था ओह लड़की जो बेटी थी उसका था नाखून और बाल के कुछ हिस्से पाए गए। गांव में बिल्कुल सन्नाटा छ गया।कितना दुःख तकलीप सहकर, भूखा पेट रहकर बेटीको बड़ा बनाया पढ़ाया लेकिन उसी की हाथों से जीवन समाप्त हुआ बूढ़े बिचारे को।उसकी जिंदगी में आराम, संतोष,खुशहाल की पलें कभी नहीं आई। अब कोर्ट में केस फाइल किया गया, सारे प्रमाण जुटाकर सुनवाई होने के दिन में कठघरे में ओह डाक्टर और जज की कुर्सी पर उस बूढ़ेका बेटा यानि यह बेटी डाक्टर के भाई ।कई साल बाद दो भाई बहन मिले तो भी किस हाल में।दोनों की आंखों में आंसू थे।कुछ पल तो दोनों नॉस्टैल्जिक हुए ।एक कानून को बचाने में था, दूसरी ओर कानून के हाथ में ली हुई अपराधी थी।जज साहब ने उसकी सर्वस्व हरन सहित जन्मकैद की सजा सुना दिया।दोनों के आंखों में आंसूओं के बाढ़ के साथ बिदा हुए।कहानी आपको पसंद आए तो जरूर लाइक,शेयर , करें।आप की एक शेयर लाइक से सायद किसी के दिल में यह कहानी, फिर से इंसानियत जगाने का काम करसकती है।

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