05/07/2026

जो आप कहेंगे वही सच है संतों की बैठक में पत्रकार के तीखे सवाल

सनसनीखेज खुलासा: डॉ. अनिल मिश्र और संघ प्रचारक नरेंद्र जी के संदर्भों में उठी गबन की गूंज, क्या रसूखदारों के कथित संरक्ष...
05/07/2026

सनसनीखेज खुलासा: डॉ. अनिल मिश्र और संघ प्रचारक नरेंद्र जी के संदर्भों में उठी गबन की गूंज, क्या रसूखदारों के कथित संरक्षण ने राम मंदिर परिसर को बनाया चोरियों का केंद्र ==============================================अंतरिक्ष तिवारी की कलम से=====================अयोध्या। वर्तमान समय में सुर्खियों में चल रहे चोरी प्रकरण ने जन्मभूमि परिसर की आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन को लेकर एक ऐसी बहस छेड़ दी है, जिसने पूरे तंत्र को हिलाकर रख दिया है। अंदरूनी सूत्रों और जानकारों का दावा है कि यदि अतीत में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध गतिविधियों पर समय रहते कठोर और पारदर्शी कानूनी कार्रवाई की गई होती तो आज यह नौबत ही न आती। सूत्रों के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा के समय अत्यधिक भीड़ का लाभ उठाकर दान पटल पर तैनात मनजीत नाम के एक कर्मी द्वारा लाखों की हेराफेरी का मामला सामने आया था, जिसमें महाराष्ट्र की एक महिला श्रद्धालु से करीब तीन लाख रुपये का दान तो लिया गया, किंतु उन्हें रसीद देने के बजाय संदेश भेजने वाले मोबाइल माध्यम पर भेजने का झांसा दिया गया। महिला जब अगले दिन शिकायत लेकर न्यास कार्यालय पहुंची तो वहां उपस्थित संघ प्रचारक नरेंद्र जी द्वारा कथित तौर पर उन्हें डांट-फटकार लगाकर टालने का प्रयास किया गया। लेकिन जब महिला अपनी बात पर अड़ी रही और मामला उच्च स्तर पर पहुंचा, तो गुप्त कैमरा तकनीक की जांच में मनजीत की संलिप्तता साफ उजागर हो गई। इसके बावजूद, सूत्रों का दावा है कि मनजीत के पिता न्यास के एक बेहद रसूखदार पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्र के यहाँ चपरासी का काम करते थे, और इसी करीबी रसूख और संरक्षण के चलते मनजीत पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई; महिला को रसीद थमाकर मामला शांत कर दिया गया और वह आज भी कथित तौर पर मुख्य कार्यालय में कार्यरत है। ढिलाई का यह खेल यहीं नहीं रुका; सूत्रों के मुताबिक संडीला हरदोई के रहने वाले रत्नेश सिंह नाम के एक अन्य कर्मी पर भी जब वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे तो पहली बार उसे केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया, जिससे बेखौफ होकर उसने दोबारा वही काम किया और तब जाकर उसकी छुट्टी की गई। इसी तरह कारसेवक पुरम में धर्मवीर नाम के एक कर्मी को चोरी करते पकड़ा गया था, जिसे शुरुआत में तो वहां से हटा दिया गया, लेकिन किसी सख्त पाबंदी या लिखित विवरण के अभाव में वह महज एक वर्ष बाद दोबारा सीता अंगद टीला राम जन्मभूमि' में बहाली पाने में सफल रहा। जानकारों का स्पष्ट कहना है कि अपनों को बचाने की यह नीति और चोरों को केवल हटा देने या माफ कर देने की शिथिलता ही आज व्यवस्था के लिए नासूर बन चुकी है।
इस पूरे गंभीर घटनाक्रम पर जब हमारे प्रतिनिधि द्वारा न्यास के जिम्मेदार व्यक्तियों से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो सभी इस कथित चोरी और पुराने मामलों पर कुछ भी बोलने से पूरी तरह बचते नजर आए। सूत्रों का कहना है कि व्यवस्था से जुड़े बहुत से लोग रसूखदारों के डर से सामने आकर बोलने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की इस पावन नगरी में सब कुछ पूरी तरह पारदर्शी और साफ-सुथरा हो। यही कारण है कि बिना अपना नाम सार्वजनिक किए, इन अंदरूनी सूत्रों ने मीडिया के माध्यम से यह सारे तथ्य वर्तमान में जांच कर रहे विशेष जांच दल और उच्च जांच एजेंसियों तक पहुंचाने का प्रयास किया है। जानकारों का मानना है कि यदि विशेष जांच दल और उच्च अधिकारी इन पुराने कथित मामलों के मूल तथ्यों दबे हुए गुप्त कैमरा अभिलेखों और इन संदिग्ध कर्मियों के संपर्कों की गहराई से पड़ताल और बुनियादी कारणों की समीक्षा करें तो वर्तमान चल रही जांच को एक नई मजबूती मिलेगी और इस पूरे तंत्र के भीतर छिपे कई बड़े चेहरे और वित्तीय विसंगतियों के चौंकाने वाले सुराग स्वतः सामने आ जाएंगे।

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