25/10/2025
अयोध्या में अवैध खनन माफिया का व्यापक सिंडिकेट सक्रिय: गोंडा और बस्ती की सीमा से लगे अयोध्या के क्षेत्रों में बना अवैध खनन का बड़ा हब सेंटर सरकारी राजस्व को भारी चूना==============================================
स्वतंत्र पत्रकार अंतरिक्ष तिवारी=================
अयोध्या। अयोध्या से सटे गोंडा और बस्ती जिलों की सीमाओं पर, विशेष रूप से माझा क्षेत्र की कीमती जमीनों में, अवैध खनन का कारोबार एक संगठित सिंडिकेट के रूप में व्यापक पैमाने पर जारी है। अवैध खनन पूरी तरह से फिर जोरों शोर पर शुरू हो चुका है, जिसके प्रमुख केंद्र बिंदु अयोध्या तहसील सदर, सोहावल तहसील और रुदौली हैं। सूत्रों के अनुसार, अयोध्या की ये तीन तहसीलें और इनसे सटे गोंडा-बस्ती के सीमावर्ती क्षेत्र सबसे बड़े अवैध खनन का हब सेंटर माने जाते हैं। यह गंभीर आरोप है कि संबंधित विभागों की कथित मिलीभगत और जानबूझकर की जा रही अनदेखी के कारण करोड़ों रुपए का अवैध खनन रात के अंधेरे में चोरी से किया जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुँच रही है। खनन विभाग और पुलिस विभाग के बीच गहरे गठजोड़ के चलते मिट्टी और बालू के अवैध खनन का यह कारोबार बिना किसी बाधा के चल रहा है, जिसके कारण बड़े पैमाने पर अवैध खनन माफिया सक्रिय हैं। यह गंभीर आरोप है कि वर्तमान में सक्रिय अवैध खनन के इस नेटवर्क के तार पूर्व में सक्रिय रहे कुछ बड़े नेताओं और कुछ बड़े खनन माफिया के समूह से जुड़ते हैं, जो दर्शाता है कि अवैध गतिविधियों का यह सिलसिला पुराना और संगठित है। माझा जमथरा (अयोध्या) और दुर्गागंज (गोंडा) जनपदों से बड़े पैमाने पर मिट्टी और बालू का अवैध खनन नियम विरुद्ध तरीके से कराया गया है। करोड़ों रुपए के इस अवैध कारोबार से पूर्वांचल के एक बाहुबली से जुड़े समूह को कथित तौर पर व्यावसायिक लाभ पहुँचाया गया है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि सिंचाई विभाग के स्पष्ट शासनादेश का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। शासनादेश के अनुसार, बंधे (बांध) से लगभग 600 मीटर की दूरी तक दोनों तरफ किसी भी प्रकार का खनन प्रतिबंधित है, लेकिन विभागीय अनदेखी के चलते बंधे के लगभग 300 मीटर के भीतर ही बड़े पैमाने पर मिट्टी और बालू का खनन कराया गया है। यह भी आरोप है कि वर्षा ऋतु से ठीक पहले अयोध्या के बिल्वहरि घाट बंधे के किनारे लगभग 300 मीटर के अंदर मिट्टी का खनन कराया गया, जिसके दुष्परिणाम स्वरूप, वर्षा के कारण तारकोल की पक्की सड़क कटकर आधी रह गईं। कई जगह मिट्टी और बालू की डंपिंग भी बड़ी तेजी से हुई है। पहले भी डंप बालू बेचे गए थे, और अब डंपिंग और बेचने की शुरुआत पुनः शुरू हो चुका है। प्रशासन के नाक के नीचे नदियों, तालाबों और खेतों को खोदा जा रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जीरो है। यह देखा गया है कि अगर खबर मीडिया में चलती है, तो अधिकारी एक-दो दिन के लिए सक्रिय होते हैं, और उसके बाद पुनः निष्क्रिय हो जाते हैं। अधिकारियों को इतना बड़ा गड्ढा और खुदाई का स्थान नहीं दिखता, यह भी आरोप है कि खनन माफिया द्वारा बंधे से लगभग 100 मीटर की दूरी पर करोड़ों की सफेद बालू चोरी करके, मिट्टी की जगह सप्लाई की गई है। अनुमान है कि इस व्यावसायिक धोखाधड़ी की जांच होने पर सरकार को कई सौ करोड़ रुपए के राजस्व और व्यावसायिक नुकसान का खुलासा होगा। यदि आस-पास के कैमरों को चेक करा लिया जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। खनन माफिया हैं मस्त, जनता है दुखी। यदि इस पूरे मामले की सीबीआई जैसी उच्च-स्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाती है, तो बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकता है, जिससे कई प्रभावशाली सफेदपोश लोगों की भूमिका उजागर हो सकती है, जो इस अवैध खनन सिंडिकेट को संरक्षण दे रहे हैं।