25/12/2025
आज ठीक 13 साल पूरे हो गए...
24 दिसंबर 2012 की वो यादगार ठंडी सुबह, जब मैं अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर भारत से यूके की उड़ान भरा था। मेरी पत्नी तो नौ महीने पहले ही आ चुकी थी – अकेली हिम्मत करके यहां बसने की शुरुआत कर रही थी, ताकि हमारा परिवार एक हो सके। ❤️
मेरे साथ था मेरा नन्हा बेटा और सिर्फ तीन साल की मेरी प्यारी बेटी... उनकी मासूम आंखें, छोटे हाथ मेरे हाथ में थामे हुए, और दिल में नई जिंदगी की उम्मीदें। माताजी उस वक्त भारत में थीं – एयरपोर्ट पर उनकी आंसू भरी विदाई आज भी दिल को छू जाती है। पिताजी तो 1997 में ही पोर्टुगल में हमें अलविदा कह गए थे... उनकी कमी हर खास दिन पर और गहरी लगती है। 😔
पर यहां आकर लगा जैसे मैं घर से दूर नहीं आया।
मेरा बड़ा भाई और दोनों बड़ी बहनें पहले से ही यूके में थे। और सबसे बड़ी खुशी – हमारे गांव के 75-80% लोग, सारे रिश्तेदार, चाचा-ताऊ, मामा-मामी सब यहीं बस गए हैं! इतना ही नहीं, स्कूल के पुराने सहपाठी और दोस्त भी यहीं मिल गए। यूके में हमारा अपना एक पूरा छोटा सा भारत बन गया है – जहां हर गली में अपनी भाषा की आवाजें गूंजती हैं, त्योहार साथ मनाते हैं, और अपनों का साथ कभी कम नहीं होता।
उस दिन लगा था कि जड़ें छूट रही हैं – गांव की मिट्टी, बचपन की गलियां, दोस्तों की महफिलें, मां की गोद... सब पीछे रह जाएगा।
पर आज मुस्कुराकर सोचता हूं – हम जहां गए, अपना भारत साथ ले आए। बच्चे यहां बड़े हुए, पर दिल में वही संस्कार, वही प्यार।
आज पुरानी यादें ताजा कर रहा हूं।
माताजी अब हमारे साथ हैं, बच्चे युवा हो गए हैं, और ये अपनों का कारवां दिन-ब-दिन बड़ा होता जा रहा है।
भगवान का शुक्रिया, कि तुमने हमें कभी अकेला नहीं होने दिया।
और आप सबका शुक्रिया – परिवार, रिश्तेदार, दोस्त – तुम हो तो ये सफर इतना हसीन है। ❤️
सबको ढेर सारा प्यार! 🇮🇳🇬🇧