08/06/2026
चीन-भारत संवाद: शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से संस्कृति, परंपरा और नवाचार पर सार्थक विमर्श
हाओहान थिंक टैंक द्वारा 7 जून को पेइचिंग के बियॉन्ड सैलून में आयोजित सांस्कृतिक सैलून “भारतीय शास्त्रीय नृत्य और समकालीन कला के बीच संवाद,”सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशेष कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना सुरंगामा और युवा भारतीय कलाकार सुरम्य ने भाग लिया। अपनी चीन यात्रा के दौरान दोनों कलाकारों ने चीनी विद्वानों, विशेषज्ञों और कला प्रेमियों के साथ भारतीय शास्त्रीय कला की परंपरा, उसके वैश्विक महत्व तथा समकालीन संदर्भों में उसके विकास पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पूर्वी सभ्यताओं की शास्त्रीय कलाओं को अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से समझना और आज के सांस्कृतिक एवं कलात्मक विकास में उनकी भूमिका पर चर्चा करना था। संवाद के दौरान भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत को केवल प्रदर्शन कला के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, सौंदर्यशास्त्र और सांस्कृतिक चेतना की अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया।
सुरंगामा ने अपने वक्तव्य में भारतीय शास्त्रीय कलाओं की प्राचीन जड़ों पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत ग्रंथ नाट्यशास्त्र का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह ग्रंथ आज भी भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत की आधारशिला माना जाता है। उन्होंने नृत्य के विभिन्न प्रदर्शन तत्वों, उनकी संरचना तथा अभिव्यक्ति की तकनीकों को विस्तार से समझाया। विशेष रूप से उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि कथात्मक प्रस्तुतियों में चेहरे के भाव, श्वास की लय, हस्त मुद्राएं और शरीर की गतियां किस प्रकार समन्वित होकर भावनाओं को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाती हैं।
चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि भारतीय नृत्य और संगीत संस्कृति आज विश्वभर में नई सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रेरित कर रही है। विभिन्न देशों में विकसित हो रहे क्रॉस-कल्चरल प्रयोग इस बात का प्रमाण हैं कि शास्त्रीय कलाएं अपनी मूल परंपराओं को संरक्षित रखते हुए नवाचार और समकालीन रचनात्मकता को भी अपनाने में सक्षम हैं।
युवा कलाकार सुरम्य ने भारतीय साहित्य और संस्कृति के विश्वव्यापी प्रभाव पर चर्चा करते हुए महान कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर के योगदान को याद किया। उन्होंने टैगोर की रचनात्मक विरासत और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया तथा उनकी स्मृति में एक गीत प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों और कला संस्थानों के विद्वानों तथा कलाकारों ने दोनों भारतीय अतिथियों के साथ गहन संवाद किया। चर्चाओं में चीनी और भारतीय शास्त्रीय नृत्य मुद्राओं का तुलनात्मक अध्ययन, शास्त्रीय नृत्य परंपराओं की निरंतरता और पुनर्निर्माण, नृत्य-रचना की प्रक्रिया, साहित्यिक पात्रों की कलात्मक व्याख्या तथा नृत्य एवं संगीत के स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव जैसे विषय प्रमुख रहे।
कार्यक्रम के समापन पर हाओहान थिंक टैंक के महासचिव ही एन ने दोनों भारतीय कलाकारों को प्रसिद्ध चीनी कैलिग्राफर चांग वेइपु द्वारा निर्मित विशेष कैलिग्राफी कृति “ड्रैगन एंड एलिफेंट डांसिंग टुगेदर”भेंट की। यह कलाकृति ओरेकल बोन लिपि और आधुनिक नियमित लिपि दोनों में लिखी गई है। इसमें चीन और भारत के बीच मैत्री, सांस्कृतिक संवाद और सभ्यताओं के परस्पर सम्मान का संदेश निहित है।
यह आयोजन केवल कला पर चर्चा का मंच नहीं था, बल्कि चीन और भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु निर्माण का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी था। शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से दोनों देशों के कलाकारों और विद्वानों ने यह संदेश दिया कि परंपरा और नवाचार एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विकास की पूरक शक्तियां हैं। ऐसे संवाद भविष्य में दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच आपसी समझ, सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
(दिव्या पाण्डेय)