25/02/2026
झारखंड विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पेश में आंकड़ों की बाजीगरी करने की बजाय दूरदृष्टि दिखाने की जरूरत थी. रोजी-रोजगार, युवाओं के कौशल और क्षमता विकास तथा पलायन रोकने के लिए सरकार के पास आखिर विजन क्या है. सिर्फ विदेशों के दौरे को उपलब्धियों में नहीं शामिल किया जा सकता. हर पढ़ा-लिखा नौजवान बजट की खामियों और मजबूत पक्ष को बखूबी समझ रहा है.
कृषि क्षेत्र में सरकार ने 4884.2 करोड़ रुपये बजट का प्रावधान किया है. राज्य की लगभग 75 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है. जबकि लगभग 22 लाख छोटे और सीमांत किसान हैं. इस लिहाज से कृषि विभाग के बजट पर प्राथमिकता नहीं दिख रही है.
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जरूर कुछ घोषणाएं की गई हैं. लेकिन सरकार को वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट भाषण को भी पीछे मुड़कर देखना था. पिछले वर्ष बजट में कई अहम घोषणा पर अब तक काम शुरू नहीं हुए.
कौशल विकास के लिए पिछले बजट में 585 करोड़ का प्रावधान किया गया था. क्या वे पैसे खर्च हो गए. और खर्च हो गए, तो कितने युवाओं का कौशल विकास कर उन्हें नौकरी, रोजगार से जोड़ा गया.
पिछले बजट भाषण में कहा गया कि जल जीवन योजना सरकार अपने पैसे से आगे बढ़ायेगी. साल भर में सरकार ने कितने पैसे खर्च किए. सरकार अपना राजस्व बढ़ाने के लिए जिन बातों की चर्चा कर रही है उसमें भी लैप्सेज हैं.
सरकार ने बजट में मामूली नवाचार प्रयोग पेश करने का प्रयास किया है, पर राज्य की जरूरतें, आम आदमी की आकाक्षाएं को बारीकी से समझने में चूक हुई है. बजट पर चर्चा के दौरान वे मंत्रियों से अपेक्षा करेंगे कि ईमानदारी से एक साल में अपने विभाग के कार्यों और योजनाओं की प्रगति से सदन को अवगत करायें, ताकि एक साधारण आदमी भी जान सके कि हां, बजट का पैसा जमीन पर पहुंचता है.