14/05/2026
🙏जय माँ ज्वालामुखी🔥⬇️
❤️सतयुग समय में राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन उन्होंने अपनी पुत्री माता सती और भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। माता सती बिना बुलाए यज्ञ में पहुँचीं, पर वहाँ भगवान शिव का अपमान होता देख उनका हृदय दुख से भर गया। अपमान सहन न कर पाने पर माता सती ने यज्ञ की अग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया।
जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ, तो वे अत्यंत क्रोधित और दुखी हुए। उन्होंने माता सती के शरीर को उठाया और पूरे ब्रह्मांड में तांडव करने लगे। सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अनेक टुकड़े किए। जहाँ-जहाँ उनके अंग गिरे, वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
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माना जाता है कि Jwala Ji Temple में माता सती की जिह्वा *(जीभ)* गिरी थी। तभी से यहाँ धरती से स्वयं अग्नि की दिव्य ज्योतियाँ प्रकट होती हैं। इन ज्योतियों में न तेल लगता है और न ही बाती, फिर भी ये सदियों से निरंतर जल रही हैं।🔥🙇