17/08/2026
बटेश्वर (बाह, आगरा) का इतिहास बहुत संक्षिप्त और साफ शब्दों में इस प्रकार है:
# # 1. पौराणिक महत्व (महाभारत काल)
* शौरीपुर: महाभारत काल में यह क्षेत्र भगवान कृष्ण के दादा राजा शूरसेन की राजधानी 'शौरीपुर' के नाम से जाना जाता था।
* जैन तीर्थ: शौरीपुर जैन धर्म के 22वें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की जन्मस्थली भी है।
* नामकरण: भगवान शिव द्वारा यहाँ बरगद (वट) के पेड़ के नीचे विश्राम करने के कारण इसका नाम बटेश्वर पड़ा।
# # 2. भदावर राजवंश और मंदिरों का निर्माण
* 101 शिव मंदिर: यमुना नदी के किनारे अर्धचंद्राकार (आधे चाँद के आकार) में बने 101 शिव मंदिरों का निर्माण 17वीं-18वीं शताब्दी में भदावर के राजाओं (मुख्यतः राजा बदन सिंह भदौरिया) ने करवाया था।
* यमुना की उल्टी धारा: राजा बदन सिंह ने मंदिरों को बाढ़ से बचाने के लिए एक विशाल पक्का बांध बनवाया, जिससे यहाँ यमुना नदी का प्रवाह पूर्व से पश्चिम (उल्टी दिशा) की ओर हो गया। इसे 'भदावर की काशी' या 'छोटी काशी' भी कहते हैं।
# # 3. आधुनिक महत्व
* अटल जी की जन्मभूमि: यह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का पैतृक गाँव है।
* एतिहासिक मेला: यहाँ हर साल कार्तिक पूर्णिमा (अक्टूबर-नवंबर) पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला और धार्मिक मेला लगता है।
यदि आप चाहें, तो मैं आपको आगे की जानकारी दे सकता हूँ:
* बटेश्वर के राजा बदन सिंह के लड़की से लड़का बनने की प्रसिद्ध लोककथा क्या है?
* आगरा या बाह से बटेश्वर धाम पहुंचने का सबसे सही रास्ता और साधन क्या है
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