Time 24 News

Appeler Itinéraire Contacter l'entreprise

Time 24 News Informations de contact, plan et itinéraire, formulaire de contact, heures d'ouverture, services, évaluations, photos, vidéos et annonces de Time 24 News, Société de médias/d’actualités, Democratic Republic of the.

13/09/2026

डॉ एसके आजाद ने सरकारी अस्पताल में पत्रकार को बनाया बंधक,अपने गुर्गो के साथ बेरहमी से पिटा

11/09/2026

I got over 400 reactions on my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

बिहार में 10 हजार रुपए रिश्वत लेते प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी गिरफ्तार। प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी का और भी संपत्तियों का ...
11/09/2026

बिहार में 10 हजार रुपए रिश्वत लेते प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी गिरफ्तार। प्रखण्ड आपूर्ति पदाधिकारी का और भी संपत्तियों का हो सकता है जांच। भ्रष्ट अधिकारी के गिरफ्तारी के दौरान आपूर्ति कार्यालय में अफरा तफरी का माहौल बना रहा। इनके गिरफ्तारी से और भी अधिकारियों में डर का माहौल है।

स्टोरी/ आफताब रौशन सिलसिला-ए-चिश्तिया के अज़ीम सूफ़ी और हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी के सब से ख़ास ख़लीफ़ा हज़...
29/08/2026

स्टोरी/ आफताब रौशन
सिलसिला-ए-चिश्तिया के अज़ीम सूफ़ी और हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी के सब से ख़ास ख़लीफ़ा हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी का ख़ानदानी सिलसिला पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ के नवासे हज़रत इमाम हुसैन से मिलता है; उन्हें 'क़ुतब-उल-अक़्ताब' (तमाम औलिया के रूहानी मरकज़) का मुक़ाम हासिल था।

आपको 'काकी' का लक़ब मिलने की सबसे मशहूर रिवायत यह है कि जब आपके घर में फ़ाक़ाकशी का आलम था, तो आपकी ज़ौजाह (पत्नी) पड़ोस के एक पंसारी से उधार सौदा-सुलफ़ लाती थीं; एक दिन पंसारी ने ताना मारा कि अगर उसकी मेहरबानी न हो तो पूरा ख़ानदान भूखा मर जाए।

जब हज़रत ख़्वाजा को इस बात की ख़बर हुई, तो उन्होंने आइंदा उधार लेने से मना फ़रमा दिया और दीवार में बने एक आले (ताक़) की तरफ़ इशारा करके कहा कि यहाँ 'बिस्मिल्लाह' पढ़कर हाथ डालना और रोटी निकाल लेना; चुनाँचे वहाँ से मुअज्जिज़ाना (चमत्कारी) तौर पर गर्म 'काक' (रोटियाँ) निकलती रहीं, जब तक कि उनकी ज़ौजाह ने यह राज़ दूसरों पर ज़ाहिर नहीं कर दिया।

नौजवानी के दौर में बग़दाद जाकर आप हज़रत ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती के मुरीद हुए और फिर अपने पीर-ओ-मुर्शद के साथ हिंदुस्तान तशरीफ़ ले आए, जहाँ मुर्शद के हुक्म पर आपने दिल्ली में मुक़ाम फ़रमाया और यहाँ पहला चिश्ती रूहानी मरकज़ क़ायम किया; दिल्ली के सुल्तान शम्सुद्दीन इल्तुतमिश आपके बेहद अक़ीदतमंद थे और हफ़्ते में दो मर्तबा आपकी ख़ानक़ाह में हाज़िरी दिया करते थे।

​हज़रत ख़्वाजा की बढ़ती हुई मक़बूलियत देखकर मुक़ामी उलेमा हसद करने लगे और समा (सूफ़ियाना क़व्वाली) की महफ़िलों को लेकर इख़्तिलाफ़ात व तनाज़ा खड़े करने लगे; जब मुर्शद हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ को अपने मुरीद की इस तकलीफ़ का इल्म हुआ, तो वो दिल्ली तशरीफ़ लाए और ख़्वाजा क़ुतुब को अपने साथ अजमेर ले जाने लगे।

जब दोनों बुज़ुर्गों का क़ाफ़िला चला, तो दिल्ली की पूरी अवाम सुल्तान इल्तुतमिश की क़ियादत में रोती हुई मीलों पीछे चल पड़ी और जिस मिट्टी पर सूफ़िया के क़दम पड़ते थे, लोग उसे मुक़द्दस समझकर आँखों से लगाने लगे; अवाम की यह बेपनाह मोहब्बत देखकर ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का दिल भर आया और उन्होंने ख़्वाजा क़ुतुब को वापस दिल्ली में ही रहने का हुक्म फ़रमाया, जिसके बाद सुल्तान इल्तुतमिश ने शुक्राने के तौर पर ग़रीब नवाज़ के क़दम चूमे और हज़रत ख़्वाजा क़ुतुब को इज़्ज़त-ओ-एहतिराम के साथ वापस दारुल-हुकूमत दिल्ली ले आए।

