12/08/2026
ऐलनाबाद शिवराज किराड़
🚆 पांच सर्वे, दो सांसद और फिर भी ऐलनाबाद-सिरसा रेलव सफर अधूरा!
देश बदल रहा है, रेलवे बदल रही है, तकनीक बदल रही है… लेकिन ऐलनाबाद से सिरसा तक करीब 45 किलोमीटर का रेल सफर आज भी अधूरा है।
यह सवाल आज सिर्फ रेलवे विभाग से नहीं है। यह सवाल उन जनप्रतिनिधियों से भी है, जिन्हें जनता ने अपने क्षेत्र की आवाज संसद तक पहुंचाने के लिए चुना है।
सिरसा लोकसभा क्षेत्र से पहले बीजेपी से सुनीता दुग्गल सांसद रहीं और अब कांग्रेस की कुमारी शैलजा सांसद हैं। सांसद बदले, राजनीतिक समीकरण बदले, लेकिन ऐलनाबाद से सिरसा तक रेल कनेक्टिविटी का मुद्दा आज भी वहीं खड़ा है, जहां वर्षों पहले था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों?
एक तरफ देश में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। दूसरी तरफ कश्मीर की खूबसूरत वादियों में वंदे भारत ट्रेन दौड़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों को आधुनिक रेल सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
लेकिन ऐलनाबाद?
यहां करीब 45 किलोमीटर की रेल लाइन की मांग वर्षों से उठ रही है। इस परियोजना को लेकर पांच बार सर्वे होने की बात सामने आती है, लेकिन जनता के हिस्से में अभी तक सर्वे की रिपोर्ट और आश्वासन के अलावा क्या आया?
* रेल सुविधा सिर्फ ट्रेन चलाने का मामला नहीं है।
रेल का मतलब है—सस्ता सफर, बेहतर कनेक्टिविटी, व्यापार को गति, विद्यार्थियों को सुविधा, मरीजों के लिए आसान आवागमन और पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा।
फिर सवाल उठता है कि आखिर इस मांग को दिल्ली तक पहुंचाने में कमी कहां रह गई?
किसी क्षेत्र को केंद्र सरकार से सुविधा नहीं मिलती तो इसका मतलब यह नहीं कि वह क्षेत्र पिछड़ा है या वहां की जनता पिछड़ी हुई है।
कभी-कभी सवाल यह भी होता है कि क्या उस क्षेत्र के जनप्रतिनिधि अपनी जनता की समस्या को संसद के भीतर उतनी मजबूती, सटीकता और लगातार उठा पा रहे हैं, जितनी जरूरत है?
सिर्फ संसद में सवाल पूछ लेना काफी है या फिर उस सवाल के जवाब के बाद अगला सवाल भी तैयार है?
* सर्वे हुआ तो उसकी रिपोर्ट क्या आई?
* रिपोर्ट आई तो रेलवे ने क्या निर्णय लिया?
निर्णय नहीं हुआ तो जनप्रतिनिधियों ने सरकार से क्या जवाब मांगा?
और अगर परियोजना में कोई तकनीकी, आर्थिक या प्रशासनिक अड़चन है तो जनता को उसकी पूरी जानकारी क्यों नहीं दी जाती?
अब ऐलनाबाद की जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए।
उसे यह जानना है कि पांच सर्वे के बाद छठा सर्वे होगा या अब काम शुरू होगा?
* क्योंकि सवाल किसी एक पार्टी का नहीं है।
* बीजेपी हो या कांग्रेस—जनता को पार्टी नहीं, परिणाम चाहिए।
सांसद कोई भी हो, सरकार कोई भी हो, लेकिन ऐलनाबाद की आवाज संसद तक पहुंचनी चाहिए और तब तक पहुंचनी चाहिए जब तक उसका समाधान सामने न आए।
मुंबई-अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन और कश्मीर में वंदे भारत पहुंच सकती है, तो ऐलनाबाद से सिरसा तक 45 किलोमीटर की रेल लाइन आखिर इतनी मुश्किल क्यों है?
और अब इस सवाल का जवाब भाषण से नहीं, जमीन पर रेल की पटरी से चाहिए।
ऐलनाबाद को आश्वासन नहीं—रेल कनेक्टिविटी चाहिए।
पत्रकार:- शिवराज किराड़
फोन नंबर - 093545 33999
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