सुल्तान के साथ इस क़दर नज़दीकियों के बावजूद हज़रत ख़्वाजा क़ुतुब ने निहायत फ़क़ीराना, सादा और ज़ाहिदाना ज़िंदगी गुज़ारी; आप हर शब (रात) दो मर्तबा मुकम्मल क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत फ़रमाते थे और अपने मुरीदों को यही तालीम देते थे कि बिना किसी दुनियावी लालच या बदले की उम्मीद के ज़रूरतमंदों की मदद की जाए, क्योंकि राह-ए-हक़ के मुसाफ़िर वो हैं जो सर से लेकर पाँव के नाख़ून तक इश्क़-ए-इलाही के समंदर में डूबे रहते हैं।

​हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी समा की महफ़िलों को इश्क़-ए-इलाही की आग भड़काने का ज़रिया मानते थे और आपका विसाल भी समा की महफ़िल में एक सूफ़ियाना कलाम सुनते हुए वज्द (हाल/कैफ़ियत) के आलम में हुआ; आपका इंतक़ाल (विसाल-ए-हक़) 14 रबी-उल-अव्वल 635 हिजरी (1236 ईस्वी) को हुआ। आपकी नमाज़-ए-जनाज़ा सुल्तान इल्तुतमिश ने पढ़ाई और आपको महरौली में उसी ज़मीन पर सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया जो आपने अपनी ज़िंदगी में मज़ार के लिए ख़रीदी थी।

हज़रत ख़्वाजा क़ुतुब के आला रूहानी मर्तबे के पेश-ए-नज़र हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ ने यह फ़रमान जारी किया था कि जो भी अजमेर शरीफ़ हाज़िरी देने आए, वह पहले हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन की दरगाह पर हाज़िरी दे; यह रिवायत आज भी जारी है और अजमेर शरीफ़ जाने वाले ज़ायरीन पहले महरौली में हाज़िर होते हैं। दिल्ली के तमाम हुक्मरान आपकी बारगाह में अक़ीदत रखते थे, और ख़ानदान-ए-ग़ुलामां के बानी सुल्तान क़ुतुबुद्दीन ऐबक ने इन्हीं अज़ीम सूफ़ी के नाम पर मशहूर-ए-ज़माना 'क़ुतुब मीनार' की तामीर करवाई थी।

स्टोरी- आफताब रौशनदिल्ली/ हज़रत क़ुत्बुद्दीन बख़्तियार काकी रहमतुल्लाहि अलैह भारत के प्रसिद्ध चिश्ती सूफ़ी संतों में से ...
29/08/2026

स्टोरी- आफताब रौशन
दिल्ली/ हज़रत क़ुत्बुद्दीन बख़्तियार काकी रहमतुल्लाहि अलैह भारत के प्रसिद्ध चिश्ती सूफ़ी संतों में से एक थे। उनका संबंध दिल्ली की शुरुआती चिश्ती परंपरा से है और वे ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती रहमतुल्लाहि अलैह के प्रमुख ख़लीफ़ाओं में माने जाते हैं।

🕌 संक्षिप्त इतिहास

* नाम: ख़्वाजा क़ुत्बुद्दीन बख़्तियार काकी
* उपाधि: क़ुत्बुल-आलम / क़ुत्बुद्दीन
* सिलसिला: चिश्तिया
* मुरशिद: ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी
* मुख्य केंद्र: महरौली, दिल्ली
* वफ़ात: 1235 ई. के आसपास
* मज़ार: महरौली, दिल्ली

🌙 “काकी” नाम क्यों पड़ा?

परंपरागत चिश्ती स्रोतों में बताया जाता है कि उन्हें “काकी” की उपाधि क़ाक (एक प्रकार की रोटी) से जुड़ी करामत/घटना के कारण मिली। इसी वजह से उनका नाम इतिहास में बख़्तियार काकी के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

❤️ उनकी शिक्षाएँ

उनकी शिक्षाओं में इंसानियत, फ़क़्र, सब्र, ज़िक्र, मोहब्बत और अल्लाह पर भरोसा प्रमुख थे। चिश्ती परंपरा में उन्होंने सांसारिक सत्ता से दूरी और आम लोगों की सेवा को महत्व दिया।

🏛️ महरौली की दरगाह

उनकी दरगाह दिल्ली के महरौली क्षेत्र में स्थित है और चिश्ती सिलसिले के महत्वपूर्ण आध्यात्मिक स्थलों में गिनी जाती है। उनके बाद चिश्ती परंपरा को दिल्ली में आगे बढ़ाने वालों में हज़रत हमीदुद्दीन नागौरी और विशेष रूप से हज़रत निज़ामुद्दीन औलिया की परंपरा महत्वपूर्ण बनी।

28/08/2026

I got over 30 reactions on one of my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

20/08/2026

बेतिया नगर निगम का बैठक स्थगित, विवादों में घिरा रहा नगर निगम

18/08/2026

#सूफिया प्रवीण ने कहा शिक्षा से बड़ा कोई धन नहीं,जो शिक्षित है वह गरीब नहीं

Adresse

Democratic Republic Of The

Téléphone

+919852847106

Site Web

Notifications

Soyez le premier à savoir et laissez-nous vous envoyer un courriel lorsque Time 24 News publie des nouvelles et des promotions. Votre adresse e-mail ne sera pas utilisée à d'autres fins, et vous pouvez vous désabonner à tout moment.

Contacter L'entreprise

Envoyer un message à Time 24 News:

Raccourcis

Partager